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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
June 23 · Edited
तोरे दर्शन को रघुराई
मै सोलह सिंगार कर आयी
रूप रंग सब रंग लायी
मै लायी हाथ वर माला
प्रिय तोसे बंधन के लिये
जनम जनम के लिये
मै प्रीत का सागर लायी
माला फुल मे प्रेम चुन चुन के लायी
स्वीकार करे मोरे प्रिय मेरी वर माला
नयन बिछाये बैठी तोरे रूप दर्शन को मै बाला
रचना ... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
June 23
पंचैती चुनौ जीती की
तुम तै नेता बनाला
तुम ठेकेदार बणला
ठेका ल्यू चा क्या हमुन
तुम तै परधान बानाला
पुस्ता बिट्टा नाली बाटा कू
तुम कमीशन खाला
सीमेंट बजरी कंक्रीट तुम घौर लागला
गौ का विकास कार्यो मा रेत उडाला
पंचैती की आड़ मा
तुम संचेती जोडला
कखी दारु कखी कुजाणी क्या बिकाला
तुम तै मोटा सेठ बनाणा कू
ठेका ल्यू चा क्या हमुन
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
June 20 · Edited
हे पौड़ी
कखी उकाल
कखी उंदार
आँखों का तीर
हिवाला प्यारा
धारा रोड
अपर बाजार
लोहार बाजार
मॉल रोड एजैन्सी चौक
का भिड़ा आहा कतगा स्वाणा
कंडोलिया का बण जंगल
नागदेव मा बुरांस बांज का छेला
असीस देदा क्वीकाला का शंकर
पौडी तै
आवा तुम बि पौड़ी मा
थोडा घूमणा खुनि
हे देब्भूमि का पर्यटक
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
June 20
अगर ऑडियो कैसेट का दौर न आता
तो क्या जगजीत सिंह
और क्या नरेन्द्र सिंह
न बन पाता गुलशन कुमार
ऑडियो का किंग
सोचो ये इन्टनेट पहले आता तो
कैसे हो पाते नगमे यादगार
कैसे बन पाते गीत सदाबहार
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
July 3
माया का
सब्बी बाटा
छोरी चौबाटा
आणा का त् छन
भंडी बाटा
जाणै क्वी
गल्ली नि
जाणा बि
कैकु मन चा
मि ऎग्यों सदानी कु
दुन्या बसोणा कु
छोरा तेरा माया का चौबाटो मा
मुंडारु चा छोरी भारी
माया का चौबाटो मा
गोली इन्नी नि क्वी बाजार मा
पीड़ा कम करि जौ
ज्यु माया मुंडारा कि
सब्ब सै देलु छोरा
बरमंड बि चढ़ जौ
मुंडारु माया क्वी नि
चल तो फिर चल
छोरी माया का चौबाटो
हाँ हाँ आणु छौ
छोरा त्यरा पैथर
चल फिर माया का चौबाटो मा
रचना। ......शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 30
एक चाँद
और एक सुरज
छिन
द्वि झणा
कुटुम्दरी का
पहिया छिन
द्वि झणा
गंगा का द्वि
छाला छिन
द्वि झणा
द्वि गात
एक साँस
छिन
द्वि झणा
सुख दुख का
साथी छिन
द्वि झणा
मंगलमय रहुँन
सदानी
द्वि झणा
रचना। ...शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

माया की चार द्यब्ता सी
ह्वेकी बि दिखेंदी नि
माया भरम चा
स्या क्वी जादू
पिरेम माया कु बोल्दन
त पिरेम क्या माया चा
स्या बस ठगौणीया छवी
सबाल मन मा स्यु चा
माया मा मनखी ठगदू अफ्वी
स्या ठगांदु क्वी
माया जन भगवानै माया
हर कैका समझ मा नि आंदी
पर विकी माया सैरी दुन्या चल्दी
पिरेम की माया बि इन्नी चा
हवेकी बि हर कैका बिंगणा मा
नि आंदी स्या माया
माया की चार बिंग सकदु
