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Today's Thought - पहाड़ के मुहावरों/कथाओं एवं लोक गीतों पर आधारित: आज का विचार

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 08, 2008, 02:02:13 PM

हुक्का बू

पोथी पूरा ये है-----

त्यर पहाड़, म्यर पहाड़, होय दुखों को ड्यर पहाड़,
बुजुर्गों ले जोड़ पहाड़, राजनीति ले त्वेड़ पहाड़,
ठेकदारों ने पफोड़ पहाड़, नान्तिनों ले छोड़ पहाड़।[/red]

Mukesh Joshi

हेके देखि लगई  अपनी देखि नांगी
मेरा बाबे की मति मरे मेखुनी से नि मांगी 
अनुबाद
दुसरे का अच्छा पहना  कर अपनी को नंगा देखा
मेरे बाप की मति मारी गई मेरे लिए ऐसा क्यों नि लाया 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Quote from: mukesh joshi on August 22, 2008, 11:31:50 AM
हेके देखि लगई  अपनी देखि नांगी
मेरा बाबे की मति मरे मेखुनी से नि मांगी 
अनुबाद
दुसरे का अच्छा पहना  कर अपनी को नंगा देखा
मेरे बाप की मति मारी गई मेरे लिए ऐसा क्यों नि लाया 

Ati Sundar Mukesh Ji.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

हिमालो ऊँचा डाना प्यारो मेरो देश
छबीलो गड़वाल मेरो रंगीलो कुमाऊँ[/size]

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज हिमाल तुमन के धत्यूंछौ, जागौ-जागौ हो म्यरा लाल,
नी करण दियौ हमरी निलामी, नी करण दियौ हमरो हलाल।

Mukesh Joshi

प्यारा हिवाला की ऊँची सिराणीयू मा
छिटो न फेक दियो क्वी
सुरता रखीयान याकि .



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिना उन जाना रैया, मेरो पहाड़ माँ बहिना, बुत देखिया रैया !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


वंश मा बुद्धि दे माता मुख मा अम्रत वाणी,
जयति जै-जै ज्वाल्पा माँ जोत जगदी रो तेरी