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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खुद लगीं च
आज मीतै दुर
कनक्वै की जांण
मीन यखुली घर
ताल लग्यां छन
बंद द्वार म्वार
बांजी हुंयी कुडी
जम्यां छन डाल
जंदर्युं क नी च
सुंण्यांणु घुंघ्याट
छींच्वड भी सुखी गेन
कखी नी सुंस्याट
घस्यांद बल्दु की
नी बजणी घंडुली
पांणी म दीदी भूल्युं क
नी हुंणु गुमणाट
अग्यर पछ्यर दीदों
मल्सु फूलीं च
वबर की पस्युंण भी
लडबडी हुंयी च
ज्यू त भुनु च
जौं मी भी घर
पर बांजी हुंयी कुडी
अर बंद द्वार म्वार
खुद लगीं च
आज मीतै......
दगड्यों अजकाल भौत ब्यस्त छौं पर टैम निखोली कन ध्वलुं छौं ....सर्वाधिकार सुरक्षित@लेख सुदेश भट्ट"दगडया"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

खुद लगीं च
आज मीतै दुर
कनक्वै की जांण
मीन यखुली घर
ताल लग्यां छन
बंद द्वार म्वार
बांजी हुंयी कुडी
जम्यां छन डाल
जंदर्युं क नी च
सुंण्यांणु घुंघ्याट
छींच्वड भी सुखी गेन
कखी नी सुंस्याट
घस्यांद बल्दु की
नी बजणी घंडुली
पांणी म दीदी भूल्युं क
नी हुंणु गुमणाट
अग्यर पछ्यर दीदों
मल्सु फूलीं च
वबर की पस्युंण भी
लडबडी हुंयी च
ज्यू त भुनु च
जौं मी भी घर
पर बांजी हुंयी कुडी
अर बंद द्वार म्वार
खुद लगीं च
आज मीतै......
सर्वाधिकार सुरक्षित@लेख सुदेश भट्ट"दगडया"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

त्वै बिना खुदीं च
मेरी छाली आंखी
जिकुडी मा बडुली तेरी
मेरी उबईं सांकी
दिन भर ड्यूटी मा
रात सुपिन मा गौं जांदु
जनम भूमि तेरी कुखली मा
माटु मा लपोड्यांणा रांदु
कबी सुपन्यु मा दीदों मी
गुंण्युं तै ढुंगादु
कभी आम की डाल्युं की
फौंट्यूं तै हिलांदु
सुपन्युं मा ही सरा गौं की
ककडी मुंगरी चुरांदु
डुंग पडल तुमर गैर्युं मा
गाली भी खुब खांदु
सुपिन म्यार सच ह्वै गेन
आंख्यूं मा च पांणी
अपण प्यारु ब्वांग बिना
जिकुडी च खुद्यांणी
त्वै बिना खुदीं च
मेरी छाली....
सुपिन मा गौं की यात्रा कु वर्णन क दगडी सर्वाधिकार @लेख सुदेश भट्ट"दगडया"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तिमला का डाला
सुरिज भैजि पार जाला
स्यू सीन अँखियु का तीर
जब देखी घौर बिटि आज
खिस्सा बिटि
मुबेल निकाली तस्बीर खिंची ।।....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

रच के भी जिसमे ना है
हाँ की जिसमे कोई गुंजाइश नहीं
ये ना ही रचना है
जिस दिन रच के
हाँ हो जाती है
ना रच शुरू हो जाती है
किसी रचनाकार की
क्रेटिविटी का अंत
यही है शायद
रच के ना है मन में
कुछ बाकि है रचने को
ये रच के साथ ना की
गंगा ही रचना है ।।.........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

