• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

Raje Singh Karakoti

चाँड पौथि उठणि वै
तू उणरि दगडि छेवै
ऐ कुँमो आँचल कि नारि वै
राति भौर ठा उठणि छै
आँगण झाड चुल लिपणि छै
त्यर यूँ दिन चरिया चढ
पजै चढु यूँ सुरज गँढ
गँढ बै उछै घाँ कू डाल
गौर भैसि मौऊ गाडणि छै
चूल भाँण कर
एक पल रुक जा
हाँवू ब्याँऊ फल फुलू पाँत
तू नि रुकणि ना यूँ बगदू पाणि जन
जै दिन रुकलि...
"थम जाल यूँ माटि अँन
गौर भैसि दुधाँरु थँन"
सुख दुख स्यौतू जन टिपणि छै
लाँकड पिरुग घै कू डाल
ख्वँर पडि छू भौते भार
हिटणि छै सौ कोसू पार
सुरज छिप जा
नि छिपण यूँ तेरो बुँत
नि छिपण यूँ तेरो बुँत

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

हे ग्वँल देवा
करदे कृपया हे कृपालु देवा
"भिझि आँख भिझि बाँथ
हे ग्वँल देवा धँर दियै लाँज"
देश रक्षा खातिर शरहद मा आज
गौ-डाण्डि मा बैठि म्यर ईजा आस
हे ग्वँल देवा धँर दियै लाँज

गँढ-भिड मा हौलि म्यर ईजा
पानी कू तिषू..
एक घुँट पाण दिणि देवा
शरहद मा घुँट-घुँट रुणि
हे ग्वँल देवा
मनिख बनि..
एक आँचुई दिदिया पानी!
एक आँचुई दिदिया पानी!

ग्वाँड किलू कू जूँ धरणि देवा
त्यर थाँणू कू जूँ जलणि देवा
गँढ बै आलि ख्वँर हौलू बौजा
आपण धरा नरम कर दियै देवा
खुँट मा कान बुडि हौलि देवा
आँख नि दैखण..
मनिख बनि कान निकायि देवा!
मनिख बनि कान निकायि देवा!

ईज हौलि चौथार मा बैठि
म्यर चिट्टि ईज हाथो मा हौलि
अनपँढ छू..
मनिख बनि चिट्टि पँढ दे देवा!
मनिख बनि चिट्टि पँढ दे देवा!
सकुशल छू के दे देवा
एक हँवा कू झौका दे दै
आपण मुँया ऐहसास तू दे दै
हे ग्वँल देवा
मनिख बनि पौछ दियै आँसू!
मनिख बनि पौछ दियै आँसू!

हे ग्वँल देवा
म्यर ईजा कष्ट दिदै मैगे झट
हे ग्वँल देवा करदे कृपया
टयड मयड बाँटा सिद करनि देवा
गौरु बाछा गौरु गाँवा देवा
त्यर जोत जलै पलटण मा देवा!
त्यर जोत जलै पलटण मा देवा!

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

साँस सौरा, दी ब्वाँरि खेल- 'न्याँर'

ब्वाँर कुण्यि च्यँल सुडि राय
गौ कू शेर पुछड हिलुणै राय
ठुँल नान भै देखि नटखि राय
दी ब्वाँरिक बीच खेल चलणै राय
सैण मैस क कान भरणै राय
दी ब्वाँरि धूँ..
भैर वाल धुँमण दैखणै राय
"न्याँर हैजाणु मनशा हाय"
चाहा घुटुक लगुणै राय
"मी गुँई हिसाब दिणै रौय"
च्याँला टुकुर टुकुर मैहे चाणै राय
म्यर आँख पुतैई ब्वाँर कुणै राय
म्यर सुपणियू चूर चूर करणै राय
एक चूँलक तीन भागो करणै राय
नानछण बटिक जो मुख चाँछि म्यर
आ ठुँल हैबे आँख दिखुणै भाय
लाग पड बै दी हैगिण न्याँर
सुयूड बटि लुकुँड ले न्याँर
ईज बौज्यु दी भागम बटणै राय
तब समझि मी ब्वाँरियू खेल
न्याँर हबै परदेश जाणै राय
लाग पड बै..
"हम दी बुँढ बाँढि कर गीण न्याँर"
मी बुँढियक मुख देखि हँसणै राय
"ईजा बौज्यु आस अँछ्याण धँरणै भाय
साँस सौरा, दी ब्वारि खेल चँलणै हाय"

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

माँटि कू खिलौणा नै टुटि जावो
जतै दियै वै भल जँतलन
समाय रखै जिकुडि काँखा
नाजुक छू बन्धन कू नाँता
मि छू तेरो पागल पँछि
जतै दियै वै भल जँतलन!
जतै दियै वै भल जँतलन!

