• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
January 7 at 4:28pm ·

फुरर उड़ि जा हे घुघति,
प्‍यारी सुवा का पास,
राजि खुशी छौं कि ना,
लगिं होलि सास....

ऊ जमानु अब बितिगी,
मोबाईल मेरा पास,
घुघति मू रैबार नि देन्‍दु,
होयिं छ ऊदास.....

कब्‍बि सुवा ऊदास रंदि थै,
आज घुघति ऊदास,
कू देलु रैबार वीं मू,
आज लगिं रंदि सास.....

दिन सब्‍यौं का, औन्‍दा जान्‍दा,
यीं धरती मा, सच्‍ची छ या बात,
हे कनु जमानु ऐगि अब,
कंदुड़यौं फर छन हात.......

भुला मनोज रावत (बौल्या) द्वारा लिख्‍यां गढ़वाळि गीत पढ़िक मेरा कविमन मा यनु कबलाट पैदा ह्वै।
7.1.15

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
January 7 at 1:49pm ·

लग्‍द बग्‍द लग्‍युं छौं,....

मेरा नौना कू ब्‍यो छ,
कखि सौदा पत्‍ता होणु,
न्‍युतेरु तैं न्‍युतु दियेणु,
हबरि मन मा डौर लगणि,
क्‍वी लंगि संगि छूटि न जौ,
वनत मैंन फेसबुक मा,
कार्ड पोस्‍ट करियालि,
जू प्रेमी औण चालु,
हृदय सी स्‍वागत छ....

मेरु ज्‍यु पराण यनु हिछ,
सोचि ब्‍यो पहाड़ प्रेम मा,
अपणा गौं मुल्‍क मा हो,
मेरु गौं, कुल देव्‍ता,
पित्र देव्‍ता,ग्राम देव्‍ता,
मेरा गौं का मनखि,
सैत भारी खुश होला....

पेणी पाणी कू बंदोबस्‍त,
बल दिदा जरुरी होयुं चैंदु,
खराण्‍यां ह्युंद लग्‍युं छ,
तब त ढ़िक्‍याण की भी,
जरुरत कतै निछ दिदा,
सैडि रात मण्‍डाण लगलु,
नाची नाची रात कटलि,
ढ़ोल दमौं मुस्‍क्‍या बाजु,
वेकु बंदोबस्‍त होयुं छ,
अपणि जिंदगी मा मैं,
बैण्‍ड बाजा कू विरोधी छौं,
वैसी प्‍यारु हमारु,
उत्‍तराखण्‍डी ढ़ोल छ....

कवि छौं लिखि दिनि,
मन मा भौंकुछ न सोच्‍यन,
मन की बात पेट मा,
कतै मेरा पचदि नि,
सोचि मैंन लिखि द्यौं,
किलैकि मेरा नौना कू ब्‍यो छ.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
मेरा कविमन कू कबलाट
7.1.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिन बीती जाला

दिन बीती जाला हो हो
दिन बीती जाला ....... २
ये पहाड़ मा
ये म्यार गढ़वाल मा

बस तेर बाटो हेरी रे
कन तेरी ये देरी हो
ये उमरी भरी की खैरी
कब तक मिल इन सैरी रे

दिन बीती जाला हो हो
दिन बीती जाला ....... २
ये पहाड़ मा
ये म्यार गढ़वाल मा

आषाढ़ की भीगी बरखा रे
पुष्प माघ मोरी जानू जदू हो
चैत की मैना कु उल्यार मा
फागुन फूलों फुल्यार रे

दिन बीती जाला हो हो
दिन बीती जाला ....... २
ये पहाड़ मा
ये म्यार गढ़वाल मा

यख समा सुम वार-पार रे
सास ब्वारी रोजी को टांटा बार हो
हुक्कों की गूंजी गुडगुडहाट मा
नान छोरों को राखलादार मा

दिन बीती जाला हो हो
दिन बीती जाला ....... २
ये पहाड़ मा
ये म्यार गढ़वाल मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
January 7 ·
·

नारंगी की दाणी ये

नारंगी की दाणी ये
कन खाणा हुला भगयान
इंथे बैठी सोली सोली की ये

खटी-मीठी खुदी ये
द्वी दिन का समलौण दिन
समधोला ह्वे गेनी ये

सब एक नि रैंदा ये
अकास धरती कब एक वैंदा रे
मगृजाळ कु रच्यूं ये फेरु ये

क्ख्क हर्ची बिरडी गे ये
मेरु गौं मेरु पहाड़ कु बाटू रे
मेरु गढ़ ऐ उत्तराखंड ये

नारंगी की दाणी ये
कन खाणा हुला भगयान
इंथे बैठी सोली सोली की ये

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

क्ख्क लुकी गयं तुम

ऐ रे गेल्या ......
क्ख्क लुकी गयं तुम
मेरी जिकोड़ी चुरेकी
बुरडी व्हैग्युं मि यख
तुमरि बाटा हेर हेरी की
ऐ रे गेल्या ......

