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Who, Where, Why In Uttarakhand? - उत्तराखंड मे कौन, कहाँ, क्यो?

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, June 11, 2008, 01:44:01 PM

पंकज सिंह महर

उस उत्तराखण्डी महिला का नाम बतायें, जिन्हें दूसरे देश में राष्ट्र माता कहा जाता है?

हेम पन्त

??????
मैं भी उत्तर जानने के लिये उत्सुक हूं..

Quote from: पंकज सिंह महर/Pankaj on February 05, 2009, 05:22:01 PM
उस उत्तराखण्डी महिला का नाम बतायें, जिन्हें दूसरे देश में राष्ट्र माता कहा जाता है?

पंकज सिंह महर

Quote from: H.Pant on February 05, 2009, 05:25:05 PM
??????
मैं भी उत्तर जानने के लिये उत्सुक हूं..

Quote from: पंकज सिंह महर/Pankaj on February 05, 2009, 05:22:01 PM
उस उत्तराखण्डी महिला का नाम बतायें, जिन्हें दूसरे देश में राष्ट्र माता कहा जाता है?

मल्ला कसून, अल्मोड़ा निवासी डेनियल पंत ने १८७१ में ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन अपना मूल नाम "पंत" नहीं छोड़ा। उनकी ही पुत्री थीं, श्रीमती आइरिन पंत, जिनका जन्म अल्मोड़ा में १९०५ में हुआ, इनकी शिक्षा नैनीताल तथा लखनऊ में हुई। इनका विवाह मुजफ्फरनगर निवासी लियाकल अली खान से १६ अप्रैल, १९३३ को हुआ। विभाजन के समय श्री खान सपरिवार पाकिस्तान चले गये और शादी के बाद आइरिन पंत रानी बेगम हो गईं। लियाकल अली खान को पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने, १९५१ में उनकी हत्या के बाद भी श्रीमती आइरिन पंत सक्रिय रहीं और १९५४ में नीदरलैंड में पाकिस्तान की राजदूत नियुक्त हुई। इसके अलावा वे इटली और ट्यूनेदिया में भी पाकिस्तान की राजदूत रहीं। इन्होंने पाकिस्तानी महिलाओं के उद्धार के लिये "आल पाकिस्तान वीमेन्स एसोसियेशन" की स्थापना भी की। इनके सराहनीय कार्यों ही वजह से १९६५ में इन्हें "मदर आफ पाकिस्तान" तथा "वूमेन आफ द वर्ल्ड" और संयुक्त राष्ट्र संघ के "मानवाधिकार पुरस्कार" से सम्मानित किया गया। १३ जून, १९९० को आइरिन पंत उर्फ राना बेगम की मृत्यु हो गई।

Rajen


हेम पन्त

Are waah!! aisi exlusive aur mahatvapoorn janakari ke liye meri taraf se bhi +1 karma ho Maharaj!!!




पंकज सिंह महर

रुड़की में चली थी भारत की पहली रेल

प्रस्तुतकर्ता मुसाफिर जाट http://neerajjaatji.blogspot.com/2008/12/blog-post_25.html
अगर आपसे पूछा जाए कि भारत में पहली बार रेल कहाँ चली थी, तो निःसंदेह आपका जवाब ग़लत होगा। शायद आप कहें "मुंबई से ठाणे" और फ़िर इतिहास भी बताने लगें कि सोलह अप्रैल 1853 को 34 किलोमीटर की दूरी तय की थी। लेकिन ये जवाब तो सरासर ग़लत है। सही जवाब है कि भारत की पहली रेल रुड़की में चली थी।
यह रेल मालगाडी थी। शुरू में तो यह मानव शक्ति से खींची जाती थी,
लेकिन बाद में भाप का इस्तेमाल होने लगा था। इसके विपरीत मुंबई-ठाणे वाली रेल सवारी गाड़ी थी।
1850 में अंग्रेजों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अकाल और सूखे से बचाने के लिए एक नहर परियोजना की शुरूआत की। इसे आजकल गंगनहर के नाम से जाना जाता है। यह नहर हरिद्वार से निकलकर रुड़की, मुज़फ्फ़रनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर होते हुए कानपुर तक चली जाती है।
रुड़की में इस नहर के रास्ते में सोलानी नदी आती है। इस नदी पर पुल बनाना जरूरी था ताकि इसके ऊपर से गंगनहर का पानी गुजर सके। अब यह पुल कोई छोटा मोटा तो बनना नहीं था, कि दो चार लक्कड़ लगा दो, चल जाएगा काम। तो इसके लिए जितने भी कच्चे माल की जरूरत पड़ी, वो पिरान कलियर से आता था। पिरान कलियर रुड़की से लगभग दस किलोमीटर दूर एक गाँव है।
इसमे प्रयुक्त रेल लकड़ी की थी। बाद में जब इसमे भाप इंजन लगाया गया वो भारत का पहला इंजन था। इसकी स्पीड छः किलोमीटर प्रति घंटा थी। यह बाईस दिसम्बर, 1851 को शुरू हुई थी। इसमे केवल दो डिब्बे थे, जो पुल निर्माण की सामग्री ढोते थे। जब हम दिल्ली से हरिद्वार जाते हैं तो रुड़की पार करके सोलानी नदी आती है। सड़क वाले पुल से बाएं देखने पर एक और जबरदस्त आकार वाला पुल दिखाई देता है। यही वो ऐतिहासिक पुल है। इसी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खुशहाली बहती है। आज कल पिरान कलियर भी मुस्लिम धर्म का तीर्थस्थान है।