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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
May 13 at 8:29am ·

मन मेरु बोलणु जी

माया दाड़ी चा जी
ईन तेर मयाल्दी अँखियुं मा
सुण ले कथा मेरु जी कु जी
ऐजा कबीत ईं जिकोड़ी कु बाटू मा

माया दिकि छे ईं तेरी स्नेयुं की
ऊँ डंडि काण्ठियों की ईं उकाली ऊँदारीयूँ की

पिरती की गेढ़ मरीं चा
ई अल्य पल्य भितरी जी
ऐजा ऐकी खुलि ले
अपरा ईं दोईयां हाथों दगडी

माया दिकि छे ईं तेरी स्नेयुं की
ऊँ डंडि काण्ठियों की ईं उकाली ऊँदारीयूँ की

पहाड़ को मिथु पाणी
जानी तेरु माया जी
बरखा को बादल जनि
ठण्डु तेरु छैलू जी

माया दिकि छे ईं तेरी स्नेयुं की
ऊँ डंडि काण्ठियों की ईं उकाली ऊँदारीयूँ की

मन मेरु बोलणु जी
ऐजा अब मेरु अंग्वाळ मा
देख तेर मुखडी जब से
सुध-बुध मेरी हर्ची चा

माया दिकि छे ईं तेरी स्नेयुं की
ऊँ डंडि काण्ठियों की ईं उकाली ऊँदारीयूँ की

माया दाड़ी चा जी
ईन तेर मयाल्दी अँखियुं मा
सुण ले कथा मेरु जी कु जी
ऐजा कबीत ईं जिकोड़ी कु बाटू मा

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ये गद्नि छम छम

कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

ऊ ह्युंद चुल्युं मा
ये ऊंचा निसा डंडि-कांठि
अपरी अपरी लगादी वा
झट बिराणी व्है जांदी
कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

चल जोंला
द्वि दीदी भूली
छकेकि विं की तस्बीर थे
यूँ आंखां मा टिपि ओंला
कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

रोलां खोलों मा
हिंसालों दानी, डालों डालों मा
ढुंगा गारों मा लपक छपक कैकि
हैराली पस्यारी स्यारी स्यारी मा
कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

देख ऐकि मेर माया कु चित्र
सरया पसरयूं च ये मेर पहाड़ मा
कैन ऐकि रंगी गै हुलु ये सारू
बस यख ऐकि एक रात मा
कन बगनी हुली ये दीदी
ये गद्नि छम छम
कन बगनी हुली

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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अपरी मा मि अब

अपरी गरीबी की
कथा कैमा लगाण
दोई बल्द कु जौड़
कै फुंगडा मिल हकाण

बंजा पौड़ी धरती यख
नि रैगे विंका सैगुस्याण
रीता पौडी रै गै सदनी
बणीगे ऊ जंगलाता धौर

निर्भगी रे माया
कया तेर यख पछाण
सुख़ मा सब दगडी
दुःख मा सब व्हैगे बिराण

कथगा धैये लगाण
क्ख ऊं थे हुमन रैबार पठणा
बंद व्हैगे अब ऊ सब चिठ्ठी-पत्री
क्ख हुलु ओंका अब ठों ठिकाण

अपरी मा मि अब
लग्युं छों यखुली बचाण
रैगे जीयू द्वि सांस कु ठौर
चखुली बण हुमन उड़ जाणा

बालकृष्ण डी ध्यानी
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ई दुनिया कु

ई दुनिया कु
यात्रा मा मि अलझिग्युं
समझे ना बिंगी ना मि
कन के मि ऐमा अटकीग्युं
ई दुनिया कु

कख भत्तेक ऐई ये बाटा
ये बाटा मा मि बिरदीगयुं
सुख दुःख की बरखा मा
यखुली यखुली मि भिगीग्युं
ई दुनिया कु

ना मि हैसणु चैंदु
ना मि अब रुणु चैंदु
कुच अपरू कु यख बिराणू
ऐ घोलमा अब यख पिसीग्युं
ई दुनिया कु

माछा मि बिन पाणी कु अब
अपरी अपरा मा तड़पीग्युं
ना उघडि स्की मेसे ऊ लुक्यां भेद
मि वै खोल मा अब लुकीगयुं
ई दुनिया कु .........

