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Story Of Gweljyu/Golu Devta - ग्वेल्ज्यु या गोलू देवता की कथा

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय, April 06, 2008, 10:31:36 AM

पंकज सिंह महर

अनुभव दा,
        बहुत-बहुत धन्यवाद, इस गरिमामय और ऎतिहासिक स्थान के दर्शन कराने के लिये। कुमायूं के न्याय के देवता है गोल्ज्यू, मैं घर आते और जाते समय इनके दरबार में अपनी हाजिरी लगाकर जाता हूं।


जय गोल्ज्यू महाराज!

पंकज सिंह महर

न्याय के देवता: गोलू देवता
गोलू देवता इष्ट देव और न्यायाधीश के रुप में पूजे जातें हैं। भारत के उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित चितई नामक स्थान में गोलू देवता का मंदिर अपने चमत्कारों के लिए सारे विश्व में जाना जता है। न्याय के देवता के रुप में पूजे जाने वाले गोलू देवता का यह मंदिर हजारों घंटियों से ढका है। ये घंटियाँ लोग अपनी मन्नत पूरी हो जाने के बाद यहाँ आकर चढातें हैं। कोर्ट में लंबित मुकदमों में जीत के लिए लोग यहां आकर गुहार करतें हैं और माना जाता है कि गोलू देव दूध का दूध और पानी का पानी कर देतें हैं। आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग उनके इस न्याय को स्वीकार करता है। इस मंदिर में सारे साल कभी भी आकर पूजा की जा सकती है। देश ही नहीं विदेश से भी लोग आकर मन्नत मांगते हैं और कई चमत्कारों को देख कर विदेशी नत - मस्तक हो जातें हैं। जीवन कि व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक, मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक सभी समस्याओं का हल गोलू देवता कर देतें हैं। वास्तव में यह एक चमत्कार से कम नहीं है की एक मनुष्य अपनी सारी समस्याओं का हल एक ही ईश्वर एक ही बार में कर देता है। जब भी आप परेशान हो तो सिर्फ एक बार गोलू देवता से प्रार्थना अवश्य कीजियेगा।

पंकज सिंह महर

चितई गोलू देवता मंदिर

पता:  चितई, अल्मोड़ा
    जिला-अल्मोड़ा, उत्तराखंड-263601
यह चितई में है और अल्मोड़ा बस स्टेंड से इसकी दूरी 8 किलोमीटर है।
आरती/प्रार्थना समय:  सुर्योदय   और सुर्यास्त   
यह मंदिर सप्ताह के सभी दिन खुला रहता है।
सावन के पवित्र महीने में यहां काफी संख्या में श्रद्धालू आते हैं।
अन्य विशेषतायें/:  यहां पर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया जाता है। मनोकामनाओं को कागज के एक टुकड़े पर लिखा जाता है और उसे मंदिर की घंटी से बांध दिया जाता है और मनोकामना पूरी होने के बाद कागज हंटा लिया जाता है। 

पंकज सिंह महर

गोलू देवता:

इसको गोरिल, गौरिया, ग्वेल, ग्वाल्ल या गोल भी कहते हैं।  यह कुमाऊँ का सबसे प्रसिद्ध व मान्य ग्राम-देवता है।  वैसे इसके मंदिर ठौर-ठौर में है, पर ज्यादा प्रसिद्ध ये हैं।  बौरारौ पट्टी में चौड़, गुरुड़, भनारी गाँव में, उच्चाकोट के बसोट गाँव में, मल्ली डोटी में तड़खेत में, पट्टी नया के मानिल में, काली-कुमाऊँ के गोल चौड़ में, पट्टी महर के कुमौड़ गाँव में, कत्यूर में गागर गोल में, थान गाँव में, हैड़ियागाँव, छखाता में, चौथान रानीबाग में, चित्तई अल्मोड़ा के पास।

