• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 05, 2011, 12:00:34 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज त्वै सरा देश
याद करना बौडा
त्वै बिना देश सरा
खुदयांणा च बौडा
गली मोहलों मा आज तेरी
जयजयकार बौडा
अंग्रेजु तै देश बिटी
तीनी निकाली बौडा
देशभक्ति कु पाठ देश तै
त्वैन सिखाई बौडा
रातों रात अंग्रेजु तै
त्वैन दौडाई बौडा
आज ह्वैंदी हमर बीच
बीर भग्यान बौडा
जुनी पर पौंछी जांद
देश अपुण बौडा
कन कन पैदा ह्वेन
म्यार देश मा बौडा
त्वै जन लौह पुरुष
कुई नी जन्मी यख बौडा
आज ह्वैंदा हमर बीच
तुम जन बीर बौडा
क्या मजाल दुश्मनु की जु
आंख घुरांदन बौडा
तेरी एक कडकताल से
अंग्रेज भी डरी गैन बौडा
झ्वाला तुमडी लेकी अपणी
रतों रात चलीगेन बौडा
लिखंण कुन त दगडया मा
बहुत कुछ त्वै पर च बौडा
जतका लेखु उतका कम
आखर नीछन मीमा बौडा

सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया) की लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल जी के जन्मोत्सव पर सप्रेम भेंट

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हैंसदी रै ख्यल्दी रै
टिकुली बिंदुली चमकदी रै
मुंड मा सिंदुर तेरो
फूलु सी डाली हैंसदी रै
द्वी हथी चुडयुं न भरै
हतेली मा मेहंदी रचदी रैन
नाक मा फुल की चमक
खुट्य माुं पैजीब बजदी रैन
हैंसदी रै ख्यल्दी रै
टिकुली बिंदुली चमकदी रै
देवी दयबतों की दीदी भुली
आशीर्वाद तुमतै मिलणा रैन
घर ह्वा या परदेश स्वामी
सुखी श्यांदी रखणा रैन
तेरी दुनिया की डाली मा दीदी
खुशियों क फूल लगदी रैन
तेरी जुनी सी ऊज्याली मुखडी
मुल मुल हैंसदी रैन
हैंसदी रै ख्यल्दी रै
तेरी टिकुली बिंदुली....
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया) की करवाचौथ पर दीदी भूल्युं कुन सादर सप्रेम भेंट

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हैंसदी रै ख्यल्दी रै
टिकुली बिंदुली चमकदी रै
मुंड मा सिंदुर तेरो
फूलु सी डाली हैंसदी रै
द्वी हथी चुडयुं न भरै
हतेली मा मेहंदी रचदी रैन
नाक मा फुल की चमक
खुट्य माुं पैजीब बजदी रैन
हैंसदी रै ख्यल्दी रै
टिकुली बिंदुली चमकदी रै
देवी दयबतों की दीदी भुली
आशीर्वाद तुमतै मिलणा रैन
घर ह्वा या परदेश स्वामी
सुखी श्यांदी रखणा रैन
तेरी दुनिया की डाली मा दीदी
खुशियों क फूल लगदी रैन
तेरी जुनी सी ऊज्याली मुखडी
मुल मुल हैंसदी रैन
हैंसदी रै ख्यल्दी रै
तेरी टिकुली बिंदुली....
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया) की करवाचौथ पर दीदी भूल्युं कुन सादर सप्रेम भेंट

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी 

मि त लिख द्यूलु लाख कविता

मि त लिख द्यूलु लाख कविता
वैल नि पैढ़ स्की त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

पड़ी राई सदनी कुल्हणा भितर
भैरी नि ऐस्की त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

लाख विपदा लाख पीड़ा सैई विल
आंसूं आखों मा राई त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

ढुंगा गारा ही रे गैल्या अब मेरो
तिल ऐ समझी नि त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

झम्प मारी की ये मेर कविता ग्याई
क्वी अपरो ना मिल त मिल कया कण
मि त लिख द्यूलु लाख कविता

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फिर बी फैशन हो ऐसा जी

खानु कू नि पैंसा
फिर बी जमानु चैणु ऐसा जी
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

छोरी जनि लट्लु
ब्याल च की बैठूल नि समझने हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बोबा व्हैगे बोई जी
बोई व्हैगे अब बोबा हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

