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Give Temple Details - यहाँ दीजिये अपने क्षेत्र के छोटे-२ मंदिरों का विवरण

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 13, 2009, 11:08:06 AM

विनोद सिंह गढ़िया

[/size]श्री गुरु गोरखनाथ गुंसाईं मंदिर चिरपटकोट (कपकोट) बागेश्वर[/size]

श्री गुरु गोरखनाथ गुंसाईं मंदिर का प्राचीन मंदिर कपकोट क्षेत्र के चिरपटकोट नामक पहाड़ी में है . यहाँ मंदिर में लोग समय-समय पर गुंसाईं देवता की पूजा अर्चना के लिए करने के लिए आते हैं . यह मंदिर चिरपट कोट  पहाड़ी के चोटी में है , यहाँ आने के लिए भक्तों को सीधी चडाई चडनी पड़ती है. यहाँ पर पानी की  व्यवस्था  नही है, हो भी तो कैसे इस चोटी पर. जब यहाँ पर कथा का आयोजन होता है तभी भक्त लोग सम्पूर्ण सामग्री एवं जल अपने पीठ/कंधे पर लादकर लाते हैं. यहाँ पर आकर भक्त लोग सुख और शांति का अनुभव करते हैं.



पौराणिक दृष्टि से चिरपट कोट का अपना खास महत्व हैं. कहते हैं कि प्राचीन समय में यहाँ "बैसाखसाल" नामक राजा रहते थे. यहाँ आज भी कुछ खंडहर मौजूद हैं और ओखल है, इस ओखल को इसी राजा का बनाया बताते हैं, जिसके दर्शन मैंने भी प्रत्यक्ष रूप से किया है.




जो यह चोटी दिख रही है, इसी का नाम है चिरपटकोट, यहीं विराजमान हैं श्री गुरु गोरखनाथ गुंसाईं देवता 

Devbhoomi,Uttarakhand

गाड़िया जी इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए धन्यवाद जय हो गुरु गौरखनाथ की

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संतान प्राप्ति की चाह खींच लाती है यहां
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संतान की कामना को लेकर बैकुंठ चतुर्दशी पर्व पर कमलेश्वर महादेव मठ मंदिर में की जाने वाली खड़ा दीपक पूजन में शामिल होने वाली महिलाओं की संख्या पिछले दो-तीन सालों से निरंतर बढ़ती जा रही है। पिछले वर्ष खड़ दीपक पूजन में शामिल होने के लिए 200 निसंतान दंपतियों ने पंजीकरण कराया था जिसमें से 170 निसंतान महिलाओं ने खड़ा दिया पूजन में भाग लिया। इस वर्ष अभी तक 49 निसंतान दंपती अपना पंजीकरण करा चुके हैं।

कमलेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री 108 आशुतोष पुरी ने बताया कि पंजीकरण कराने वालों में लखनऊ सहारनपुर, चंडीगढ़, देहरादून, दिल्ली आदि शहरों में रहने वके निसंतान दंपती हैं। यह पूजन आगामी 19 नवम्बर को सांय साढ़े चार बजे से मंदिर में शुरू होगा। महंत आशुतोष पुरी ने बताया कि इस वर्ष खड़ा दीपक पूजन में भाग लेने वालों की संख्या पिछले वर्ष से अधिक होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षो में खड़ दीपक पूजन में भाग लेने वाले 80 निसंतान दंपती उन्हें अब तक संतान प्राप्ति की शुभ सूचना दे चुके हैं।

महंत श्री 108 आशुतोष पुरी ने बताया कि निसंतान महिला जलते दिए के साथ रात्रिभर शिव स्तुति करती है। इस पूजन में उसका पति भी सहयोगी रहता है। प्रात: 4 बजे महंत जी को साक्षी मानते हुए निसंतान दंपती जलता दीपक भगवान शिव को अर्पित करते हैं। गंगा स्नान और हवन के बाद पूजन में भाग लेने वाले दंपतियों को महंत द्वारा सुफल दिया जाता है। उनका व्रत भी इस अवसर पर मंदिर की ओर से ही तुड़वाया जाता है। महंत आशुतोष पुरी ने बताया कि कमलेश्वर मंदिर में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मंदिर में खड़ा दीपक पूजन की प्रथा 1787 से चली आ रही है। शास्त्रों में उल्लेख के अनुसार सतयुग से यह प्रथा चली आ रही है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने जामवंती के कहने पर यहां पर खड़ा दीया पूजन किया था।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6834040.html

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मौडवी पूजा को लेकर उत्साहित लोग
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कर्णप्रयाग: नंदाधाम नौटी स्थित उफराई देवी मंदिर में मौडवी की मनौती उत्सव को लेकर क्षेत्रवासियों में उत्साह बना हुआ है। ध्याणियों के इस महापर्व मौडवी का संकल्प वैसे रामनवमी पर गांव के प्रधानों द्वारा लिया गया था। वहीं, अब पूजा की विधिवत तैयारियां पूरी होने से गांव में रौनक बनी है।

विकासखंड कर्णप्रयाग के चांदपुरपट्टी स्थित नौटी मैठाणा में 12 वर्षो के अंतराल में दो बड़ी पूजायें नंदाराजजात व मौडवी पूजा का विधान है।

दंत कथाओं के अनुसार बैनोली गांव की कन्या उफराई के समीप जंगल में घास के लिए गयी थी कि मौडवी नामक स्थान पर वनदेवियों ने उसे हर लिया। तभी से कन्या को देवी के रूप में पूजा जाने लगा। नौटी व समीपवर्ती गांवों के ग्रामीण देवी के भूमियाल के रूप में पूजते हैं और उफराई देवी को हर वर्ष नये अनाज का भोग लगाया जाता है। सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए मंदिर के मैठाणी समुदाय के पुजारियों द्वारा पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद को पत्थरों में खाने की परंपरा को निभाया जाता है।

