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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपणा मुल्‍क कू मनखि छ,
ख्‍याल रख्‍यन हे दिदा भुलौं.....

श्री जसबीर सिंह भण्‍डारी
दूरभाष: 9899022813

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दर्द भरी दिल्‍ली मा.....

पैलि मुलाकात मेरी ह्वै,
गढ़वाळ भवन कवि सम्‍मेलन मा,
मिल्‍यन मैकु श्री नरेन्‍द्र कठैत,
रैबासु छ कविवर कू,
जख गंगा जी कू मैत.....

गौळा मिल्‍याैं हम प्‍यार सी,
आंख्‍यौं मा ऐन मेरा आंसू,
क्‍या बतौण हे दगड़यौं,
धन्‍य ह्वैगि कवि जिज्ञासु....

कविवर मैकु समूण ल्‍हेन,
भेंट करि 'डाळै की विप्‍दा',
पढ़्यन मैन कवि की कविता,
जन लोग आम की दाणी टिप्‍दा......

कविमन मा मेरा,
सेळि सी पड़िगी,
जुगराजि रयन कवि कठैत,
मां चंद्रबदनी सी अर्ज छ मेरी,
कवि जी तैं होणी खाणी दे,
राजि रखि ऊं गंगा जी का मैत........

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 17.5.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गढवाल छौं मि....

मोटर सड़िकी ल्हाणीं छीं मोटरू मा बोकी ...
जख जख बटै
डिपाटमैंट करों थै ,
भलु कनों म्यारू !
बिंगाणा छीं मीथै पलानिंग अपंणी
गिच्ची पर कोला लगै ।.
.
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लड़ैं.......

कलास तीन का गढवली इसटूडेंट घर्या इसकोल जांदि दौ लैड़ गीं ....

शीरू ! शीरू ! त्यारू ददा भौत खराब च,

ना ना म्यारू ददा भौत अच्छू चा ! म्यारु ददा मीखुंणै टौफी ल्हाई , हां ! म्यारू ददा भौत अच्छू चा !

चल कमेंणा ! वा टौफी रामू काका कुंसाऊंद बटी पोड़ी छै: अर जनी मिल व टीपी च तनी त्यार ददा चप मीसे लूछी दे कि रामू थै वापिस दे दींण !
मीथै नि खांण द्याई त्यारा ददा ल् व टौफी !

वी टौफी खाई रै तिल !

अच्छा कमेंणा त अब अपंणा बबै करतूत भी सूंण ले , म्यारा पितजी आखिरी पैक लगांणा छाया तबरी त्यारू बबा ऐ ग्या ,
पितजील् ब्वाल बोतल खाली ह्वे गया म्यारा गिलास मा मेरी जुठी रंई चा !

पता भि चै उल्लूपठ्ठा ! त्यारा बबा क्य ब्वाल ?
बल ! भैजी दारू भि जुठ्ठी हूंद कबि ! दारू कभी जुठ्ठी नि हूंदी अर गट गटागट एक ही सांस मा पे गया कखि म्यारा पितजी लूछ नि द्यावा !

हठ पुड़ी भैंणिकुमैस ह्वेलु तु !!

त्यारा बब्बै सांग जाली तुरूरूरू...

तुमरी कूड़ीउंद बजर प्वाड़लो !

तुमरा ख्वाल हैजा आली !

तुमरा लता कपड़ा डाल लग जैंया !

त्यारा कटूड़ लगली स्य दारू !

तेरी आँखि मा गरूड़ रीटला !

तेरी गौड़ी की पोट पटाख ह्वे जंया !

हब्बै ! मास्टर जी आंणा छीं !

द्वी इकम द्वी !
द्वी दुनी चार !
द्वी पंजे दस !

इन दिस वे !
लड़ै कम टु अन एंड

डिड यू लाइक दैट लड़ै ?
प्लीज फील फ्री टु राइट @

सुनील थपल्याल घंजीर .डॉट कौन ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आम डालू !

आम नि आंदा बोडि ये आमा डाला फर ?

न ब्यटा ! कख्वै , पाँच छै: साल मा एक आद दौ ।

क्यां खुंणै पल्यूं च यो आमो डालो ? काटि लमडा द्यावा से फुनै !

छैल त् दींणु चा ब्यटा !

छैल त तूंणी डालू भि दींद ,बोडि ! ये आमो डालो काम आम फल दींणौं च !

हां ब्यटा जब यु लगै छौ त्यारा ब्वाडा ल् तब बटै अब तक येल क्वी कष्ट नि द्याई हमथै , कबि कबि इतगा फल दींद कि हम पिछनै सैर जंदों पर यु नि थकदो । अर जैं औलादू का गिच्चों अपंणु गफ्फा डाल ऊं की तरफ बटै चुकापट हुईं चा ।हमजनै ह्यरणां भि नि छीं ।
ये थै त् काट द्यूंला पर औलाद खुंणे कख जांण म्यारा अट्टा !

