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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Gyan Pant
April 10 at 8:50am

जिम कार्बेट पार्काक् शेर .....

बखत
कैको इंतजार नि करन्
पाँणि न्याँत छिर जांछ् छिर- निकलना
और हम
चाय्यै रै जानूँ
नान्तिनन् देखि बेरि कि
पोरुवौक् छोर् पोरुवौक् जोर् - परसौं पैदा हुआ
आज द्वार जस् ठाड़् है ग्यो
देखन - देखनै
नान्तिनन् वाल् ले है ग्यो ....
साँचि कूँछ
पाकी बाव देखि बेरि
मैं आपणी उमर् ' क
कभै अंदाज नि लाग् ...
मगर के करछा
यो प्रकृति 'क नियम भै
बखत् 'क हिसाब लगूँण बैठ्यूँ त
म्यार सानिक् भौत लोग
आब् यो दुन्नि में नि छी ! सानिक - बराबर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Like kre agr aap UTTARAKHAND k culture ko psnd krte h ya fir Uttarakhand se hai.....
Kumaouni Jhoda
==============
O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani
O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani
O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan
O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani
O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan
O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan
Hey surama salaai bali surama salaai bali surama
salaai Hey surama salaai bali surama salaai bali surama
salaai
Hey na kushal bata bali na mukha balaai bali na
mukha balaai
Hey na kushal bata bali na mukha balaai bali na
mukha balaai O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani
O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani
O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan
Ye kakadi ka kyara bali kakadi ka kyara bali
kakadi ka kyara
Ye kakadi ka kyara bali kakadi ka kyara bali
kakadi ka kyara ye khani pini tyar gaon ka bali badnaam myar
bali badnaam myara
ye khani pini tyar gaon ka bali badnaam myar
bali badnaam myara
O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani
O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan
O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan Hey machhi mara jaav bali machhi mara jaava bali
machhi mara java
Hey machhi mara jaav bali machhi mara jaava bali
machhi mara java
Hey hikoi na anchhe bali udekha ka kaaw bali
udekha ka kaawa Hey hikoi na anchhe bali udekha ka kaaw bali
udekha ka kaawa
O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani
O Chakote ki Parwati sauraas ni jaani bali saurasa
ni jaani O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan
O Masi ka Pratap londa schoola ni jaan bali
schoola ni jaan.......@.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Gyan Pant
April 17 at 10:40am ·

..... बस यों ही

नाराज हैं खेत
" छाती " में
जलन होती है
पेस्टीसाईड से ।

गेहूँ तैयार था
" रोटी "होने के लिए
गुस्साए बादलों ने
फसल ही धो डाली !

फसल रही नहीं
जिएं किस इंतजार में
इसीलिए जा रहे
किसान " खेत " छोड़कर ।

फिर मस्ती में
आ गए बादल
जाने क्या
गुल खिलायेंगे ।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Gyan Pant
April 17 at 7:52am ·

....जिम कार्बेट पार्काक् शेर

आज
बादल ले
" ओच्छी " रयीं ओच्छी -- इतराना
पत्त न के करनीं !

ग्यूँ - चुुटै
हुँण् चैंछी मगर
आग् - हान् बादल
फसल " नवै " गियीं । नवै - नहलाना

खेत
नाराज छन्
पेस्टीसाइड
" जलन " करैं बल् !

बात - चीत ले
बंद है गे
कैले कैले - किसी ने
" मुन " राखौ बल् । मुन राखौ -- जादू करना

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

अपने लगे हैं कहने ,गैरों ने भी कहा है

अपने लगे हैं कहने ,गैरों ने भी कहा है
चल घूम आये अब तो ,देखें तेरा पहाड़ कैसा है
अपने लगे हैं कहने ,गैरों ने भी कहा है

शर्मीली एक कली होगी ,फूल बनने वो खिली होगी
क्षण भर उसका वो जीना,खुशबू ही उसका वो नगीना

वो जीवन देख आयें हम ,चल तेरा पहाड़ घूम आये हम
अपने लगे हैं कहने ,गैरों ने भी कहा है

