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Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 03, 2011, 12:06:15 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



देव भूमि बद्री-केदार नाथ
दीपावली कविता मेरी

दीपावली कविता मेरी
जगमग जगमग जगमगाती है
रंगोली के रंगो में मुझे मिला जाती है
कंही बम कंही दीप जलाती है
द्वार पर तोरण से मुझे बुलाती है
दीपावली कविता मेरी

कंही उजाला कंही अंधियारा छ्या
सबको एक नजरों से मैंने कंहा पाया
भूख से मिठाईयों के लिये वो रोती है
गरीबी में अकेले आंखे भीगोती है
एक दीप के लिये रोशनी तड़पती है
दीपावली कविता मेरी

लम्हें जिन्दगी के गलियारे में
प्रतीक्षा एक दिवाली खड़ी है सदियों से
कब मिटेगा ऐ अंतर मन मेरे
कब हर द्वार कम से कम एक दीप तो जलेगा
तब जाकर मेरे कविता दीपवली मनायेगी
दीपावली कविता मेरी

दीपावली कविता मेरी
जगमग जगमग जगमगाती है
रंगोली के रंगो में मुझे मिला जाती है
कंही बम कंही दीप जलाती है
द्वार पर तोरण से मुझे बुलाती है
दीपावली कविता मेरी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सदनीयूँ

देखणा.........
कंण लंग्युचा ऐ
कै बाटा कै घार की
बिरड्यू छा ऐ
तू सदनीयुं को साथा की
देखणा.........
कंण लंग्युचा ऐ

णा मैता णा सारसो की
कोयाड़ी बारामासा की
एक दीण णा एक राता की
कोयाड़ी बारामासा की

देखणा.........
कबी आली कबी जलो ऐ
पडी यख एक रेघ परदेस कू जलो ऐ
परती कू हेरती रहली ऐ
कंण क्ख्क रुदाली लुकाली ऐ
देखणा.........
कंण लंग्युचा ऐ

णा भैर णा भीतर की
कोयाड़ी बारामासा की
उकाली की णा ऊंधारु की
कोयाड़ी बारामासा की

देखणा.........
जिर जिर लगी राली ऐ
जिकोडी बरखती राली ऐ
सालू मा भी लग्युं घाम ऐ
सवेर शाम बस यख काम ऐ

णा मेरु णा तेरु जी
कोयाड़ी बारामासा की
सदनी बडोली लगे की
कोयाड़ी बारामासा की

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Soniya Joshi and 49 others. Photo: सदनीयूँ देखणा......... कंण लंग्युचा ऐ कै बाटा कै घार की बिरड्यू छा ऐ तू सदनीयुं को साथा की देखणा......... कंण लंग्युचा ऐ णा मैता णा सारसो की कोयाड़ी बारामासा की एक दीण णा एक राता की कोयाड़ी बारामासा की देखणा......... कबी आली कबी जलो ऐ पडी यख एक रेघ परदेस कू जलो ऐ परती कू हेरती रहली ऐ कंण क्ख्क रुदाली लुकाली ऐ देखणा......... कंण लंग्युचा ऐ णा भैर णा भीतर की कोयाड़ी बारामासा की उकाली की णा ऊंधारु की कोयाड़ी बारामासा की देखणा......... जिर जिर लगी राली ऐ जिकोडी बरखती राली ऐ सालू मा भी लग्युं घाम ऐ सवेर शाम बस यख काम ऐ णा मेरु णा तेरु जी कोयाड़ी बारामासा की सदनी बडोली लगे की कोयाड़ी बारामासा की एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीतLike ·  · Share

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
13 minutes ago
सदनीयूँ

देखणा.........
कंण लंग्युचा ऐ
कै बाटा कै घार की
बिरड्यू छा ऐ
तू सदनीयुं को साथा की
देखणा.........
कंण लंग्युचा ऐ

णा मैता णा सारसो की
कोयाड़ी बारामासा की
एक दीण णा एक राता की
कोयाड़ी बारामासा की

देखणा.........
कबी आली कबी जलो ऐ
पडी यख एक रेघ परदेस कू जलो ऐ
परती कू हेरती रहली ऐ
कंण क्ख्क रुदाली लुकाली ऐ
देखणा.........
कंण लंग्युचा ऐ