@ सुनील थपल्याल घंजीर !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गौं का अच्छा लोग !

भौत बढिया छीं गौं का लोग ,
अपंणा अप़णा शैहरू मा !
म्यारा मुख फर भि लगै जंदी कालु कड़ू पांणी !
साल छै मैनम एक आद दौं !.
.
सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

०२/०३/२०१५

बरमंड

विक्की !
(हैप्पी बर्थडे मनाने वाला एक गढवाली कान्वेंट स्कूल स्टूडेंट )

दलेदर सर गुड ईवनिंग !

सुबेर बटै चांणा खांणू छौं गुड इवनिंग क्यां बातै बै ?

चांणा मींस ?

त्यारू बरमंड !

बरमंड क्या होता है ?

कैर याल न तिल बिना बरमंड वली बात !
सूंणु नि तिल बरमंड का द्वी फाड़ा कैर द्यूंलू !

फाड़ा तो मेरी दादी कहती है । तरबूज के चार फाड़ा कर दो । इट मींस तरबूज को ही बरमंड कहते हैं ! एम आई करेक्ट ?

द कन हुंच्या मेरी ! इन मिठ्ठू बरमंड त म्यारा बरमंड मा भि नि आई कभि !
पर जब त्वे पता च कि बरमंड क्यां खुंणै ब्वलदीं त मै किलै पुछणूं छै रै ?

मै पूछने तो नानी के पास गया था पर नानी ने कहा मेरे पास इतना बरमंड नहीं है कि तुझे समझांऊ जा वै दलेदरो को बरमंड खा !

हे मेरी मौ करा ! तभि छै तू वैदिन बटै म्यारू बरमंड खांणू ।
अटग जा यख बटै अपंणा बब्बौ बरमंड खा ।

पर वो मै नहीं खा सकता !

किलै भै म्यारू बरमंड तेरी प्रॉपर्टी च क्या ।

नहीं नहीं पापा का बरमंड तो सारा मम्मा खा जाती है !

हे म्यारा नरंकारा मी बचा ।

सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

०२/०३/२०१५

बरमंड

विक्की !
(हैप्पी बर्थडे मनाने वाला एक गढवाली कान्वेंट स्कूल स्टूडेंट )

दलेदर सर गुड ईवनिंग !

सुबेर बटै चांणा खांणू छौं गुड इवनिंग क्यां बातै बै ?

चांणा मींस ?

त्यारू बरमंड !

बरमंड क्या होता है ?

कैर याल न तिल बिना बरमंड वली बात !
सूंणु नि तिल बरमंड का द्वी फाड़ा कैर द्यूंलू !

फाड़ा तो मेरी दादी कहती है । तरबूज के चार फाड़ा कर दो । इट मींस तरबूज को ही बरमंड कहते हैं ! एम आई करेक्ट ?

द कन हुंच्या मेरी ! इन मिठ्ठू बरमंड त म्यारा बरमंड मा भि नि आई कभि !
पर जब त्वे पता च कि बरमंड क्यां खुंणै ब्वलदीं त मै किलै पुछणूं छै रै ?

मै पूछने तो नानी के पास गया था पर नानी ने कहा मेरे पास इतना बरमंड नहीं है कि तुझे समझांऊ जा वै दलेदरो को बरमंड खा !

हे मेरी मौ करा ! तभि छै तू वैदिन बटै म्यारू बरमंड खांणू ।
अटग जा यख बटै अपंणा बब्बौ बरमंड खा ।

पर वो मै नहीं खा सकता !

किलै भै म्यारू बरमंड तेरी प्रॉपर्टी च क्या ।

नहीं नहीं पापा का बरमंड तो सारा मम्मा खा जाती है !

हे म्यारा नरंकारा मी बचा ।

सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बिज्वाड़

बिज्याड़ सुपिन्यों की लगै ही नि साको कखि
स्यारू सगोड़ी पुंगड़ी ही नि मीली क्वी ?
.
@सुनील थपल्याल घंजीर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कमींणा छै तु।

ब्वे तेरी जंण्या हुंई गौंमा
ब्वे तेरी लग्या लगीं गौंमा
रैबार
सिरौंणा मुड़ी धैरी
सुनिंद प्वड़्यूं छै तु ?

छंछरवार ऐतवार जग्वलंणू छै तू

म्वरांणासन्न ब्वे का ज्यूंदा दर्शन छोड़ि
मुखजात्रा का समाचार कु अटक्यूं छै तू
कन मेसी नौकर छै तु ?
कमींणा छै तू ।

.
सुनील थपल्याल घंजीर