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Today's Thought - पहाड़ के मुहावरों/कथाओं एवं लोक गीतों पर आधारित: आज का विचार

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 08, 2008, 02:02:13 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दोस्तो,

हमारे संस्कृति मे, लोक कथाओ और लोक गीतों मे कई एसे तथ्य है जिनमे से हम कुछ तथ्यों यहाँ पर " आज के विचार" के रूप व्यक्त करेंगे ! जिससे की हमारी संस्कृति को और बढावा मिल सकता है !

आशा है आप एसे तथ्यों को यहाँ पर  आज के विचार" के रूप व्यक्त करेंगे

एम् एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


इस लाइन देखए "

" दुःख दुःख झान कए
"दुःख छो दुनिया क "

इसका तात्पर्य है... 

हर इन्सान इस दुनिया मे दुखी है.. कई बार इन्सान भावनाओ मे बहकर अपना ही दुःख जयादा समझाता है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Hope. .our members would put some kinds of similar thought here.

Quote from: M S Mehta on May 08, 2008, 02:05:19 PM

इस लाइन देखए "

" दुःख दुःख झान कए
"दुःख छो दुनिया क "[/b]

इसका तात्पर्य है... 

हर इन्सान इस दुनिया मे दुखी है.. कई बार इन्सान भावनाओ मे बहकर अपना ही दुःख जयादा समझाता है.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


आज विचार ... . गोस्वामी जी का यह गाने की लाइन

यो मेरो भारत ताज
मेरो कुमाओं गड़वाल
येकी माया नियारी रे ...

हेम पन्त

बहुत सुन्दर

Quote from: M S Mehta on May 09, 2008, 10:18:51 AM

आज विचार ... . गोस्वामी जी का यह गाने की लाइन

यो मेरो भारत ताज
मेरो कुमाओं गड़वाल
येकी माया नियारी रे ...





पंकज सिंह महर

एक लाइन है, जो बरबस याद दिला देती है, पहाड़ की और वहां न रह पाने की मजबूरी की-

छण-छ्ण आंसू आयीं, मुलुक याद मां,
रंगीलो पहाड़ छूटोऽऽऽऽ सुवा, द्वी रोटी कारणे।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Ati sundar mahar ji.

Quote from: पंकज सिंह महर on May 11, 2008, 01:22:26 PM
एक लाइन है, जो बरबस याद दिला देती है, पहाड़ की और वहां न रह पाने की मजबूरी की-

छण-छ्ण आंसू आयीं, मुलुक याद मां,
रंगीलो पहाड़ छूटोऽऽऽऽ सुवा, द्वी रोटी कारणे।