णा भैर णा भीतर की
कोयाड़ी बारामासा की
उकाली की णा ऊंधारु की
कोयाड़ी बारामासा की

देखणा.........
जिर जिर लगी राली ऐ
जिकोडी बरखती राली ऐ
सालू मा भी लग्युं घाम ऐ
सवेर शाम बस यख काम ऐ

णा मेरु णा तेरु जी
कोयाड़ी बारामासा की
सदनी बडोली लगे की
कोयाड़ी बारामासा की

एक उत्तराखंडी

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    3 people like this.
    देव भूमि बद्री-केदार नाथ आप, आपके परिवार, आपके मित्रो व आपके सभी सगे संबंधियों को इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें जय उत्तराखंड
    13 minutes ago · Like
    केदार जोशी एक उत्तराखण्डी Mahalaksmi Varsh 2012-13 mein aap per MAHADEV ki kripa Ho, Aishwarya Indra jaisa Ho, Kuber jaisa Dhan Ho, Shri Ram Ki Safalata Ho, Krishna Ki Door-Drishti Ho,Dhanvantari Sa Swasthya Ho, Shri Ganesh Sa Gyan Ho.
    "SHUBH DEEPAWALI" TO U AND UR FAMILY MEMBERS...
    6 minutes ago · Like
    Hemant Rajoria HAPPY DIWALI
    5 minutes ago · Like
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
19 minutes ago
आप, आपके परिवार, आपके मित्रो व आपके सभी सगे संबंधियों को इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें जय उत्तराखंड
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    Jagdish Rawat J D and 10 others like this.
    View all 8 comments
    Rajpal Panwar Aapko bhi Hardik Shubhkamnayein....
    13 minutes ago via mobile · Like
    Gajendra Singh Sajwan aap ko hardik subkamnaye
    11 minutes ago · Like
    Mahi Mehta aapko bhi sir
    7 minutes ago · Like
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
15 hours ago
हँसते रहो
**************************************
रुला देना बहुँत आसाँन है सबको
पर हंसाना बहुत कठिन है सबको
**************************************
शुभ रात्री उत्तराखंड
आप का ध्यानी
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    26 people like this.
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    Gajendra Singh Sajwan diwali pavan parv ke hardik subkamnaye dhyani ji good night
    15 hours ago via mobile · Like · 1
    देव भूमि बद्री-केदार नाथ gajendra jee aapko bhee shubh ratree jee
    15 hours ago · Like · 1
    Arvind Narayan Paliwal Happy Diwali To You & Your
    Family.
    14 hours ago · Like
    Gopal Pandey Happy diwali
    14 hours ago via mobile · Like
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देव भूमि बद्री-केदार नाथ
21 hours ago
भाग्या का लेखा मेरा

कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी
दोई गफा अन्ना कु कख्क लिख्युंचा
ऐ मेरी पोट्गी तिल भी णी जाणी
कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

बत्ती बलण मण दीप बुझेकी
यकुली रैंण जिकोड़ी झुरेकी
अंशुं रुंदा रैंदा सदनी को बोई
सण बार ऐदा ओर यकुल चला जांद
कैका भाग मा क्या दुःख दागडायूँ
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

मी तेरु सरू तू मेरु सारु बोई
मुल्क मेरु सदनी को उजाड़ू
खैरी की कमाणी उकालों को पाणी
तू भरदा रैं एक गढ़ छोडी सरदा रै
कैक भाग क्ख्क छ वैकु माटू
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी
दोई गफा अन्ना कु कख्क लिख्युंचा
ऐ मेरी पोट्गी तिल भी णी जाणी
कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
Sunday
अहम रह गया बाकी मेरा
****************************
यूँ ही जला था मै
राख था सिर्फ उड़ा था मै
अहम में उम्र भर पीसा यूँ मै
तेरे चरण में अब गिरा हूँ मै
********************************
शुभ मध्य उत्तराखंड

आप का ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जब चली गयी तुम ....

