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Story Of Gweljyu/Golu Devta - ग्वेल्ज्यु या गोलू देवता की कथा

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय, April 06, 2008, 10:31:36 AM

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Dear all,

I visited Chitai temple in my recent visit and got a booklet there which contained the story of Gvelju or Golu Devta as per traditional information. Here I am writing the story as per the book of Hari Vinod Pant ji.

अपनी इस उत्तराखंड यात्रा के दौरान मैं चितई मन्दिर अल्मोड़ा भी गया. वहाँ मैंने ग्वेल्जू या गोलू देवता के बारे मैं प्रचलित कथाओं पे आधारित किताब खरीदी. हरी विनोद पन्त जी द्वारा लिखित कथा को मैं आप लोगों के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ.



Anubhav / अनुभव उपाध्याय

हम सबके इष्ट ग्वेल देवता



(श्री गोलू महाराज की संक्षिप्त कथा जनश्रुति पर आधारित)

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

उत्तराखंड के लोकदेवता, यहाँ के जनमानस के इष्ट देव श्री ग्वेल ज्यू, बाला गोरिया, गौर भैरव या ग्वेल देवता की अपनी एक अलग पहचान एवं शक्ति है - इन्हे न्यायकारी, कृष्णावतारीएवं दूधाधारी आदि विशेषणों से विभूषित किया गया है. त्वरित न्याय देने मैं यह विश्वास रखते हैं - फरियादी की फरियाद को सुनते हैं. आज ग्वेल ज्यू को उत्तराखंड मैं ही नही वरन पूरे देश के लोग जानने लगे हैं, और लाखो श्रद्धालु प्रतिवर्ष ग्वेल ज्यू के दर्शन करके पुण्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं.

मन्दिर मैं दी हुई अर्जियाँ / Applications written


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

कुमाऊँ मैं भगवान् ग्वेल ज्यू की प्रसिद्द मन्दिर चम्पावत, चितई (अल्मोड़ा),  तथा घोडाखाल (नैनीताल) हैं. जनश्रुतियों के अनुसार चम्पावत मैं कत्यूरीवंशी राजा झालुराई का राज था. इनकी सात रानियाँ थी. राज्य मैं चहुंओर खुशहाली थी, सभी प्रजाजन खुश थे दुखी थे - तो केवल राजा झालुराई. राजा की सात रानियाँ परन्तु सात रानियाँ के होते हुए भी राजा नि:संतान थे. उन्हें हर वक्त यही बात कचोटती रहती थी कि मेरे बाद मेरा वंश कैसे आगे बढेगा? राजा इसी चिंता मैं डूबे रहते. कुछ दिन बाद राजा ने अपने राजज्योतिषी से अपनी व्यथा कही. राज ज्योतिषी ने सुझाव दिया कि महाराज! आप भैरव को प्रसन्न करें, आपको अवश्य ही सन्तानसुख प्राप्त होगा.

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

राजा ने भैरव पूजा का आयोजन किया और भगवान भैरव को प्रसन्न करने का प्रयास किया. एक दिन स्वप्न मैं भैरव ने इन्हे दर्शन दिए और कहा - तुम्हारे भाग्य मैं संतान सुख नही है - मैं तुझ पर कृपा कर के स्वयं तेरे घर मैं जन्म लूँगा, परन्तु इसके लिए तुझे आठवीं शादी करनी होगी, क्यौंकी तुम्हारी अन्य रानियाँ मुझे गर्भा मैं धारण करने योग्य नही हैं. राजा यह सुनकर प्रसन्न हुए और उन्होंने भगवान भैरव का आभार मानकर अपनी आठवीं रानी प्राप्त करने का प्रयास किया.


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

एक दिन राजा झालुराई शिकार करते हुए जंगल मैं बहुत दूर निकल गए. उन्हें बड़े जोरों की प्यास लगी. अपने सैनिकों को पानी लाने का निर्देश देते हुए वो प्यास से बोझिल हो एक वृक्ष की छाँव मैं बैठ गए. बहुत देर तक जब सैनिक पानी ले कर नही आए तो राजा स्वयं उठकर पानी की खोज मैं गए. दूर एक तालाब देखकर राजा उसी और चले. वहाँ पहुंचकर राजा ने अपने सैनिकों को बेहोश पाया. राजा ने ज्योंही पानी को छुआ उन्हें एक नारी स्वर सुनाई दिया - यह तालाब मेरा है - तुम बिना मेरी अनुमति के इसका जल नही पी सकते. तुम्हारे सैनिकों ने यही गलती की थी इसी कारण इनकी यह दशा हुई. टैब राजा ने देखा - अत्यन्त सुंदरी एक नारी उनके सामने खड़ी है. राजा कुछ देर उसे एकटक देखते रह गए तब राजा ने उस नारी को अपना परिचय देते हुए कहा - मैं गढी चम्पावत का राजा झालुराई हूँ और यह मेरे सैनिक हैं. प्यास के कारण मैंने ही इन्हे पानी लाने के लिए भेजा था. हे सुंदरी ! मैं आपका परिचय जानना चाहता हूँ, टैब उस नारी ने कहा की मैं पंचदेव देवताओं की बाहें कलिंगा हूँ. अगर आप राजा हैं - तो बलशाली भी होंगे - जरा उन दो लड़ते हुए भैंसों को छुडाओ टैब मैं मानूंगी की आप गढी चम्पावत के राजा हैं.

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

राजा उन दोनों भैसों के युद्ध को देखते हुए समझ नही पाये की इन्हे कैसे छुड़ाया जाय. राजा हार मान गए. तब उस सुंदरी ने उन दोनों भैसों के सींग पकड़कर उन्हें छुडा दिया. राजा आश्चर्यचकित थे उस नारी के इस करतब पर - तभी वहाँ पंचदेव पधारे और राजा ने उनसे कलिंगा का विवाह प्रस्ताव किया. पंच्देवों ने मिलकर कलिंगा का विवाह राजा के साथ कर दिया और राजा को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया.