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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज फिर खैरी
पहाड की लगोणा छौंऊ
खुद लगीं गौं की
ब्यथा सुणाणा छौंऊ
जनि दस पास कैरी
मी दिल्ली क्या औऊं
नौकरी क्या लगी की
मी गौं कभी नी ग्योंऊ
मैट्रो की सीढीयुं मा मी
रुल्दी खुजणा छौंऊ
बहुमंजिला लिप्टु तै
ग्युड चितांणा छौंऊ
जगजगा प्रदर्शनियुं मा
क्वादु झंग्वरु खुजणा छौंऊ
जख जांदु यी दिल्ली मा
वखी पतड्याणा छौंऊ
गैल्या दगडयों तै ब्हाटसप
फेसबुक मा खुजणा छौंऊ
बांजी तिबारी डिंडयाली रोज
मोबेल मा दिखणा छौंऊ
खंद्वार हुंयीं कुडी तै हम
लाईक करना छ्याऊ
घर जांण क जु नी बुदु
कमेंट मा दुख जतांणा छ्याऊ
आज फिर खैरी
पहाड की.......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भटट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Cdr SC Joshi Retd
January 14 at 7:01pm
*आओ पहाडं मे*
दो दिन रहने आओगे'महीना रह जाओगे
भूल जाओगे शहर का खाना चुलकाडीं जब
खाओगे
सुहानी सी सुबह यहॉ
हर शाम मतवाली है
बॉज बुरांस के पेडं यहॉ
हर जगह हरियाली है
होली जैसे रंग यहॉ
हर रोज दीवाली है
गधेरो का पानी देखकर
नहाने को मन करेगा
भूल जाओगे मैगी चाउमीन
मडुवै की रोटी खाने को मन करेगा
हर गर्मीयो की छुट्टी मे दोस्त
पहाडं आने को मन करेगा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तुम चली ग्या छोडी दीदों
अपणी गौं की माटी तै
रीक बाग घचकांणु च
तुमरी छानी पटाल्युं तै
बिंडी दिनु बिटी दीदों
ये मुल्क बाग लग्युं च
छान्युं की पटली निखोली
गौर बछरु तै खांणु च
पलायन की मार न दीदों
कुडी हमन बंजेन
ये नरबै बाग न हमर
सनी बी बंजै देन
कुडी क दगडा दगडी
छानी बी बंजै गेनी
यन नरबै रीक बाग
यख पैली दफा यैनी
जख भी छ्या बरै तुम
तखी बिटी घ्याल लगाओ
सींयी सरकार सीयां नेतों तै
सौलु सी घचकाओ
अभी तक कै बी नेता न
कुई आश्वासन नी द्याई
ब्याली भी पटल तोडी की बाग
तीन गोरु तै मारी ग्यायी
तु बी जणदी छै बाग देवता
तीन कैकी मौ घाम लगांण
संतरी मंत्रियुं मा न छडै बरै
तीन सिनक्वली मरै जांण
अगर हिम्मत च त्वै पर
तु 17 मा यैकी देखी
पटल त दुर बल
तु झल्कां दिखे की देखी
त्यार बान नेता जी हमर
भुख हडताल पर बैठी जालु
रतों रात त्वै मराण कु
दिल्ली बिटी आर्डर मंगालु
तुम चली ग्या छोडी......
बाग की मचयीं तबाही पर @सुदेश भट्ट (दगडया)फोटो साभार सत्यपाल सिंह पयाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्यार प्रेम कु दीदों अब
गिंदी रलै द्योला
कबी त्याडों गाड कबी
ख्याडा रौडी जौला
अब त घर आंण क भी
सारु ह्वै ग्यायी
हरचीं लोक संस्कृति हमरी
फिर से बिजी ग्यायी
जु आंद छ्या हंत्या अर
घडयलु मा घर
सलों साल मा खुल्द छ्या
बंद द्वार मोर
ब्याली शुभ दिन
दिखंण मा आयी
रैबासी कम प्रवासी
बिंडी म्याला मा आयी
बधै ह्वा तुमकुन जौंन
गिंदी या उर्यायी
दीदी भुल्युं कुन मैत कु
बाटु तुमुन खोली द्याई
जलेब्युं की दुकान भी
खुब सज्यां छ्यायी
भुल्यां बिसर्यां दगडया
खुब भिट्यांणा छ्यायी
जुगराज रयैन दीदों
जौंन गिंदी रलाई
कती दगडयों से मीतै भी
कई सालों मा मिलाई
प्यार प्रेम कु दीदों अब
गिंदी रलै........
सर्वाधिकार@सुदेश भटट(दगडया)
लुप्त हुंयी गिंदी तै फिर से उर्यांण क वास्ता आयोजक मंडल तै मेरी कलम की ओर से बधै संदेश

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dinesh Dhyani
Yesterday at 10:41am
पलायन एक चिंतन!
पलायन पहाड़ो से
होना नहीं चाहिए
लोगों को अपने पुस्तैनी
गाऊँ में ही रहना चाहिए।
क्यों भाग रहे हैं लोग
पहाड़ छोड़कर देश बिदेश
क्यों हो रहा है पलायन?
सरकारों को कुछ करना चाहिए।
रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा पर
ध्यान देना चाहिए
घर गावं की सुध भी लेनी चाहिए।
कभी न कभी हमें भी अपने
गावं जाना चाहिए।
चलो अगली बार
गर्मियों में छुट्टी मानाने
कुछ दिनों पहाड़ चलते हैं
और फिर वहां से आकर
शहर में शामियाने तले
वातानुकूलित कमरो में
बैठकर पहाड़ की बात करंगे
पलायन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य
आदि बिषयों पर गंभीर चिंता
और चिंतन करेंगे
पहाड़ के बहाने, चलो पहाड़ की बात करेंगे। दिनेश ध्यानी. २५/१/१६