कन के हर्ची ऐ मेर जिकोड़ी
तुम दगडी नजरि मिलेकी
अब नि रे ये मेर दुक दुकी
अब त व्हैग्याई बस जी तेरी

ऐ रे गेल्या ......
क्ख्क लुकी गयं तुम
मेरी जिकोड़ी चुरेकी
बुरडी व्हैग्युं मि यख
तुमरि बाटा हेर हेरी की
ऐ रे गेल्या ......

कन जादू के तैन
ये मेर निर्भगी काया पर
में पास व्हैकि बी
नि रैगे औ अब मेरी

ऐ रे गेल्या ......
क्ख्क लुकी गयं तुम
मेरी जिकोड़ी चुरेकी
बुरडी व्हैग्युं मि यख
तुमरि बाटा हेर हेरी की
ऐ रे गेल्या ......

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी with Dhirendra Dhiru Dhapola and 113 others
January 11 ·
·

किले मी हुलु बैठी रुनु

अब बी मै मा कया च बांकी
मी नि जण दूं मै कया इन दडयूं
किले लगी हुली बडुळि ईं तांसी
ये जीकोडी किले झुरनी व्हाली
अब बी मै मा कया च बांकी

डाला की छैयां मिली की बी
किले ई सरीर मेरु इन ऊफानु हुलु
कूच इन दडी व्हालु ये बगता ने बी
अब भैर ऐकि ऊ मि थे किले डराणु हुलु
अब बी मै मा कया च बांकी

इन धगुली टूटी इन दगड़यों मेरी
टूटी की वा क्ख्क बोगी ग्याई
अच कल लगणि जन काणी मेरी
इन काणी अब यख कैंकी ना हो
अब बी मै मा कया च बांकी

तपरणु मी यकुलि अपरी अपर मा
अपरी आगी मा मी छों अब जलणु
किले भागी अपरी मुल्क देश छोड़ी
अब पछतैकी किले मी हुलु बैठी रुनु
अब बी मै मा कया च बांकी
.
एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी w

दूर तक विं सड़की का छोर मा

कु हुलु आनु व्हालु
ये दंडी काण्ठियों मा
हेर दी मेरी आंखी हेर दी
दूर तक विं सड़की का छोर मा

हेरी ले दी ईं आंखी दगड्या मेरी
बिजी जाली ये तांसी बी मेरी
सुकी व्है जालु ये परान मेरु
देके जालु क्वी मेरु तेरु आन व्हालु

सरी माया भोरी ले ईं दंडी मा
उजाळु वहैगे अबै ईं कंठी मा
देक मयादार मुखडी कु हेर
छूछा लाटा मेरा अब ना कैर देर

कद्ग दिन बीती गयां
ना पत्री ना क्वी ठौर रैबार अंयां
कन व्हालु कया खाण व्हालु
मेरे पोट्गी लथड़ु वख कन रैण हुलु

कु हुलु आनु व्हालु
ये दंडी काण्ठियों मा
हेर दी मेरी आंखी हेर दी
दूर तक विं सड़की का छोर मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"


आज गरम् टोपली गरम कोट अर गरम सुलार
तब भी जाडू होणू हाय बेसुमार
रोज रोज फोन मां दयखणा टिम्प रेचर
आज कुछ बढ़ी कि ब्याल्ये की चा।। र
स्यूं सगत रजै मां बि बथों वार पार

तें रजै मां त कब्बि नि ह्व़े छो यन
जें पर छा रुंवाली का ढीन्ढ़l हजार

बिना जुतों की क्वंगळी खुट्टी
अर पाल़ा मां धचाक

न गात ढंगा कपड़ा लत्ता
न ढंगो दसा ण
क्न्क्वे बचे हवला सचि
ब्व़े बुबों न अपणा छ् वरों का पराण

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
January

ब्यखुनी की बेला,अछोन्दु घाम,
लगोंदी रैगे धाऑडी,बिसरयाँ न बाटू,
आवा बौडी ऐ जावा, मुल्क मैती कु।
"मैती"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi

दोस्तीक रिस्त यस छू जो बिराण कें मिलै द्यों,जिन्दगीक हर कदम पर एक नई मोड़ द्यों
सांच दोस्त आफत में तबतलै लै दगौड़ दिनी, जब हामर आपण स्योव लै दगौड़ छोड़ द्यों