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Poems Written by Shailendra Joshi- शैलेन्द्र जोशी की कवितायें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 25, 2013, 10:21:23 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 22
पानी की पीड़ा
पीड़ा मे पानी
तरसा गला एक बूंद पानी
पानी की पीड़ा
पीड़ा मे पानी
प्रकृति प्रक्रिया थी जो पिघलते थे
हिमालय से गिलेशियर गल गल
गंगा बहे घर घर पहुंचे पानी
ये सब हो जाये गी बीती कहानी
आप्राकृतिक हो गया मानव
धर लिया रूप उस ने दानव
काट डाले वन कैसे करे झरने छन छन
मन मे रह गया पानी स्रोत सब सुखे
विश्व शव हो रहा पानी
बचे कैसे पानी अभी तो घर मे थी लड़ाई
तैयार खड़ा विश्व युध पानी
मुखडे से पानी छीन लेगे पडोसी
ज़रूरत है सब को पानी
जाहा देखेगे पानी पागल हो जायेगा आदमी
तस्वीर मे भी देखेगे नदी झरने सागर
फाड़ देगा चीर देगा
दीवाना हुआ जो पानी के लिये आदमी
पानी पानी सारे कषट कालेष घुम रहे है पानी
सारी सुख संपदा है पानी
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

एक क्लिक मा नाता बणदा
एक क्लिक मा नाता टूटदा
नया जमाना मा दगडू
दग्डया येथै ही बोल्दा
हथगुलियो मा सरकिणी
सर सर टच की दुन्या
टच ह्वैकी बि
अनटच सी स्या लोली दुन्या
अफ्हू रंग मा रंगी रांदी
सेल्फी दुन्या
मुखड़ी का म्यैला मा
ठगी कौथिगेर सी लगदी
स्या लोली क्लिक की दुन्या
रचना......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

माया सी चार द्यब्ता सी
ह्वेकी बि दिखेंदी नि
माया भरम चा
स्या क्वी जादू
पिरेम माया कु बोल्दन
त पिरेम क्या माया चा
स्या बस ठगौणीया छवी
सबाल मन मा स्यु चा
माया मा मनखी ठगदू अफ्वी
स्या ठगांदु क्वी
माया जन भगवानै माया
हर कैका समझ मा नि आंदी
पर विकी माया सैरी दुन्या चल्दी
पिरेम माया बि इन्नी चा
हवेकी बि हर कैका बिंगणा मा
नि आंदी स्या माया
माया सी चार बिंग सकदु
वू ही ज्यू ठगै माया मा
अब्ब मैमा क्या पुछणा लग्या
विस्बास नि होंदु पुछ ल्या कै मायादार मा
रचना ............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
July 10
ऐसु बरस म्येरा मुल्क नंदाजात होली
बाराबरस मा नंदाजात अपणा मुलूक बौड़ाली
दीदी भूली नंदा का गीत गाली
ध्याणी अपणा मैत जाली वख नाचली गाली
मै कनी अभागी छोऊ रमियु देस मा मन मेरु पौच्यु हिमालय
नौटी कासुवा ईधा बधाणी की दीदी भूली नंदा गीत गाली
चौसिंघ्या खाडू का पैथर छातोलियो तै लेकी जात्रा का जत्रोई जाला
सेम कोटी भगोती कुलसारी की दीदी भूली नंदा गीत गाली
मेरु मन पौच्यु वख
चैपड़ो नन्दकेसरी फल्दिया गोउ मुन्दोली
कण भैटुली होली अपणी मैत बैटूली
कुरुड़ बाधण वाला भी पौचिया होला नन्दकेसरी
नंदा जात कु कनु मिलन देखा
कुरुड़ दसोली दसमद्वार डोली
गैरोली पाताल पातर नाचोणिया
सिलासमुद्र च्न्दनियाघाट
वख बुग्यालो लोग हिटणा होला
मेरु मन पौचियु वख
घाट माँ कानी भारी करुणा
नंदा मैत से विदा होली
मि अभागी यख परदेश मा खुदेणु छोऊ
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 24
हम देखते रह गये बस
चाँद न जाने किसके
घर पर सवेरा कर गया
हम मन मे ही
खुसर फुसुर
करते रह गये
न जाने किस गली
किस नुकड़ मे कोई
अजनबी चाँद से
गुफ्तगू कर गया
ये चाँद का अपना हक़ है
वो किस के आकाश मे
चांदनी बिछाये
किस्मत मे तारा
बनना रहा होगा
जो चाँद को देख तो
सकते है पर हो
नहीं सकते
रचना .............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 23
जैसे कहा जाता है दो बेटों के जुडाव या जोड़ने का कारण माँ है वैसे ही गढ़वाल और कुमायु को जोड़ने वाली माँ नंदा है जो दो मंडलो को अफ़स मे जोड़ती है भाईचारे और प्रेम उन्माद का भी दर्शन है नंदादेवी राजजात जय माँ नंदा ..........................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi

कुछ सेल्फी खीचणा मर गिनी
कुछ सेल्फी देखी मर गिनी ...................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 22
कभी कैसेट को अलटना
कभी कैसेट को पलटना
टेप रिकॉर्डर मे
फेवरेट सांग को सुनने के
लिये कभी फॉरवर्ड
तो कभी रिवर्स करना
वो ऑडियो कैसेट का
क्या दौर था गीत -संगीत सुनने का
कभी ए साइड
तो कभी बी साइड
के गीतों को निहारना
रैपर मे
सजा के रखना ड्रॉइंग रूम मे
या अलग से कैसेट केस ख़रीदना बाज़ार से
कितना अहमियत थी इनकी
कितना ख्याल रखा जाता था
आज काबड़ी भाव नहीं बिकती है
ये ऑडियो कैसेट
पर टच स्क्रीन के पर्दो मे
स्मार्ट फ़ोन से हजारों गीत
चंद सेकिण्ड मे सुनने वाली पीढ़ी
ऑडियो कैसेट गीत संगीत गाने
सुनने क्या आनन्द था
ये कभी नहीं समझ पायेगी
रचना। ......शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poiet Shailendra Joshi
August 22 · Edited
कन्नु राली गौरा
ऊँचा कैलास
बाबा जी की
जिकुड़ी हुयी
उदास
माँजी आंसू बगैकी
होणी कवांसू
थमी की बि
नि थमणा द्वि
आंसू
सैरा मैत
मुल्क होणी
बरखा आंसू
रचना .........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

सुबह सुबह ले प्राणी फेसबुक का नाम
तर जायेगे तेरे सारे काम
किसी का मैसैज किसी का स्टैटस
से मिलता भांति भांति का ज्ञान
करले प्राणी सुबह फेसबुक का ध्यान
संध्या पुजा आराधना सब तेरो नाम
नहाने धोने से पहले लू तेरा नाम
किसी फोटो लाइक किसी शेयर
ज्यादा ही पसन्द आ जाये तो डाउनलोड कर के पाऊ आराम
कोई जादा ही हो खासम खास इनबॉक्स मे करू हाय दुवा सलाम
तन मन सब मे बसा तू फेसबुक ऐसा धाम
तरजाता मानव लेके तेरा नाम
बच्चे बुढे अधेड़ सब लेते तेरा नाम
सुबह सुबह ले प्राणी फेसबुक का नाम
रचना शैलेन्द्र जोशी