'टुट जावो ना देखि साँघ
कँडु बचण नि बोलि राधा'
प्रित खिलै वै बारोमासा
बचण नि तोडि मेरी राधा
मि छू तेरो पागल पँछि
जतै दियै वै भल जँतलन!
जतै दियै वै भल जँतलन!

सात बचण कू मेरी राधा
भ्यौ भग्याँरु नि छोडि साथा
अँध राता कि मेरी जुनि राधा
भल कै निभैयि रिश्तो कू गाँठा
मि छू तेरो पागल पँछि
जतै दियै वै भल जँतलन!
जतै दियै वै भल जँतलन!

'उल्झै नै प्यारु कू डौरा
सल्झै दै मेरी प्यारि राधा'
पिणौलि पाँता रँड जालि पाँणा
जो प्रित लगायि त्वैमा राधा
काँचै पाँकै साँचि प्रिताआ
मि छू तेरो माँटि कू खिलौणा
जो प्रित बिशै किले मैमा राधा
मि छू तेरो पागल पँछि
जतै दियै वै भल जँतलन!
जतै दियै वै भल जँतलन!
जतै दियै वै भल जँतलन!

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

ओ लाटा..
"लुर-लुर वल धाँरु रे पल धाँरु
लुर-लुर मैसू धैई लुरिणै रोले"

भल लागू मन.. म्यरो पहाड मा
जै कुँछा काकि ताँई बौडि हो
भल लागू मन.. म्यरो पहाड मा
ऊँचा निचा धाँर.. छू या
ठँण्डो मिठो पाँण.. छू या
वाँरु पाँरु धैँ भेटु अँगाश
का मिलू नसिब कूँ?
भल लागू मन.. म्यरो पहाड कूँ!

रितु उणि बारामास
बेडु पाँकु काफल चैत
चैत लाँगु त्याँरु मैत
का मिलू नसिब कूँ?
भल लागू मन.. म्यरो पहाड कूँ!

पहाड बोलि याँछू रँगत
या उँकाल या हुँलार
काम काँजू मा याँछू छैक
सुख दुखै मा सबै एक
का मिलू नसिब कूँ?
भल लागू मन.. म्यरो पहाड कूँ!

सौण भादो कू रुडमुड बरखा
पूष माघ कू ओशि रात
आँगन तापि दिन घामा
का मिलू नसिब कूँ?
भल लागू मन.. म्यरो पहाड कूँ!

कैकु ले दुख लागि जाला
को जताणि छू पिडा..?
नान मुना सब परदेशु बाँटा
हिल मिल रु वै काकि ताँई
गिनदे मैसा गिनती का
रात अँध राता जै हैगे पिडा
छिलुक उजाँऊ म्यर गौ कू बाँटा
का मिलू नसिब कूँ?
भल लागू मन.. म्यरो पहाड कूँ!

पितरो कि म्यर भुमि या
पाण जननि सिल छू या
राति ब्याँखुण घँटि गूँज
धार देव कू मन्दिर या
का मिलू नसिब कूँ?
भल लागू मन.. म्यरो पहाड कूँ!

