• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Today's Thought - पहाड़ के मुहावरों/कथाओं एवं लोक गीतों पर आधारित: आज का विचार

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 08, 2008, 02:02:13 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

यकलु बानर

तू ले पहाडि
मि ले पहाडि
हमरी कहानि
उलटी गंगा ज दिखणि
हे पहाडि दब्याता
कस भाग रचो
ना घर क रयो
ना परदेश क भयो
चार दिन क छुट्टी
फिर अण्यार रात गयो
ना हँसी करो
ना डाँड धरो
सकुशल घर मे रोजगार दयो
भल मति नेता लोगो
पहाड मे दब्यता राज बनो
सुख सम्पन घर परिवार गडो
हँसणि मुखडि ईज (माँ) क रखो
हे पहाडि दब्यता
एक शराप लगो
पहाडि नानतिण घर मे पनपो
दूर देश बे झट दौडि ऐजो
माँ क मुखडि खिलणि रेजो
आँगण मा नान दौडि हेजो
य विनती सुन ल्यु
हे पहाडि दब्यता
नेता क चषु
भल बाटणि क खोलो

''यकलु बानर''
copy right सुरक्षित नही
हम खुद असुरक्षित है

हे पहाडि दब्यता
देखा ये धोखा
नेता कि धोति
हाथ कि लोटि
फोड कपाई
जनता कि रैलि

''यकलु बानर''
copy right सुरक्षित नही
हम खुद असुरक्षित है

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दैणा हुयां,खोली का गणेशा...दैणा हुयां, मोरी का नरैणा.
दैणा हुयां,भूमि का भुम्याला ...दैणा हुयां,पंचनाम देवा .

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रयाग पाण्डे

अलग उत्तराखंड बनने से पहले के वायदे और अलग राज्य बनने के बाद पहाड़ की आम जनता को हासिल सुविधाओं को लेकर पेश है एक बहुत पुरानी लोकोक्ति -----

बात कैछ गजराज की ,दृष्टि दिखायी बैल |
पाणी पाड़ी कुकुड में ,हात लै च्यापो मैल ||

अर्थात -"आश्वासन दिया हाथी दान करने का ,सामने दिखाया बैल | संकल्प लेते समय मुर्गे के ऊपर पानी छिड़का और देते वक्त अपने हाथ का मैला निकलकर हाथ पर रख दिया |"इस राज्य में ऐसा ही कुछ यहाँ की आम जनता के साथ भी हो रहा है |

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कुकर की लादोड़ी दिल्ली
भंगुला की पकोड़ी दिल्ली
सचेई भाई का सों
मानीख यख सोचदा..... कन्क्वे द्वी का दस कमों
ईं लौली निर्भी दिल्ली न गढ़वाल घुली याला
.................
चमोली choondi याला
तेहरी ठून्गारी याला
पौड़ी पतेडी याला
ईं लौली निर्भी दिल्ली न गढ़वाल घुली याला --- kishna bagoht---

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ता ता ताता गास त्वेन सुद्धि नि सळ कण
गिच्चू फुके जालू चुचा भईंत ह्वे जाली

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ऊंचा डाना बटि, बाटा-घाटा बटि,
ऊंचा ढूंगा बटि, सौवा बोटा बटि,
आज ऊंणे छे आवाज,
म्यर पहाड़, म्यर पहाड़ !!
ऊंचा पहाड़ को देखो, डाना हिमाला को देखो,
और देखि लियो, बदरी-केदार
म्यर पहाड़ !
यांको ठंडो छू पांणि, नौवा-छैया कि निशानी,
ठंडी-ठंडी चली छे बयार
म्यर पहाड़ !
जय-जय गंगोतरी, जय-जय यमनोतरी,
जय-जय हो तेरी हरिद्वार
म्यर पहाड़ !
तुतरी रणसिंहा तू सुण
दमुआ नंगारा तू सुण
आज सुणिलै तू हुड़के की थाप
म्यर पहाड़, म्यर पहाड़ !!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

घुघूती बासुती
हल्द बेचीं बलद लायु
मोटा भेर लाल हैरो ...
हल बान के पट. ....
हाय जमाना चल जमाना
हाय जमाना चल जमाना
त्वे जमाना देखि म्यार
दिल जै हैगो खट्ट

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


महान कवि सुमित्रा नन्द की कुमाउंनी कविता

                बुरुंश

   सार जंगल में त्वि ज केन्हाँ रे केन्हाँ
फुलन छै बुरुंश! जंगल जनि जलि जन
सल्ल छ , द्यार छ , पइं, अंयार च
सबनाक फांगन में पुंगनक भारछ,
पै त्वि में दिलैकि आग,त्विमें छ ज्वानिक फाग
रगन में नई ल्वे छ प्यारक खुमारै छ
                सारि दुनी में मेरी सू ज , ल्वे क्वे न्हाँ
                   मेरी सू कैं रे त्योर फूल जैन अत्ती भां
काफल , कुसम्यारु छ , आरू छ , अखोड़ छ
हिसालू-किनमोड़ ट पिहल सुनुक तोड़ छ
पै त्वि में जीवन छ , मस्ती छ , पागलपन छ ,
फूलि बुरुंश ! त्योर जंगल में को जोड़ छ ?
                         सार जंगल में त्वि ज केन्हाँ रे केन्हाँ
                        मेरी सू कें रे त्योर फूलनक्म' सुहाँ

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

.
जख गरूड़ू का पंख बि नि कैरी साका स्वां स्वां,
तख हेलिकोप्टर करणान किरर्र ,किरर्र फुआं फ़ुआं. . .
जनता का पैसों कु भूलों धुआं धुआं .
अर लोग कन्न लग्याई ऊवाँ. . .ऊवाँ. . .

- Dr.Balbir Singh Rawat

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

भुर-भुर उज्याव जसि जाणी रात्ति-ब्याण
भेकूवे  सेकड़ि कसि उड़ी जै निसाण
खित्त कने हसण और झऊ कने चान...
मिशिर हबे मीठि लागी, कार्तिके मौ छे तू!
पूसकि पालनि  जसि, ओ खणयूँणी को छे तू !!