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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चुल पर पांणी ध्वालो
त दिख्यांणा छन नेता
अजकली ब्यो बराती मा संगती
जग जगा छयां छन नेता
जै साल मी बंणी बरजी
चुनौ पैली हारी जीती गे छ्या नेता
चुनौ से पैली ब्यवयांद मी भी
म्यार घर भी कनी आंद नेता
ब्यो हुंणा छन कखी
अर रगर्याट मा छन नेता
बथौं बंण्यां छन सबेर बटी
अर तंणसे तंणसे की थकी गेन नेता
चुनौ की बेदी मा आज
खुब रिंगणा छन नेता
सरा बिधान सभा क फ्यारा
खुब कटंणा छन नेता
गल्या हुयां छन नेता कती
अर बोट मंगणा छन नेता
चुनौ की बेदी मा कन
आज लिसुर्यांणा छन नेता
कम से कम अब ब्यो बराती मा
गौं मा अब दिख्यांणा त छन नेता
गौं की खैरी पीडा चुनौ कुन
दुयी हथ्युं न बटोलणा छन नेता
चुलु पर पांणी ध्वालो
त दिख्यांणा छन ने...
यैंसुक चुनौ पर यु ताजु लेख कै बी ब्यक्ति बिशेष से संबधित नी रचना मा नेता शब्दों कु मिश्रण ब्यंग व हास्य क बान धुल्यां छन@सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज फिर से अपणी
वा ताल लगै दे भैजी
देवी क धुंयाल आज
खुब बजै दे भैजी
उकाली ऊंदारी कु
बाज बजै दे भैजी
पंचनाम द्यवतों की
ताल लगै दे भैजी
ताल ही ताल मा आज
छुंई लगै दे भैजी
पोखरखाल स्कूल मा आज
पंडो नचै दे भैजी
हरचदी लमडदी हमरी
संस्कृति बचै दे भैजी
ढोल दमौ आज अपणी
खुब घमकै दे भैजी
मंगल ताल आज
जमकै की बजै दे भैजी
घुंड्या रांसु लगै आज
सब्युं तै नचै दे भैजी
कुल क ईष्ट देवी द्यवता
सब्युं क सुमिरण करै दे भैजी
नागरजा नरसिंग आज
यखी नचै दे भैजी
ढौल दमौ की ताल आज
खुब गजै दे भैजी
देवी क धुयांल आज
खुब बजै दे......
दगड्या द्वारा आयोजित ढोल दमाऊ प्रतियोगिता को समर्पित@लेख..सुदेश भट्ट "दगड्या"ब्हाटसप 8576931840

Raje Singh Karakoti

"दर्प-दहा"
कैकु भल जै हैई
दर्प-दहा यु पैलि रैई
कैकु घर मा लागि
यु बण मा लागि
सदाबहार...
जेठ कु चड़कण घाम कू जैसोँ
छाँव मिलो ना ठण्डोँ पानि
दर्प-दहा ज्युँ दिल मा मेरोँ
मैत कु दब्यत सौरास पुकारि
पुजण मा रुणि साल महेण
दर्प-दहा यु सैणि-मैसि
लडणु-झगणु ऊमर यु गुजरि
दर्प-दहा मा दुनिया छाडि
छाडि सबै...
जैक लिजि दर्प-दहा
जैक लिजि दर्प-दहा

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

"जा रे काँवा म्यर मैतौणि र्फुर उडि जा मेरोँ काँवा"

जा रे काँवा म्यर मैतौणि
र्फुर उडि जा मेरोँ काँवा
कै दैई म्यर बाबा तै
बालँपनो कु उ दिना
हैँसि खेलि घर आगँण
जवानी कु यु कै पाँखा लागि
र्फुर उडाई... किले रे बाबा
बालँपन कु घोला छाडि
छोडि तुमरु द्धार बाबा
किले रचाई म्यर ब्याह हो बाबा
किले बनाई पराई हो बाबा
किले बनाई पराई हो बाबा
ओ म्यर लाडली प्यारि चेलि
तू छै मेरो जूँ अर पराण
चेलि जात कू यु छा रश्म
"एक दिन जाण पडु रे
अपणु स्वामि कु द्धार"
चेलि कू यु छा जात
जा चेलि तू अपणु द्धार
पराई हैग्यु यु मेरो द्धार
त्यार-ब्यार मा रौनक हौलि
जबै तु आलि मेरो द्धार
जा चेलि तू अपणु द्धार

जा रे काँवा म्यर मैतौणि
र्फुर उडि जा मेरोँ काँवा
झुरि हौलि म्यर ईजा
आगँण कु एक कोनु मा
बैठि हौलि म्यर ईजा
टुकुड-टुकुड उ चाणि हौलि
त्यार-ब्यार कु गिनती रौलि
जा रे काँवा म्यर मैतोणि
राजि-खुशि छू.. कै दैई..
"दुख लगै नि कैई रे"

ईजा-बाबा झुरि जाला
आँखा आँसू बरकि जाला

राजि-खुशि छू तुमरि चेलि
दुख लगै नि कैई रे
दुख लगै नि कैई रे
जा रे काँवा म्यर मैतोणि
र्फुर उडि जा मेरो काँवा

ओ म्यर लाडली प्यारि चेलि
तू छै मेरो जूँ अर पराण
साल महैण यु बिति गिण
त्यार-ब्यार ले पुरि गिण
किले नि ऐई मेरो द्धार
रिसै-रिसाई छै कि तू
राछि-खुशि कै दुख-पिडा
ओ रे काँवा सच बते दै
मेरि चेलि दुख-पिडा
मेरि चेलि दुख-पिडा

तुमरि चेलि दुख-पिडा
कसकै लगु मि मुख-पिडा
साँस-ससूर ले दहैज मा टोकि
रोज निकलणु आँसू आँखा
लुकि-छुपि कि...
ओ म्यर बाबा... ओ म्यर ईजा...

जा रे काँवा म्यर मैतौणि
र्फुर उडि जा मेरोँ काँवा
कै दे मेरो ईजा-बाबा
राजि-खुशि छू तुमरि चेलि
दुख लगै नि कैई रे
"ईजा-बाबा झुरि जाला
आँखा आँसू बरकि जाला"
राजि-खुशि छू कै दैई
दुख लगै नि कैई रे
दुख लगै नि कैई रे
जा रे काँवा म्यर मैतोणि
र्फुर उडि जा मेरो काँवा


लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

ओ ईजा....म्यर ईजा

म्यर ईजा...
कन याद समाई ममता मा
दुध भात खिलाई बचपन कु
जब याद ले उँछि ओ ईजा
मन ले दौडि त्यर बाँट पिछाणि
म्यर ईजा...
ब्याव बखत कमरा पँहुचदु
बुलबुलि ऐण मा करि
बनठनि कु सितणु छू
स्वैण मा लै जुण घर उत्था जी
भल आँगणि एक घाँघरि
म्यर ईजा...
निँद मा हैग्यु घनाघौर हे ईजा
जन पिछाडि मुड़ जा ईजा
देश बे ऐरु त्यर भेट-भिटाणु
सुपि-सुपणियोँ मा ऐग्यु घौर
म्यर ईजा...
स्वैण टुटण तै पैलि
हँसदि मुखडि मिठु बोल
चौथार मा बैठि फँसक लगाणु
म्यर ईजा...
स्वैण टुटि जौल राति ब्याण
ऐण मा दैखुण...
टिक पिठाँ यु आँसु आल
टिक पिठाँ यु आँसु आल
त्यर बिन कसकै कटनु दिन म्यरा
तिमलु पाता पाण धरि पराण म्यार
ओ ईजा....म्यर ईजा

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

"ओ परुँवा बौज्यु भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ"

ओ परुँवा बौज्यु
भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ
लाल ज्लेबी एक चपल मुले ध्यु
ओ परुँवा ईजा
नानतिण ज्युँ तेरो ख्वाट
चूट ले तू भँट्ट
फिर कौलि मैथे रे
ओ परुँवा बौज्यु...
"चपल कै ले छा यस"

