• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Uttarakhand Ramleela - उत्तराखंड की रामलीला

Started by मेरा पहाड़ / Mera Pahad, September 17, 2008, 02:50:47 PM

मेरा पहाड़ / Mera Pahad

Source: http://www.bbc.co.uk/hindi/specials/84_ramleela_change/

महाराष्ट्र में गणेश पूजा और गुजरात में गरबा की तरह उत्तरांचल में रामलीला की शानदार परँपरा रही है.यहाँ की रामलीलाओं ने न सिर्फ पहाड़ में बल्कि बाहर भी पहचान बनाई है.
कुमाऊँ की रामलीला की खास बात जहाँ राग-रागिनियों पर आधारित सँवाद हैं वहीं गढ़वाल की रामलीला ठेठ आँचलिक है.
उत्तरांचल की रामलीला में आ रहे बदलाव की झलकियाँ एकत्रित की हैं शालिनी जोशी ने.


मेरा पहाड़ / Mera Pahad

गाँव-गाँव में होती है यहाँ रामलीला बल्कि कुछ गाँव तो ऐसे हैं जो अपनी रामलीला से ही चर्चित हुए .साधन और सुविधाएँ भले ही कम हों लेकिन ये शास्त्रीय परंपरा से हटे नहीं हैं.
इनमें कई कलाकार तो ऐसे मिल जाएँगे जो बरसों से एक चरित्र को पूरी श्रद्धा और निष्ठा से निभाते आ रहे हैं.
 

मेरा पहाड़ / Mera Pahad

हाईटेक होती रामलीलाएँ. समय के साथ-साथ रामलीला मँचन के तौर-तरीके बदल भी रहे हैं. कुछ जगहों पर साउँड इफेक्ट्स,रेकॉर्डेड संवाद और लाइट इफेक्ट्स से पौराणिक प्रसंगों को अभिनव रूप दिया जा रहा है.
थियेटर की इन तकनीकों के प्रयोग से लंका दहन, सीताहरण और युद्ध जैसे दृश्य जीवँत हो उठे हैं.


मेरा पहाड़ / Mera Pahad

यहाँ तक की कई जगह तो एक ही साथ कई-कई मँच बनाए जा रहे हैं.6 से 10 मँचों पर अलग-अलग दृश्यों की प्रस्तुति से कहानी में एक तेज़ी और निरंतरता बनी रहती है.
दृश्य बदलने के लिये न तो पहले की तरह अँधेरा करना होता है और न ही पर्दा गिराना होता है.


मेरा पहाड़ / Mera Pahad

रामलीलाएँ अब पेशेवर भी होती जा रही हैं. भव्य और आधुनिक होने के साथ ही साथ कई रामलीलाओं में स्थानीय कलाकारों की जगह भी अब पेशेवर कलाकार लेने लगे हैं.
राम-सीता और रावण जैसे प्रमुख चरित्रों को निभाने के लिये स्थापित कलाकारों को अच्छी कीमत देकर बुलाया जाता है.


मेरा पहाड़ / Mera Pahad

कोई फर्क नहीं आया है तो वो रामलीला के पर्दों में.ये भी एक कला है..कई दिन पहले से ये कलाकार रंग और कूची लेकर पर्दों को दरबार, महल, जँगल, लंका और अशोक वाटिका जैसे दृश्यों का रूप देने लगते हैं.
 

मेरा पहाड़ / Mera Pahad

ये क्या? रावण के दरबार में "काँटा लगा......!".जी हां कई जगहों पर अब रामलीला में आइटम साँग भी दिखाए जाने लगे हैं.
परँपरा और श्रद्धा से परे रासलीला बनती इन रामलीलाओं में रामायण की आड़ में पूरे लटके-झटकों के साथ लड़कियाँ आइटम साँग पेश करती हैं. आयोजकों का कहना है कि दर्शकों को खींचने के लिये वो भी ये सब दिखाने को मजबूर हैं.


मेरा पहाड़ / Mera Pahad

और एक रामलीला बच्चों की भी.
उत्तराँचल के कई स्कूलों में भी खेली जाती है रामलीला.खुले आकाश के नीचे होनेवाली इस रामलीला में बच्चे ही बनते हैं राम और रावण भी, दैत्य सेना और वानर सेना भी बच्चों की ही होती है.


पंकज सिंह महर

वाह-वाह, टापिक देखकर मजा आ गया.....अपने गांव देवलथल और लखनऊ में रामलीला से मै भी जुड़ा रहा। मेघनाद, खर, ताड़िका, सुषैन वैद्य, सुमन्त, वाणासुर, मन्थरा के पात्रों का अभिनय मैने किया है।

अल्मोड़ा के हुक्का क्लब की रामलीला अपने शाष्त्रीय अंदाज के कारण काफी लोकप्रिय और स्तरीय है।


यहाँ पढ़ें : कुमाउनी रामलीला की रोचक जानकारी।

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Wah Wah sahi darshan kara diye Pahad ki Ramleela ke Sir.