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Today's Thought - पहाड़ के मुहावरों/कथाओं एवं लोक गीतों पर आधारित: आज का विचार

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 08, 2008, 02:02:13 PM

खीमसिंह रावत

उत्तरांचल जन्मभूमि गढ़ कुमाऊ माँ
नौ लाख कत्यूर छेना म्यार पहाड़मा
बागनाथ जागनाथ, बदरी केदार
तुमरा खुतो मे भागी अमृतधारा
गंगाजी कै देखिलियो  म्यार पहाड़मा

khim

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Bahut hi achha prayaas hai yeh. Keep up the Good work. 1 nivedan hai ki saath main Hindi Translation bhi kiya jaae.

हेम पन्त

पितर कि कमै, नातर लिजि..

बुजुर्गों/पुरखों द्वारा किये गये अच्छे-बुरे कर्मों का फल उनकी आने वाली पीढी को मिलता है

पंकज सिंह महर

अल्मोड़े की नन्दादेवी, सौरे की भगवती,
सबखिन दयालु होये, मै खिन लखपती।
नैनीताले की नन्दादेवी, सौरे की भगवती,
सबुहीं दयालु हुये, मैं हुणी लखवती॥

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Pankaj bhai saath main Hindi matlab bhi samjhaya kariye :)

Quote from: पंकज सिंह महर on June 23, 2008, 02:49:52 PM
अल्मोड़े की नन्दादेवी, सौरे की भगवती,
सबखिन दयालु होये, मै खिन लखपती।
नैनीताले की नन्दादेवी, सौरे की भगवती,
सबुहीं दयालु हुये, मैं हुणी लखवती॥

पंकज सिंह महर

स्कन्द पुराण में हिमालय को पॉच भौगोलिक क्षेत्रों में विभक्त किया गया है:-

खण्डाः पत्र्च हिमालयस्य कथिताः नैपालकूमाँचंलौ ।
केदारोऽथ जालन्धरोऽथ रूचिर काश्मीर संज्ञोऽन्तिमः ।।

(अर्थात हिमालय क्षेत्र में नेपाल ,कुर्मांचल (कुमाऊं) , केदारखण्ड़ (गढवाल), जालन्धर
(हिमाचल प्रदेश) और सुरम्य काश्मीर पॉच खण्ड है।)

पंकज सिंह महर

अपनी कृति कुमारसम्भव में कालीदास कहते हैं:

अस्युत्तरस्यां दिशि देवतात्मा हिमालयो नाम नगाधिराज:।
पूर्वापरौं तोयनिधी वगाह्य स्थित: पृथि इवमानदणड:।।

baldev joshi

सभी भाई बहनो को नमस्कर
आप लोगो लिखा धार्मिक और अन्य शास्क्रितिक बहुत खुशी लगा और सिक्ने को मिला और मे मन मे हमारे देबी देवता को जो पुजा करते उस मे भि कोहि ऎसा पुजा करते है जो देबि देवता हमे परिशान करे लेते हॆ यानि दोख कह्ते हॆ. हमरि भसा मे यह क
कैसा लगता है [/font]


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

त्यर पहाड़ म्यर पहाड़
हय दुखो डयर पहाड़
बुजर्गो ले जोड़ पहाड़
राजनीति तोड़ पहाड़
ठेकेदारों ने फोड़ पहाड़