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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऐ काला पैंसा
हमन त नि देखि .....नि देखि
ऐ काला पैंसा हमरा पहाड़ों मां ....
ऐ आँखियों मां नि पौडी ...नि पौडी ...
इत्गा सुपनिया यों आँखियों मां
हमन त नि देखि .....नि देखि। ...
गर पात पात मा पैंसा खिल्दा
हैंसदरा मायादार हम ते कख बठे मिल्दा
तब कख लुकि हुन्दी ऐ बिन्सरी बेल
रात भर जगदा सुबेर कन क्वे उठ दा
हमन त नि देखि .....नि देखि। ...
पलायन कु ऐ नोऊ बी नि हुन्दु
दुःख पीड़ा मां एक बी गौं बी नि हुन्दु
मौज्दा रैंदा सब टक्कों टक्कों थे
एक बी ऊजाड़ा बांज खल्याण नि हुन्दु
हमन त नि देखि .....नि देखि। ...
द्वी नम्बरा कया हुन्दो हम थे कया पता
क्नो क्वे जम्मा करदा हम थे कैल नि सिखै
हरकौणौं-फरकौणौं हम थे आंदो नि
बौग कन कै मरदा तू ऐकि ऐजा सिखा
हमन त नि देखि .....नि देखि। ...
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आस
जबैर मेर स्वास
मेर दगड मेर दगड़ू छोड़ देल
तबैर बी मेर ऐ यात्रा खत्म हुलि ना
चार लाकुडु दगड
मेर ऐ आस कया जळलि
राख हुन्दा वो मेरा फिनका
वै माटु का अंग्वाळा दगडी बी
मेरा ऊ सुपनिया स्याळा ना
भटक दा राला वा
पर वैकु छैल पड़लू ना
अंकगणिता का इच्छा
जंण झट कैरी की खत्म नि हुन्दा
वा जलदा रैंदा ठंडू जून जणी
वा जलदा रैंदा चमकदा गैणा जणी
रात हुलि जब
अंधारु गजबज कणु हुलु तब
ब्यौखोनि बेल हुलि
काला कपड़ा पैनी कि ऊ
वै बगता मां
सूरज उदय हुनू हुलु कखि
वैकि आग बी शांत ना हुलि
शांत ह्वैगे हुली माशाल
फिर जळालि
नाराज वो हाथ
फिर शुरू व्हाला
एक नै यात्रा कु
वै बाटा धैरी की ऊ
गाठलु
परिवर्तना कु क्षतिज
तबैर तक वैकि परेली
चक्रचाल मां बी झप नि कैल
जबैर मेर स्वास ....
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज फिर से अपणी
वा ताल लगै दे भैजी
देवी क धुंयाल आज
खुब बजै दे भैजी
उकाली ऊंदारी कु
बाज बजै दे भैजी
पंचनाम द्यवतों की
ताल लगै दे भैजी
ताल ही ताल मा आज
छुंई लगै दे भैजी
पोखरखाल स्कूल मा आज
पंडो नचै दे भैजी
हरचदी लमडदी हमरी
संस्कृति बचै दे भैजी
ढोल दमौ आज अपणी
खुब घमकै दे भैजी
मंगल ताल आज
जमकै की बजै दे भैजी
घुंड्या रांसु लगै आज
सब्युं तै नचै दे भैजी
कुल क ईष्ट देवी द्यवता
सब्युं क सुमिरण करै दे भैजी
नागरजा नरसिंग आज
यखी नचै दे भैजी
ढौल दमौ की ताल आज
खुब गजै दे भैजी
देवी क धुयांल आज
खुब बजै दे......
दगड्या द्वारा आयोजित ढोल दमाऊ प्रतियोगिता को समर्पित@लेख..सुदेश भट्ट "दगड्या"ब्हाटसप 8576931840

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चकुली हिलांस सी
अर घिंडुडी सी हुयुं मन
गांव की धार ख्वालों मा
रिंगण कुन जयुं मन
बचपन क गैल्या दगड्या
कुई नी छन गांव मा
डल डल्युं मा चकुली क घोल
खुजंण कुन जयुं मन
डीजे मा गीत सुंणी
हुयुं परेशान छौं
बढा बाज सुंण कुन
गौं मा जयुं मेरु मन
पार्क मा छन झूला यख
लोखर की सांगल हां
बड की लगुल्युं मा
झूलंण कुन जयुं मन
खुदेंणु छौं परदेश दीदों
गौं की खुद च जिकुडी मा
जौल मा बैंठंण कुन
घुमंण कुन जयुं मन
चकुली हिलांस सी अर
घिंडुडी सी हुयुं मन
गौं की धार ख्वालों मा
रिंगण कुन जयुं.....
सर्वाधिकार @सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बई दिल्ली महानगरों मा
कन रस्यांण अयीं च
ब्यो बराती मा दीदी भूल्युं की
कन घिमसांण मचयीं च
हेमा मालीन अर श्री देवी कु
कैरीयर कर्युं तमाम च
ब्यो बराती मा दीदी भूल्युं की
नचंण की रस्यांण च
हंत्या घड्यलु मा नचंण भूली गेन
हपार मिस्यां छन डीजे मा
पाड भूली गेन दीदी भूली मेरी
जब बिटी बसी गेन बंबई दिल्ली मा
गडवली बुन बच्यांण भूली गेन
डांस कना छन गडवली गांणो मा
कोदु झंगोरा पकै नी सक्दन
पर मंगांणा छन आन लैनों मा
मुंबई दिल्ली महानगरों मा
कन रस्यांण.......
सर्वाधिकार लेख@सुदेश भट्ट"दगड्या"