ओ परुँवा बौज्यु
सुन-सुनै यु गीत सुनि
उत्तँराखण्ड मा धूम मचि
नान कै ठुला खूब झुमि
अब हैगिण हम दी बुँढा
सुपर हिट गीत कु
यु कुडि यकलु हम
का बै कुनु... ओ परुँवा बौज्यु
"चप्पल कै ले छा यस"
परुँ ले हैगोँ जस
जमान ले ऐगोँ कस
ओ परुँवा बौज्यु
भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ
हिट दगडि परुँवा बौज्यु
लाल ज्लेबी एक चपल मुले ध्यु

ओ परुँवा ईजा
नानतिण ज्युँ तेरो ख्वाट
चूट ले तू भँट्ट
कौथिकै डबलू कू खेल छू
सुपणियो हैरु... घर मा मैरु...
काण पडि गगरि तै.... चूँगि गो
डबलू कू पाणि नै
डबलू कू पाणि नै
साल महैण बिति गिण
हाँट-बाँट टुटि गिण
परुँ कु याद नै
परुँ कु याद नै
बुढ-बाढि जुण-मरि ख्याल नै

ओ परुँवा बौज्यु
हुँक्का थामो कश तो मारो
भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ
घुमि उणा भगवति कौथिक तै
रँग-बँरगि चूडि हला
लाल ज्लेबी पात तै
अणकसै मिजात देखि.... भगवति थान कु
कौथिकै कौतियार ले... झुमि हला
हौसिया मुलार मा
गौ कु चेलि-बेटि
नौ रँगि सिगाँर मा कौथिकै बाँटु तै
पटै गै आँख मेरो
घँघरि कु निल मा
घँघरि कु निल मा
हाथ जुडाणा खूट पडुणा... भगवति माता तै
एक स्वैण दि दै... परुँवा तै
गौ मा तेरो बुढि ईजा
दगडे वैकु
जाँठ टेकु...!
परुँवा बौज्यु
नौ वैकु...!
सुपर हिट गीत कु
सुपर हिट गीत कु
ओ परुँवा बौज्यु
भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ
लाल ज्लेबी एक चपल मुले ध्यु

ओ परुँवा ईजा
नानतिण ज्युँ तेरो ख्वाट
चूट ले तू भँट्ट
जाँठ टेकि कौथिकै उकाल तै
कसकै हिटैण...
बुढ पडि पराण तै
चिर पडि जेब मा
डबलू कू पाणि नै
ओ परुँवा ईजा
भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ
अणकसै रुप तेरो
हिट दगडि परुँवा ईजा
लाल ज्लेबी...
एक चपल मुलै ध्यु
एक चपल मुलै ध्यु
भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ
ओ परुँवा ईजा
भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ

ओ परुँवा बौज्यु
भुरु-भुरु कौथिक ऐगोँ
लाल ज्लेबी एक चपल मुले ध्यु

ओ परुँवा ईजा
नानतिण ज्युँ तेरो ख्वाट
चूट ले तू भँट्ट


लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

[b]सौण कु महैण[/b]

सौण कु महैण
रुम-झुमि बर्रखालि
झुम-झुमाट हैई छा
ऊँचो-निचोँ डाण्डि मा
फुल-पात खिलणी हौला
बोटु डाई मा
गोरु बाछा डोरि हला
पुछड धरि पुठ मा हौला
गोरु कु गौछार ले
बोटु डाई लुकि हला
गौ कु चेलि-ब्वारि घाँ घटवा
ख्वर मा धरि औणि हौला
चाह कु केतिल
चुल मा धरि खोलणि हौला
बुँढ-बाँढि दगड बैठि
र्फुर-र्फुराण फसैक कौला
कन रँगति यु पहाड
कै कु क्वीड चलणि हला
कै कु मन उदास हौला
सौण कु महैण[/size]

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

"ऊँच डाण्डि मा रुणि वालि
कोट भाँम्ररि भगवति मय्या"

