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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
May 1 at 11:58am · Edited ·

बोडि बोन्‍नि छ.....

बेटा आज कू जमानु,
भौत भलु छ,
पुराणु निथौ,
वे जमाना मैं,
तेरा बोडा दगड़ि,
दिल्‍ली गै थौ,
तब मैंन चप्‍पल पैर्यन,
जब गौं वापिस अयौं,
गौं सी पैलि मैंन,
चप्‍पल लुकैयालि था,
क्‍या बोलला लोग....

आज मैमु,
यू मोबाईल छ,
सब्‍यौं दगड़ि,
बात ह्वै जांदि,
खुद मिटि जांदि,...

स्‍वर्ग मा भी,
जू मोबाईल सेवा होन्‍दि,
तेरा बोडा कू नंबर होन्‍दु,
मैं तेरा बोडा दगड़ि,
बात करि सकदु,
आज कू जमानु,
भौत भलु छ,
बोडि बोन्‍नि छ.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
मेरा कविमन की कुतग्‍याळि,
दिनांक 1.5.15

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
May 1 at 10:52am ·

कथ्‍गा लम्‍डि होला....

तुमारा पिछनै,
ज्‍वानि का दिनु मा,
ऊन बोलि,
उबरि मैंन,
पिछनै नि देखि,
अफु लम्‍डि होला,
मैकु पता निछ,
मैन क्‍वी नि लम्‍डाई,
न मेरा मन मा,
कब्‍बि ख्‍याल आई,
एक हि लम्‍डाई,
जीवनसाथी बणाई.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
मेरा कविमन की कुतग्‍याळि,
दिनांक 1.5.15

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
May 1 at 10:29am ·

तेरी मौसी.....

पुराणा जमाना की बोडी,
नौनी दगड़ि,
पहाड़ सी परदेश गै,
वख नौनी का कमरा फर,
वीन ऐना फर अपणि,
अन्‍वार देखि,
बोन्‍न लगि बेटी कू,
हे बेटी यख देख,
तेरी मौसी......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
मेरा कविमन की कुतग्‍याळि,
दिनांक 1.5.15

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
May 1 at 11:58am · Edited ·

बोडि बोन्‍नि छ.....

बेटा आज कू जमानु,
भौत भलु छ,
पुराणु निथौ,
वे जमाना मैं,
तेरा बोडा दगड़ि,
दिल्‍ली गै थौ,
तब मैंन चप्‍पल पैर्यन,
जब गौं वापिस अयौं,
गौं सी पैलि मैंन,
चप्‍पल लुकैयालि था,
क्‍या बोलला लोग....

आज मैमु,
यू मोबाईल छ,
सब्‍यौं दगड़ि,
बात ह्वै जांदि,
खुद मिटि जांदि,...

स्‍वर्ग मा भी,
जू मोबाईल सेवा होन्‍दि,
तेरा बोडा कू नंबर होन्‍दु,
मैं तेरा बोडा दगड़ि,
बात करि सकदु,
आज कू जमानु,
भौत भलु छ,
बोडि बोन्‍नि छ.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
मेरा कविमन की कुतग्‍याळि,
दिनांक 1.5.15

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फ़ज़िल कु गीत

ह्वेगी झुक मुक
उट्ठ अब उट्ठ
झुलकि खुज्यो मुण्ड ढको
लम्प बजो मार फूक

गात्ति लगो लुस्यान्दू पागड़ू सम्भाळ
छाटणु गाड़ पकड़ गञ्ज्याळ

पोंछ उर्ख्याला झट पट
ह्वेगी झुक मुक उठ अब उट्ठ

ढोंडू बूसू वखळी उमजो
चोट्टि मार गों जगो

छटणि लगो कूटण की कर छवीं
इखरोंण दुरोंण बिटि छट्ट छाड़
दिख्यो न क्वी बीं

घोस लीप चुल्लू जगो
चा बणो। गुट्ट। मुट्ट
ह्वेगी झुक मुक
उट्ठ अब उट्ठ

(Uma bhatt)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अन्यारी राता मा

अन्यारी राता मा
तू कैले मेसै बाता

हेर त्यूं भूली
ऊ ह्यूँद व्हाली चूली
चमकन लागि हुली
जन रात गैना

अन्यारी राता मा
तू कैले मेसै बाता

चौख्टीय बाटू हेरि
फिर घिर ऐगे चौमास
यकुली परानु भूलि मेरु
झट छविं लगाण ऐजा

अन्यारी राता मा
तू कैले मेसै बाता

ऊ क्या देलो हैका शुख
वैकु नि रैगे अब अता पता
भैम व्हैगे थे मिथे भूली
झट तू दौड़ी की मै पास ऐजा

अन्यारी राता मा
तू कैले मेसै बाता

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अछोदो बैठी हुली बोई मेर

अछोदो बैठी हुली बोई मेर
ऐगि हुलु ओडल ऊ डाँडो पार
पुंगडु ओड़ा मा कु ऐन्ठू हुलु
इज्रान व्हैजा बांज पुंगड़ी मेरी

कटुला कटील भूमि म्यारी
कुल्यान्दा व्हैजा स्यारी स्यारी
गंग्लोडा कु गधेरा गोळ ढुंगा
गड्डी गोट ऊ गयुंवाडी कु सारा

मरसा तिल रीखु कि स्वगाडी
हल्दू आदु चणा और्री ऊ सुंठा
पिंडालू भांग्लू तैल्डू कु ऊ बाड़ा
खरक मरडा कु पसरया बग्वाल

गंज्याला घरया चोपडी छाछरो
गाड़ कु जवाडा छोप्न्य्या छर्रों
बिच्ल्या बुणया बीजवाड रौली
तप्पड भ्विमुंडा बिच्छा कु धार

अछोदो बैठी हुली बोई मेर ...............

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपरी तिबरी डांड्याली

अपरी तिबरी डांड्याली
मा तू ऐजा
सुरुक ऐकी
सिन्कोली निरजक
तू सैजा

झक्क झौं
ई दुनिया मा
त्यागी दे तू
सब मोह माया
ये मा अटकी
बल कैल कया पाया

अपरी तिबरी डांड्याली
मा तू ऐजा
सुरुक ऐकी
सिन्कोली निरजक
तू सैजा

सब कुच
यखी च
वख कुच बी
नि च तेरु
अपरा मा मिसणा कु
सब छोड़ी ऐजा

अपरी तिबरी डांड्याली
मा तू ऐजा
सुरुक ऐकी
सिन्कोली निरजक
तू सैजा

खुद लगी व्हाली
वख ते थे यकुली
मिथे यख
तेर बडुळि लागि
कैल कया कण
सब किस्मत का फेर

अपरी तिबरी डांड्याली
मा तू ऐजा
सुरुक ऐकी
सिन्कोली निरजक
तू सैजा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi
 

सिद्द-साद्द मैंस म्यार पहाड़ाक शुद्ध हों उनौर चित ।
सब मनखियोंक आदर करनी दुश्मण हवो या मित॥

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi


सुखैकि इच्छा वालों कै विद्याक और विद्याक इच्छा वालोंकें सुखौक त्याग करिदिण चै किलैगि सुख चाणीयां कें कभ्भें विद्या निमिलनि और विद्याक इच्छा वालोंकें हमेसा सुखै मिलों।