दूर एक नदी होगी ,झरनों के संग वो बही होगी
कितनी अड़चन आये ,फिर भी ना रुकी ना थमी होगी

वो नदी के संग बह आये हम, चलो जीना सीख आये हम
अपने लगे हैं कहने ,गैरों ने भी कहा है

वहां हर एक कंकड़ पहाड़ होगा,भगवान शिव का वो संसार होगा
ऋषियों मुनियों की देवभूमि,मेरे पूर्वजों की वो कर्म भूमि

वो अचल शांत धैर्य कब से खड़ा , वो पहाड़ देख आये हम
अपने लगे हैं कहने ,गैरों ने भी कहा है

अपने लगे हैं कहने ,गैरों ने भी कहा है
चल घूम आये अब तो ,देखें तेरा पहाड़ कैसा है
अपने लगे हैं कहने ,गैरों ने भी कहा है

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
April 17 at 9:45pm ·

काफल लगे हैं पकने

काफल लगे हैं पकने
बुरांस लगे हैं वो खिलने
धुप लगी जब पिघलने
पहाड़ लगे अब सजने

नित नया रूप धर लेता
वो सारे दुःख हर लेता
जब लीची लगे ललचाने
फिर पहाड़ लगे बुलाने

काँटों काँटों पे बहार आयी
फूलों ने ली फिर अंगड़ाई
उजाड़ आज कैसा खिला
कोई बिछड़ा हो उससे मिला

गर्मी में चहल पहल होती
वो साल भर का इंतजार होता
आमदनी कुछ मेरी होती
चेहरा पे सबका निखार होता

चार महीनों की वो रौनका
झट तुरंत समाप्त हो जाती
फिरा ना कोई संगी साथी
मै ही दूल्हा मै ही बाराती

काफल लगे हैं पकने। .....

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
3 hrs · Edited ·

वो कविता

वो कविता
मेरे पहाड़ों की
पहाड़ों की वो कविता
अभी तक ना लिखी
ना सोची किसी ने अभी तक
ना देखी ठीक से
अब तक
सब सामने थी पसरी
वो कविता
मेरे पहाड़ों की
पहाड़ों की वो कविता

काटों पे
खिलते फूल देखे
दुःख में भी
हँसते वो कैसे लोग देखे
आँखें वो भीगी
यादों में डूबी
रातों का वो इंतजार
सुबह वो बेकरार
ना लिख पाया मै
अब तक
वो कविता
मेरे पहाड़ों की
पहाड़ों की वो कविता

भूख है वो
प्यासा है वो
अपने सपनों का साँचा है वो
वो उसकी तड़प
वो उसकी वेदना
ना जान पाया कोई
ना उससे सबक ले पाया कोई
लिखने बैठे हैं सब पर
उसे ठीक से ना लिख पाया कोई
रह गया वो
रह गयी मेरी अधूरी
वो कविता
मेरे पहाड़ों की
पहाड़ों की वो कविता

कितने मौसम आये यंहा
वो चले गये
कुछ भीगा कुछ सुखा कर
वो चले गये
अब भी बैठी है वो
बिरह की सूली पर
अपने लोगों की वो बोली पर
रंगी तीन रंग की डोली पर
जल रही है अपनों की होली पर
वो कविता
मेरे पहाड़ों की
पहाड़ों की वो कविता

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

फ़ज़िल कु गीत

ह्वेगी झुक मुक
उट्ठ अब उट्ठ
झुलकि खुज्यो मुण्ड ढको
लम्प बजो मार फूक

गात्ति लगो लुस्यान्दू पागड़ू सम्भाळ
छाटणु गाड़ पकड़ गञ्ज्याळ

पोंछ उर्ख्याला झट पट
ह्वेगी झुक मुक उठ अब उट्ठ

ढोंडू बूसू वखळी उमजो
चोट्टि मार गों जगो

छटणि लगो कूटण की कर छवीं
इखरोंण दुरोंण बिटि छट्ट छाड़
दिख्यो न क्वी बीं

घोस लीप चुल्लू जगो
चा बणो। गुट्ट। मुट्ट
ह्वेगी झुक मुक
उट्ठ अब उट्ठ

(Uma bhatt)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

गों म्येरू बद्लिग्ये

कख भटयोद मैन, के माँ ब्योन अब मैन

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये.....

