• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
22 hrs · Edited ·

द्वी दिन की जिंदगी......

सच माणा न माणा,
सच छ दिदौं,
लग्‍दु यनु सच हिछ,
औन्‍दु मनखि जान्‍दु भी,
खौरि का दिन बितौन्‍दु मनखि,
कनि असंद औन्‍दि छ,
या जिंदगी हमारी,
हैंसौन्‍दि रुऔन्‍दि छ.....

हैंसि हैंसि जिंदगी,
अपणि जीवा,
यांहि मा रंगत भारी छ,
सब कुछ हात हमारा दिदौं,
जिंदगी या प्‍यारी हमारी छ.....

तैं बुरांस की जिंदगी देखिक,
सबक हमतैं लिन्‍यु चैन्‍दु,
ऋतु मौळ्यार मा खिल्‍दु बिचारु,
दुख वेका मन मा भी होला,
हैंस्‍दु छ अर हैंसौंन्‍दु......

भला बुरा कू ख्‍याल रखा,
परमपिता कू ध्‍यान करा,
माता पिता गुरु की सेवा,
जौंका आशीर्वाद सी मिल्‍दा,
द्वी दिन की जिंदगी मा हमतैं,
आशीर्वाद रुपी मेवा.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
मेरी कविता का द्वार आपका स्‍वागत मा ऊगाड़ा छन, कविता मेरी छ, यींकु रंग रुप कू आनंद लेवा, कनि लगि मन की बात लिखा, उत्‍साहवर्धन का खातिर।
रचना स्‍वरचित एवं ब्‍लाग पर प्रकाशित
दिनांक 8.1.15 समय 10 बजि सुबेर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
January 7 at 4:28pm ·

फुरर उड़ि जा हे घुघति,
प्‍यारी सुवा का पास,
राजि खुशी छौं कि ना,
लगिं होलि सास....

ऊ जमानु अब बितिगी,
मोबाईल मेरा पास,
घुघति मू रैबार नि देन्‍दु,
होयिं छ ऊदास.....

कब्‍बि सुवा ऊदास रंदि थै,
आज घुघति ऊदास,
कू देलु रैबार वीं मू,
आज लगिं रंदि सास.....

दिन सब्‍यौं का, औन्‍दा जान्‍दा,
यीं धरती मा, सच्‍ची छ या बात,
हे कनु जमानु ऐगि अब,
कंदुड़यौं फर छन हात.......

भुला मनोज रावत (बौल्या) द्वारा लिख्‍यां गढ़वाळि गीत पढ़िक मेरा कविमन मा यनु कबलाट पैदा ह्वै।
7.1.15

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
January 7 at 1:49pm ·

लग्‍द बग्‍द लग्‍युं छौं,....

मेरा नौना कू ब्‍यो छ,
कखि सौदा पत्‍ता होणु,
न्‍युतेरु तैं न्‍युतु दियेणु,
हबरि मन मा डौर लगणि,
क्‍वी लंगि संगि छूटि न जौ,
वनत मैंन फेसबुक मा,
कार्ड पोस्‍ट करियालि,
जू प्रेमी औण चालु,
हृदय सी स्‍वागत छ....

मेरु ज्‍यु पराण यनु हिछ,
सोचि ब्‍यो पहाड़ प्रेम मा,
अपणा गौं मुल्‍क मा हो,
मेरु गौं, कुल देव्‍ता,
पित्र देव्‍ता,ग्राम देव्‍ता,
मेरा गौं का मनखि,
सैत भारी खुश होला....

पेणी पाणी कू बंदोबस्‍त,
बल दिदा जरुरी होयुं चैंदु,
खराण्‍यां ह्युंद लग्‍युं छ,
तब त ढ़िक्‍याण की भी,
जरुरत कतै निछ दिदा,
सैडि रात मण्‍डाण लगलु,
नाची नाची रात कटलि,
ढ़ोल दमौं मुस्‍क्‍या बाजु,
वेकु बंदोबस्‍त होयुं छ,
अपणि जिंदगी मा मैं,
बैण्‍ड बाजा कू विरोधी छौं,
वैसी प्‍यारु हमारु,
उत्‍तराखण्‍डी ढ़ोल छ....

कवि छौं लिखि दिनि,
मन मा भौंकुछ न सोच्‍यन,
मन की बात पेट मा,
कतै मेरा पचदि नि,
सोचि मैंन लिखि द्यौं,
किलैकि मेरा नौना कू ब्‍यो छ.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
मेरा कविमन कू कबलाट
7.1.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
January 6 at 4:44pm ·

ह्युंद का दिन लग्‍यां,
हरि बोला जी,
जाडडु भौत होणु छ,
आंखा कंदूड़ खोला जी....

लत्‍ता कपड़ा खूब पैरा,
शरील ढ़कै रखा जी,
चुल्‍ला की आग तापा,
मोटी रजै ओढा जी....

गरम सरम खूब खवा,
थोड़ी थोड़ी पेवा जी,
ढिक्‍याण मुख रखिक,
फंसोरिक सेवा जी....

आलु मौळ्यार जब बौड़ि,
ह्युंद तैं अड़ेथा जी,
हर ऋतु कू अपणु मजा,
भला भाग हमारा जी.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु",
मेरा कविमन कू कबलाट कविता का रुप मा
दिनांक: 6.1.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
December 26, 2014 at 9:40am · Edited ·

It's been a great year! Thanks for being a part of it.
फेसबुक ने ये कहा...