नजरें ढूंढे तोहे
सजना मेरे कंहा खोये
सुध-बुध लगे ना मोहे
प्रित मेरी खोये खोये
जब छोड़कर चली गयी तुम

दिन ढाला अकेले
रात वो यादों के मेले
सवेरे भी तू ही साथ थी
चुपके तू ही पास थी
जब छोड़कर चली गयी तुम

आदत यूँ हो गयी है तेरी
ना लगता नैन ना आता चैन
बरसती रही घटा दिन रैन
दिल में तेरे बिन तेरे बिन
जब छोड़कर चली गयी तुम

कुछ ना रहा मै तेरे बिन
होकर तुझ से जुदा मै
तब मैंने माना तुम्हे जाना
मुझमें तु ही तुम हो
जब छोड़कर चली गयी तुम

खुद से खफा हो मै
तेरे बिन मुझसे जुदा हूँ मै
बैठा हूँ उदास अकेले यंहा
तेरे बिन बस जुदा हूँ मै
जब छोड़कर चली गयी तुम

नजरें ढूंढे तोहे
सजना मेरे कंहा खोये
सुध-बुध लगे ना मोहे
प्रित मेरी खोये खोये
जब छोड़कर चली गयी तुम

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कंहा चला

सुख की ओर भाग रहे
दुःख स्वयं ओढ़ रहे है
कैसे समझाओं मै उन्हें
पीछे क्या छोड़ रहे हैं

श्रणिक सुख के संग
अलोकिक देह छेद रहे हैं
कंकड़ अपने पर तोल कर
रिश्तों पर मोल कर रहे हैं

कर्म के पथ पर हम
स्तविक पथ क्यों छोड़ रहे है
अर्थ अब वंचित है कया का
मोह माया को ओढ़ रहे हैं

अकेल चला था तू अब
अकेला ही यंहा से जायेगा
तेरा किया धरा ही तेरे संग
अब योनी योनी वो आयेगा

सुख की ओर भाग रहे
दुःख स्वयं ओढ़ रहे है
कैसे समझाओं मै उन्हें
पीछे क्या छोड़ रहे हैं

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ ना भुला

मीथै भूल जावा
कोई बात णी..२ 

तुम थै ना भूलो दैलो दीदो
आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड

सदनी रिंगण राला वा
यख वख भटकाण राला वा ..२
अग्ने पिछने  आलो
आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड

पाणी पीता याद आली वा
ठंडी ठंडी तिस बुझली वा ...२
तांबा बटा याद दिला तुम थै
आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड

छुंयी बणकी निघाली वा
तेरी गीची दिन रात आली वा
खुदेडा की निघी एक रेघ
आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड

प्रवासी उत्तरखंडी भुल्हों
जख भी रयाँ राजी खुशी रयां
आंसूं खुदा का चुल दियां 
आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड

मीथै भूल जावा
कोई बात णी..२ 

तुम थै ना भूलो दैलो दीदो
आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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ना भुला मीथै भूल जावा कोई बात णी..२ तुम थै ना भूलो दैलो दीदो आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड सदनी रिंगण राला वा यख वख भटकाण राला वा ..२ अग्ने पिछने  आलो आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड पाणी पीता याद आली वा ठंडी ठंडी तिस बुझली वा ...२ तांबा बटा याद दिला तुम थै आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड छुंयी बणकी निघाली वा तेरी गीची दिन रात आली वा खुदेडा की निघी एक रेघ आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड प्रवासी उत्तरखंडी भुल्हों जख भी रयाँ राजी खुशी रयां आंसूं खुदा का चुल दियां आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड मीथै भूल जावा कोई बात णी..२ तुम थै ना भूलो दैलो दीदो आपरू गढ़देश हे उत्तराखंड एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ अन्यास ही

बच्चों के संग मै भी बच्चा
उम्र मै अब भी हूँ कच्चा पर वो हैं सच्चे
अंनछुये सा वो है बचपन
बच्चों के संग मै भी बच्चा

भोली सी मुस्कान उनकी
अटखेली लेती शान उनकी
भाव उनके ना बंधे मेरे जैसे
मुक्त विचारों से उड़ते तितली जैसे
बच्चों के संग मै भी बच्चा

सुख दुःख से परे वो बचपन
बैर द्वेष ना पनपे उस आंगन
हंसती खेलती किलकारियां गूंजे
तन मन मेरा अब भी तरसे   
बच्चों के संग मै भी बच्चा

