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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
May 7 at 1:12pm ·

गौं का गौं....

खाली होणा,
अर बजेंणा छन,
निर्दयी ह्वैग्‍यन,
मनख्‍यौं का मन......

द भै ऊदौळि सी ऊठणि छन......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु,
दिनांक 7.5.15
रचना सर्वाधिकार सुरक्षित,
अवलोकनार्थ स्‍वागत छ आपकु...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 11 at 11:34pm ·

बिनसिरौ घाम
सुबैरो घाम
दुफरौ घाम
ब्याखुनी को घाम
तपैकी घमैकी
अछले जांदू पर
नयी तकनीक से पैदा ह्यु
रातों घाम मनमर्जी कु च
जब तक चैल्या तपल्या घमेल्या
चका चौंध हुयी च दीदा ................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 13 at 9:19pm ·

झेंगु झेंता झेंगु झेंता
मंत्री जिन ढोल बजैकी
बोली द्यब्ता का भरोसा रा
जात मा जा
जागर लगा
द्यब्तो तै जगा
म्येरा भरोसा न रा
मैसे कुछ नि हुण भैजी
हम पाणी लुट सकदा
पत्थर कूट सकदा
पर गौली तर नि कर सकदा तुमरी
सुगम दुर्गम का फेर मा
ट्रांसफरै मलायी खै सकदा
परैवैट इस्कुल्या दूकान खोल सकदा
अब इत्गा त करना छा
अब कत्गा करन
मंत्री छा द्यब्ता नि
चुनौ आण दया
दय्ख्दा फेर
हैकी जात मा होली अब बात
तब तक ढोल बजैकी
झेंगु झेंता झेंगु झेंता.................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 6 at 10:24pm ·

पाणी घुसी नैर मा
बिजली मैदान सैर मा
द्वि छालों का बीच
पाड़ी नदी सुखा गादेरा हुया
बस दुंगा रेता रौखड रैया
गंगलोड़ा सी भी जादा
उंका मुंड ऐंच
ट्रक डम्फर जेसबी वल्ला हुया
रचना ............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 मन मा भाषा प्रेम छ,
लिख्‍दा मन की बात,
शैलेन्‍द्र जी की या बात भलि,
ज्‍व छ हमारा हात.....

मनखि कू जल्‍म होन्‍दु छ,
करु भाषा संस्‍कृति कू श्रंगार,
जब जब पढ़दु रचना शैलेन्‍द्र जी की,
खुशी होन्‍दि अपार....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु,
दिनांक: 9.3.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

श्रीनगर का सैण मा,
मेरा कविमित्र,
शैलेन्‍द्र जोशी जी,
शैल पर्वतु का बीच मा,
जख अलकनंदा बग्‍दि,
सृजन यात्रा कन्‍ना छन,
भौत खुश होन्‍दु,
मेरु यू कविमन......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
29.1.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ये गद्नि छम छम

कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

ऊ ह्युंद चुल्युं मा
ये ऊंचा निसा डंडि-कांठि
अपरी अपरी लगादी वा
झट बिराणी व्है जांदी
कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

चल जोंला
द्वि दीदी भूली
छकेकि विं की तस्बीर थे
यूँ आंखां मा टिपि ओंला
कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

रोलां खोलों मा
हिंसालों दानी, डालों डालों मा
ढुंगा गारों मा लपक छपक कैकि
हैराली पस्यारी स्यारी स्यारी मा
कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

देख ऐकि मेर माया कु चित्र
सरया पसरयूं च ये मेर पहाड़ मा
कैन ऐकि रंगी गै हुलु ये सारू
बस यख ऐकि एक रात मा
कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ई दुनिया कु

ई दुनिया कु
यात्रा मा मि अलझिग्युं
समझे ना बिंगी ना मि
कन के मि ऐमा अटकीग्युं
ई दुनिया कु

कख भत्तेक ऐई ये बाटा
ये बाटा मा मि बिरदीगयुं
सुख दुःख की बरखा मा
यखुली यखुली मि भिगीग्युं
ई दुनिया कु

ना मि हैसणु चैंदु
ना मि अब रुणु चैंदु
कुच अपरू कु यख बिराणू
ऐ घोलमा अब यख पिसीग्युं
ई दुनिया कु

माछा मि बिन पाणी कु अब
अपरी अपरा मा तड़पीग्युं
ना उघडि स्की मेसे ऊ लुक्यां भेद
मि वै खोल मा अब लुकीगयुं
ई दुनिया कु .........

बालकृष्ण डी ध्यानी
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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
May 15 at 8:21am ·

पड़ै लिखै कया कनु जी

पड़ै लिखै कया कनु जी
जाणा भैर देश
ये गढ़वाल मा कया रख्युं च
ढुंगा गारा बच्या शेष

पड़ै लिखै कया कनु जी हो ...अ

नक़्ल कैरी पास हुंया जी
टीचरों को मोरी गैत
एक टीचर सर्या स्कुल मा
अब व्हैगै पाड़ों की विद्या गैर

पड़ै लिखै कया कनु जी हो ...अ

कन कै हुनु किले की हुनु जी
प्रगति नौ को बस ठेला म ठेल
करोड़ टक्का विज्ञापन मा फुकी गै
नेतों पुट्गी भोरीगे थेट

पड़ै लिखै कया कनु जी हो ...अ

सब इनि ही अब सोचण जी
मिल बी किले मोडम धरण तेल
ई अब दुनिया तेल मलिस की
ज्याद बोव्ली हो जाली जेल

पड़ै लिखै कया कनु जी हो ...अ

पड़ै लिखै कया कनु जी
जाणा भैर देश
ये गढ़वाल मा कया रख्युं च
ढुंगा गारा बच्या शेष

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
May 13 at 11:31pm ·

दुई रुटी का बाना

दुई रुटी का बाना
लाटा दुई रुटी का बाना
क्द्गा ऊकाळ सैरी....... २
दुई रुटी का बाना

आच बी जबै
याद आंदि वा खैरी
बस तेर मुखड़ी देखिकी
मेरे दुःख सब बगे देन्दी
दुई रुटी का बाना

लखडु घासु को आंदा जाँदा
खुठी जबै जबै रुपै ऊ कांटा
ते बगत याद आंदि तेर भूकी पोटी
सब पीड़ा मेर बिसरी दिंदा
दुई रुटी का बाना

आच कोई बी नीच पासा
सब्यां छुट्यां जन सब धागा
अब बी जबै ऐ जांदू तै रैबार
विंच मेरु जियूं णु कु आधार
दुई रुटी का बाना

दुई रुटी का बाना
लाटा दुई रुटी का बाना
क्द्गा ऊकाळ सैरी....... २
दुई रुटी का बाना

बालकृष्ण डी ध्यानी

देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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