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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पतरोळ जी की थाती मा.....
खूब बौंखळेयौं,
मचाई जरा कौंताळ,
मन खुश थौ होयुं भारी,
वे प्यारा गढ़वाळ......
या जिंदगी द्वी चार दिन की,
क्या छ रख्युं,
खूब हैंसा खेला,
भोळ बग्वाळ छ दिदौं,
खूब खेला भैला......
वे दिन दगड़्याैं,
छंद हि यनु आई,
कैमरा मैं कैद पल,
आपतैं भी बताई......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 28/10/2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फिर बी त ऐ आस छे
ये जियु किले तू उदास छे
आणि जाणी वाळी सांस ये
ये तर अब बी अप्ड़ पास छे
आज नि हुळू भौळ त हुळू
अजी हां ये बात त छे
पहाड़ मा बिकास को नोऊ छे
ऊ बी नऊ दर्जा द्वि दफा फेल छे
खिल्दा फूल हैंस ही जाला
कंडो थे तिळ किलै इल्जाम दे
माळु ग्वीराळ कु ऊ हैरू घासु
भौरीक अब बी मेरा पास छे
डंडियों मां बांसुरी कि धौण छे
मेरा नेता लुक्यां कै कै कुण छे
गदन्यों कु सुस्यांट आणू ह्वालु
बल अब ये बगता कु पास छे
रूणु-हैंसणु को जोग ये
बिधाता ने लेखि कै का पास ये
हमरु पाड़ा अब कया बुनु
सिंकोलि सैजा खेजा भात ये
फिर बी त ऐ आस छे
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नोटों की बल आयी है बरात
बैंकों के आंगन मे
थोला ले लेकी मच्युं है कुरच्याट
बैंको के आंगन में
लग गयी लंबी लंगार
रीसकेष के बैंकों मे
लेके नोटों की आयी है बरात
बैंको के आंगन मे
हरच्यां कर्जदार भी मिले
जो लगे थे लेनों मे
सेठ सौकार आज हैं बैठे
बैंकों के आंगन मे
नोटों की बल आयी है बरात
बैंकों के आंगन...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

काश मी बी जण्दु
द्वी आखर अंग्रेजी मा
कज्यंणी कुन वाईफ लाईफ
कनी बुल्द अंग्रेजी मा
काश मी बी जण्दु
द्वी आखर अंग्रेजी मा
ईना सुंणा रै नरबैग्युं
हैलो कम बुल्द अंग्रेजी मा
फांग्यु कुन भी प्लाट मी
कनी बुल्द अंग्रेजी मा
काश मी बी जंण्दु
द्वी आखर अंग्रेजी मा
ब्यो बराती मा जांदु मी
दबे जांदु अंग्रेजी मा
दगड्यों की अंग्रेजी दीदों
बंणै नी सकुद गडवली मा
काश मी बी जंण्दु
द्वी आखर अंग्रेजी मा
जंग्या तै बी गैल्यों न
कैपरी बंणै द्या अंग्रेजी मा
बुये ज्यूंदी ममी बणयीं
बुबा डैड हुयां छन अंग्रेजी मा
काश मी बी जण्दु
द्वी आखर अंग्रेजी मा
कच्ची एक पक्की एक
एल.के.जी युकेजी हुयां छन
अंग्रेजी क जमन मा गुरजी
मोबैल्युं मा सवाल कना छन
काश मी बी जंण्दु
द्वी आखर अंग्रेजी मा
दगड्या भग्यान म्यार
पौंछी गेन जुनी फर
मी जखै की तखी रैग्यों
मार खै ग्यों अंग्रेजी मा
काश मी बी जंण्दु
द्वी आखर अंग्रेजी ...
सर्वाधिकार @लेख सुदेश भट्ट "दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आस
जबैर मेर स्वास
मेर दगड मेर दगड़ू छोड़ देल
तबैर बी मेर ऐ यात्रा खत्म हुलि ना
चार लाकुडु दगड
मेर ऐ आस कया जळलि
राख हुन्दा वो मेरा फिनका
वै माटु का अंग्वाळा दगडी बी
मेरा ऊ सुपनिया स्याळा ना
भटक दा राला वा
पर वैकु छैल पड़लू ना
अंकगणिता का इच्छा
जंण झट कैरी की खत्म नि हुन्दा
वा जलदा रैंदा ठंडू जून जणी
वा जलदा रैंदा चमकदा गैणा जणी
रात हुलि जब
अंधारु गजबज कणु हुलु तब
ब्यौखोनि बेल हुलि
काला कपड़ा पैनी कि ऊ
वै बगता मां
सूरज उदय हुनू हुलु कखि
वैकि आग बी शांत ना हुलि
शांत ह्वैगे हुली माशाल
फिर जळालि
नाराज वो हाथ
फिर शुरू व्हाला
एक नै यात्रा कु
वै बाटा धैरी की ऊ
गाठलु
परिवर्तना कु क्षतिज
तबैर तक वैकि परेली
चक्रचाल मां बी झप नि कैल
जबैर मेर स्वास ....