देखों उनको अब भी मोड़कर
उस गली उस छोटे पथ पर
हंस रहा है अब भी वो मुझ पर
अश्रु निकल आते उस पल पर
बच्चों के संग मै भी बच्चा

बच्चों के संग मै भी बच्चा
उम्र मै अब भी हूँ कच्चा पर वो हैं सच्चे
अंनछुये सा वो है बचपन
बच्चों के संग मै भी बच्चा
एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत — with Reena Mishra and 47 others.अन्यास ही बच्चों के संग मै भी बच्चा उम्र मै अब भी हूँ कच्चा पर वो हैं सच्चे अंनछुये सा वो है बचपन बच्चों के संग मै भी बच्चा भोली सी मुस्कान उनकी अटखेली लेती शान उनकी भाव उनके ना बंधे मेरे जैसे मुक्त विचारों से उड़ते तितली जैसे बच्चों के संग मै भी बच्चा सुख दुःख से परे वो बचपन बैर द्वेष ना पनपे उस आंगन हंसती खेलती किलकारियां गूंजे तन मन मेरा अब भी तरसे बच्चों के संग मै भी बच्चा देखों उनको अब भी मोड़कर उस गली उस छोटे पथ पर हंस रहा है अब भी वो मुझ पर अश्रु निकल आते उस पल पर बच्चों के संग मै भी बच्चा बच्चों के संग मै भी बच्चा उम्र मै अब भी हूँ कच्चा पर वो हैं सच्चे अंनछुये सा वो है बचपन बच्चों के संग मै भी बच्चा एक उत्तराखंडी बालकृष्ण डी ध्यानी देवभूमि बद्री-केदारनाथ मेरा ब्लोग्स http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
Monday
भाग्या का लेखा मेरा

कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी
दोई गफा अन्ना कु कख्क लिख्युंचा
ऐ मेरी पोट्गी तिल भी णी जाणी
कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

बत्ती बलण मण दीप बुझेकी
यकुली रैंण जिकोड़ी झुरेकी
अंशुं रुंदा रैंदा सदनी को बोई
सण बार ऐदा ओर यकुल चला जांद
कैका भाग मा क्या दुःख दागडायूँ
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

मी तेरु सरू तू मेरु सारु बोई
मुल्क मेरु सदनी को उजाड़ू
खैरी की कमाणी उकालों को पाणी
तू भरदा रैं एक गढ़ छोडी सरदा रै
कैक भाग क्ख्क छ वैकु माटू
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

चलदा रै चलद रै भाग का लेखा चलद रै
मनखी तू क्ख्क क्ख्क भटके भाग का लेखा चलद रै

कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी
दोई गफा अन्ना कु कख्क लिख्युंचा
ऐ मेरी पोट्गी तिल भी णी जाणी
कैका भ्ग्याँ मा क्या च लिख्युं
ऐ मेरी बोई कैल णी जाणी

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव भूमि बद्री-केदार नाथ
15 hours ago
लिखूंगा गीत मै

अश्कों पर लिखूंगा गीत मै
आँखों को अब बहने दू
यादों के संगीत के संग
सुर ताल अब भीगने दू
अश्कों पर लिखूंगा गीत मै .....

गिले गिले हैं शब्द मेरे
कंठ से अब उसे उमड़ ने दू
दिल की महफिल लगी है
उसके कोने में ना छुप ने दू
अश्कों पर लिखूंगा गीत मै .....

बहते रहेंगे ताल पर अब वो
ढोलक की थाप पर बजने दू
बांसुरी की रुदन स्वर में अब
जी भरके अब सिसकने दू
अश्कों पर लिखूंगा गीत मै .....

रोना मेरा ना नकाम हो
अब तो अक्षर बन उभरने दू
मेरे भी तू जज्बात है दोस्त
अश्रु बनकर उसे गिरने दू
अश्कों पर लिखूंगा गीत मै .....

अश्कों पर लिखूंगा गीत मै
आँखों को अब बहने दू
यादों के संगीत के संग
सुर ताल अब भीगने दू
अश्कों पर लिखूंगा गीत मै .....

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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