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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ढुंगा मा बैठि....
स्वचणु छौं मैं,
क्या ख्वे अर क्या पाई,
द्वी हजार सोळा बितिगी,
मन अपणु समझाई......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 2/1/2017

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कुसगोर्यान कूट्यन साटी,
लगै दिनि छाट्टी बाट्टी,
तब कखन खाण थौ भात,
भूकन कटि सैडि रात....
-कवि जिज्ञासू उवाच, 30.12.16
तस्वीर श्री कुम्मी घिल्डियाळ, नई टिरी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चिल्म पेन्दु नि चिताई.....
लाल चन्द जी का दगड़ा बैठि,
ऊंचि धार मा दिन बिताई,
कब कटिगी सैडु दिन,
चिल्म पेन्दु नि चिताई.....
-मन का ऊमाळ कवि जिज्ञासू का, 30.12.16

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मैं यनु किलै छौं लगणु, सुरु रावत भुलान खैंचि मेरी या फोटु।
फुन्ड फूका....
जन करलु वन भरलु,अब त फुन्ड फूका,
ये जमाना का दिन देखिक, ज्यु कन्नु छ लुका.....
-कवि "जिज्ञासू" ऊवाच
29.12.2016

Raje Singh Karakoti


Raje Singh Karakoti

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Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720 on January 02, 2017, 12:20:23 PM
मैं यनु किलै छौं लगणु, सुरु रावत भुलान खैंचि मेरी या फोटु।
फुन्ड फूका....
जन करलु वन भरलु,अब त फुन्ड फूका,
ये जमाना का दिन देखिक, ज्यु कन्नु छ लुका.....
-कवि "जिज्ञासू" ऊवाच
29.12.2016

