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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darshan Singh
31 mins

मुर्गा कनै गै? (तिसरु भाग)

लतगि प्वडण छैं कुकरेती जी की सैर्या गौं मा सुणेगे।
अस्वाल बाडा ल राजीनामाकू काका मनै दे।।

तिसरु द्वफरी राजीनामा कू द्वी पौंछिगैं थाणा।
वख पौंछिकि पता लग चोर त पौंछिगैं जेल माणा।।

अस्वाल बाडा ल सिरडे ब्वाल चल भै अब घौर जाण।
कख रैगे थाणा कख रैगे माणा कनै कनै जी जाण।।

मैणा द्वीए म जमानत कू द्वी फीरि माणा गैं।
जेल कि सड्यणिल भैर बिटैक वूंथै द्यखणा रैं।।

तीन चोर त अधम्वरा छाई छ्वटु जंदरी घुमाणू छाई।
धुमाकोट कु लुहारुकु नौनू वूंथै खाणु खवाणू छाई।।

अस्वाल बाडा थैं देखीक वूंल खुटौं म मुंड टेकि दे।
घ्यपळी काका खुणि माफ कैदे ब्वाल बीडी पिलै दे।

घ्यपळी काका मयल्दु बिचरू बीडी माचिस दे दे।
बीडी जलैक माचिस द्याख त वूंकू ऐडाट ह्वैगे।।

ऐडाट वूंकु सूंणिकी बाडा अस्वाल भी अजके गे।
जेलर चटग लगैक चुप रैणाकू धमका गे।।

अस्वाल बाडा ल मिठु कै पूछ निरभग्यो क्य ह्वै।
माचिस की डब्बी द्यखा वूंल मुर्गा की फोटो छै।।

मुर्गा च्वरों कु इनु बण मुर्गा कि वांग से भि डरणा छैं।
मुर्गा कु फोटो देखिक वूंकी हडगी कंपणा छैं।।

किस्मत फ्वाड मुर्गा ल वूंकी अब त टक टूटी गे।
आज तलक वूं चरि चोरों कू घर बौडू नि ह्वे।।

जगा,नाम, घटना सब काल्पनिक छैं। कैसे कैकु क्वी संबंध नीछ।

सर्वाधिकार सुरक्षित @दर्शनसिंह रावत "पडखंडाई "
दिनांक :-07/09/3015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Darshan Singh
August 25 at 11:56am ·

रखडी (राखी) कु त्योहार नजदीक च। जौं कि भैणि या भाई नि ह्वाला, वूं थैं कनु लगदु होलु। --------------------------------------------------

कनू छै विधाता तू त निरदयी रैई।
रखडी त्यौहार द्याई भैणी नि देई।।
कनु छै विधाता तू त निरदयी रैई।
रखडी त्यौहार द्याई भाई नि द्याई।।

एक भैणी मीकू दिंदु क्या बिगड़ी जांदू।
ए त्यौहार मि भि त्वैकु भेट पिठै ल्यांदु।।
एक भाई मीकू दिंदु क्या बिगड़ी जांदू।
ए त्यौहार मि भि त्वैकु भेट पिठै ल्यांदु।।

जौं भयों कि भैणि ह्वैलि रखडी पैराला।
बिना भैणि वळा छ्वारा प्यटा प्यटि र्वाला।।
जौं भैण्यू का भाई ह्वाला रखडी पैराली।
बिना भायों वळी छे्वरी प्यटा प्यटी र्वेली।।

त्योहार का बान सुदी दंतुडी द्यखाला।
आंख्यू का कूणू मा छ्वारा आंसू लुकाला।।
त्योहार का बान सुदी दंतुडी द्यखाली।
आंख्यू का कूणू मा छ्वेरी आंसू लुकाली।।

दगड्या भग्यान म्यारा रखडी पैराला।
अपणी भैण्यू का हथौं खटी मीठि खाला।।
दगड्या भग्यान मेरी रखडी पैराली।
अपणा भयों थै टीका पिठैई लगाली।।

