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Give Temple Details - यहाँ दीजिये अपने क्षेत्र के छोटे-२ मंदिरों का विवरण

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, February 13, 2009, 11:08:06 AM


Devbhoomi,Uttarakhand

नहीं संवर सका सूर्य मंदिर समूह
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इतिहास अतीत का आइना ही नहीं, वर्तमान की नींव भी है। बावजूद इसके भविष्य की ओर दौड़ते कदमों को नींव के क्षरण का अहसास तक नहीं है। उत्तरकाशी जिले के रैथल गांव में सूर्य मंदिर के अवशेष भी इसी मानसिकता के शिकार हैं। एतिहासिक तथ्यों के अनुसार यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्यमंदिर से भी पुराना है। कोणार्क सूर्य मंदिर तेहरवीं सदी का है, जबकि रैथल के मंदिर नवीं सदी के बताए जाते हैं। जर्जर हो चुकी इमारत से मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं और शिल्प की पौराणिक शैली नष्ट होने की कगार पर है। महज पांच वर्ष पहले पुरातत्व विभाग ने मंदिर का अधिग्रहण किया और खंडहर के निकट एक अन्य कंक्रीट का मंदिर बना बोर्ड टांग कर कर्तव्य का निर्वहन कर डाला।

उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 42 किमी दूर भटवाड़ी व रैथल गांव के बीच खेतों में पौराणिक सूर्य मंदिर है। इनकी संख्या दो है। इस बारे में स्थानीय लोगों को भी ज्यादा जानकारी नहीं है। वे भी इतना ही जानते हैं कि कभी यहां और भी मंदिरों के अवशेष थे। इनकी मूर्तियां चोरी हो गई और अवशेष भी नष्ट हो गए।

रैथल के निकट सूर्य मंदिर समूह का उल्लेख 1816 में गंगा के उद्गम की खोज में निकले अंग्रेज खोजकर्ता जेम्स विलियम फ्रेजर के यात्रा वृतांत में मिलता है। पांच वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग ने एक कंक्रीट का मंदिर तैयार करने के साथ ही एक बोर्ड टांग कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी। इतिहास के जानकार उमारमण सेमवाल बताते हैं कि नवीं सदी की इस धरोहर का उल्लेख इतिहास की पुस्तकों में मिलता है। गंगोत्री धाम यात्रा मार्ग में ऐसे मंदिरों की बहुलता रही है, जो 1803 में आए भूकंप में नष्ट हुए थे।

विश्वनाथ मंदिर के महंत अजय पुरी बताते हैं कि पहले यह मंदिर समूह टिहरी व उत्तरकाशी के अन्य मंदिरों की तरह रियासत काल में बने टैंपल बोर्ड के ही संरक्षण में था। पांच वर्ष पहले पुरातत्व विभाग ने इसे अपने अधीन कर लिया।

क्या कहते हैं अधिकारी

' रैथल का सूर्यमंदिर विभाग द्वारा संरक्षित किये जाने वाले मंदिरों में शामिल है। पांच साल पहले इस पर काम कराया गया था। शीघ्र ही इसके संरक्षण के लिए प्रयास किए जाएंगे।'

Devbhoomi,Uttarakhand

पौराणिक कुंड की जातर का भव्य आगाज



  बड़कोट,  पौराणिक कुंड की जातर (गंगानी बसंतोत्सव मेले) का स्थानीय देवता बाबा बौखनाग की डोली की उपस्थिति में जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण सिंह चौहान ने उद्घाटन  किया। कुंड की जातर का यह मेला तीन दिन तक चलेगा। मेले में काश्तकारों को विभिन्न जानकारियां मुहैया कराने के लिए विभिन्न विभागों ने स्टाल लगाए हैं।
रविवार को रिमझिम बारिश के बीच त्रिवेणी संगम गंगानी में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ बाबा बौखनाग की डोली की अगुआई में पौराणिक कुंड की जातर का मेला शुरू हुआ। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्री चौहान ने कहा कि जिला पंचायत इस मेले को क्षेत्र वासियों के आस्था के अनुरूप पौराणिक बनाये रखने को सदैव प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मेले हमारी पौराणिक धरोहरें हैं, इनके संरक्षण, संवर्धन के लिए सभी के सहयोग की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संस्कृति को बचाये रखने के लिए क्षेत्र के लोक गायकों, कलाकारों द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों प्रस्तुत किए जाएंगे।
सीडीओ उत्तरकाशी एमएस कुटियाल ने कहा कि मेले में आने वाले काश्तकारों एवं आम लोगों के लिए जिले के विभिन्न विभागों ने स्टाल लगाए हैं।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7315715.html

मनोज भौर्याल

माँ वैशंवी माता मंदिर कुरोली ( दियाली) बागेश्वर

मनोज भौर्याल

जय भोले नाथ !
महाशिव रात्रि के शुब अव्षर पर मैं आपको  Maholi ( रंगिलिनाकुरी) बागेश्वर के प्रशिद शिव मंदिर के दर्शन कर वाता  हु [/बी]



Anil Arya / अनिल आर्य