• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
March 14 at 4:35pm · New Delhi, India ·
बिकामु ह्रवैग्यौं मैं.......
अपणा सी दिखेंदा था जू,
अब दिखेणा नी,
यनु लगण लग्युं छ,
बिकामु ह्रवैग्यौं मैं.......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु,
मेरा कविमन कू कबलाट, कुजाणि किलै
दिनांक 14.3.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु added 5 new photos.
March 11 at 3:31pm · New Delhi, India ·
श्री समीर रतूड़ी जी का जेल सी रिहा हाेण की खबर सुणिक खुशी कू अहसास होणु छ।
दूध कू दूध पाणी कू पाणी ह्रवैगि,
हमारु प्रिय दगड़्या समीर जी,
जेल सी रिहा ह्रवैक भैर ऐगि,
सच मा सच की आज जीत ह्रवैगि......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 11.3.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
March 11 at 11:41am · New Delhi, India ·
चला हे भुलौं,
अपणा उत्तराखंड जौला,
खाजा बुखणा धार मा बैठि,
बगछटट ह्रवैक बुखौला हे.......
(कविमन का ऊमाळ)
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 11.3.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
March 11 at 10:04am · New Delhi, India ·
हे पहाड़! तेरु दर्द......
पैलि का जमाना मा जब गाळी देंदा था त बोल्दा था तेरी कूड़ी बांजा पड़लि। आज यू वरदान छ, किलैकि देख्दा होला आप अपणा पहाड़ का गौं मा बांजा कूड़ा अर टुट्यां ऊंका धुर्पळा।
जौंकी कूड़ी बांजा पड़िं,
ऊंकू होयुं बिकास छ,
परदेश प्रवास मा,
आज होयिं आस छ.......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 11.3.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
March 10 at 2:55pm · New Delhi, India ·
एक कज्याण लाल दा तैं खोेजणि थै। बाटा मा बबिन जी वीं तैं मिल्यन। वींन पूछि लाल दा कू घौर कख छ। बबिन जी तैं कुछ शक ह्वै अर बोलि, मैं लाल दा तैं जाण्दु हि निछौं। तब वींन काव्य अंदाज मा बोलि:-
देख लूंगी, जहां भी मिलेगा,
बर्मण्ड फोड़ दूंगी,
दारु की एक बोतळ ल्हिगे थौ,
पैंसा नि दिन्यन आज तक वेन,
वेकी हाडगि भी तोड़ दूंगी.....
बबिन जी वींका बोल सुणिक, लुकां लाल दा का घौर गैन अर बोलि जान बचौण चांदि त गोळ ह्रवे जा।
अबे बबिन मनखि छौं मैं लंबु,
कनुकै ह्रवै सकदु गोळ,
किलै मेरी मति मा,
फेन्न लगिं छैं जोळ......
हा हा हा हा हा बिचारु लाल दा
लाल भुला,
तेरु भैजि जग्गू
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 10.3.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Sudesh Bhatt
March 27 at 9:55pm ·
राज्य की बर्बादी कु
जश्न आज मन्युं च
कांग्रेस कुन शोक
बीजेपी युकेडी की बग्वाल हुंयी च
जुंग मुछ सब फुकैगी
नरबै हथ तपांणा छन
हमकुन लगै गेन 144
अफू दिल्ली लुक्यां छन
अफसोस नी च नरबैग्युं तै
लोकतंत्र की खत्ता खंणी च
यीं खत्ता की श्रेय लींण कुन
हपार छौंपा दौड लगीं च
जु भुना छन हमन लगवै
यख राष्ट्रपति शाशन
अजैन नरबैग्युं तुम भोटु कुन
कल्दी भीगैकी धरीं च तुमकुन
हपार द्याखो तुम्ही फोटु मा
कन छरमल्याट हुयुं च
अरे म्वाड निखली ग्या सरकार कु
युंकी रस्यांण अयीं च
ग्वाई लगांणा छन दल जु
बसकल्या छ्वाया सी हुयां छन
तीरें बर्सी ह्वै ग्या सरकार की
मुयली क सार लग्यां छन
राज्य की बर्बादी कु
जश्न आज मन्युं च
कांग्रेस कुन शोक
बीजेपी युकेडी......
आज क ताजा घटनाक्रम पर यु लेख@लेखक...सुदेश भट्ट "दगडया"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु

गुरौं न पाळा....
तड़कौन्दा छन,
बिंगणा होला आप......
-कवि जिज्ञासू
31.3.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
20 hrs · New Delhi, India ·
यनु भी होंदु यीं दुन्यां मा....
हम तुम्तैं बुलौला,
तुम हम्तैं बुलैन,
याद रख्यन,
मिलि जुलिक खैन,
ऊ होनहार भी होला,
कखि भि, कतै न बुलैन,
जब तक हम छौं,
तौंकु बाटु बंद रख्ला,
मान सम्मान कू स्वाद,
हम हि चाख्ला........
-कवि जिज्ञासू
अहसास मेरु, बिंगि सकला जू आप
दिनांक 31.3.2016
(मान्यवर नरेन्द्र कठैत जी तैं समर्पित मेरी या रचना।)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बल भैजि परणाम.....
परणाम,
मैंन बोलि पछाण्नु निछौं,
भैजि हम आपकी कविता,
फेसबुक का माध्यम सी,
रोजाना पढ़दा छौं,
मैंन बोलि सौभाग्य मेरु,
कनि लगदिन मेरी कविता?
कुतग्याळि सी लगदिन,
पहाड़ आधारित होंदिन,
आपकी कविता......
मैं अपणि कविता का पाठकु कू हृदय सी आभार व्यक्त करदु। मंच का माध्यम सी ना सही, फेसबुक का माध्यम सी मैं आप तक अपणा कविमन का कबलाट तैं कविताओं का रुप मा पौंछौंदु रौलु। सच्चाई छ कबरि मेरा कविमन मा या बात औंदि गढ़वाळि कविता लेखन की डगर मा किलै पड़युं छौं। पर मैकु सुखद अहसास होंदु जब देश विदेश बिटि मेरी कविताओं का प्रेमी मैकु फोन करिक या संदेश का माध्यम सी मन की बात व्यक्त करदा छन। गढ़वाळि भाषा कू श्रृंगार मेरु संकल्प छ, जब तक यीं धरती मा रौलु।
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 28.3.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जुगराजि रै लाल भुला.....
भुला लाल चंद निराला,
देखण लग्युं लाल बुरांस,
भोळ होळी कू त्यौहार छ,
जगणि मन मा आस.....
सोचणु होळी खेलिक,
मन सी माैज मनौलु,
थोड़ा सी लगैक तब,
बिष्ट जी फर रंग लगौलु.....
जग्गू दिदा की जग्वाळ मा,
भ्वीं मा बैठि ध्यान लगौलु,
जथ्गा होलु भाग मा मेरा,
पीक भुरभिताळ बणि जौलु.....
जुगराजि रै लाल भुला तू,
हास्य की गंगा बगौंदु रै,
जथ्गा होलु भाग मा तेरा,
वथ्गा खांदु पेंदु रै......
- तेरु दिदा जग्गू
दिनांक 23.3.2016