त्योहार कू भैणी नि दे त्यारु च कसूर।
खुशि कनकै मनौलु नि दे घार पूरू।।
त्योहार कू भाई नि दे त्यारु च कसूर।
खुशि कनकै मनौलु नि दे घार पूरू।।

निठुर समिझि मिल, क्याच तेरी माया।
धर्म्यालि भैणि, त्वैन मीकू दे ही द्याया।।
निठुर समिझि मिल, क्याच तेरी माया।
धर्म्यालु भाई, त्वैन मीकू दे ही द्याया।।

ऐंसु की रखडी,देवी तु ह्वै जैई दैणी।
भैण्यू थै तु भाई देई,भायों थैई भैणी।।
ऐंसु की रखडी, देवी................

सर्वाधिकार
सुरक्षित @दर्शनसिंह रावत "पडखंडाई
दिनांक 25/08/2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Dinesh Dhyani
June 3 

हमरा मुख्यमंत्री
जी न बोली
आपदा का दौरान
अगर वूंका
अफसरों न मैंगू
भोजन करी
दस रुपय्या चीज
सौ रुपयों म खै
ता क्या ह्वे ?
जनता तैं इत्गा
मर्च किले लगे ?
वो ता अफसरों को
मीनू म छौ
तौन खाणु ही छौ।
ठीक बोली आपन
रावत जी आप
सरकार छा
आपकू प्रताप
सब कुछ होणु च।
पर एक बात बतावा
उत्तराखंड म अमणि
जनता का पैसों की
जो बरबादी हुणि च,
रेता माफिया, बजरी माफिया
क्रेशर माफिया, जल, जंगल माफ़िया
हौरि त हौरि
मीडिया माफिया बी जो
अमणि यत्गा बलवान
हुयूं चा वों तैं
कख बिटि साहस मिलणु चा?
अमणि उत्तराखंड म
यानि छूट किले ह्वै ?
यु .............. !!
कै मीनू म छौ ?। साहित्यकार, दिनेश ध्यानी। ३/६ /१५

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुनील थपल्याल घंजीर
September 4 at 6:25pm

किनमजाद ..क्यनमजाद !

दादा अयूं त् छौ घौर... बूंण
तूभि दगिड़ी खिसग जांदू
किनमजाद ..

ह्वेत् गे दस पास ... छुचा
लैंसीडौन दौड़ी आंदु
किनमजाद ..

दाल भात सदनि त् खांण
माछा ब्वगंणा छीं ताल नयरी ..जरसि पौडर छिड़िकी आंदु
किनमजाद ...

बेकारी शान बागम छै फुकेणु
आटु चौंल खु़णि छै तकणेंणु
रेखा गरीबि की खैंचांदु ...
किनमजाद...

भै भौजा कैका ह्वैन ... ?
कखि कै साबा हत-खुटा दबांदु
किनमजाद...

टक्क ये लौला पहाड़ , क्यांकु तेरी "
खै त् याल अपंण बांठौ लूंण पांणी ...
छोड़ हवा स्यांणी गांणी ,अईं च् गाडी
किनमजाद...।।
.
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुनील थपल्याल घंजीर
September 6 at 12:55pm ·

... शिक्षा नीति ...

बस्ता ओवरलोड तवा गरम चस ,
पढै ल्यखै बैठ सलेबस की बस ,
कितबी कौफीयूं कु बेढब संसार ,
छ्वाड़ बटी छवाड़ तक सब्या लंपसार !

सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुनील थपल्याल घंजीर
September 4 at 6:15pm ·

किनमजाद ..क्यनमजाद !

दादा अयूं त् छौ घौर... बूंण
तूभि दगिड़ी खिसग जांदू
किनमजाद ..

ह्वेत् गे दस पास ... छुचा
लैंसीडौन दौड़ी आंदु
किनमजाद ..

दाल भात सदनि त् खांण
माछा ब्वगंणा छीं ताल नयरी ..जरसि पौडर छिड़िकी आंदु
किनमजाद ...

बेकारी शान बागम छै फुकेणु
आटु चौंल खु़णि छै तकणेंणु
रेखा गरीबि की खैंचांदु ...
किनमजाद...

भै भौजा कैका ह्वैन ... ?
कखि कै साबा हत-खुटा दबांदु
किनमजाद...

टक्क ये लौला पहाड़ , क्यांकु तेरी "
खै त् याल अपंण बांठौ लूंण पांणी ...
छोड़ हवा स्यांणी गांणी ,अईं च् गाडी
किनमजाद...।।
.
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
September 6 at 9:46pm ·

उलटू जवाब
हे दीदी खूब छे खूब छन तेरा बाल बच्चा
हे लोली तू क्या चाणि छे मर जौ हम सब्बि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
September 4 at 8:48am · Edited ·

मेरी औठंडियो न्युतायलि त्वैकु
बँसुली बणि ऐजा छोरी धोरा
मेरा जिकुडा लुकी माया की धुन
बनबनी अनेक तू ऐजा बस छोरी
गुंजलि बंसुली माया की फिर
चौ दिसू डांडी कांठी तू ऐजा बस छोरी
बँसुली बणि मेरी औठंडियो धोरा
पिरेम भौ बन्यु रौ सदा इन्न
मेरु तेरा परति
समझ कतामती
मी लोला मायादार की तू ऐजा बस .................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Shailendra Joshi
September 3 at 12:03am · Edited ·

यु तो नरेंद्र सिंह नेगी गीत के हर विषय महारथ रखते है पर जो मास्टरी उनको मायादारी गीत लिखने मे वो महारथ अन्या किसी लोकभाषा के कवि या गीतकार नजर नहीं आती साहित्यकार वीरेन्द्र पंवार के शब्दो मे कहू तो नरेन्द्र सिंह नेगी मायादार गीतों के डॉक्टर है

अभि मेरी नाकुड़ी मा नी बसी नी बास तेरी
अभि मेरी जिकुड़ी मा नी बुझी नी बुझी तीस तेरी
अभि मेरी कंदुडयुमा नी रली नी गली तेरी मिसरी जनि बाच
जाणु छौ मन जोड़ीकी छोड़ीकी त्वैमा सुआ
फेर औलु यनि दौड़की बौडीकी त्वैमा सुआ
अभि मेरी आख्यु मा नी छपी नी छपी
तेरी तै मुखड़ी की छाप
अभि तेरा रंगमा कख रंगी कख रंगी
मेरु सैरु मन सैरु गात
कनुकै कटेलु दिन कनुकै कटेलि रात
सुआ हो सुआ हो
अभि धै नी लगनी रुमुक नि पोड़ी
अभी ज्यू नी भरेइ अभी नजा मी छोड़ी
नजा नजा मान बात ...........................................नरेन्द्र सिंह नेगी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
August 31 at 9:48pm ·

एक पट्टदार शैली पर एक नया प्रयोग इस प्रेम गीत मे आपको उतराखंड सभी लोक नृत्य का जिक्र किया है और सभी लोक नृत्य नायिका के मन मे नाच रहे है

मेरु घर गुदड़या लाटू सच्चु मेरु सौंजडया
त्वै देखी मेरा दिल मा नचण लगगी थडया
खिलगी खिलगी दिल मा फुला
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी चौफला
बैखो कु भीड़ तमासु मेला मा तू यखुला
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी झुमैला
गौकी हैरी भरी नाज सारी
त्वै देखी मेरा मन मा नचण गाण लगगी चांचरी
चमकदू सुना चाँदी
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी तांदी
छोरा तेरी हैसी मुलमुल
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी हारुल
चाँद तारा आगासो
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी रासो
फुल खिली कांडो
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी पण्डो
तू मेरु हीरा मोती
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी छोपती
बारात लेकी ऐजा घोड़ा
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी झोड़ा
जगदु आखंड जोत दिया
त्वै देखी मेरा मन मा नचण लगगी छोलिया...................शैलेन्द्र जोशी