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जो न बोळ स्की ऊ बोळ
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
मन की पीड़ा थे इनि ही रोज...... लाटा
मन की पीड़ा थे इनि ही रोज
यों अँखियों न बोगोंदी छो
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
मैथे क्वी कबि कवी ना जाना ना माना
मि इनि रोज अप्ड़ी दबाई बणादू छो
मेर मरजा कु इलाजा ना क्वी
कागद भौरिकि बस लेखी जांदू छो
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
मेर माया कु प्रेम बल ढुंगा गारा
वैथे मि अपड़ो पहाड़ बणादू छो
बग्दी गदनि छन ऐ नेडू मेरा
वैथे मि इनि हैरेल पोछाँण दू छो
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
ब्याळ मि जब मौरी जाळू जी
कैथे थे मेरो ऐ ख्याल आळू जी
वै मा मि इनि मिसी जाळू जी
फिर अपडों छोड़ी कख नि जाळू जी
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कैथे खोज्णु छै
कैथे खोज्णु छै
ऐ जियु तू कैथे खोज्णु छै
ऐ स्वास बी बिराणी रे
बस आंदि जांदी छै
कैथे खोज्णु छै ..........
मौल्यार कु कंडू छै
ऐ उजाड़ा कु तू धांडू छै
ऐ आँखि भाति रौड़ी गैनी
बस अंद्यरु कु बाटु छै
कैथे खोज्णु छै ..........
तन कि पीड़ा छै
ऐ मन कु तू विपदा छै
अपणा बारा अपणु बाना रे
तू कख कख दौड़ी छै
कैथे खोज्णु छै ..........
छैल छबीली दुन्या छै
ऐ रंग रंगीली दुन्या छै
इं भूल भूल्या दुन्यामां
तू कै बाटा बिरड़ी छै
कैथे खोज्णु छै ..........
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऐ काला पैंसा
हमन त नि देखि .....नि देखि
ऐ काला पैंसा हमरा पहाड़ों मां ....
ऐ आँखियों मां नि पौडी ...नि पौडी ...
इत्गा सुपनिया यों आँखियों मां
हमन त नि देखि .....नि देखि। ...
गर पात पात मा पैंसा खिल्दा
हैंसदरा मायादार हम ते कख बठे मिल्दा
तब कख लुकि हुन्दी ऐ बिन्सरी बेल
रात भर जगदा सुबेर कन क्वे उठ दा
हमन त नि देखि .....नि देखि। ...
पलायन कु ऐ नोऊ बी नि हुन्दु
दुःख पीड़ा मां एक बी गौं बी नि हुन्दु
मौज्दा रैंदा सब टक्कों टक्कों थे
एक बी ऊजाड़ा बांज खल्याण नि हुन्दु
हमन त नि देखि .....नि देखि। ...
द्वी नम्बरा कया हुन्दो हम थे कया पता
क्नो क्वे जम्मा करदा हम थे कैल नि सिखै
हरकौणौं-फरकौणौं हम थे आंदो नि
बौग कन कै मरदा तू ऐकि ऐजा सिखा
हमन त नि देखि .....नि देखि। ...
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जो न बोळ स्की ऊ बोळ
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
मन की पीड़ा थे इनि ही रोज...... लाटा
मन की पीड़ा थे इनि ही रोज
यों अँखियों न बोगोंदी छो
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
मैथे क्वी कबि कवी ना जाना ना माना
मि इनि रोज अप्ड़ी दबाई बणादू छो
मेर मरजा कु इलाजा ना क्वी
कागद भौरिकि बस लेखी जांदू छो
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
मेर माया कु प्रेम बल ढुंगा गारा
वैथे मि अपड़ो पहाड़ बणादू छो
बग्दी गदनि छन ऐ नेडू मेरा
वैथे मि इनि हैरेल पोछाँण दू छो
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
ब्याळ मि जब मौरी जाळू जी
कैथे थे मेरो ऐ ख्याल आळू जी
वै मा मि इनि मिसी जाळू जी
फिर अपडों छोड़ी कख नि जाळू जी
जो न बोळ स्की ऊ बोळ
वैथे लिख्दु जांदू छो
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कैथे खोज्णु छै
कैथे खोज्णु छै
ऐ जियु तू कैथे खोज्णु छै
ऐ स्वास बी बिराणी रे
बस आंदि जांदी छै
कैथे खोज्णु छै ..........
मौल्यार कु कंडू छै
ऐ उजाड़ा कु तू धांडू छै
ऐ आँखि भाति रौड़ी गैनी
बस अंद्यरु कु बाटु छै
कैथे खोज्णु छै ..........
तन कि पीड़ा छै
ऐ मन कु तू विपदा छै
अपणा बारा अपणु बाना रे
तू कख कख दौड़ी छै
कैथे खोज्णु छै ..........
छैल छबीली दुन्या छै
ऐ रंग रंगीली दुन्या छै
इं भूल भूल्या दुन्यामां
तू कै बाटा बिरड़ी छै
कैथे खोज्णु छै ..........
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित