• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
April 7 at 10:37pm ·

बाकी कुछ याद नही

वो स्कूल
वो जमाना
वो पनघट
वो आम का पेड़
वो स्कूल मेरा पुराना
वो याद है पहला दिन
वो अब भी मुझे
वो पाणी सैण स्कूल में जाना
वो उम्र कुछ पांच ,छह होगी
वो बस्ते अंदर स्लेट खडु थे
वो साथ एक पोटली बांध रखी थी
वो कुछ घी रोटी ,गुड़ के टुकड़े थे
वो बंधा था मेरी माँ ने
वो पोटली उसने अपने स्नेह से
वो स्कूल के उस पहले दिन में
वो बस याद है अब इतनी बाकी
वो स्कूल की
वो बीच की छुट्टी
वो बैठ था मध्यान में
वो आम के पेड़ तले अकेल
वो हाथ में थी
वो ही गुड़ और रोटी माँ की
वो स्वाद
वो अब भी जुबान में मेरे
वो मेरी माँ के स्नेह की
और बाकी कुछ याद नही

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
April 9 at 7:09am ·

अब तो मै हूँ

अब तो मै हूँ
और बस मेरा पहाड़ यंहा
कह दे ये दिल तुझे किस से है प्यार यंहा
बता ना बता ना
ऐ दिल अब तो बता
अब त बता ... बता दे
अब तो मै हूँ
और मेरा पहाड़ यंहा

ना शरमा ना यूँ नजरें छुपा
पलके उठा
मुख से नही तो
अपने आँखों से कहते जा
अब त बता ... बता दे
अब तो मै हूँ
और मेरा पहाड़ यंहा

देख तेरी ये ही बात
कर गई दीवान मुझे
वो मेरी पहाड़े की बांद
ना इन तू इनि दिल लुछी जा
अब त बता ... बता दे
अब तो मै हूँ
और मेरु पहाड़ यंहा

ना तो बोलेगी
बस वो तेर गलोड़ी हसेगी
तेरे दांतों के उजाले में
बस वो मुखडी त देखेती जा
अब त बता ... बता दे
अब तो मै हूँ
और मेरु पहाड़ यंहा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
9 hrs · Edited ·

पहाड़ पत्थर

खाली खाली सा देखने लगा
कुंठित मन अब खुद से कहने लगा है

दर्पण साफ़ और स्वच्छ था कभी मेरा
अब मैला सा वो क्यों लगने लगा है

तन्हाई तो बात करेगी जरूर मुझसे
लेकिन वो भी अब चुप रहने लगी है

देखों जिधर भी सन्नाटा सा पसरा है
वीराना वीराने से अब जा खटका है

पहले तो गुफ्तगू होती थी अक्सर
लेकिन वो मुलाकातें अब पीछे छूटी हैं

अब तो डर कहीं यूँ ना खो जाये हम
पहाड़ थे कहीं पत्थर ना हो जाये हम

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali classes " गढ़वाली छुईं " मा आज हम पढ़ला महिमानंद ममगाईं जिक एक लोकप्रिय रचना " ऊँचि डांड्यू तुम नीसि जावा "

ऊँचि डांड्यू तुम नीसि जावा

रचनाकार: महिमानंद ममगाईं

ऊँचि डांड्यू तुम नीसी जावा
घणी कुलायो तुम छाँटि होवा
मैकू लगी छ खुद मैतुड़ा की
बाबाजी को देखण देस देवा
मैत की मेरी तु त पौण प्यारी
सुणौ तु रैवार त मा को मेरी
गडू गदन्य व हिलाँस कप्फू
मैत को मेर तुम गीत गावा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी with Gokul Negi and 100 others
Yesterday at 5:12am ·

वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
वैका पहाड़ी कबीत वैका हुला
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

जाणा छे दूर वै भ्तेक दूर भांडी दूर
कबीत ऊ दूर गयां वै का पास पैतण हुला
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

वैकि ब्यारा तब वैकि हुली
जबै वैकि दीदी भूली वैका पास ना यकुली हुली
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

जब वैकि खुद तेथे लगी व्हाली
घुघूती घुरेली बुरांस वैका पास फुलेली व्हाली
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

ऐई आस मा ऊ कबी भ्तेक बैठ्युं छया
वैकी जग्वाली मा सदनी आप्ड ही छया
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
April 13 at 4:41am ·