#‪#‎मेरा‬ जिकुड़ा का जलोटा मा
तिन आणु जाणु छोड़याली
तू उड़ी म्वारि कुजाणि कै दिसा फुर
तेरी माया जम्यु सैद
रीतू हवेकी भि अभि भि बच्यु च
मेरा जिकुड़ा आसे जलोटा मा
सूंघ ली अपणी माया जमी
सैदे गंद बास मेरी म्वारि
कै हैका बिराणी म्वारि तै
मिल टपकाण नि दे सैद माया कु
अपणा जिकुड़ा का जलोटा मा
तेरा डांडा का जम्या फूल कु रस
तेरा अस्यो पस्यो की गंद बास
अज्यूँ भि मेरा नाक मा टिकी च
मेरी माया झूटी लगणी त्वेकु म्वारि
तो तू अफु ऐ की सूंघली
अपणी टपक्यी सैदे गंद बास
मेरा जिकुड़ा जलोटा मा म्वारि## ।.......शैलेन्द्र जोशी
फोटो क्लिक .............शैलेन्द्र जोशी की नजर से

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फेसबुके वाल मा माया अर पिरेम परे एक हौर रचना थुपड़ायली जी
#‪#‎मेरा‬ जिकुड़ा का जलोटा मा
तिन आणु जाणु छोड़याली
तू उड़ी म्वारि कुजाणि कै दिसा फुर
तेरी माया जम्यु सैद
रीतू हवेकी भि अभि भि बच्यु च
मेरा जिकुड़ा आसे जलोटा मा
सूंघ ली अपणी माया जमी
सैदे गंद बास मेरी म्वारि
कै हैका बिराणी म्वारि तै
मिल टपकाण नि दे सैद माया कु
अपणा जिकुड़ा का जलोटा मा
तेरा डांडा का जम्या फूल कु रस
तेरा अस्यो पस्यो की गंद बास
अज्यूँ भि मेरा नाक मा टिकी च
मेरी माया झूटी लगणी त्वेकु म्वारि
तो तू अफु ऐ की सूंघली
अपणी टपक्यी सैदे गंद बास
मेरा जिकुड़ा जलोटा मा म्वारि## ।.......शैलेन्द्र जोशी
फोटो क्लिक .............शैलेन्द्र जोशी की नजर से

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नवरात्री पावन अवसर पर देश कि सभी बेटियों को समर्पित जो देवी का स्वरूप है एक काफी पुरानी रचना मेरी लिखी
मुझको वो दिन याद है
मुझ पगली को वो दिन याद है
वो दिन काश फिर मुझ को मिल जाये
ऐसी मेरी फरयाद है
वो सुबह देर से उठना
वो बिस्तर से अंगडाइ ले हुए उठना
वो मम्मी की डांट खाना
वो स्कूल कॉलेज तैयारी मे हडबडाट करना
सभी सहेलियो के साथ स्कूल कॉलेज जाना
वो एक जैसे सूट सिलवाना
एक जैसे से हेयर कटिंग करवाना
कभी दुपट्टटे पर
कभी स्वेटर पर
कभी नेलपोलिश लिपस्टिक क्रिम पर
कभी टीवी सीरियल फिल्मों पर
कभी किसी पर तो कभी किसी पर
बाते करना याद है
वो पिकनिक ट्रिप
वो बर्थडे पार्टीया
वो न्यू इयर मस्तीया
नाच वो हँसी
वो फ्रेंड के गिफ्ट वो ग्रीटिंग
क्या थे वो दिन मुझको वो दिन याद है
मुझ पगली को वो दिन याद है
कविता शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi 
April 15 at 8:28am ·
गीतू का संत अर दीपा पंत
जब गीत गांदीन
इंन्नु लगदु जन
गीतू का भगीरथ दगड़ी
गंगा ही युगल गीत गाणी हो

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

रच के भी जिसमे ना है
हाँ की जिसमे कोई गुंजाइश नहीं
ये ना ही रचना है
जिस दिन रच के
हाँ हो जाती है
ना रच शुरू हो जाती है
किसी रचनाकार की
क्रेटिविटी का अंत
यही है शायद
रच के ना है मन में
कुछ बाकि है रचने को
ये रच के साथ ना की
गंगा ही रचना है ।।.........शैलेन्द्र जोशी