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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फिर बी त ऐ आस छे
फिर बी त ऐ आस छे
ये जियु किले तू उदास छे
आणि जाणी वाळी सांस ये
ये तर अब बी अप्ड़ पास छे
आज नि हुळू भौळ त हुळू
अजी हां ये बात त छे
पहाड़ मा बिकास को नोऊ छे
ऊ बी नऊ दर्जा द्वि दफा फेल छे
खिल्दा फूल हैंस ही जाला
कंडो थे तिळ किलै इल्जाम दे
माळु ग्वीराळ कु ऊ हैरू घासु
भौरीक अब बी मेरा पास छे
डंडियों मां बांसुरी कि धौण छे
मेरा नेता लुक्यां कै कै कुण छे
गदन्यों कु सुस्यांट आणू ह्वालु
बल अब ये बगता कु पास छे
रूणु-हैंसणु को जोग ये
बिधाता ने लेखि कै का पास ये
हमरु पाड़ा अब कया बुनु
सिंकोलि सैजा खेजा भात ये
फिर बी त ऐ आस छे
बालकृष्ण डी ध्यानी
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मेरा माँ न मेसे कबी ऐ बोलि
कुच इनि छुई हुन्दी दुनिया मां
मेरा माँ न मेसे कबी ऐ बोलि
वे बग्त बेल बदली जान्दु जिबान
जब सचि मां जिकोडी थे ठेश लग्दी
वे आस थे कबी कथै ना छोड़ि
बेटा वै बात थे कैसे कबि ना बोलि
ठंडू मठू कै बाटु बी मिले तैथे
वै अप्ड़ी धास से तू कबी ना छोड़ी
छैल छबीली ऐ दुन्या का रंग
वै बाटा मां कतै , कबी ना दौड़ी
द्वि दिना का मौळयार छन ओ
देखि की दुःख थे,कबी ना परती
त्वैमा मां ही तू लुकियुँ छे
खोजी ले अफ थे पैल तब बोलि
हैंसदर त ,इल मिल जाला तैथे
जैं रुळै तै थे ऊं को साथ कबि ना तोड़ी
मेरा माँ न मेसे कबी ऐ बोलि
कुच इनि छुई हुन्दी दुनिया मां
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डाळयोंन माया लगै
ये जंगलात वै गौं मां
तू कख बी रै यों थे लगै
डाळयोंन माया लगै
डाळा डाळा दगडी राला
कदगा फल फूल
वा हम थे कया कया द्याला
डाळयोंन माया लगै
जड़ों मुल्ल हैंसण लगे
धरती कु दुःख झणी कख गे
ऐ उज्यड़ा थे इन तू सजै
डाळयोंन माया लगै
बेबस ना यूँ थे कै जे
आँखों अगनै ये सुपनीय रैं दे
अप्डू जल्म सफल कैजे
डाळयोंन माया लगै
बालकृष्ण डी ध्यानी
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मुंबई दिल्ली महानगरों मा
कन रस्यांण अयीं च
ब्यो बराती मा दीदी भूल्युं की
कन घिमसांण मचयीं च
हेमा मालीन अर श्री देवी कु
कैरीयर कर्युं तमाम च
ब्यो बराती मा दीदी भूल्युं की
नचंण की रस्यांण च
हंत्या घड्यलु मा नचंण भूली गेन
हपार मिस्यां छन डीजे मा
पाड भूली गेन दीदी भूली मेरी
जब बिटी बसी गेन बंबई दिल्ली मा
गडवली बुन बच्यांण भूली गेन
डांस कना छन गडवली गांणो मा
कोदु झंगोरा पकै नी सक्दन
पर मंगांणा छन आन लैनों मा
मुंबई दिल्ली महानगरों मा
कन रस्यांण.......
सर्वाधिकार लेख@सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी with Geeta Chandola and 100 others.
November 18 at 5:48pm ·
फिर ऐजा
उकालो ऊंदरू का बाटा
चल ऊँथे फिर भेटीं ओंला
खिल्दा फूल हैंसदा पात
कखक हुली इन जनि बात
झपन्यळू छैलू मां ऐजा
ऐकि ऊं खुद थे मिटै जा
रौन्तेळी बथों मा ऐकि
द्वि घड़ी टम कैकी सैजा
घैणि हर्याळी बिंछी छा
घुघुती बी घूर घूर लगींचा
डाळा डाळा मां झम्पा तेरा
धारा मां ऐकि तिस बुझै जा
देखि ले ये सबी यूँ नजारा
अंग्वाल भोरी भोरी कि लेजा
अँखियों माँ खिंच ले मि
सेल्फी मेर अप्डी दग्डी लेजा
उकालो ऊंदरू का बाटा
बालकृष्ण डी ध्यानी
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