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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ना

ना सिंह कि सदैयी म्येरे पास
ना डंडरियाल जना गीत
ना श्रीयाल जना छद कु ज्ञान
ना नेगीदा जना मयालु गीत
ना कठैत जना व्यंग
ना पवार जना गौका गीत
ना प्रेमी जनु साहित्य म्येरू
ना अबोध बंधू जना ढोल सागर
ना गणी जना हाईकू
ना केसवान जनि हास्य
ना छिपाडू दा सि मिज्याज
ना चमोला जनि गड्वाली कथा कबिता
ना अपर्च्यांण सि रस्यांण
ना भीष्म सि व्यंग कि थात
ना चक्रधर ना कंकाल ना विणापाणी सि कबिता
ना गढ़वाली तत्गा ज्ञान
फिर भि लिख्य्णु छौ
स्या गड्वाली भासा का परती पिरेम चा म्येरू
रचना ......शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
November 21 at 11:13am ·

साधु का चोला
आश्रम मे कर्म
कैसे कैसे
बाबा का थैला
उस के अन्दर पैसे वालो का मेला
रूप गिरगिट सा
रंग बदलता पल पल पर
रेप इश्क पोलिटिक्स सब मे माहिर बाबा
च्क्कूबाजी छुराबाजी गुंडागिर्दी
मंत्री संत्री पुलिसवाले बड़े बड़े साहूकार
मे बजता बाबा का घंटा
ढोलक तबला हारमुनियम
बडे बड़े पंडाल मे भजन भजता
जोर जबरदस्ती मे गुरु बन
चेला दुनिया को बनाता
कथा के बीच बीच मे चंदा का पैसा बटोर
कभी आश्रम कभी क्या बनवाता
फिर पकड़ा जाता ऐसे आश्रम मे रंग रलिया करते
भगवान बचाये कलयुग के ऐसे
बाबा साधु संतो से हम सब को
ये कवीता मेरी जनहित मे जारी
बचाओ माँ बहिन बेटीयों को ऐसे ठगों से
ना हो धरम की आड़ मे ज़ुल्म बारी बारी
रचना शैलेन्द्र जोशी


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
December 7 at 6:18pm · Edited ·

******सोचो जरा मेरे हिमालय के रहनुमाओ********** ........शैलेन्द्र जोशी

दिल्ली के आगामी चुनाव मे अपना राजनितिक हक़ मांगने के लिये दिल्ली मे बसे उत्तराखंड के लोग अपना राजनितिक हक़ मांग रहे है उनका कहना कि दिल्ली मे कोई भी राजनितिक दल हो वो सिर्फ वोट के लिये उतराखंडीयों का प्रयोग करता है दिल्ली के चुनाव मे आज तक किसी उतराखंडी को टिकट नहीं मिला उनका कहना है इस बार दिल्ली के विधान सभा चुनाव उस पार्टी का समर्थन उतराखंडी करेगे जो उतराखंड के लोगो को चुनाव मे टिकट देगा और उनका यह भी कहना है जो पार्टी इस चुनाव उतराखंडीयों अनदेखी करेगा ये 35 लाख उतराखंडी बता देगे हमारे बिना दिल्ली मे किसी की भी सरकार नहीं बन सकती है राजनीतीक पार्टीयों को खुली चुनौती देने के लिये दिल्ली मे बसे उतराखंडी जन्तर मंतर मे आगामी 14 दिसम्बर 2014 को विरोध प्रदर्शन करेगे शांति पूरण तरीके से और उंनका कहना कि आजादी से पहले से उतराखंडी लोग नौकरियों के कारण दिल्ली मे रह रहे है आज इन उतराखंडीयों तादाद हाजरो मे नहीं बल्कि लाखों मे है , आंकड़ा कहता है आज दिल्ली मे 30-35 लाख उतराखंडी लोग रहते है लम्बे जीवन संग्रसों के बाद आज उतराखंडी लोग दिल्ली मे उच्च सरकारी पदों , प्राइवेट सेक्टरो मे है और कही उतराखंडी अपना व्यवसाय भी है ,और शोध फील्ड हो या एजुकेशन सब जगह मे हमारे उतराखंडी दिल्ली मे अपनी सेवा दे रहे है , इन सभी उत्तरखंडीयों सोचना सही है जब दिल्ली इन से गुलजार होती है तो इनकी उपेछा क्यों ? किन्तु जाने अनजाने सही लेकिन ये अच्छा व्यंग भी बन गया वैसे तो व्यंग साहित्यकार कल्पना के साथ रचता है किन्तु कभी कभी कुछ ऐसी घटनाये हो जाती है प्राक्रतिक तौर से जो भौतिक जगत उस काल कर्म खुद ही व्यंग बना देता है जैसे यह राजनीती हक़ मांग ने वाली घटना है जो दिल्ली के राजनितिक दलों के लिये चुनौती है ही साथ ही उन बेशरम नेताओ और राजनीतिक दलों को भी ये बता रही है जो बरसो से उत्तराखंड पैरोकारी के साथ जो उतर प्रदेश के ज़माने से पहाड़ो कि पैरोकारी और विकाश की बात करते है अगर उतराखंड मे विकाश हुआ होता तो यह 35 लाख काबिल लोग पहाड़ मे सेवा दे रहे होते ,दोष उन नेताओ का ही है कही किसी दिन ऐसा न हो जाये पहाड़ का सारा वोटर बाहर के राज्य का हो जाये सोचो जरा मेरे हिमालय के रहनुमाओ ..............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
November 20 at 3:19pm · Edited ·

नेगी दा के बोल लगता है जैसे व्यंगकार परसाई को समझा रहे हो ऐसा नहीं है भैया

अज्यु बि तू रूप रंग कि खाण छाई
मै कुथै सदानी तू नयी नवांण रयी
तेरी ज्वनि से उम्र हारी गै
सदानी तेरी माया को मतवालू रयु
पयार छक्वे छकि कि बि मि तिस्यालू रयु
ओहो धारी गै जून मेरी डंडयाली धारी गै
ओहो तेरी करारी नजर मारी गै

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
December 7 at 6:18pm · Edited ·

******सोचो जरा मेरे हिमालय के रहनुमाओ********** ........शैलेन्द्र जोशी

दिल्ली के आगामी चुनाव मे अपना राजनितिक हक़ मांगने के लिये दिल्ली मे बसे उत्तराखंड के लोग अपना राजनितिक हक़ मांग रहे है उनका कहना कि दिल्ली मे कोई भी राजनितिक दल हो वो सिर्फ वोट के लिये उतराखंडीयों का प्रयोग करता है दिल्ली के चुनाव मे आज तक किसी उतराखंडी को टिकट नहीं मिला उनका कहना है इस बार दिल्ली के विधान सभा चुनाव उस पार्टी का समर्थन उतराखंडी करेगे जो उतराखंड के लोगो को चुनाव मे टिकट देगा और उनका यह भी कहना है जो पार्टी इस चुनाव उतराखंडीयों अनदेखी करेगा ये 35 लाख उतराखंडी बता देगे हमारे बिना दिल्ली मे किसी की भी सरकार नहीं बन सकती है राजनीतीक पार्टीयों को खुली चुनौती देने के लिये दिल्ली मे बसे उतराखंडी जन्तर मंतर मे आगामी 14 दिसम्बर 2014 को विरोध प्रदर्शन करेगे शांति पूरण तरीके से और उंनका कहना कि आजादी से पहले से उतराखंडी लोग नौकरियों के कारण दिल्ली मे रह रहे है आज इन उतराखंडीयों तादाद हाजरो मे नहीं बल्कि लाखों मे है , आंकड़ा कहता है आज दिल्ली मे 30-35 लाख उतराखंडी लोग रहते है लम्बे जीवन संग्रसों के बाद आज उतराखंडी लोग दिल्ली मे उच्च सरकारी पदों , प्राइवेट सेक्टरो मे है और कही उतराखंडी अपना व्यवसाय भी है ,और शोध फील्ड हो या एजुकेशन सब जगह मे हमारे उतराखंडी दिल्ली मे अपनी सेवा दे रहे है , इन सभी उत्तरखंडीयों सोचना सही है जब दिल्ली इन से गुलजार होती है तो इनकी उपेछा क्यों ? किन्तु जाने अनजाने सही लेकिन ये अच्छा व्यंग भी बन गया वैसे तो व्यंग साहित्यकार कल्पना के साथ रचता है किन्तु कभी कभी कुछ ऐसी घटनाये हो जाती है प्राक्रतिक तौर से जो भौतिक जगत उस काल कर्म खुद ही व्यंग बना देता है जैसे यह राजनीती हक़ मांग ने वाली घटना है जो दिल्ली के राजनितिक दलों के लिये चुनौती है ही साथ ही उन बेशरम नेताओ और राजनीतिक दलों को भी ये बता रही है जो बरसो से उत्तराखंड पैरोकारी के साथ जो उतर प्रदेश के ज़माने से पहाड़ो कि पैरोकारी और विकाश की बात करते है अगर उतराखंड मे विकाश हुआ होता तो यह 35 लाख काबिल लोग पहाड़ मे सेवा दे रहे होते ,दोष उन नेताओ का ही है कही किसी दिन ऐसा न हो जाये पहाड़ का सारा वोटर बाहर के राज्य का हो जाये सोचो जरा मेरे हिमालय के रहनुमाओ ..............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi


रामी बौराण से लबरा छोरी तक
रामी बौराण एक कवि कल्पना है जो पहाड़ नारी का दर्शन ओर सजीव चित्रण है रामी कोई वास्तव नहीं हुयी पहाड़ मे , कवि साहित्यकार के शब्दों का एक चित्रण रचना है रामी बौराण पहाड़ नारी का चरित्र सच्ची तस्वीर है रामी बौराण , किन्तु जहा हमारे लोक साहित्य मे रामी बौराण , वीर वधु देवकी का चित्रण कवियों ने किया आज कवि और गीतकरो ने पहाड़ नारी लबरा छोरी और न जाने क्या बना दिया है ....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
16 hrs ·

कुकुर बराबार क्वी वफादार नि
मनखी बराबर क्वी गलदार नि
झुक जौ ज्यू डाला सि
यी जामाना मा
क्वी इन्नु फलदार नि
लतम लती लाठी गोली कु
नमस्कार
हाथ जुड़े आदर सत्कार कु
तिरस्कार
सैरी दुन्या फैदा साहूकार
क्या मिल्लु वी कारिज करी
हम कु बता यार
जोगी जोकटा तिलिस्म चमत्कार
फैदा मिललू करा युथै नमस्कार
दुन्या च एक हैका तै ढगौणा
कारोबार
रेला ठेला मेला मा सजीयु संसार
कखी ठगला कखी हसला
कखी लसका कखी ढसका
जीबन च जब तलक
इन्न चलणु रालु यार
रचना .................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देस मा देसी बणी रै तू
विदेस मा विदेसी बणी रै तू
पर गौं मा जब भि ऐ तू
गवांणया बणी ऐ
गौं मा गौ जनि रै तू
चंट चलाकी सारि हुसयारी
देस विदेस छोड़ी ऐ तू
मयालु सुभोऊ कवांसु पराण
भोला लाटा सिधु सच्चु बणी
गौ मा ऐ तू
गौं मा गवांणया बणी ऐ तू
अपणी सच्ची अनवार
गौ तै दिक्खो तू
अपणी पहचाण भूली ना तू
देसी विदेसी लुक वखि छोड़ी
गौ मा गवांणया सज धरि
गौ मा गवांणया बणी ऐ तू
रचना ..........................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
19 hrs · Edited ·

मेरी सेल्फी रचना को आप कुछ समय बाद उतराखंड कि सुर कोकिला माया उपाध्याय की सुरीली आवाज मे सुनेगे

छोरो मर गिनी कत्गा
म्येरी सेल्फी खीचणा मा
अर कुछ सेल्फी देखणा मा

जब बीटी खिची मिन अपणी सेल्फी
भोर भोरिक आणा छोरों का कमेंट
क्वी बोल्नु बने दे मिथै अपनी गर्ल फ्रेंड
क्वी बोल्नु बने दे अपनी ब्योली
एक अनार चा सौ बिमार छिन
कै कै कु करू दिल कु इलाज
दिल तू ही बता
ज्वान त ज्वान
बुडिया बि लाइक
करदा म्येरी सेल्फी
क्वी शेयर करदा
क्वी करदा डाऊनलोड
कन्न कमाल करियु त्येरु सेल्फी
सैरी दुन्या मा बबाल करयु त्येरु सेल्फी
सब्बयु की जिकुड़ी राणी बानायु
मैकू त्वेंन सेल्फी
फेसबुक मा म्येरी सेल्फी
ट्विटर मा म्येरी सेल्फी
लाइन मा म्येरी सेल्फी
वाटसअप मा म्येरी सेल्फी
वी चैट मा म्येरी सेल्फी
कुजणी कख कख
कै कै सोशल साईट मा म्येरी सेल्फी
पर वू कु भगी होलू
जैका जुकड़ा तक पौचली
म्येरी सेल्फी
रचना ................शैलेन्द्र जोशी