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Story Of Gweljyu/Golu Devta - ग्वेल्ज्यु या गोलू देवता की कथा

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय, April 06, 2008, 10:31:36 AM




Risky Pathak


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

रानी कलिंगा अत्यन्त रूपमती एवं धर्मपरायण थी. राजा उसे अपनी राजधानी धूमाकोट मैं रानी बनाकर ले आए. जब सातों रानियों ने देखा की अब तो राजा अपनी आठवीं रानी से ही ज्यादा प्रेम करने लग गए हैं, तो सौतिया डाह एवं ईर्ष्या से जलने लगीं.

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

कुछ समय बाद यह सुअवसर भी आया जब रानी कलिंगा गर्भवती हुई. राजा की खुशी का कोई पारावार न था. वह एक-एक दिन गिनते हुए बालक के जन्म की प्रतीक्षा करने लगे. उत्साह और उमंग की एक लहर सी दौड़ने लगी. परन्तु वे इस बात से अनजान थे, की सातों सौतिया रानियाँ किस षड्यंत्र का ताना बाना बुन रही हैं. सातों सौतनों ने कलिंगा के गर्भ को समाप्त करने की योजना बना ली थी और कलिंगा के साथ झूठी प्रेम भावना प्रदर्शित करने लगीं. कलिंगा के मन मैं उन्होंने गर्भ के विषय मैं तरह - तरह की डरावनी बातें भर दी और यह भी कह दिया की हमने एक बहुत बड़े ज्योतिषी से तुम्हारे गर्भ के बारे मैं पूछा - उसके कथनानुसार रानी को अपने नवजात शिशु को देखना उसके तथा बच्चे के हित मैं नही होगा.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जय गोलू देवता की जय..

एक हिन्दी फ़िल्म का गाना शायद आप ने सुना है की नही पर पूरा पहाड़ पर बना गया है.. जिसमे चितई गोलू देवता के बार मे मी वर्णन है.

   " ना कोई अक्भर ना कोई बाबर "
     ना यहाँ था हुमायु
   
    सब है यहाँ दिल के सह्जादे
    ये है देश कुमायूं 
   
गाने के बीच मे एक बोल है..

     अल्मोड़ा मे नंदा देवी
   शिव जागे जागेश्वर ..
     "चितई का गोलू देवा माना जाए घर - २......

      ना कोई अकबर ... ना कोई बाबर...

यह बहुत अच्छा गाना है. जो सुर सम्राट यशु दास ने गाया है..

jai गोलू देवता



Quote from: Anubhav / अनुभव उपाध्याय on April 06, 2008, 10:49:27 AM
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