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पड़ै लिखै कया कनु जी

पड़ै लिखै कया कनु जी
जाणा भैर देश
ये गढ़वाल मा कया रख्युं च
ढुंगा गारा बच्या शेष

पड़ै लिखै कया कनु जी हो ...अ

नक़्ल कैरी पास हुंया जी
टीचरों को मोरी गैत
एक टीचर सर्या स्कुल मा
अब व्हैगै पाड़ों की विद्या गैर

पड़ै लिखै कया कनु जी हो ...अ

कन कै हुनु किले की हुनु जी
प्रगति नौ को बस ठेला म ठेल
करोड़ टक्का विज्ञापन मा फुकी गै
नेतों पुट्गी भोरीगे थेट

पड़ै लिखै कया कनु जी हो ...अ

सब इनि ही अब सोचण जी
मिल बी किले मोडम धरण तेल
ई अब दुनिया तेल मलिस की
ज्याद बोव्ली हो जाली जेल

पड़ै लिखै कया कनु जी हो ...अ

पड़ै लिखै कया कनु जी
जाणा भैर देश
ये गढ़वाल मा कया रख्युं च
ढुंगा गारा बच्या शेष

बालकृष्ण डी ध्यानी
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दुई रुटी का बाना

दुई रुटी का बाना
लाटा दुई रुटी का बाना
क्द्गा ऊकाळ सैरी....... २
दुई रुटी का बाना

आच बी जबै
याद आंदि वा खैरी
बस तेर मुखड़ी देखिकी
मेरे दुःख सब बगे देन्दी
दुई रुटी का बाना

लखडु घासु को आंदा जाँदा
खुठी जबै जबै रुपै ऊ कांटा
ते बगत याद आंदि तेर भूकी पोटी
सब पीड़ा मेर बिसरी दिंदा
दुई रुटी का बाना

आच कोई बी नीच पासा
सब्यां छुट्यां जन सब धागा
अब बी जबै ऐ जांदू तै रैबार
विंच मेरु जियूं णु कु आधार
दुई रुटी का बाना

दुई रुटी का बाना
लाटा दुई रुटी का बाना
क्द्गा ऊकाळ सैरी....... २
दुई रुटी का बाना

बालकृष्ण डी ध्यानी

देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपरी मा मि अब

अपरी गरीबी की
कथा कैमा लगाण
दोई बल्द कु जौड़
कै फुंगडा मिल हकाण

बंजा पौड़ी धरती यख
नि रैगे विंका सैगुस्याण
रीता पौडी रै गै सदनी
बणीगे ऊ जंगलाता धौर

निर्भगी रे माया
कया तेर यख पछाण
सुख़ मा सब दगडी
दुःख मा सब व्हैगे बिराण

कथगा धैये लगाण
क्ख ऊं थे हुमन रैबार पठणा
बंद व्हैगे अब ऊ सब चिठ्ठी-पत्री
क्ख हुलु ओंका अब ठों ठिकाण

अपरी मा मि अब
लग्युं छों यखुली बचाण
रैगे जीयू द्वि सांस कु ठौर
चखुली बण हुमन उड़ जाणा

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
22 hrs ·

गैरसैंण तू
कै नदी का छाला
किल्हे नि
त्वे मा डाम बनैकी
त्वे डूबैकी
स्या राजधानी वल्ली
राजनीती भि डूबे देंदा
सदानी कु ...............शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Anuj Pant
May 17 at 12:28pm · Edited ·

झेंगु झेंता झेंगु झेंता
मंत्री जिन ढोल बजैकी
बोली द्यब्ता का भरोसा रा
जात मा जा
जागर लगा
द्यब्तो तै जगा
म्येरा भरोसा न रा
मैसे कुछ नि हुण भैजी
हम पाणी लुट सकदा
पत्थर कूट सकदा
पर गौली तर नि कर सकदा तुमरी
सुगम दुर्गम का फेर मा
ट्रांसफरै मलायी खै सकदा
परैवैट इस्कुल्या दूकान खोल सकदा
अब इत्गा त करना छा
अब कत्गा करन
मंत्री छा द्यब्ता नि
चुनौ आण दया
दय्ख्दा फेर
हैकी जात मा होली अब बात
तब तक ढोल बजैकी
झेंगु झेंता झेंगु झेंता.................
.........................................
:शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
May 13 at 9:19pm ·

झेंगु झेंता झेंगु झेंता
मंत्री जिन ढोल बजैकी
बोली द्यब्ता का भरोसा रा
जात मा जा
जागर लगा
द्यब्तो तै जगा
म्येरा भरोसा न रा
मैसे कुछ नि हुण भैजी
हम पाणी लुट सकदा
पत्थर कूट सकदा
पर गौली तर नि कर सकदा तुमरी
सुगम दुर्गम का फेर मा
ट्रांसफरै मलायी खै सकदा
परैवैट इस्कुल्या दूकान खोल सकदा
अब इत्गा त करना छा
अब कत्गा करन
मंत्री छा द्यब्ता नि
चुनौ आण दया
दय्ख्दा फेर
हैकी जात मा होली अब बात
तब तक ढोल बजैकी
झेंगु झेंता झेंगु झेंता.................शैलेन्द्र जोशी