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Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 "हमारी भैंसी"

जैंकी आत्मा,
आज भी भटकदि छ,
हमारा खंडवार होयां,
कूड़ा का ओर पोर,
कुजाणि क्यौकु,
यनु लग्दु,
वीं सनै आज भी,
लगाव छ जन्मभूमि सी...
वीं बिचारि का प्रताप,
हम्न दूध पिनि घ्यू खाई,
घ्यू की माणी बेचिक,
बुबाजिन हम पढाई,
जब वा बुढया ह्वै,
बुबाजिन बेची दिनि,
वांका बाद वींकू,
क्या हाल ह्वै?
पता तब लगि,
तुमारी भैंसी की आत्मा,
बल भटकदि छ,
तुमारा कूड़ा का ओर पोर,
गौं वाळौंन बताई....
हम दूर छौं आज,
"हमारी भैंसी" की कृपा ह्वै,
पढ़ी लिखिक हमारू,
यथगा विकास ह्वै,
हम घौर जुग्ता नि रयौं,
खाण कमौण का खातिर,
सदानि का खातिर,
पलायन करिक,
पाड़ सी दूर अयौं......
कवि: जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
सर्वाधिकार सुरक्षित १४.११.२०१२

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फिर बी फैशन हो ऐसा जी

खानु कू नि पैंसा
फिर बी जमानु चैणु ऐसा जी
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

छोरी जनि लट्लु
ब्याल च की बैठूल नि समझने हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बोबा व्हैगे बोई जी
बोई व्हैगे अब बोबा हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

कन बदली हुणि च
वो कख जाने की सोचणी हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी
देश हो या हो अब भैरदेशा जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

लुन रोटी अब मिल नि खाणु जी
बर्गर पिज्जा जब म्यारा स्वामी लाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

रामी नि बनने ना मीथै बहूरानी जी
पैल टिकिट कटै जब स्वामी मुंबई दिखाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

ये उकाला का बाटा अब व्हैजा टाटा
दोई मैन की छुट्टी मा स्वामी स्विजरलैंड घुमाणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

हीटे हीटे ये पहाड़ किले अब कमरी पटणु जी
हवाई जहाज मा जब म्यारा स्वामी मि थे उढणु जी
जखि म्यारा स्वामी वखि मि जी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऐ बी जावा ऐ बी जावा

ऐ बी जावा ऐ बी जावा
म्यारा गढ़ देशा मा जी ऐ बी जावा

बाटों बाटों मा हिटा कांडों कंडो मा
नाचा नाचा दीधो ढ़ोल दामू मा
नचेड़ी डंडी कंठी ऐजा मेरो साथी
ऐ बी जावा ऐ बी जावा
म्यारा गढ़ देशा मा जी ऐ बी जावा

रंग रंगा की फूल खिल्या छन
मस्त व्हैकि लस्का धसका लग्या छन
जोड़ा तोड़ कैरि सब खूब नच्या छन
ऐ बी जावा ऐ बी जावा
म्यारा गढ़ देशा मा जी ऐ बी जावा

ये उकाल दगङया दगडी सरोंला
रुकी सुकी खैकी अपरी हिमत बढोंला
हैरी भैरी सैरी धरती थे चल सरग बणोंला
ऐ बी जावा ऐ बी जावा
म्यारा गढ़ देशा मा जी ऐ बी जावा

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
Yesterday at 7:57pm

सिद्द-साद्द मैंस म्यार पहाड़ाक शुद्ध उनौर चित ।
सब मनखियोंक आदर करनी दुश्मण हवो या मित॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Harish Joshi
October 25 at 4:28am

*****यो बुड़याकाल*******
बिन चश्मा देखिन नै,
बिन एयरफोन सुणीन नै ,
बिन जाठी हिटिन नै ,
बैठी ग्यो फिरी उठीन नै ,
भूख आब लागनी नै ,
कै खानों अब पचनो नै ,
डबल न्हेगो दवाईन में ,
नानतिन अब अपना मन का हो गई ,
ब्वारी अपना फैसन में रै गई ,
कान में मोबाईल चिपकियो रै गई ,
ठुल सयाना कोई नै रै गई ,
चेली बेवाई ससुरालिक न्हेगे ,
च्याला कमुन हूपरदेस न्हेगे ,
उन्नके देखणी कोई नै रै गई ,
ससुर ज्यो आब डेडी है गई ,
सासु आब मम्मी हैगे '
ज्येठ ज्यू अब दाज्यू है गई ,
पति दगडा अब की रिस्ता रे ग्यो ,
घरवाली थे लेके की कुनू,
पेली चंद्रमुखी छी ,
आब ज्वालामुखी है गई |

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
October 25 at 8:43pm

जानौर खातिर सार दुनी छोड़ि बेर आयुं
ऊं तो लाट निकावाल य कां मील सोचौ
ऊं कई सालों बटी मिनरल वाटर पिणइं
उनर दिल लै मैल हौल य कां मील सोचौ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Gyan Pant
October 26 at 3:58pm · Edited

.... जिम कार्बेट पार्काक शेर

आब् तु जिंदगी 'की बात करी कर
ऊँण जाँण् त सब लाग्यै रुनेर भै ।

बोट भये त फल ले लगाल् जरुर
तुम नि खै सका ,यो भाग्यै बात छ ।

कसिक् कै दियूँ कि वां के~ न्हाँ कै
पाँणि त आजि ले मली बटी उनेर भै ।

खालि जि लागैं यो बाटुयि जऊँण ले बाटुयि -- हिचकी
साँचि छ कि पहाड़ ले मैं कैं याद करौं ।

तुम भुलि ले जाला त के बात न भै
मैं पहाड़ छूँ , बोट सुखण् नि दियूँ ।

यो तुमैरि देयि छ आब् तुमैं जांणौ हो
पोर्यून - पौर्यूनै मेरि ले की उमर है गे । पोर्यून - पौर्यूनै -- रखवाली करते करते

योयी सोचि बेरि आजि ले हरी है रयूँ
तुम न सही क्वे न क्वे त आलै सही ।

माया को जंजाल समझ ल्हियौ तुम ले
नाराज है ग्यो त पहाड़ ढुँङ ले घुर्याल । ढुँङ घुर्याल -- पत्थर लुढ़काना
ज्ञान पंत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जिम कार्बेट पार्क में ...

झुठ नि बोलां
म्यार् भतेर ले
राबण बैठि रौ
दिन - रात
खै - पी बेरी
बिरखम् है रौ
जसिकै - तसिकै
थिरै राखौ
मौक मिलण् चैं
झिट घड़ि में
तैयार है जां
मनखिनां बीच
मिसिर है जां ...
एक राम ले छ
खान् - पिनै
सगी जै रौ
जसिकै - तसिकै
समायि राख्छी
आब् समांवण् ले
मुश्किल है रौ
किलैकि
हर साल नई
रावण तैयार
हुँण् लागि रौ
फिर ले ....
मैं ज्यूँन छूँ
विश्वास नि है रौ । ज्ञान पंत

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
October 19 at 7:40pm

बहादुर छा तो यदुग याद जरूर धरिया, उठै जगै बेर दुश्मन पर वॉर करिया
चिड़कैल घाम में हिटण हौल मुस्किल, स्योव दगाड़ ना यदुग प्यार करिया