मि तेरो द्वार
दुख विपदा मा घैरि घर परिवार
भगवति मय्या मि तेरो द्वार
ना चुनरी ना दीया-बाति
गरीब छू मय्या दुख विपदा
फुल-पात मा तेरो घर दरबार
दुख विपदा मा आयो तेरो द्वार
कर दे मेरो यु बेडा पार
सुख सँम्पन्न घर परिवार

"ऊँच डाण्डि मा रुणि वालि
कोट भाँम्ररि भगवति मय्या"
अपना मेरो मेरो अपना
छोड चलि यु घर परिवार
राग-दोष मा उलझि मय्या
उलझि मेरो घर परिवार
ऊँच डाण्डि मा रुणि वालि
भगवति मय्या मि तेरो द्वार
तेरि महिमा सार लोक मा अपरम पार
लगै दे मय्या दुख विपदा कु पार
सबै कु दैछि माँ-ममता कु आँचल
जो ले उछि तेरो शरण मे मय्या
बिन माँगि भर दैछि यु अन्न भखाँर

तू शिव भक्तणि गौरि रुपणि
तेरो घर परिवार
यु आस लगै शरण मा तेरो
ऊँच डाण्डि मा रुणि वालि
कोट भाँम्ररि भगवति मय्या मेरी
फुल-पात मा सँतुष्टि तेरी
खाल हाथ मि तेरो द्वार
तू जग जननी तू दुख हरणि
अपणु छाया रख दे मय्या
दुख विपदा मा मेरो घर परिवार

"ऊँच डाण्डि मा रुणि वालि
कोट भाँम्ररि भगवति मय्या"
जन समहु अपार यु देखि
डगोलि मा तेरो कौतिक जे लागि
उमड पडि यु जन समहु
दर्शन कु अभिलाषी
दुख विपदा सुख सँम्पन्न
सबै तेरो थान भैटोणि
थान मा देखि तेरो रुप निरालि
सज्जी-धज्जी तू डोट नथुलि
दीया-बाथि तेरो नौ मा जलणि
मन मा यु अभिलाषी लैई
जन समहु अपार यु देखी

सार लोक मा मय्या मेरी
सबसे प्यारि
"ऊँच डाण्डि मा रुणि वालि
कोट भाँम्ररि भगवति मय्या मेरी"


लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड

Raje Singh Karakoti

घर छुटि बण छुटा
माय नि टूटि मायदारा

राति ब्याखुण शिल जै पिसण
हल्द खुसाणि माय जै ईजा
याद जै ऊणि राति ब्याखुण
जबै निकलणि आँखा डाँडु
परदेशी युँ चेला तेरो
माय लिबेरी माय जै हैगो
माय लिबेरी माय जै हैगो

दी डबलु मा कै छुटि ईजा
नि टूटि रे माय ईजा
चकाचौद सी नगरी मा
निशासी गो रे त्यर चेला
कसि बतु रे ओ ईजा
कसि कटणी दिन मेरा
भुखै प्यासु मुख मा थामु
नि थामिण हो ईजा यादु
नि थामिण हो ईजा यादु

ओ रे ईजा तेरो बात
याद जै ऊणि मैगणि आज
फुकै फुकै कि कै हुणि बात
कैकु सुपणियु कु खातिर
माय लिबेरी दिल्ली वाला
दी डबलु कु आँखा डाँडा
परदेशी यु चेला नाना
माय लिबेरी माय जै हैगिण
माय लिबेरी माय जै हैगिण

जबै यु चलणि आधि रात
खातड उडाई तेरी याद
ठण्ड गरम सी माया तेरो
कसि बतु रे ओ ईजा
तन लिबेरो तल गयो
मन छुटो रे घर मेरो
मन छुटो रे घर मेरो

एक पाँखा घर लगै
एक पाँखा तल जडै
फुर उडि रे दी किनार
परदेशी यु घैल पँछि
माय लगै घैल पँछि
माय लगै घैल पँछि

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड