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Today's Thought - पहाड़ के मुहावरों/कथाओं एवं लोक गीतों पर आधारित: आज का विचार

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, May 08, 2008, 02:02:13 PM


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


जब तक ल्वे, तब तक सब क्वे,

यानी,

जब तक शरीर में लहू है, तब तक सब अपने साथ है
(सुख के सभी साथी दुःख ने ना कोई)

Rajen

परदेसी मू रोया ना,
अपणी पत खोया  ना   |

(परदेसी के सामने रोना नहीं, अपनी मर्यादा खोना नहीं)

Meena Rawat

देखिया आदमी ताप्य्या घाम  :D

सेकी हुई धूप के समान आदमी
(जिस तरह धूप रोज आती है उस ही प्रकार ये आदमी भी रोज एक ही बात कहता है )  ;D

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

Muhaware & Lokoktiyun hetu upyukt Kitab "AAN-KATH"
Lagbhag 250 muhawarun ka Sankalan,
Prakashak - Creative Uttarakhand-myor pahad
Contact - 9212692291, 9910532720

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


टक छान त टकटका
नितर झकझाका

पैसे है तो ठीक है, पैसे नहीं है तो भिखारी

यानी

जिसके पास पैसे नही है, उसकी इज्जत नहीं 

Ajay Tripathi (Pahari Boy)

"ज्ञानी जन विवेक से सीखते हैं, साधारण मनुष्य अनुभव से, अज्ञानी पुरुष आवश्यकता से और पशु स्वभाव से" - कौटिल्य

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


आज  का विचार
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जैक जगदीश, वीक के रीस
(जिसके भगवान्, उसका कोई नुक्सान नहीं)

(जिस पर प्रभु की कृपा हो, उसको किसका डर)

Devbhoomi,Uttarakhand

सही कहा महता जी आपने

"जैसे भगवान् छप्पर फाड़ कर देता है,आत्मचिंतन वाला ब्यक्ति सांसारिक सुखों की ओर आकर्षित होता है भद्रा अनिष्टकारी होती है ये सब प्रभु की लीला है"

Ajay Tripathi (Pahari Boy)

Aaj Ka Vichar - "Ye sach hai ke hume dusro ki sahayata karni chahiye,par aisi sahayata nai karni chahiye jis se dusro ka nuksaan(harm) ho."