वू ही ज्यू ठगै माया मा
अब्ब मैमा क्या पुछणा लग्या
विस्बास नि होंदु पुछ ल्या कै मायादार मा
रचना ............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
July 11
ऐसु बरस म्येरा मुल्क नंदाजात होली
बाराबरस मा नंदाजात अपणा मुलूक बौड़ाली
दीदी भूली नंदा का गीत गाली
ध्याणी अपणा मैत जाली वख नाचली गाली
मै कनी अभागी छोऊ रमियु देस मा मन मेरु पौच्यु हिमालय
नौटी कासुवा ईधा बधाणी की दीदी भूली नंदा गीत गाली
चौसिंघ्या खाडू का पैथर छातोलियो तै लेकी जात्रा का जत्रोई जाला
सेम कोटी भगोती कुलसारी की दीदी भूली नंदा गीत गाली
मेरु मन पौच्यु वख
चैपड़ो नन्दकेसरी फल्दिया गोउ मुन्दोली
कण भैटुली होली अपणी मैत बैटूली
कुरुड़ बाधण वाला भी पौचिया होला नन्दकेसरी
नंदा जात कु कनु मिलन देखा
कुरुड़ दसोली दसमद्वार डोली
गैरोली पाताल पातर नाचोणिया
सिलासमुद्र च्न्दनियाघाट
वख बुग्यालो लोग हिटणा होला
मेरु मन पौचियु वख
घाट माँ कानी भारी करुणा
नंदा मैत से विदा होली
मि अभागी यख परदेश मा खुदेणु छोऊ
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
18 hours ago
छत मे आना गोरी ईद ए चाँद बनके
टूट जा ये रोजा आज तू जे देख के
हम तो तेरे दिदार के लिए
तरस गये है तेरे प्यार के लिए
तीर ए तरकस चुबा बैठे है
दिल ए गुलजार मे
गोरी तेरे प्यार मे
दर्द ए दिवार पर सर टिकया है
घुटन कमरे मे गम ए आसू बहा ये
तेरे प्यार मेईद है गले मिलो मेरे यार
भूल जा ओ तुम लड़की हो हम लडके है
ईद है बस गले मिलो मेरे यार
टूट जा ये रोजा आज तू जे देख के
रचना .... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 23 · Edited
कविता----------------- शैलेन्द्र जोशी
भै नरु
हरु करियु भारु करियु त्वेन गढ़ गीतों तय भै नरु
हे त्वे जनि गितैर नि ह्वे सक दू फेर
गढ़ कवी गढ़ रफ़ी गढ़ कविन्द्र हे नरेन्द्र सिंह नेगी
सब्दो कु कोठार चा गढ़वाली भासा खुनी मौलियार चा
भै नेगी महान छाया गढ़ गीतों की जान छ्या
गीतों की गंगा सदनी तयरा मुख बीटी बग दी
हैसदी हैसदी गा दी गीत मुड मा टोपला हाथ मा बाज़ा
बहुत स्वाणु लग दू जब गांदी जब कुई पहाड़ी गाना
जब तू ढौल मा ऐकी ढौलैर हुवीकी
यु गीतों की छालार बैकी डैरो डैरो पौंच जादी
उत्तराखंड की समस्या मा रचय बस्य तयारा गीत
त्यरा नयु कैसीट जब बाज़ार मा अन्दु ता धरा धडी बिक जादू
त्यरा नया गीतों की जग्वाल मा लूग रैदन
जनि गीत बाज़ार मा अदन ता समलोणीया ह्वे जादन
कालजय गीतों कु रचनाकार गढ़वाली गीतों कु सिंगार
मखमली भोंन कु जादूगर भै नेगी
हिवाले संसकिरती तय हिवाला ऊँचे देंन वाला अपणु तोर कु कलाकार
गढ़ गीतों कु हीरा भी तू छे नवरतन छे तू गढ़ कु गढ़ रतन छे तू
बात बोदू गढ़ की मन की गढ़ गौरव छे तू
नौसुरिया मुरली जनि सुरीली गौली छा तेरी
गंगा जनि शीतलता चा तेरा गीतों मा
मायालु गीत तेरा मायालु भोंण चा
गीतों कु बाट की लेंन पकड़ी की गीतों का बटोई बणी की
गीतों का बाट ही बणी ग्या
ये मुलुक का सुर सम्राट बनी ग्या
गीतों कु पियूष जुगराज रया सदनी संसकिरती पुरुष