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जब बिटी की मोबाईल
बजारू मा क्या आई
तब बिटी की सब
नाता रिस्तेदारू यक
आणू जाणू सब छुटि ग्याई
जब बिटी की मोबाईल
बजारु मा क्या आई
पैली चिठी पत्रियू कू
सार लगयू राद छा
चिठी पत्रियू मा
प्यार और उलार दिख्याद छा
अब त मोबाईल पर
इक घडी मा बात हुव्ये जाद
पल भर मा देश विदेश
की खबर सार मिल जाद
जै टैम पर मैबाईल नी छाई
नौनू द्वि चार मैणा मा
घार ऐ जादू छाई
जब बिटी की मोबाईल
बजारू मा क्या आई
पैली हतयू मा घडी
पैरी राद छाई
बगत दिखण हुआ त
बाबा जी समलोण दी
घडीमा बगत देखी लियाद छाई
अब त मोबाईलू मा
ही बगत दिख्याणा छन
बाबा जी समलोण दि घडी
आलमारी मा बन्द करी
झणी के कुणिया धरिया छन
जब बिटी की मोबाईल
बजारु मा क्या आई
पैली घरू मा सभियू क दगडी
बैठी की ठट्टा मजाक
करद छाई
अब त वू भी खत्म
हुणू लगयू चा
सभी अपडा मोबाईल
हत्यू मा लेकी
व्टस्प और फेशबूक मा
व्यस्त हुया छन
सोशल साईड की बनोटी दुनिया
कुछ पहचाण कुछ आजाण
हजारो दगड्डया बणया छन
अर वास्तव मा सभी का सभी
इखुली छन खाली छन फिर
झणी क व्यस्त हुया छन
जब बिटी की मोबाईल
बजारु मा क्या आई
नाता रिस्तेदारू यख
आण जाण छुटिग्याई
जब बिटी की मोबाईल
बजारू मा क्या आई ।
सर्वाधिकार सुरक्षित@ दीपक नेगी गढप्रेमी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चम्मचों की मौज अयीं च
ये चुनौ क मौसम मा
नेतों की सांकी सुकीं च
ये चुनौ क मौसम मा
जौंते टिगट मिली ग्या पैली
उंतै जरसी आराम मिल्युं च
जु लग्यां छन अज्यूं भी सार
उंकुन स्वील पीडा सी हुंयी च
कैकी जौंल्या टिगटों की राड घलीं त
कैते यखुली बी नी मिनु च
आला कमान बंण्यु डाक्टर
अपरेशन कुन तैय्यार बैठ्यूं च
यीं स्वीली पीडा तै लेकी
कती पैली भर्ती हुयां छन
क्वी दिल्ली दरबार मा क्वी
ड्यारदूंण ही पौड्यां छन
ब्यखन सबेर कबरी बी ह्वै सकद
डिलीवरी टिगट बतांणा छन
समर्थक भी द्यु धुपंण लेकी
पुजंण कुन खड हुयां छन
आला कमान बिनार हुयुं
प्रत्यासी बिमार हुयां छन
ब्यखन सबेर बोली बोली की
प्रत्यास्युं तै टर्कांणा छन
चम्मचों की मौज अयीं च
ये चुनौ क मौसम....
चुनौवी बथौं मा ल्या फिर ध्वलुं छौं@लेख सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कुर्सी कुर्सी हाय रे कुर्सी
टक सब्युं की त्वै पर कुर्सी
रेडियो टीबी मा खुब छयीं छे
अखबारु मा आज भी कुर्सी
त्यार बान कती बौल्या बंण्या छन
कत्युं कुन रगर्याट हुयुं च
बड बड नेता त्वाक लग्यां छन
कुर्सी कुर्सी हाय रे कुर्सी
गाड गदन्यों क गिगड गड्याल भी
सार लग्यां छन त्यार हे कुर्सी
चुनौ बंणी की ये तु हे कुर्सी
टक सब्युं की ड्यारदूंण कुर्सी
कखी घोषणा कखी सुपन्या
तु दिखांदी रोज हे कुर्सी
अपंण भी बैरी बंण्या छन
त्यार बान हे नरबै कुर्सी
कुर्सी कुर्सी हाय रे कुर्सी
टक सब्युं की त्वै पर.....
चुनौ की बथौं मा आज फिर ध्वलुं छौं अपंणी या नयी रचना @सुदेश भट्ट"दगड्या"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पर्वतो की शान छे मन अभिमान छे सारा मुलुक ताज छे तू
हिमालय जुगराज रे तू
पंडित ज्ञानी कु ज्ञान ऋषि मुनि कु ध्यान
त्वेमा ही राच्या बसयां हमारा भी वेद पुराण
हे हिमालय -२
श्री बद्री केदार धाम दुनिया करदी जो प्रणाम
चरणों माँ त्येरा बसयां देवी देवता तो तमाम .. हे हिमालय -२
देवतो को बॉस छे तू -२ हिमालय जुगराज रे तू
अन्न धन कु छे भंडार सुख माँ दुःख माँ ट्वी अद्धार
ट्वी हमरो सो स्रिंगार तू हमरो पैराडार.. हे हिमालय
कृपा त्येरी यानि अपर हमारा गौ उ और ग्वाठयर
गंगा जमुना जी की धार बगडन छोयां पंड्यार.. हे हिमालय
कथगा खुशमिजाज छे तू .. हिमालय जग राजा
फूल का बाग़ और बागवान जड़ी बुटियुकि छे तू खान
गौर शिवजी कु धाम देवभोमी कु छी मान हे हिमालय
जनाद सब क्या कण बखान त्येरी सय आन बाण शान
समदि उचु आसमान बाकि सबी का सर झुक्यान हे हिमालय
आश छे विश्वाश छे तू ... यमालय जुगराज
न्यू पुरानू समाज देखि बदलद रिवाज देखि
ज़ुग बातिन देखनी छे तू हमुन त्वेक आज द्येखी .. हे
थोकदारों कु मि नाज़ देखि जिमदारो कु नाज देखि
तीनटा बाँदा मीठड़ा कई राजो कु राज देखि
जयुडु इतिहास छे तू .... हिमालय जुगराज रे तू ..