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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
April 6 at 3:41pm ·

छोरो मर गिनी कत्गा
म्येरी सेल्फी खीचणा मा
अर कुछ सेल्फी देखणा मा

जब बीटी खिची मिन अपणी सेल्फी
भोर भोरिक आणा छोरों का कमेंट
क्वी बोल्नु बने दे मिथै अपनी गर्ल फ्रेंड
क्वी बोल्नु बने दे अपनी ब्योली
एक अनार चा सौ बिमार छिन
कै कै कु करू दिल कु इलाज
दिल तू ही बता
ज्वान त ज्वान
बुडिया बि लाइक
करदा म्येरी सेल्फी
क्वी शेयर करदा
क्वी करदा डाऊनलोड
कन्न कमाल करियु त्येरु सेल्फी
सैरी दुन्या मा बबाल करयु त्येरु सेल्फी
सब्बयु की जिकुड़ी राणी बानायु
मैकू त्वेंन सेल्फी
फेसबुक मा म्येरी सेल्फी
ट्विटर मा म्येरी सेल्फी
लाइन मा म्येरी सेल्फी
वाटसअप मा म्येरी सेल्फी
वी चैट मा म्येरी सेल्फी
कुजणी कख कख
कै कै सोशल साईट मा म्येरी सेल्फी
पर वू कु भगी होलू
जैका जुकड़ा तक पौचली
म्येरी सेल्फी
रचना ................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi


बिनसिरौ घाम
सुबैरो घाम
दुफरौ घाम
ब्याखुनी को घाम
तपैकी घमैकी
अछले जांदू पर
नयी तकनीक से पैदा ह्यु
रातों घाम मनमर्जी कु च
जब तक चैल्या तपल्या घमेल्या
चका चौंध हुयी च दीदा ................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 11 at 3:30am ·

वो आये यात्रा जात्ररा मे
टेंट वेंट लगाया बुग्यालो मे
ऊँचे हिमालयो मे
शांत वातावरण हवाओ मे
जड़ी बूटिया फुल पोधे
कुरचे वुरचे
दारू सारु पी
बोतल सोतल
फेकी
पैकेट सैकेट खाने वाने का
कूड़ाकरकट जहा तहा
सन्यासी कम अय्यासी ज्यादा
टट्टीया वट्टीया करी
जल्द दिये पर्यटक साब
जवाबदारी किसकी
सरकार तो माफीदार है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 13 at 9:19pm ·

झेंगु झेंता झेंगु झेंता
मंत्री जिन ढोल बजैकी
बोली द्यब्ता का भरोसा रा
जात मा जा
जागर लगा
द्यब्तो तै जगा
म्येरा भरोसा न रा
मैसे कुछ नि हुण भैजी
हम पाणी लुट सकदा
पत्थर कूट सकदा
पर गौली तर नि कर सकदा तुमरी
सुगम दुर्गम का फेर मा
ट्रांसफरै मलायी खै सकदा
परैवैट इस्कुल्या दूकान खोल सकदा
अब इत्गा त करना छा
अब कत्गा करन
मंत्री छा द्यब्ता नि
चुनौ आण दया
दय्ख्दा फेर
हैकी जात मा होली अब बात
तब तक ढोल बजैकी
झेंगु झेंता झेंगु झेंता.................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 11 at 11:34pm ·

बिनसिरौ घाम
सुबैरो घाम
दुफरौ घाम
ब्याखुनी को घाम
तपैकी घमैकी
अछले जांदू पर
नयी तकनीक से पैदा ह्यु
रातों घाम मनमर्जी कु च
जब तक चैल्या तपल्या घमेल्या
चका चौंध हुयी च दीदा ................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
10 hrs · Edited ·