कन बदली हुणि च
वो कख जाने की सोचणी हो
फिर बी फैशन हो ऐसा जी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिल्ली मां बैठयां छन
उत्तराखंड बच्यांण मा
जगजगा रैली भाषंण
हुणी रैंदन दिल्ली मा
जौंन नी खैनी लाठी गोली
उत्तराखंड आंदोलन मा
वी नेता बणी गेन दीदों
आज उत्तराखंड मा
बोली भाषा कुछ नी जंणदीन
भुना छन पहाड बचोला हम
दिल्ली मा पड पडी की
राजधानी गैरसैंण लीजोला हम
बिरली की सी टक लगीं
१७ की दही की डखुली मा
तैडु सी या खता खंणैणी
बैठ बैठी की दिल्ली मा
जौं भयुं न लाठी गोली
खैन उत्तराखंड आंदोलन मा
वी बिरण हुयां छन
अपुंण उत्तराखंड मा
दिल्ली मा बैठयां छन
उत्तराखंड बच्यांण मा
जगजगा रैली भाषंण
हुणी रैंदन.......
गडवली कुमयीं भाषा जौंसारी
भाषा बचांण कुन भुना छन
पहाडियों की कछेडी लगेकी
देशी मा बिंगांणा छन
दिल्ली मा बैठ्यां छन
उत्तराखंड बचांण मा
जगजगा रैली भाषंण
हुणी रैंदन .........
सर्वाधिकार सहित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सौब चलगेन छोडी माटी
दुर देस बिदेशु मा
बौडी सक्दा बौडी जावा
गौं की छानी पटाल्युं मा
ज्यूंदी मुयली सी कुडी ह्वैगे
डाल जम्यां छन कुडी मा
धार मंदर पाणी सुखी गेन
मल्सु फूल्यूं च पुंगडी मा
मुखडी दिखे जा दीदों कभी तुम
साल अर द्वी सालु मा
जुनी सी तैं मुखडी दिखै जा
अपण गौं की धार मा
सोब चलगेन छोडी माटी
दुर देस बिदेशु मा
बौडी सक्दा बौडी जावा
गौं की छानी.....
तुम त बणी ग्या देशी बाबु
ऊंची मंजिल फ्लैटु मा
बिसरी गे तु गौं की माटी
जैकी दुर परदेशु मां
भुली गे तु छींच्वाडु झरना
नयेंणु छै फुहारों मा
जलडयूं कु ठंडो पाणी
खुज्याणु छै फिरीजों मा
धै" लगांणु भयुं मी तुमतै
बौडी जावा गांव मा
उकरी सक्दा उकरी ल्यावा
खत्यां दिन बालपन मां
सोब चलगेन छोडी माटी
दुर देश बिदेशु मा
बौडी सक्दा बौडी जावा
गौं की छानी.....
सर्वाधिकार सुरक्षित@लेखक सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नयु लिख्वार छो। मेरी या रचना मातृशक्ति कुन समर्पित च।
शीर्षक- हे माँ

धुआयी,तपायी तीन मितै
पाली-पोषीक बडू कायी।
धन्य छे हे माँ तू
ममता तेरी कण रायी।।

बणूँ मा घासकु जान्दी तू त
टक तेरी घर ई रायी।
म्यार तै भूख लगी होली
दौड़ी ए की दूध पिलायी।।

मेरु बाल ,मेरु कालू
बोलिक प्यार दीन्दी छे।
जरा सा रवै जांदू छया त
पीठ थपकेकी सुलादी छे।।

हँसे, खिले मै सिवाली
फ़िर धाणी कु चली जान्दी।
ह्वै जान्दु अगर मुन्डारु मै
चिन्ता त्वे लगी रान्दी।।

ममता क सागर हे माँ तू
तेरु कज्र कनकै दियोल।
त्वै कुन सौ बार नमन
तेरु सदनी मि ऋणी रोलु।।
।। ।।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आहा आज जिकुडी मा मेरी
फिर उमाल यैगे
गौं गलों की याद
त्योहार बग्वाल यैगे
बार त्योहारु मा दीदी भूली
मैत पैटीं होली
नौकरया भयुं की
अर्जी छुट्टी की जयीं होली
मीतै बी बौडी बौडी
याद गौं की यैगे
खुशीयों कु त्योहार दीदों
हपार बग्वाल यैगे
फुलझडी दिवाछलों की
मीतै याद यैगे
पुजा पिठै की बाडी
गोरु तै खलांण की याद यैगे
आहा आज जिकुडी मा मेरी
फिर उमाल यैगे
मेरी बुडडी बुये दीदों
सार लगीं होली
औलु बग्वाल्युं की छुट्टी
घीयु की गुंदकी धरीं होली
दुर परदेस्युं की घरम
हुंणी होली जग्वाल
दगडया बुल्दु भयुं तुमकुन
मुबारक ह्वा हैप्पी बग्वाल
आहा आज जिकुडी मा मेरी
फिर उमाल यैगे
गौं गलों की याद
त्योहार बग्वाल यैगे
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बल
हियुं मा हग्युं से ह्वे जांद
(बर्फ में हगा हुआ दिख जाता है)
हिमायती बंधूओ भी ध्यान से पड़ना
जमीर जगे तो लाईक कर जाना
नहीं तो सत्ता के भूकों संग यूँ ही जलते रहोगे
भारत में तो रहोगे लेकिन भारतीय नहीं रह पावोगे।
@ बलबीर राणा 'अडिग'
फोटो पंक्तिया : गौरव चौहान
फोटो - साभार सोशियल मिडिया
रचनाकार गौरव चौहान जी की कलम को नमन