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संतरा देवी मंदिर मसूरी


    * संतरा देवी मंदिर उत्तराखंड की प्रकृति की गोद में बसी मसूरी के मुख्य पर्यटन स्थल में से है।
    * संतरा देवी मंदिर मसूरी का प्रसिद्ध मंदिर है।
    * संतरा देवी मंदिर भी लेक मिस्ट कि तरहा केम्पटी फ़ॉल से वापसी के रास्ते में स्थित है।
    * पहाडियों पर कुछ सीढियाँ चढ़ने के बाद संत संतरा द्वारा स्थापित संतरा देवी के दर्शन होते है।
    * संतरा देवी मंदिर के आस पास एक दूसरे से टकराती पहाड़ियाँ बहुत ही अनुपम दृश्य पैदा करती हैं।

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धरती पर देवता और स्वर्ग में मन
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लोस्तु(कीर्तिनगर)

स्वस्तिन इंद्रो वृदसर्वाहा, स्वस्तिन.. मंदिर में स्वस्तिनवाचन मंत्र की गूंज, बाहर परिसर में ढोल दमाऊं की गर्जना, घंटों के स्वर, भंकोरों की दिव्य ध्वनियां, शंखनाद व चारों ओर घंटाकर्ण के जयकारे। इस बीच देवता अवतरण और श्रद्धालुओं को अक्षत का आशीर्वाद देना। ऐसा है इन दिनों घंटाकर्ण (घंडियाल)देवता की महाजात का दिव्य वातावरण। सैकड़ों किमी से लोग यहां पहुंचकर मन्नत मांग रहे हैं। कोई मनोरथ पूरा होने पर घंटे और छत्र भेंट चढ़ा रहा है तो कोई वांछित फल मिलने पर यहां दोबारा आने का संकल्प ले रहा है। घंटाकर्ण देवता के प्रति भक्तों की प्रगाढ़ आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पांच दिनों में ही यहां करीब ढ़ाई सौ घंटे, दो सौ छत्र और करीब चार लाख रुपये की नगदी भेंट स्वरूप एकत्र हो चुकी है। लोस्तु पट्टी के प्रसिद्ध घंडियालधार मंदिर में बीती 11 जनवरी से शुरू हुई महाकुंभीय महाजात का शनिवार को पांचवां दिन था। तीस गांवों के करीब बारह सौ परिवारों औश्र अठारह जातियों के इस संयुक्त आयोजन में चिकित्सा, यातायात व मनोरंजन की समुचित व्यवस्था है। सैकड़ों साल पहले स्थापित इस सिद्धपीठ में औश्र नौ रात्रि तक लगातार महायज्ञ चल रहा है। चारों प्रहर पूजन होता है और देवता अवतरित होते हैं। इनमें घंटाकर्ण के अतिरिक्त कैलापीर, देवी, नागराजा, हूणिया, कालिंका, हनुमान आदि हैं। कई परेशानियों से पीड़ित लोग दूर-दूर से आकर देवता से समस्याएं बताते हैं देवता समस्या का कारण औश्र उपाय बताता है। घंटाकर्ण, कैलापीर और देवी मिलकर तंत्र शक्तियों का शमन करते हैं। इस महामेले में इन गांवों के अतिरिक्त चंडीगढ़, दिल्ली, मुम्बई आदि शहरों के श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।

बारिश भी नहीं डिगा पाई कदम

लोस्तु(कीर्तिनगर): कल से लगातार हो रही बारिश और हल्की बर्फबारी से भले ही क्षेत्र में तापमान में गिरावट आई हो लेकिन भक्तों की आस्था बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हो पाई है। भारी बारिश व ठंड के बावजूद भी टोला, ग्वाड़, रिंगोली, खोंगचा आदि गांवों से लोग मेले में पहुंच रहे हैं। भेंट चढ़ाने के लिए लोगों को घंटों तक लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है।

Dainik jagran



Vinod Jethuri

मां चामुन्डा देवी सिद्द पिठ (मुन्नाखाल टिहरी गढवाल)

टिहरी गढवाल पटटी - भरपुर, ऋषिकेश से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सौडपानी और भरपुर दोनो जगह से उपर चोटी मुन्नाखाल पे बना मां भगवती चामुंडा देवी का भब्य सिद्द पिठ ! वर्षो पुराना ईस मन्दिर मे प्रतिवर्श १० गते बैशाख यानी कि २२ नही तो २३ अप्रैल को बहुत बडा मेला लगता है ! १२ बहिने देवियो मे से एक मां चामुन्डा भी है! यह मन्दिर जादातर लोगो के परिचय से दुर है पर जो भी ईस सिद्द पिठ मां के दरबार मे आता है! मां उसकी झोली जरुर भर देती है..! चंड मुन्ड नामक दैन्त्यो के अन्त करने पर मां का नाम चामुन्डा पडा था !
रास्ता:-
ऋषिकेश से ५० किलोमिटर की दुरी पर सौडपानी ....ईस मन्दिर तक जाने के लिये मेरे गांव यानि कि सौड गांव से होकर जाना पडता है..! सौडपानी से पहले पैदल २ किलोमीटर मुन्नाखाल तक जान पडता था ! अभी सौडपानी से मुन्नखाल तक मोटरमार्ग बन गया है.! आप अपने निजी वाहन से भी मां चामुन्डा देवी तक जा सकते हो !

जय मां चामुन्डा

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