ग्वाल देवता गी उत्पत्ति इस प्रकार से बतायी जाती है - चम्पावद कत्यूरी राजा झालराव काला नदी के किनारे शिकार खेलने को गये।  शिकार में कुछ न पाया।  राजा थककर और हताश होकर दूबाचौड़ गाँव में आये।  जहाँ दो भैंस एक खेत में लड़ रहे थे।  राजा ने उनको छुड़ाना चाहा पर असफल रहे।  राजा प्यासा था।  एक नौकर को पानी के लिए भेजा, पर पानी न मिला, दूसरा नौकर पानी की तलाश में गया।  उसने पानी की आवाज सुनी, तो अपने को एक साधु के आश्रम के बगीचे में पाया।  वहाँ आश्रम में जाकर देखा कि एक सुन्दर स्री तपस्या में मग्न है।  नौकर ने जोर से पुकारा, और स्री की समाधि भंग कर दी।  औरत ने पूछा कि वह कौन है?  स्री ने धीरे-धीरे आँखे खोली और नौकर से कहा कि वह अपनी परछाई  उसके ऊपर न डाले, जिससे उसकी तपस्या भंग हो जाय।  नौकर ने स्री को अपना परिचय दिया, और अपने आने का कारण बताया।  तथा झरने से पानी भरने लगा। तो घड़े का छींट स्री के ऊपर पड़ा तब उस तपस्विनी ने उठकर कहा कि जो राजा लड़ते भैसों को छुड़ा न सका, उसके नौकर जो न करे, सो कम।  नौकर को इस कथन पर आश्चर्य हुआ।  उसने स्री से पूछा कि वह कौन है?  तपस्विनी ने कहा - "उसका नाम काली है, और व राजा की लड़की है।  वह तपस्या कर रही है।  नौकर ने आकर उसकी तपस्या भंग कर दी।' राजा उस पर मोहित हो गये, और उससे विवाह करना चाहा।  राजा उसके चाचा के पास गये। देखा - वह एक कोढ़ी था।  पर राजा काली पर मोहित थे।  उन्होंने उस कोढ़ी को अपने सेवा-सुश्रुषा से संतुष्ट कर लिया, और वह विवाह को राजी हो गया।  अपने चाचा की आज्ञास से उस स्री ने राजा से विवाह कर लिया।  काली रानी गर्भवती हुई। राजा ने रानी से कहा था कि जब प्रसव पीड़ा हो तो वह घंटी बजावे।  राजा आ जाएगा।  रानियों ने छल से घंटी बजाई।  राजा आये, पर पुत्र पैदा न हुआ।  राजा फिर दौरे में चले गए।  रानी के एक सुन्दर पुत्र पैदा हुआ।  अन्य रानियों ने ईर्ष्या के कारण पुत्र को छिपा लिया।  काली रानी की आँखों में पट्टी बाँधकर उसके आगे एक कद्दुू रख दिया।  रानियों ने लड़के को नमक से भरे एक पिंजरे में बन्द कर दिया। पर आश्चर्य है कि नमक चीनी हो गया।  और बच्चे ने उसे खाया।  इधर रानियों ने बच्चे को जिन्दा देखकर पिंजरे को नदी में फेंक दिया।  वहाँ वह मछुवे के जाल में फंसा।  मछुवे के सन्तान न थी।  ईश्वर की देन समझकर वह सुन्दर राजकुमार को अपने घर ले गया।  लड़का बड़ा हुआ और एक काठ के घोड़े पर चढ़कर उस घाट में पानी पिलाने को ले गया, जहाँ वे दुष्ट रानियाँ पानी भरने को जाती थीं।  उनके बर्तन तोड़कर कहने लगा कि वह अपने काठ के घोड़े को पानी पिलाना चाहता है।  वे हँसी, और कहने लगी की क्या काठ का घोड़ा भी पानी पीता है?  उसने कहा कि जब स्री को कद्दुू पैदा हो सकता है तो काठ का घोड़ा भी पानी पीता है।  यह कहानी राजा के कानों में पहुँची।  राजा ने लड़के को बुलाया।  लड़के ने रानियों के अत्याचार की कहानी सुनाई।  राजा ने सुनकर रानियों को तेल की कढ़ाई में पकाये जाने का हुक्म दिया।  बाद में वह राजकुमार राजा बना।  वह अपने जीवन-काल में ही पिछली बातों को जानने के कारण पूजा जाता था।  मृत्यु के बाद तमाम कुमाऊँ में माना जाने लगा।  वह लोहे का पिंजरा गौरी-गंगा में फेंका गया था।

हेम पन्त


हलिया

जै गोलू देवता की.
अनुभव जी गोलू देवता की आप पर सदैव कॄपा बनी रहे। इस अच्छे कार्य के लिये +१ कर्मा मेरी ओर से भी.


राजेश जोशी/rajesh.joshee

Mahar jyu,
Anubhav bhula le bahut rochak aur gyanvardhak jankari di ye ka lijiy mai le ek karma din chanu.  Par maharaj, I wan to know how to give karma plz.

मेरा पहाड़ / Mera Pahad

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Quote from: rajesh.joshee on April 07, 2008, 03:19:20 PM
Mahar jyu,
Anubhav bhula le bahut rochak aur gyanvardhak jankari di ye ka lijiy mai le ek karma din chanu.  Par maharaj, I wan to know how to give karma plz.

Risky Pathak

Jai Golu devtaaaa.....
Mehar Jew aapne bhi bhot achhi jaankaari di....

Anubhav daa ne to hume ghar baithe baithe.. Lansdown, Kataarmal, Chitai ke darshan Kraa diye.... Anubhav daa lage raho....


Rajesh Jee.... har ek ki Profile ke Niche "Hero" likha hota hai... use click karne par aap kisi ko bhi +1 Karma De sakte hai...