अब बी खोज्नु छों मि

अब बी खोज्नु छों मि
म्यारा हर्ची
केदारा बाबा त्यारा दयाल मा

कख तू ऊँ थे बोगी लेगे तू
कख लगे तू
ऊँ थे अपरा साथ मा

अब बी मेरु बिस्वास ना मोरी
अब बी जणू मी दौड़ी
दौड़ी की त्यारा दयाल मा

तू ओंथे मिललु मैसे
ना मिला सकै मैसे
मी थे बी बोगे दे ऊ धार मा

दोई घड़ी तू ऐक ले
मेरु देबता ध्यान धैरी, ना ऐ फिर
इन घड़ी त्यारा दयाल मा

अब बी खोज्नु छों मि .........

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु
वैका पहाड़ी कबीत वैका हुला
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

जाणा छे दूर वै भ्तेक दूर भांडी दूर
कबीत ऊ दूर गयां वै का पास पैतण हुला
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

वैकि ब्यारा तब वैकि हुली
जबै वैकि दीदी भूली वैका पास ना यकुली हुली
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

जब वैकि खुद तेथे लगी व्हाली
घुघूती घुरेली बुरांस वैका पास फुलेली व्हाली
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

ऐई आस मा ऊ कबी भ्तेक बैठ्युं छया
वैकी जग्वाली मा सदनी आप्ड ही छया
वैन बी त एक सुप्निया देखी हुलु

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
April 13 at 4:41am ·

अब बी खोज्नु छों मि

अब बी खोज्नु छों मि
म्यारा हर्ची
केदारा बाबा त्यारा दयाल मा

कख तू ऊँ थे बोगी लेगे तू
कख लगे तू
ऊँ थे अपरा साथ मा

अब बी मेरु बिस्वास ना मोरी
अब बी जणू मी दौड़ी
दौड़ी की त्यारा दयाल मा

तू ओंथे मिललु मैसे
ना मिला सकै मैसे
मी थे बी बोगे दे ऊ धार मा

दोई घड़ी तू ऐक ले
मेरु देबता ध्यान धैरी, ना ऐ फिर
इन घड़ी त्यारा दयाल मा

अब बी खोज्नु छों मि .........

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अबी तक देख बाट हेनु छ

बोव्ली मिल बोव्ली
मिल ब्याल ही बोव्ली
ये घुंगतु दीदा आच कल अपरा पहाड़े मा
खूब घंगतोल म्च्युं छ

रैगे नि क्वी अपरू
सबै बिराणा हुयाँ छन
मया का डाल मा सबै
उत्तांडू व्है की लटक्या छन

डिस ऐंटिना की छातु
बोल्दा प्रगति बाटा खोल्यां छन
ब्वारी सासु का घार घार टिवि मा
अब हिंदी सीरयल लग्यां छन

पैली जनि नि मिल्दा लोक
सब शिस्टाचार बिसरी गया छन
पितला कंस्यं को भण्डा
अब उबरा लुक्यां धरयां छन

देशी बिदेशी का बजार लगया छन
तुण्ड व्हैकि स्कुल नौना रुलों मा पड्या छन
सरकार अपरी सरकर बस ऐ करनी च
घोषणा बस घोषणा कु अंबार लग्यां छन

कन कै हुली प्रगति पहाड़े मा
१४ बरस बाद अब बी बिचार करणा छन
अब्जों टक्कों को ये पहाड़ बस
वै कु अबी तक देख बाट हेनु छ

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
8 hrs ·

काफल लगे हैं पकने

काफल लगे हैं पकने
बुरांस लगे हैं वो खिलने
धुप लगी जब पिघलने
पहाड़ लगे अब सजने

नित नया रूप धर लेता
वो सारे दुःख हर लेता
जब लीची लगे ललचाने
फिर पहाड़ लगे बुलाने

काँटों काँटों पे बहार आयी
फूलों ने ली फिर अंगड़ाई
उजाड़ आज कैसा खिला
कोई बिछड़ा हो उससे मिला

गर्मी में चहल पहल होती
वो साल भर का इंतजार होता
आमदनी कुछ मेरी होती
चेहरा पे सबका निखार होता

चार महीनों की वो रौनका
झट तुरंत समाप्त हो जाती
फिरा ना कोई संगी साथी
मै ही दूल्हा मै ही बाराती

काफल लगे हैं पकने। .....

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित