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Give Temple Details - यहाँ दीजिये अपने क्षेत्र के छोटे-२ मंदिरों का विवरण

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 13, 2009, 11:08:06 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

काष्ठ कला का द्योतक है भद्रकाली मंदिरApr 20, 02:11 am

उत्तरकाशी। पौंटी भद्रकाली मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि इस मंदिर के निर्माण में लकड़ी पर हाथों से की गई कारीगरी का भी कोई जवाब नहीं है।

उत्तराखंड में कलकत्ते की काली की पूजा नित्य पौंटी में होती है। बड़कोट से यमुना के उस पार करीब 4 किमी की पैदल दूरी पर भद्रकाली का मंदिर स्थित है। उतराई और चढ़ाई से थकने के बाद जैसे ही श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचता है उसकी थकान काफूर हो जाती है और वह फिर सोचने लगता है। प्राचीन शैली में बने तीन मंजिलें लकड़ी के मंदिर की बनावट और उस पर हाथों से की गई कारीगरी को लेकर श्रद्धालु गहराई से सोचने लगता है। वास्तव में मंदिर पर की गई अद्भुत नक्काशी का कोई जवाब नहीं है। सबसे ऊपर तीसरी मंजिल पर मंदिर का गर्भ गृह है। गृभ गृह में भैरव व नाग देवता की मूर्ति भी काली की धातु से बनी मूर्ति के साथ विराजमान हैं। मंदिर के प्रधान पुजारी रामप्रसाद बहुगुणा बताते हैं कि पौंटी में पूजा कब से होती है यह वे नहीं जानते। कहते हैं सैकड़ों साल पहले एक वृद्ध के साथ यहां देवी पहुंची और तब से यहीं वास करती है।

Risky Pathak

20 साल बाद हुए कैंचुला देवी मंदिर के दर्शन

उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से यूं ही नहीं जाना जाता। यहां जगह-जगह पर विद्यमान ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व के स्थल व अवशेष हजारों साल पुरानी कहानी को बयां करते हैं। ये स्थल हमारी अमूल्य धरोहर हैं जो हमें बार-बार उस इतिहास व परंपरा को जानने-समझने के लिए प्रेरित करती हैं जिनसे मानव सभ्यता की जड़ें जुड़ी हैं। ऐसी ही एक पौराणिक धरोहर है भीमताल। इसी झील के पूर्वी छोर पर स्थित है पौराणिक महत्व का माता कैंचुला देवी मंदिर, जो आज 20 साल बाद नजर आया है। क्यों कि यह मंदिर अब तक झील के पानी से ढका रहता था। भीमताल के बीचोबीच महाभारत कालीन भीम सरोवर है। इसके किनारे स्थित है पौराणिक भीमेश्र्वर महादेव मंदिर। इसके पूर्वी छोर की चोटी पर द्वापर युग के नागों में एक राजा कड़कोटक का मंदिर है तो उत्तर में राजा नल व दमयंती ताल तथा सातताल के ऊपर हिडम्बा चोटी और दक्षिण में च्यवन ऋषि आश्रम विद्यमान है। इन्हीं प्रमुख स्थलों के बीच झील के पूर्वी हिस्से में पानी के अंदर विद्यमान है माता कैंचुला देवी मंदिर। दो दशक से यह मंदिर झील के पानी से ढका रहा था। परंतु इस बार भीषण गर्मी के चलते झील का जलस्तर गिरा तो मंदिर का ऊपरी भाग नजर आया है। जानकारों का मानना है कि ऐसा 20 साल बाद हुआ है। संभवत कुछ दिनों बाद जलस्तर बढ़ेगा तो पानी फिर से इस पौराणिक मंदिर को पूरी तरह ढक लेगा। बहरहाल वर्षो बाद कैंचुला देवी मंदिर के दर्शन करने श्रद्धालु अगाध श्रद्धा के साथ उमड़ रहे हैं। कड़कोटक नागस्य, दमयंती नलस्य च। ऋतु प्रणये राजस्ये, कीर्तनम कलि नाशनम यानी नल व दमयंती समेत आठ नागों में एक कड़कोटक नाग देवता हैं। माना जाता है कि इनके जप से सारे रोग-कष्ट दूर होने के साथ ही मनौतियां पूरी होती हैं। स्कंद पुराण के केदार खंड में वर्णित नाग वंशीय राजाओं में एक नाम राजा कड़कोटक का भी मिलता है। किंवदंती है कि देवी कैंचुली झील किनारे कड़कोटक नाग को जन्म देकर अंतर-ध्यान हो गई थी। बाद में कड़कोटक नाग देवता झील के पूर्वी छोर स्थित चोटी में बस गए। मान्यता है कि राजा कड़कोटक झील किनारे जिस स्थान से उनकी माता कैंुचली देवी अंतध्र्यान हो गई थी वहां हर रोज पानी पीने आते थे। हर रोज उनका एक भक्त कटोरी में दूध पिलाता था जिसके एवज में कड़कोटक उसे एक अशर्फी उपहार में देते थे। कहा जाता है कि एक दिन जब उनका भक्त किसी काम से बाहर गया तो उसने अपने पुत्र को राजा कड़कोटक को दूध पिलाने की जिम्मेदारी सौंपी, मगर उसकी नीयत में खोट आ गया। उसने नाग को मारकर सारी अशर्फियां एक साथ लेने की सोची और तब से नाग देवता चोटी से नीचे नहीं आए। यह भी मान्यता है कि 5 हजार वर्ष पूर्व जब कड़कोटक नाग श्रापमुक्त होकर ऋषि योनि में आए तो नाग वंशीय राजा ऋतु प्रणय ने झील किनारे मां कैंचुला देवी व चोटी पर कड़कोटक के मंदिर स्थापित किए। मंदिर के अंदर दो जल स्त्रोत हैं, जहां नाग के मुंह से पानी निकलता है। नौकुचियाताल निवासी प्रसिद्ध व्यास आचार्य जनार्दन त्रिपाठी का कहना है कि स्कंद पुराण के मानस खंड में आठ नागों का वर्णन मिलता है, जिसमें एक राजा कड़कोटक थे। कैंचुली देवी नाग की जीवन रक्षक जननी के रूप में जानी जाती हैं। उनके अनुसार यही वजह है कि इस कलियुग में भी जो सच्ची श्रद्धा से माता कैंचुली देवी मंदिर के पास झील में स्नान करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही चर्म रोग व अन्य व्याधियां दूर होती हैं। वर्षो से इस मंदिर की पूजा करते आ रहे रहे शिक्षाविद् महेश चंद्र पंत व सांगुड़ीगांव के पूर्व प्रधान विपिन सनवाल यहां की विशेषताएं बताते हैं। बहरहाल दो दशक बाद श्रद्धालु मंदिर के पास पूजा अर्चना करने से खासे उत्साहित हैं।

Source: Dainik Jagaran, 8th JUly2009

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

देव प्रयाग

यहां दो प्रमुख नदियों अलखनंदा और भागीरथी आपस में मिलती है। इसके अलावा यहां कई प्रसिद्ध मंदिर और नदी घाट भी है। ऐसा माना जाता है कि देव प्रयाग में भगवान विष्णु ने राजा बाली से तीन कदम भूमि मांगी थी। यहां रामनवमी, दशहरा और बसंत पंचमी के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है।

Devbhoomi,Uttarakhand

श्रद्धालुओं ने किया पांडव गाथा का श्रवण

गंगोलीहाट (पिथौरागढ़): विकासखंड के चहज में स्थित पौराणिक पांडव मंदिर में आयोजित जागर का पारायण के साथ समापन हो गया है। 22 दिनों तक चली इस पांडव गाथा को हजारों लोगों ने सुना। सोमवार को दस हजार से अधिक लोगों ने पाण्डव मंदिर में प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले प्रवासी परिवारों ने भी शिरकत की।

22 दिनों तक चलने वाले इस पाण्डव गाथा कार्यक्रम की शुरुआत गांव के बीचोबीच स्थित जागर के मैदान से की गयी। इस स्थल पर प्रतिदिन सुबह व सायं जगरियों द्वारा कुमांऊनी भाषा में युद्ध काल को छोड़कर महाभारत के सभी वृतांतों का वर्णन किया गया। गाथा का समापन पाण्डवों के हस्तिनापुर पहुंचने के वर्णन के साथ हुआ। इस गायन को सुनने के लिये प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

श्रद्धालुओं द्वारा देर रात तक भजन कीर्तन किये गये। कई भक्तों ने रात्रि जागरण भी किया। जागर के अंतिम दिन प्रात: चार बजे से ही श्रद्धालुओं के जागर स्थल पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने अवतरित डंगरियों का आशीर्वाद लिया। इसके बाद श्रद्धालु गांव की चोटी पर स्थित पाण्डव मंदिर पहुंचे।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6079203.html

pandeyramesh007

Rudreshwar महादेव मंदिर उत्तराखंड में प्राचीन मंदिरों में से एक है. नदी राम गंगा, Rudreshwar महादेव मंदिर के बैंक के निकट स्थित शिव भगवान को समर्पित है. Rudreshwar महादेव मंदिर Masi और Bhikyasen से केवल 10 किमी है.

यह मंदिर बस नवीकरण है. मंदिर नदी के उत्कृष्ट हॉल से देखो राम गंगा है. आप कुमाऊं मोटर स्वामियों संघ KMOU बसों के माध्यम से मंदिर तक पहुंच सकते हैं.

Rudreshwar महादेव मंदिर एक उत्तरांचल में anciet मंदिरों में से एक है. Rudreshwar महादेव मंदिर sanara से केवल 1 किमी है

पंकज सिंह महर

Quote from: pandeyramesh007 on July 15, 2010, 12:57:28 PM
Rudreshwar महादेव मंदिर उत्तराखंड में प्राचीन मंदिरों में से एक है. नदी राम गंगा, Rudreshwar महादेव मंदिर के बैंक के निकट स्थित शिव भगवान को समर्पित है. Rudreshwar महादेव मंदिर Masi और Bhikyasen से केवल 10 किमी है.

यह मंदिर बस नवीकरण है. मंदिर नदी के उत्कृष्ट हॉल से देखो राम गंगा है. आप कुमाऊं मोटर स्वामियों संघ KMOU बसों के माध्यम से मंदिर तक पहुंच सकते हैं.

Rudreshwar महादेव मंदिर एक उत्तरांचल में anciet मंदिरों में से एक है. Rudreshwar महादेव मंदिर sanara से केवल 1 किमी है

रमेश पाण्डे जी, आपका स्वागत है। आपके द्वारा दी गई जानकारी बहुमूल्य है, यदि मन्दिर का कोई चित्र हो तो उसे उपलब्ध कराने की कृपा करें। साथ ही मासी के प्रसिद्ध भूमिया मन्दिर के बारे में भी जानकारी देने की कृपा करें।


सत्यदेव सिंह नेगी

पाण्डेय जी की दी गई जानकारी बहुमूल्य है उनका तहे दिल से स्वागत एवं धन्यवाद है