पचीस मवास्यु कु योक गों च म्येरू लोगो,

पचीस चीन अब धारा, जख योक छो बस धारो,

योक घोरो कु बिंदरू गाँव भर मा बतयन्दु छो ,

अब लागोंदा बना की सदया नि बुत्यु छो

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये....

औंदा च मथ्या ख्योल्या, जब हौंडा छा त्यौहार .

कांधा मा हाथ धोरीक लागोंदा छा झुमेलो

अब घरु- घरु चन ख्योल्या, मथख्योल्या घास जम्यु छा

केन जगोड भैलो घरु- घरु आग लग्यु चा

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये....

गाँव का सिध्व देवता की पूछ नि अब जाच

मांगी का सतनाजू नर्सिंग मु जाडा चन ,

जवान चीन मन यख जख बुद्य नि मरद छा

कण नि उगड़ स्यारू अब घाट लाडा चन .....

... ... बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये....

पिडू परात गो माँ सब टप्प पड्यु चा

भे मनो ते थमलु एक भे ल्यू खडू चा

पता भी नि चलद कब हवे छो स्यो बीमार

कांधा लगोड़ कैन मुर्दा ख्योला ढ्वोल्यु चा

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये......

बचपन भी ह्वेग्ये कुछ यनि मिलीजुली का नि रोंदा.

बवे-बबुन त्योका भी कनद्युद भार्या रोंदा..

नि करदा कख्दी चोरी इस्कूल नि जांदा कठा

कख गेन फूलरी अब केन नाचोड़ घ्वोगा

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये......

कई नोना की बहर बे जब चिठ्ठी क्वे औंदी छे

आशु की बरखा माँ पठाल रददी छे

गेन कख क्वाजनी सी बीर दीदा -भूली

स्वारा से आई मैत अब पच्यन्दि नि भूली

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये......


औंदो छो जब रिसुल्ट हौंडा चा नोना पास

आर्सो का त्योल्ये की गो माँ औंदी छे बास

अब केन बड़ोद अरसा, गुलगुला ते गुडेनी

अब नोनु क्वे जन्दु भेर कनफूसी होई चा .....


बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये.......

गुड टिल बत्यंदा चा गो भर माँ तब लोगो

जब नया बल्दो की होंदी छे स्वीजोत

ब्या भेसो कु कभी प्योस बत्यांदु छो

अब भेस कु लोगो अड्कुलू ढक्यु रोंदू

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये....

कन बदली गो म्येरू कण पड़ी या दरार

कन ल्योड वापस म्येरू गो योक परिवार

ह्वेजा पैली जब तुम यां बिनिती छो तुम सबसे

यां दिवाली खयान की म्येरी आस छो ये कब से

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये....

न करा मुड कपल न घात लगा मन पे

बाटा बिंदरू फिर तुम सजा ते धारा फिर से

अब दोवाली मा तुम अयान मथ्या ख्योला

अबकी भूलो मैन फिर भेलो सजयु चा.

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये....

कख भटयोद मैन, के माँ ब्योन अब मैन

बद्लिग्ये बद्लिग्ये हाँ गो म्येरू बद्लिग्ये...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नाच नाच कंक्वे
बचली कुमौनी गड्वाली
गै गैकी कंक्वे
बचली दुदबोली हमारी
जब तक नाटक
निबंध उपन्यास गधय
लिखला नि लिख्वार
तब तक कैकु
बुबा नि बचे
सकदु गड्वाली कुमौनी
लोकभासा हमार
घर परिबार मा
तब तक पैदा नि होला
पढ़धरा नौनीयाल

रचना ...................................शैलेन्द्र जोशी