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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 21 · Edited
यो चा खुदैड़ मुल्क
की पहचान भै
रीति रिवाजों
बार त्यौहारों मा
भि दिखेन्दी विकी अनवार भै
दय्ख्णु हो खुदैड़ मनखीयों
का बार त्यौहार
सिधा चली ऐजा
नंदा राजजात
कन्न भारी करुणा
भेट भीटिकी लोग
गौरा की बिदे मा
रोणा बिलकणा
मैत ध्याणीयो
आंदु त्यौहार
बरस बार
नंदा राजजात
रचना ....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कै गौ म्येरी दीदी बसी
कै गौ भूली बसी म्येरी
कै गौ भुला भैजी बस्या
सब्भी का धोरा
आलू मी नंदा
कै गौ सैणा बाटू
कै गौ खड़ी उकाल
कै गौ बाटू उंदार
जालू सब्बी मैत मुल्क
का नाता रिश्तेदारो का घार
नचलु गालू
सब्बू का चौक
भिटेकी भेट होली
सैरा मैत मुल्क से
इन्नु अवसर आलू
फिर बाराबरस मा
रचना .....शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 21
रोई रोई मैत्यो की
आँखी हवेगे लाल
जुकड़ी की लाडी
नंदा जाणी ससुराल
मैत की ध्याणी
रोणी भकोर भकोरीकी
भिटेणी एक हैका मा
गौरा की विदे मा
नंदा का भैजी भुला
क्या दीदी भूली
क्या ब्वै बाबा
सैरा मैती आज
खुदैणा नन्दा की
विदे मा
पाली पोसी ब्येटुली
जाणी अपणा सौरास
सौण भादों मा नंदा का
मैत्यों का आंखा बर्खणा
आज नंदा की विदे मा
आज गौरा की विदे मा
रचना ......शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi

नेगी दा का जन्म दिवस मा मिल भी मने प्रेरणा दिवस डाला लगैकी...................शैलेन्द्र जोशी

तिन लगे डाली गीतू की
तिन लगे डाली बिचारो की
तिन लगे डाली संस्कीर्ति की
तिन लगे डाली लोकभासा की
आन बान शान की
ऐशू लगाला जलमदिबस मा
त्येरा नौकी डाली नेगी दा हम भि

रचना .........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 29
छत मे आना गोरी ईद ए चाँद बनके
टूट जा ये रोजा आज तू जे देख के
हम तो तेरे दिदार के लिए
तरस गये है तेरे प्यार के लिए
तीर ए तरकस चुबा बैठे है
दिल ए गुलजार मे
गोरी तेरे प्यार मे
दर्द ए दिवार पर सर टिकया है
घुटन कमरे मे गम ए आसू बहा ये
तेरे प्यार मेईद है गले मिलो मेरे यार
भूल जा ओ तुम लड़की हो हम लडके है
ईद है बस गले मिलो मेरे यार
टूट जा ये रोजा आज तू जे देख के
रचना .... शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता----------------- शैलेन्द्र जोशी
भै नरु
हरु करियु भारु करियु त्वेन गढ़ गीतों तय भै नरु
हे त्वे जनि गितैर नि ह्वे सक दू फेर
गढ़ कवी गढ़ रफ़ी गढ़ कविन्द्र हे नरेन्द्र सिंह नेगी
सब्दो कु कोठार चा गढ़वाली भासा खुनी मौलियार चा
भै नेगी महान छाया गढ़ गीतों की जान छ्या
गीतों की गंगा सदनी तयरा मुख बीटी बग दी
हैसदी हैसदी गा दी गीत मुड मा टोपला हाथ मा बाज़ा
बहुत स्वाणु लग दू जब गांदी जब कुई पहाड़ी गाना
जब तू ढौल मा ऐकी ढौलैर हुवीकी
यु गीतों की छालार बैकी डैरो डैरो पौंच जादी
उत्तराखंड की समस्या मा रचय बस्य तयारा गीत
त्यरा नयु कैसीट जब बाज़ार मा अन्दु ता धरा धडी बिक जादू
त्यरा नया गीतों की जग्वाल मा लूग रैदन
जनि गीत बाज़ार मा अदन ता समलोणीया ह्वे जादन
कालजय गीतों कु रचनाकार गढ़वाली गीतों कु सिंगार
मखमली भोंन कु जादूगर भै नेगी
हिवाले संसकिरती तय हिवाला ऊँचे देंन वाला अपणु तोर कु कलाकार
गढ़ गीतों कु हीरा भी तू छे नवरतन छे तू गढ़ कु गढ़ रतन छे तू
बात बोदू गढ़ की मन की गढ़ गौरव छे तू
नौसुरिया मुरली जनि सुरीली गौली छा तेरी
गंगा जनि शीतलता चा तेरा गीतों मा
मायालु गीत तेरा मायालु भोंण चा
गीतों कु बाट की लेंन पकड़ी की गीतों का बटोई बणी की
गीतों का बाट ही बणी ग्या
ये मुलुक का सुर सम्राट बनी ग्या
गीतों कु पियूष जुगराज रया सदनी संसकिरती पुरुष

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 22
पानी की पीड़ा
पीड़ा मे पानी
तरसा गला एक बूंद पानी
पानी की पीड़ा
पीड़ा मे पानी
प्रकृति प्रक्रिया थी जो पिघलते थे
हिमालय से गिलेशियर गल गल
गंगा बहे घर घर पहुंचे पानी
ये सब हो जाये गी बीती कहानी
आप्राकृतिक हो गया मानव
धर लिया रूप उस ने दानव
काट डाले वन कैसे करे झरने छन छन
मन मे रह गया पानी स्रोत सब सुखे
विश्व शव हो रहा पानी
बचे कैसे पानी अभी तो घर मे थी लड़ाई
तैयार खड़ा विश्व युध पानी
मुखडे से पानी छीन लेगे पडोसी
ज़रूरत है सब को पानी
जाहा देखेगे पानी पागल हो जायेगा आदमी
तस्वीर मे भी देखेगे नदी झरने सागर
फाड़ देगा चीर देगा
दीवाना हुआ जो पानी के लिये आदमी
पानी पानी सारे कषट कालेष घुम रहे है पानी
सारी सुख संपदा है पानी
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 24
हम देखते रह गये बस
चाँद न जाने किसके
घर पर सवेरा कर गया
हम मन मे ही
खुसर फुसुर
करते रह गये
न जाने किस गली
किस नुकड़ मे कोई
अजनबी चाँद से
गुफ्तगू कर गया
ये चाँद का अपना हक़ है
वो किस के आकाश मे
चांदनी बिछाये
किस्मत मे तारा
बनना रहा होगा
जो चाँद को देख तो
सकते है पर हो
नहीं सकते
रचना .............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poet Shailendra Joshi
August 23
कुछ सेल्फी खीचणा मर गिनी
कुछ सेल्फी देखी मर गिनी ...................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 22
कभी कैसेट को अलटना
कभी कैसेट को पलटना
टेप रिकॉर्डर मे
फेवरेट सांग को सुनने के
लिये कभी फॉरवर्ड
तो कभी रिवर्स करना
वो ऑडियो कैसेट का
क्या दौर था गीत -संगीत सुनने का
कभी ए साइड
तो कभी बी साइड
के गीतों को निहारना
रैपर मे
सजा के रखना ड्रॉइंग रूम मे
या अलग से कैसेट केस ख़रीदना बाज़ार से
कितना अहमियत थी इनकी
कितना ख्याल रखा जाता था
आज काबड़ी भाव नहीं बिकती है
ये ऑडियो कैसेट
पर टच स्क्रीन के पर्दो मे
स्मार्ट फ़ोन से हजारों गीत
चंद सेकिण्ड मे सुनने वाली पीढ़ी
ऑडियो कैसेट गीत संगीत गाने
सुनने क्या आनन्द था
ये कभी नहीं समझ पायेगी
रचना। ......शैलेन्द्र जोशी