मैने भी ड्रेस सिलवायी
आज हरी हरी
पर्यावरण से भरी भरी
मैने भी ओड़ लिया
चोला पर्यावरण का
मैने पहन ली टोपी
पर्यावरण के नाम की
मैने अच्छा स्पीच दिया
आज सेमीनार मे
पर्यावरण पर
कितना तरो ताजा
एयर कंडीसन हाल
था बिलकुल हिमालय
अहसास दिला रहा था
प्यास लग नहीं रही थी
पर स्पीच लम्बी थी
तो मीठा मिनरल वाटर
पि लिया
वेसे सस्था ने पर्यावरण
आयोजन अच्छा किया
लंच ठीक ठाक था
किन्तु सम्मान मिला
खाली स्मृति चिन्ह
पैसे देने बडे कंजूस थे
कोई चेक नहीं दिया
ऐसे तो बच गया
पर्यावरण हमारा
कितनी मेहनत लगती
पर्यावरण पर बोलने पर
कितनी बुक स्टडी करी रात भर
गूगल पर अलग सर्च
पर्यावरण पर बोलना
पेड़ लगाने से भी कठीन है
भाई हमारा पर्यावरण
अगला प्रोग्राम कहा
यार तभी जाऊगा
इस बार जब
मिले भारी भरकम
चेक आयोजक से
बाकि डाली
हरी भरी रहे
यही उदेश्य
है हमारा ......................................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
22 hrs ·

गैरसैंण तू
कै नदी का छाला
किल्हे नि
त्वे मा डाम बनैकी
त्वे डूबैकी
स्या राजधानी वल्ली
राजनीती भि डूबे देंदा
सदानी कु ...............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Anuj Pant
May 17 at 12:28pm · Edited ·

झेंगु झेंता झेंगु झेंता
मंत्री जिन ढोल बजैकी
बोली द्यब्ता का भरोसा रा
जात मा जा
जागर लगा
द्यब्तो तै जगा
म्येरा भरोसा न रा
मैसे कुछ नि हुण भैजी
हम पाणी लुट सकदा
पत्थर कूट सकदा
पर गौली तर नि कर सकदा तुमरी
सुगम दुर्गम का फेर मा
ट्रांसफरै मलायी खै सकदा
परैवैट इस्कुल्या दूकान खोल सकदा
अब इत्गा त करना छा
अब कत्गा करन
मंत्री छा द्यब्ता नि
चुनौ आण दया
दय्ख्दा फेर
हैकी जात मा होली अब बात
तब तक ढोल बजैकी
झेंगु झेंता झेंगु झेंता.................
.........................................
:शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 21 at 9:48am ·

ठुमका लगे पाड़ मा
ठसका लगे दूंन
माया जुडी पाड़ मा
छवी लगी दून
ब्यो ह्वे पाड़ मा
फेरा लगी दूंन
रात पड़ी पाड़ मा
जून पहुची दूंन
मनसुरी बि पास
हनीमून दूंन
दोबस्ता पाड़ मा
डिलीवरी दूंन
बालबच्चादार हुया
इस्कूल बि दूंन
टंगड़ी टूटी पाड़ मा
पलस्तर चढ़ी दूंनं
रुवा उड़ी पाड़ मा
गद्दा बणी दूंण
सुपन्या देखी पाड़ मा
फसोरी नींद दूंन ...........................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 20 at 9:27am · Edited ·

मैने भी ड्रेस सिलवायी
आज हरी हरी
पर्यावरण से भरी भरी
मैने भी ओड़ लिया
चोला पर्यावरण का
मैने पहन ली टोपी
पर्यावरण के नाम की
मैने अच्छा स्पीच दिया
आज सेमीनार मे
पर्यावरण पर
कितना तरो ताजा
एयर कंडीसन हाल
था बिलकुल हिमालय
अहसास दिला रहा था
प्यास लग नहीं रही थी
पर स्पीच लम्बी थी
तो मीठा मिनरल वाटर
पि लिया
वेसे सस्था ने पर्यावरण
आयोजन अच्छा किया
लंच ठीक ठाक था
किन्तु सम्मान मिला
खाली स्मृति चिन्ह
पैसे देने बडे कंजूस थे
कोई चेक नहीं दिया
ऐसे तो बच गया
पर्यावरण हमारा
कितनी मेहनत लगती
पर्यावरण पर बोलने पर
कितनी बुक स्टडी करी रात भर
गूगल पर अलग सर्च
पर्यावरण पर बोलना
पेड़ लगाने से भी कठीन है
भाई हमारा पर्यावरण
अगला प्रोग्राम कहा
यार तभी जाऊगा
इस बार जब
मिले भारी भरकम
चेक आयोजक से
बाकि डाली
हरी भरी रहे
यही उदेश्य
है हमारा ......................................शैलेन्द्र जोशी