Raje Singh Karakoti

"किले छा उदास बाबु
किले हैई उदास ईजा"
त्यर अँन्यारि चेलि छू
किले रिसाई मैहे छा
घर आई मी चेलि छू
हाथ बढै दो..
माया कूँ मी भुखि छू
ना बचपन देखि ना यौवन मेरी
पल खैडि यूँ माया मेरी
कै कसुर छी मी अबोध
तुमरि ममता कि प्यासी
पल खैडि यूँ माया मेरी

आ डौलि मा बैठि छू
पल खैडि मी आँसू छू
नानछण बटिक तुमरो मुख चाछि मी
आ ब्यौल बनि नै मुख चाना म्यर
कदिने तुम रौया घर आई चेलि छू
बाबा य आँखो मा छाया देख
तँड-तँड छुटनि य माया देख
त्यर अबोध सी यूँ चेलि
ईजा त्यर एक आँसू खातिर
सौ आँसू छुटनि मेरी
पल खैडि यूँ माया मेरी
तुम चाछिया घर मा ना चेलि हो
देखो बाबा..
डौलि मा घुँघट, घुँघट मा आँसू
लुक छुप मुखुडि सिसकनि आँसू
बचपन बटिक यूँ यौवन तलक
म्यर डाँड घालि ले नै सुनि क्यूँ..?
मी चेलि छू मुख लोटै राखि क्यूँ..?
"कै कसूर छी मी चेलि छू
आज परायि त्यर चेलि छू"

लेख- सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तँराखण्ड

Raje Singh Karakoti

प्रधानी
IMAGE
ऐगै रे ऐगै
पार धार प्रधानी
पँचो कि स्याणी
साल भैरि एक बजट
सार मजदुरी घर चँडै
जन बँकुरी देव चँडै
गौणू मा यू बौई रे
वोट कू यू डौई रे
देखै रे देखै
विकास कि फौख
सार गौ बिखुडि
अन्चौ कि पन्चौ कि
गौ बाँटा मन्चौ कि
ब्लौक मा छौई गै
सार बजट निगेयि गै

खेगै रे खेगै
पार धार प्रधानी
बाँट बोल चौमास धौई
रुँडि दिन स्वँजल छौइ
त्यारो ही जय जयकार

केगै रे केगै
वोट कू बोट लगै
लम्ब पुछौडि जन प्रधानी
यैक छण आँखा चार
सार गौ खसौडि तार

ऐगै रे ऐगै
पार धार प्रधानी
पँचो कि स्याणी

लेख- सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तँराखण्ड

Raje Singh Karakoti

घस्यार
IMAGE
जब बनती है घस्यार तू
डाँल देख घै कू सैप
कर देती माँटि छैक
सिप छू उजाडि हाथ
तेरो ही निशाणि साथ
चार आँठ्ठ तल-मल
छैकि तेरो हाथ
दगडि घस्यारि त्यार
बिछण हे जानि म्यार
मौसि-मासि भिडँ लाल

स्याँर कि खँरुणि तू
घाँ कि चँरुणि तू
उपँरु कि स्यार कि
सबू कि मँवाशि कि
कर दीछि तू मँलाल

डौई रुछै आर-पार
नजर बचै कि लाख
बैठि रुछि त्यर पछिण भेद
कैक हाथ नै लागणि सेद
जब बनती है घस्यार तू
ख्वँर डाँलू हाथू मा मुबाईल यार

लेख- सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तँराखण्ड

Raje Singh Karakoti

'परदेश जानक ता बाँट बन दे
घर उनक नै खोदी बाँट'
धन्य हो हे सरकारा
'गौरु-बाँछा जै लैगिण बण
गौरु-गाँवा जै रैगिण घर'

तिनक-तिनक बै जोडी पहाड
बुँढ-बाँढियो लै हाँट बाँट्ट ताड
सिढि नूमा यूँ खेत बनाई
फल-फुलू कि डाँई उगाई
"नान-मुन राला... गँढ-भिड खाला"
धार आँगण कि कथा सुनाई
रित-रिवार्ज कि जोत जगाई
अदभुत सी यूँ पहाडु सार
सँजै बै रखि छी यनुल पहाड
जणर लिजि यूँ जतण जताई
घर आँगण कि बेदि आस
"परदेश जानक ता बाँट बन दे
घर उनक नै खोदी बाँट"

झुरि रुणि पहाडु कूँ हिटणी बाँट
कस अजाब जै खुँड-खुँड धार
हौसी आँख नै पौछी आँश
धन्य हो हे सरकारा
"गौरु-बाँछा जै लैगिण बण
गौरु-गाँवा जै रैगिण घर"

लेख- सुन्दर कबडोला

Raje Singh Karakoti

चेलि तू आँखै आँस छै
लाँख कौशिश करल्यु त्वील भैरे उण
तू खुँश हौलि या तू दुख हौलि
"चेलि तू म्यर दाँर म्यर आँखै आँस"
तू ऐछि घर खुँश आँस बनि
तू जछि घर गँम आँस बनि
आँख पुँतै बँद करल्यु चेलि
तू पानी छै परघरक भाँन
तू दान छै म्यर आँखै आँस
तू आलि या तू जालि
म्यर आँख पुतैई धै भेटलि चेलि
म्यर चेलि म्यर आँखै आँस
जब तू हैसि हैसि म्यर मुख चालि चेलि
डब डब म्यर पलको मा तू हैसि हलि
जब त्यर मुखुडि मा दुख म्यर आँखो मा हौलि
त्यर चिन्ता ले उथल पुथल
त्वील भैरे उण म्यर आँखै आँस
खुशि दुख कि छै तू चेलि.. एक आँसू

लेख-सुन्दर कबडोला
गलेई- बागेश्वर- उत्तराँखण्ड