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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
March 21 at 3:24pm
घर-गौं
बरसौं पैली घौर छोडी द्यसु बस्यां
अज्यों तलक बी उपरि धरति म नि रच्यां।
रोटी-रोजगार की खातिर छां अयां
क्वी बि बौडिकि मुल्क जाण नि लग्यां।
आस्था-बीस्था कै कमै यख देसु म
धीत हमरि अजि बि अपणा मुल्क चा।
देवि-द्यबता , पितृ अपणां पुज्दा छां
रीति-रिवाज तीज त्यौहार मनदा छां।
याद औणी कूडी, पुंगडी छनुडी की
खुद लगीं मीं अपणां पांडा, वोबरा की।
मन पराण अपणां पाड म छन बस्यां
बाळि सगोडी आंख्यों छन रिटणां।
भलु सुभौ भला मनखि छन मेरा पाड़ का
कनी भली छै हवा पाणी पाड की।
याद औणी कफ्फू हिलांस, घुघती की
अपण्य पर्यौ अर बाळपन का दगड्यौं की।
दिनेश ध्यानी। 21, मार्च, 2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चल मेरी दगड़या,
अब जख जौला,
गेर भरिक,
अब वखि खौला.......
-कवि जिज्ञासू
कबलाट, चल हे लग बाट
दिनांक 5.4.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
April 5 at 12:37pm · New Delhi, India ·
मेरी कविता की एक झलक, बिंगि सकला जू आप।
नौ गरै....
जै मनखि का शांत होन,
खूब होन्दि खाणी बाणी,
बिफरि जान्दा जब,
तब होन्दि टोटग ऊताणि.....
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू,
मेरा कविमन कू कबलाट
ग्राम-बागी नौसा, पट्टी-चंद्रवदनी,
टिहरी गढ़वाळ(उत्तराखंड)
दूरभाष: 09654972366

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
April 1 at 9:36am · New Delhi, India ·
तिम्ला कू फूल देख्यालि आज,
होला तुम सोचणा, क्या यू सच होलु......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू,
दिनांक 1.4.2016
अप्रैल फूल फर मेरा कविमन कू कबलाट

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
April 5 at 12:37pm · New Delhi, India ·
मेरी कविता की एक झलक, बिंगि सकला जू आप।
नौ गरै....
जै मनखि का शांत होन,
खूब होन्दि खाणी बाणी,
बिफरि जान्दा जब,
तब होन्दि टोटग ऊताणि.....
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू,
मेरा कविमन कू कबलाट
ग्राम-बागी नौसा, पट्टी-चंद्रवदनी,
टिहरी गढ़वाळ(उत्तराखंड)
दूरभाष: 09654972366

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
March 31 at 12:07pm · New Delhi, India ·
यनु भी होंदु यीं दुन्यां मा....
हम तुम्तैं बुलौला,
तुम हम्तैं बुलैन,
याद रख्यन,
मिलि जुलिक खैन,
ऊ होनहार भी होला,
कखि भि, कतै न बुलैन,
जब तक हम छौं,
तौंकु बाटु बंद रख्ला,
मान सम्मान कू स्वाद,
हम हि चाख्ला........
-कवि जिज्ञासू
अहसास मेरु, बिंगि सकला जू आप
दिनांक 31.3.2016
(मान्यवर नरेन्द्र कठैत जी तैं समर्पित मेरी या रचना।)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
March 31 at 11:54am · New Delhi, India ·
गुरौं न पाळा....
तड़कौन्दा छन,
बिंगणा होला आप......
-कवि जिज्ञासू
31.3.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
March 28 at 10:15am · New Delhi, India ·
बल भैजि परणाम.....
परणाम,
मैंन बोलि पछाण्नु निछौं,
भैजि हम आपकी कविता,
फेसबुक का माध्यम सी,
रोजाना पढ़दा छौं,
मैंन बोलि सौभाग्य मेरु,
कनि लगदिन मेरी कविता?
कुतग्याळि सी लगदिन,
पहाड़ आधारित होंदिन,
आपकी कविता......

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जुगराजि रै लाल भुला.....
भुला लाल चंद निराला,
देखण लग्युं लाल बुरांस,
भोळ होळी कू त्यौहार छ,
जगणि मन मा आस.....
सोचणु होळी खेलिक,
मन सी माैज मनौलु,
थोड़ा सी लगैक तब,
बिष्ट जी फर रंग लगौलु.....
जग्गू दिदा की जग्वाळ मा,
भ्वीं मा बैठि ध्यान लगौलु,
जथ्गा होलु भाग मा मेरा,
पीक भुरभिताळ बणि जौलु.....
जुगराजि रै लाल भुला तू,
हास्य की गंगा बगौंदु रै,
जथ्गा होलु भाग मा तेरा,
वथ्गा खांदु पेंदु रै......
- तेरु दिदा जग्गू
दिनांक 23.3.2016