• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 17 at 7:47pm · Edited ·

गड्वाली गडवाल कु हो
या हो दिल्ली बॉम्बे कु
पर गड्वाली हुणा की
पहचाण बि एक चा
और नातु भि एक
क्या चा क्या चा
क्या करना भयों
यों चा बस गड्वाली
हुणा कि अनवार
गड्वाली सिर्फ
नाचौणया विषय रैगे
ब्यो मा डीजे का

एक ट्रैक तक
रचना .....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 16 at 10:31am ·

वो इतने आम थे
बिखर के सब
खास हो गये
हम सब भीड़ थे
कल भी और
आज भी
वो सब आम लोग
पार्टी वाले हो गये
हम तो भीड़ है
कही न कही
किसी न किसी
भीड़ के हो जायेगे
रचना ............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

म्येरा मन का
दंदोल जब तलक
नि बण जाला
म्येरा गिच्चा का
बोल
तब तलक छिन
दीदा त्येरा सबाल
जन ही ह्वे भीतरे
बात लिक तब द्यखा
त्येरा बबाल
जण द्यु छौ दीदा
त्येरी सार तार
तू छेय पत्रकार
रचना .......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



गड्वाली भाषा संस्कृति को साहित्यकार नरेन्द्र कठैत के तरफ से तर्पण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
February 3 at 11:29am ·

बोल्दरा हर्चणा छिन
बिंगदरा टिकिया छिन
पढ़दरा हर क्वी नि
लिख्दरों कि इन्न मा
होण च भै चुप
जौंन नि समझण कुछ
तौ नौनियालो कि फौज
खड़ी च भारी
कैकी बात होणी भैजी
क्या गड्वाली कुमायूनी
हा भै
रचना .....................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
February 1 at 11:29am ·

नरेन्द्र सिंह नेगी जी के पाड़ी भुला देहरादून वाला हु तर्ज पर मैने एक पैरोडी बनायीं है पाडी भुली पसंद आये तो अपना विचार जरूर दे रचना पर

रामी सी बौराण तू
तीलू सी अनवार त्येरी
अपणा मुल्क की लगणी
पाडी भूली देसी सजधज वल्ली
क्या आंटी क्या बोलती हो
मेरे माडन लुक को
अपने गवांरपन से जोड़ती हो
अपने शहर मे आंटी मै तो माडल हु
गाव पट्टी वाली नहीं
मेट्रोसिटी वाली हु
नाक भि वि च छोरी
पर ना फुल्ली ना नथुली चा
न स्युन्द न पाटी ना लम्बी धौपेली चा
पर अपणा पाड़ ब्येटी ब्वारियो
अनवार त्वैमा दिखणी क्या च छोरी
साफ झलकणी चा रे पाडी भूली
मै तो आंटी फैशन आइकान हु
तुम्ही बोलो आंटी क्या किसी
हीरोइन से क्या कम हु
वैसे तो आपकी ये फुल्ली नथुली , गलोबंद
भी कभी कभी आजमा लेती हु
सच कहू आंटी ट्रैडेशनल टिकना
न मुझे आता है न भाता है
एक दिन मे कही फैशन बदलती हु
कै सैर कै मुल्क मा पल्ली बढी
भै तू पाडी भूली
देहरादून मे पली बढी हु
दिल्ली ऍमसीआर जॉब की है
फ़िलहाल बॉम्बे सेटल्ड हु
फ्यूचर मे अमेरिका बस
एनआरआई बनने का इरादा है
पाडी दिखने से नहीं चलेगी
मेरी गाडी आंटी
मुझ से क्या पूछती हो
अपने बेटे से पूछो
उसको भी भाती है
ऐसी हि ब्वारी
पर मि कख कुछ बोन्नु छौ लाटी
बस इथगा छौ बुन्नु पाडी भुली
अपणा उतराखंड नारी अनवार
दिखेणी त्वैमा पाडी भूली
रामी सी बौराण तू
तीलू सी अनवार त्येरी
अपणा मुल्क की लगणी
पाडी भूली देसी सजधज वल्ली
रचना ........................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पहले खबरों का कारोबार
फकीरों के था हाथ
आज खबरों का कारोबार
अमीरों के है हाथ
किन्तु खबरों की दुनिया मे
मुलाजिम तो आज भी
है फकीर
किन्तु है मालिक अमीर
ऐसा क्यों है फ़क़ीर दूर है
खबरों के कारोबार से
अमीर आये जा रहा है
दिन प्रतिदिन
कही मालिक है फुलफैल्स
कही है होल्डर शेयर
हे प्रभु
इन से कितनी
सच की गुंजायीस करू
रचना ...................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऊँकि चिद चा
वुन बीड़ा उठे
बोली भासा
संसकिरती
बचाणा कु
वु दुन्या समाज मा
एक अलख जगे
दुन्या समाज जत्गा बिंगी
होली पर ऊँका जिकुड़ा पीड़ा
तब सरे जब अपणा बाल बच्चों
पर फरके उन एक नजर
मि यख पाड़ का रंग मा रंगियु
और तुम भी देसी ह्वे ग्या
पीड़ा कु रोग नासूर हवेगे
वि दिन बीटी
रचना .......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

म्येरा मन का
दंदोल जब तलक
नि बण जाला
म्येरा गिच्चा का
बोल
तब तलक छिन
दीदा त्येरा सबाल
जन ही ह्वे भीतरे
बात लिक तब द्यखा
त्येरा बबाल
जण द्यु छौ दीदा
त्येरी सार तार
तू छेय पत्रकार
रचना .......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मायादारो से बैर ल्यु चा
ऐसु बसंत मा यी बर्खन
रचना .........................शैलेन्द्र जोशी

मन छौ भारी उल्यार
कब आलू बसंत मौल्यार
ऐसु साल बरखणु
बसंत मा बसग्याल
कन्ना कन्ना सुप्नया पालैनी
मायादारोन जाला डाँडो मा
जख खिली होलू फ्योली बुरांस
बैठीकी छवी लगाला तपला बसंती घाम
पर कन्न मोरी चुचा सर्ग कु
बर्ख्णु ऐसु बसंत यी साल
जन लगी हो सौंण भादों सी बसग्याल
उन् त नया जमाना का मायादार छौ हम
घर बैठी जखी कखी मुबेल मिलन ह्वे जालु
पर यी बसंती बसग्याल मा
लोला नेटवर्क भि निहोणया हवेगे यार
मायादारो से बैर ल्यु चा
ऐसु बसंत मा यी बर्खन
रचना .........................शैलेन्द्र जोशी