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Today's Thought - पहाड़ के मुहावरों/कथाओं एवं लोक गीतों पर आधारित: आज का विचार

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 08, 2008, 02:02:13 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720




तू देण होये  बल ..
.तू दुदा धारी छै बल...
तुं संकट हरिये बल   .
..तू बे बाट  कुणी बाट में लये बल 
जै हो ..जै हो,,, जै हो...तेरी सदा जै हो
.इश्टा तेरी सदा जै हो

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पहाड़ी स्याव हम पहाड़ी स्यावों में एक कहावत है-"मुख लुका लुका चाहे भ्यालन पड़ो बज्जर"मुह छिपा लो चाहे पिछवाड़े बिजली गिर जाये!तो महाराज कुछ सियार जो रंगे हुवे थे और बरसात में और कच्चयार मेँ रंग उतर गया तो अब नैतिकता की हुवाँ हुवाँ कर रहे हैं बाकी पक्के सियार उनके नये राग को राग दरबारी मान रहे हैं,क्योंकि दरबार में हूँवां हुवां करना रंगे सियारों को खूब आता है,पर खालिस राग सियार कुछ होता है हम तो यूं हीं मस्ती में हुवाँते हैं जंगल गज्या देते हैं जूठन मिल गयी तो शरीर में मस्ती आ जाती है और एक दूसरे की पूछड़ी बुका देते हैं पिछवाड़ा नहीं बचाते ना मुंह छुपाते हैं।अब हम उनके लिये दुवा करते हैं जिन्हौंने मुंह छिपा लिया और पिछवाड़े बिजली गिरी है।हुवाँ हुवाँ हुवाँ.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

शुभ  प्रभात उत्तराखंड

आइजावा बौडी की वो परदेसी ....२
नरेंद्र सिंग नेगी जी की ऐ लाईने सोचने मै मजबोर करती है आप का क्या खयाला है   

धीरज जा चैणु ऐ ...बोउजी.....२
खैर का दीण ऐ बोउजी सदनी नी रैण  हो

ऋतू ऐणी गैनी... हो हे दीर...२
दीण बुओडी भी आला ....ज्वाणी कखक लुआणी वो ...३       

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मेरा खंड उत्तराखंड !!बड़ा तडपता है !!
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अकसर तो बस यादों मै आता है
यादों मै आकर ख्वाब सजाता है !!
ख्वाब सजकर तो नींद चुराता है
नींद चुराकर अकेला कर जाता है !!
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ध्यानी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

क्या चैदुं त्वे हे पहाड़

पहाडु तैं विकाश चैदुं
जनता तैं हिसाब चैदुं
इन मरियुं यूँ नेताऊ कु
युं दलालु तैं ताज चैदुं
ठेकादारी युंकी खूब चलदी
रुपयों पर युं तै ब्याज चैदुं
गरीबु तै गास चैदुं
बेरोज्गारू तै आस चैदुं
गोरु बाखरों तै घास चैदुं ........राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

Ajay Tripathi (Pahari Boy)


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के

कह रही है झोपडी औ' पूछते हैं खेत भी
कब तलक लुटते रहेंगे लोग मेरे गाँव के
...
बिन लड़े कुछ भी नहीं मिलता यहाँ ये जानकर
अब लड़ाई लड़ रहे हैं लोग मेरे गाँव के

कफ़न बाँधे हैं सिरों पर हाथ में तलवार है
ढूँढने निकले हैं दुश्मन लोग मेरे गाँव के

हर रुकावट चीख़ती है ठोकरों की मार से
बेडि़याँ खनका रहे हैं लोग मेरे गाँव के

दे रहे हैं देख लो अब वो सदा-ए-इंक़लाब
हाथ में परचम लिए हैं लोग मेरे गाँव के

एकता से बल मिला है झोपड़ी की साँस को
आँधियों से लड़ रहे हैं लोग मेरे गाँव के

देख 'बल्ली' जो सुबह फीकी दिखे है आजकल
लाल रंग उसमें भरेंगे लोग मेरे गाँव के....

बल्ली सिंह चीमा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

त्यर पहाड़ म्यर पहाड़ |
त्यर पहाड़ म्यर पहाड़, रौय दुखो को ड्योर
पहाड़ ||
बुजुर्गो ले जोड़ पहाड़, राजनीति ले तोड़
पहाड़ |
ठेकदारों ले फोड़ पहाड़, नान्तिनो ले छोड़
पहाड़ ||
ग्वाव नै गुसैं घेर नै बाड़ |
त्यर पहाड़ म्यर पहाड़ ||
सब न्हाई गयी शहरों में, ठुला छ्वटा नगरो में
पेट पावण क चक्करों में, किराय
दीनी कमरों में |
बांज कुड़ों में जम गो झाड़,
त्यर पहाड़ म्यर पहाड़ ||
क्येकी तरक्की  क्येक विकास |
हर आँखों में आंसा आंस ||
जे. ई. कै जा बेर पास,
ऐ. ई. मारू पैसो गाज |
अटैचियों में भर पहाड़,
त्यर पहाड़ म्यर  पहाड़ ||
    --- हीरा सिंह राण
A very meaningful poem by Heera Singh Rana Ji


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Sherda Anpad's Poem
आम कुणे सुन नाति बख्ताक हाल|
त्यार बुबुक बूब कूँ सी कलजुग आल||
सैणी पैराल फ़िर पैंट सुरयाव|
और मैंसाक ख्वार रौल पैसे धाव||

आम कुणे सुन नाति बुब कै गयी ठिर|
च्योल बाबुक सांख थामोल जुए खातिर||
मैं बाबुक दुश्मन होल उड्येरी च्योल|
सैणीक इशारों पर कदु जै नाचोल||

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Prayag PandeAugust 10अलग उत्तराखंड बनने से पहले के वायदे और अलग राज्य बनने के बाद पहाड़ की आम जनता को हासिल सुविधाओं को लेकर पेश है एक बहुत पुरानी लोकोक्ति -----

बात कैछ गजराज की ,दृष्टि दिखायी बैल |
पाणी पाड़ी कुकुड में ,हात लै च्यापो मैल ||
अर्थात -"आश्वासन दिया हाथी दान करने का ,सामने दिखाया बैल | संकल्प लेते समय मुर्गे के ऊपर पानी छिड़का और देते वक्त अपने हाथ का मैला निकलकर हाथ पर रख दिया |"इस राज्य में ऐसा ही कुछ यहाँ की आम जनता के साथ भी हो रहा है |