मैं बोन्‍नु छौं, मंगलमय हो आपतैं नयुं साल,
जुगराजि रयन हमारु, कुमाऊं अर गढ़वाल,
होणि खाणि खूब हो, राजि रौ सब्‍यौं कू घर परिवार,
जाणा छौं हम नयां साल की तरफ, 2014 का पार.....
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु, 26.12.2014

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु 
December 15, 2014 at 11:34am ·

मन मा भारी सेळि पड़ी,
मिल्‍यन जब कविमित्र प्‍यारा,
मैकु खुशी ह्वै अति भारी,
मेरा आंखौं का छन तारा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी with Geeta Chandola and 127 others
December 30, 2014 at 4:47am ·

मेरु पहाड़ मेरु संगे

मेरु पहाड़ मेरु संगे
मेरु पहाड़ मेरु संगे
यकलु यो यकलू मी
ना क्वी हम थे मिलने
दुकी पण क्वी नि संगे
सुक ना देकि यक कबि हमने
मेरु पहाड़ मेरु संगे
यकलु यो यकलू मी
ना क्वी हम थे मिलने

कन कांडा पौड़ी यख
तू बी क्ख्क रौडी गे गंगे
यूँ ह्यूं चलूँ थे यकलू
तू बी क्ख्क छोड़ी गे गंगे
अपरू झोळू अपरू संगे
भगा अपरू ना मिलने
दुकी पण क्वी नि संगे
सुक ना देकि यक कबि हमने
मेरु पहाड़ मेरु संगे
यकलु यो यकलू मी
ना क्वी हम थे मिलने

इन जली हम यकुला ही
क्वी हम थे ठंडो करी ना पैई ना
घुम्या दोई यकुलाई ये
अपरा क्वी यख छेई ना
जनी ये घाम जनि छाया
एक साथ जनि कबी ना मिलने
दुकी पण क्वी नि संगे
सुक ना देकि यक कबि हमने
मेरु पहाड़ मेरु संगे
यकलु यो यकलू मी
ना क्वी हम थे मिलने

कन जुनि ये कन जुनि मी
कै बाटा मा हम हिटण ना लग्यां
ना मिली मी ना मिली ये हम थे
जो बाटा कबि हुम्लु थे बनया
क्ख्क बिरदी व्हाली वा माया
ये जिकोडी हम थी मिलली ना
दुकी पण क्वी नि संगे
सुक ना देकि यक कबि हमने
मेरु पहाड़ मेरु संगे
यकलु यो यकलू मी
ना क्वी हम थे मिलने

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दिन बीती जाला

दिन बीती जाला हो हो
दिन बीती जाला ....... २
ये पहाड़ मा
ये म्यार गढ़वाल मा

बस तेर बाटो हेरी रे
कन तेरी ये देरी हो
ये उमरी भरी की खैरी
कब तक मिल इन सैरी रे

दिन बीती जाला हो हो
दिन बीती जाला ....... २
ये पहाड़ मा
ये म्यार गढ़वाल मा

आषाढ़ की भीगी बरखा रे
पुष्प माघ मोरी जानू जदू हो
चैत की मैना कु उल्यार मा
फागुन फूलों फुल्यार रे

दिन बीती जाला हो हो
दिन बीती जाला ....... २
ये पहाड़ मा
ये म्यार गढ़वाल मा

यख समा सुम वार-पार रे
सास ब्वारी रोजी को टांटा बार हो
हुक्कों की गूंजी गुडगुडहाट मा
नान छोरों को राखलादार मा

दिन बीती जाला हो हो
दिन बीती जाला ....... २
ये पहाड़ मा
ये म्यार गढ़वाल मा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 3 at 9:32pm ·

म्येरा सब्द मेरा बोल म्येरा आंखर
सब ठगे का ठगाया रै गिन
छोरी तेरा रूप का ऐथर
निथर मिन कन्नी कन्नी
बांधो मा रच्या छिन
गीत भला भला
कै की होली इनी स्वाणी रचना
छंद आलंकर भी सोचणा
त्येरा रूप देखी छंदो तै छंद नि आणू
कलम कंठ का सरोकार एक बार
देखी देला त्येरा रूप ज्यूत
फूल चाँद सूरज की उपमा
बिसरी की त्येरी ही उपमा देला
कन्ना कन्ना फोरमेट मा ढालीन
मिन गीत कविता
त्येरा रूप देखीक
ऐथर यी कवि ह्वे ग्या रीता
रचना .............. शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
January 9 at 8:03pm ·

म्येरा सुरों मा बसी
सरसुती भगबती
ज्यू भि रयेकी गयेकी
होली गौला मा म्येरा
गीत गै गैकी
करलू माँ सरसुती
त्येरी इस्तुती
कृपा रखी सरसुती
कंठ गौला मा म्येरा
त्येरी किरपान सुणदा
लुग गीत म्येरा
गौला मा बिराजी रै तू
यी जलम आखिर साँस तक
साधना सुरों बिटी करदु रालु
सरसुती माँ भगबती
गंगा सुरों कि जमुना गीतू कि
बगदी रा समोदर दुन्या मा
बसी रै तू बस म्येरा गौला मा
सरसुती भगबती
ज्यू भि रयेकी गयेकी
होली गौला मा म्येरा
गीत गै गैकी
करलू माँ सरसुती
त्येरी इस्तुती
रचना .........शैलेन्द्र जोशी