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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

भाषा का सल्लि
गढ़ भारती धाद लगौणी
कख भाषा का सल्लि छां
हर्चदि जाणीं बोली-भाषा
तुम राजनीति मा टल्ली छां।
रीति-रिवाज तीज त्यौहार
जरा-जरा कै तुम छ्वडणां छां
ंअपणि बोलि-भाषा से तुम
किलै बिरूट होणां छां?
देश विदेशू नाम कमौणां
अगनै-अगनै बढणां छां
अपणी बोली अपणी भाषै
क्यो समाळ नि करणां छां।
जै सामज कि बोलि गूंगी चा
भाषा जैकि उन्नत नी चा
वै समाज की यीं दुन्या म
मान मर्यादा बचीं नि रैंदा।
गढ़वळि भाषा की मर्यादा
ये कु साहित्य भण्डार प्रगाढ चा
जरर्वत अमणी सत समाळ की
गढ़वळि कै भाषा से कम चा?
सर्वाधिकार/ दिनेश ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi 

हमरी संस्कृति हमरी पहचाण
गड्वाली कुमायूनी लोक भाषा संस्कृति
जिंदा च बस अब
डी जे का बनबनी ट्रैक तक.....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
March 31 at 7:47pm ·
ब्याली सुपन्यो मा
मार्क जुरकबर्क एगी
बोलण बैठगि जोशी जी
हद हवे गया तुम तै
हर घड़ी ऑनलाइन
ठीक बात नीच
माना मेरी फेसबुके मार्किट
इण्डिया सब से जादा चा
पर लाटा जोशी इतगा
ऑनलाइन नि रै यार ।.....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
March 31 at 2:54pm ·
चाँद को कैसे देखु
चाँद है कफा कफा
मुझ से
मैं आसमान से नजर
कैसे मिलाउ
तारों से क्या कहु
जब चाँद ही नाराज है मुझ से।.....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
April 11 at 9:45am · New Delhi, India ·
बंसत ऋृतु बौड़ि ऐगि,
छयुं छ मौळ्यार,
डांड्यौं मा मौळ्यां छन,
बांज, बुरांस, अयांर......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
मेरा कविमन कू कबलाट
मेरी कविता कू एक अंश
दिनांक 11.4.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
April 7 at 9:44am · New Delhi, India ·
घत्त.......गढ़वाळि भाषा कू अलंकारिक शब्द छ। सब्बि भाषा सीखा पर अपणि गढ़वाळि दूधबोलि भाषा कू पैलि मान सम्मान करा।
द्वी बोतळ पिग्यौं ब्याळि,
यनु आई घत्त,
मन चंचल ह्रवैई मेरु,
भ्वीं मा पड़्यौं भत्त......
उठि नि सक्यौं सब्यौं न बोलि,
त्वैन करयालि खत्त,
कनु थै तू कनु ह्रवैग्यें,
यनु क्या आई घत्त.....
मैंन बताई मेरा मन मा,
शब्द घूमि घत्त,
दगड़यौन मैकु पिलाई,
आज ह्रवैगि खत्त....
कवि छौं, भौत कबलाट होन्दु मेरा मन मा गढ़वाळि भाषा का हर शब्द फर।
मेरु प्रयास आपका मन मा गढ़वाळि भाषा पिरेम बढौंणु छ, बिंगि सकला जू आप।
आपकु कवि दगड़्या,
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 6.4.2016
दूरभाष: 09654972366

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
April 5 at 12:37pm · New Delhi, India ·
मेरी कविता की एक झलक, बिंगि सकला जू आप।
नौ गरै....
जै मनखि का शांत होन,
खूब होन्दि खाणी बाणी,
बिफरि जान्दा जब,
तब होन्दि टोटग ऊताणि.....
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू,
मेरा कविमन कू कबलाट
ग्राम-बागी नौसा, पट्टी-चंद्रवदनी,
टिहरी गढ़वाळ(उत्तराखंड)
दूरभाष: 09654972366

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
March 31 at 12:07pm · New Delhi, India ·
यनु भी होंदु यीं दुन्यां मा....
हम तुम्तैं बुलौला,
तुम हम्तैं बुलैन,
याद रख्यन,
मिलि जुलिक खैन,
ऊ होनहार भी होला,
कखि भि, कतै न बुलैन,
जब तक हम छौं,
तौंकु बाटु बंद रख्ला,
मान सम्मान कू स्वाद,
हम हि चाख्ला........
-कवि जिज्ञासू
अहसास मेरु, बिंगि सकला जू आप
दिनांक 31.3.2016
(मान्यवर नरेन्द्र कठैत जी तैं समर्पित मेरी या रचना।)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खुद लगीं च
आज मीतै दुर
कनक्वै की जांण
मीन यखुली घर
ताल लग्यां छन
बंद द्वार म्वार
बांजी हुंयी कुडी
जम्यां छन डाल
जंदर्युं क नी च
सुंण्यांणु घुंघ्याट
छींच्वड भी सुखी गेन
कखी नी सुंस्याट
घस्यांद बल्दु की
नी बजणी घंडुली
पांणी म दीदी भूल्युं क
नी हुंणु गुमणाट
अग्यर पछ्यर दीदों
मल्सु फूलीं च
वबर की पस्युंण भी
लडबडी हुंयी च
ज्यू त भुनु च
जौं मी भी घर
पर बांजी हुंयी कुडी
अर बंद द्वार म्वार
खुद लगीं च
आज मीतै......
सर्वाधिकार सुरक्षित@लेख सुदेश भट्ट"दगडया"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज रिटैर ह्वै गेन बल
गुरजी हमर अश्वाल जी
पडै लिखै कन कत्युं तै
साब बणै गेन अश्वाल जी
आपक पढयां छात्र गुरजी
बड बड होदों पर छन
कुछ छन देश बिदेशु मा
कुछ सीमाओं पर तैनात छन
याद आंणा छन मीतै
आज स्कूल्या दिनों की
हथ पकडी क गणित क सवाल
जब सिखांद छ्या अश्वाल जी
पढै लिखै अर अनुशाशन क
दुसर नाम छ्या अश्वाल जी
आज सुन्याल तुमर बिना
पोखरखाल हुयुं अश्वाल जी
नैतिकता क पाठ पढैन
हमतै आपन अश्वाल जी
भाष्कर परिवार कु नायक मीतै
आपन बणै छ्या अश्वाल जी
अर्थशास्त्र अर गणित का
बिद्वान छ्या अश्वाल जी
ईंटर कालेज पोखरखाल की
शान छ्या गुरजी अश्वाल जी
ब्हाटसप मा फोटो मिली बल
रिटैरमेंट ह्वेन अश्वाल जी
बीस साल पुरंण दिन
मेरी आंख्यु मा यैगेन अश्वाल जी
आधुनिक युग क द्रोणाचार्य
आप रैन अश्वाल जी
कतका ही अर्जुन देश तै देन
पोखरखाल बिटी आपन अश्वाल जी
जतका लेखु कम ही च
आपक बार मा अश्वाल जी
आपक चरणों मा शत शत नमन
सुदेश भट्ट लखांणु च अश्वाल जी
आज रिटैर ह्वै गेन बल
गुरजी हमर.......
ईंटर कालेज पोखरखाल ब्हाटसप ग्रुप क पूर्व छात्रों की ओर से मी या रचना अपण पुज्य गुरु आदरणीय बीरबल सिंह अश्वाल जी की सेवानिबृत्ति पर ऊंक चरणों मा भेंट करनु छौं@लेख...सुदेश भट्ट"दगडया"