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

चिंतन मंथन उत्तराखंड कु
हुंणा दिल्ली बंबई मा
गडवाल कु बल माटु बी बिकणा
राजनिति की टेबल मा
कुई भुना बंबई बिटी की
पहाड बचौला हम
दिल्ली वालु की रट लगयीं
डयारदूण गैरसैंण लीजोला हम
अंगरेजी क गांणा लग्यां छन
देशी बच्यांणा छन घर मा
अपण नौन छन कानवेंट स्कुल
भाषंण सुंणा भग्यानु क
प्राईमरी जयीं च धार मा..
बाडी पल्यो तै घींणै घींणै की
कीटी कीटी की खांणु छ्या
पहाड प्रेम 17 कु दादा
मी भी त्यार चितांणु छ्या
पलायन की चिंता दीदा
मार मार कैकी त्वै खांणी च
बंबई मा तेरी कोठी लगयीं
दिल्ली मा डी.डी.ए की मुलयीं च
अपणी कुडी खंद्वार हुंयी
किलै हैंक कुन रुणी छै
पलायन की तेरी नकली पीडा
2017 बिंगाणी छै
चिंतन मंथन उतराखंड कु
हुंणा बंबई दि.........
सर्वाधिकार सुरक्षित@लेखक सुदेश भट्ट (दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

रौंत्यालु उल्यारु दीदों
हपार भग्यान गांव च
मेरी बुये कु मैत प्यारु
मेरी नन्युं गांव च
हरी भरी सारी यख
यैथर पैथर गांव क
झीलकंड बीटी दिखेणा
सरा डिवरण गांव च
मांजी ह्वे ग्या बुडडी मेरी
मैत मैत बुल्दी च
मेरी नन्युं गां बिना बुये
आंसु रोज बगांदी च
कचुंड कांडई सरा दिखेणु
ताल कंडरा बौंसील
धार मा बस्युं प्यारु
मेरी नन्युं गांव च
याद यै ग्या बचपन की
गे छ्या ननी गांव मा
ममा जी यै छ्या मी लेंण
अदबाट सिंक्वाणी धार मा
स्वर्ग से भी प्यारु मेकु
हपार भग्यान गांव च
मेरी बुये कु मैत प्यारु
मेरी नन्युं.......
सर्वाधिकार सुरक्षित@लेखक सुदेश भट्ट(दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दगडया छे तु दगड्या रै
सुख दुख कु दगड्या रे
जैकु नी सारु कुई
वै भग्यान क सारु छै
दगडया छे तु दगडया रै
गरीब असहाय भयुं कुन तु
छैलु वाल डालु छे
दुख बिपदा मा भै बंदु कुन
भौत बडु सारु छै
दगड्या छे तु दगडया रै
अपर काम छोडी तुम
जनसेवा मां लग्यां छ्या
सेवा सम्मान सदभाव सहयोग
भलु कैकी निभांणा छ्या
दगड्या छे तु दगड्या रै
बुये क दुधी क सौं लियां छन
सौं खयां छन माटी क
अपंण भै बंधु कुन रौला
जिकुडी यैथर तांणी क
दगड्या छे तु दगड्या रै
रक्तदान दगड्या तेरी
सबसे बडी पछ्यांण च
हरचदी रीती रीवाज
दगड्या तीन बचीयांण च
दगडया छे तु दगडया रे
अपंण गौं तक सीमित नी तु
सरा मुल्क क लाडु छै
दुख दर्द मा दगड्या तु
सबसे यैथर रांदु छै
दगड्या छे तु दगड्या रै
दगड्या छे तु दगड्या.......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भट्ट (दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

आज फिर खैरी दगडयों
दिल्ली की सुणाता हुं
म्यार गौं मे छिंच्वडु खत्या रहा
यहां द्वी रुप्या गिलास खुज्याता हुं
म्यार मुल्क मे पांणी खत्या रहा
जवानी दिल्ली बस गई
पानी जवानी म्यार पहाड की
दिल्ली जुगत हो गई
डब डब डबख रहा हुं
ईस नरबै दिल्ली में मै
चकोरु सी घांण की भीड में
कन पतड्या रहा हुं मै
गौं की खोली नही दिख्या रही
यैकी नरबै दिल्ली में
रीबड रहा हुं फजल बिटीकन
जमनापार की गलियों में
आज फिर खैरी दगड्यों
दिल्ली की सुणाता......
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भट्ट (दगडया)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जिकुडी मा च खैरी मेरी
छौं मी दुर परदेश मा
यखुली छौं मी हौर क्वी नी
दीदों म्यार गैल मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
गौं गैलों की याद मीतै
आंदी रोज बड्युल्युं मां
जिकुडी रैंदी यख उदास
खुद लगीं च सांकी मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
दगडया गैल्यों तै मी अपण
खुजदु छौं मौबेल मा
लाईक कमेंट करदु तौंकु
फेसबुक की चैट मा
जिकुडी मा च खैरी मेरी
माटी कु च कर्ज दगडयों
कभी चुके नी सकदु मी
पौंछी जौं चै जुनी पर भी
गौं नी भूली सकदु मी
जिकुडी मा च खैरी मेरी
पट्टी उदयपुर मा मेरु
वाया भृगुखाल च
रौंत्यालु उलारु म्यारु
प्यारु गांव ब्वांग च
जिकुडी मा च खैरी मेरी
सर्वाधिकार सुरक्षित@सुदेश भट्ट (दगडया)