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Tough Life of Women In Uttarakhand - पहाड़ की नारी का कष्ट भरा जीवन

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 17, 2007, 11:42:20 AM

पहाड़ी महिलाओ के दयनीय जीवन के लिए कौन जिम्मेवार ?

Conservative Rules of Society
4 (57.1%)
Geographical Condition
3 (42.9%)
Education
3 (42.9%)
Can't say
1 (14.3%)

Total Members Voted: 7

Voting closed: January 15, 2008, 11:42:20 AM


विनोद सिंह गढ़िया

एक मेहनती उत्तराखंडी बालिका, जो  पढ़ाई के साथ-साथ बचपन से ही यहाँ के कष्ट भरे जीवन को जीने के लिए तैयार है।


kundan singh kulyal

पहाड़ की नारी..... ये एक एसा नाम हैं जो सायद ही कोई नारी दुसरे जन्म मैं पहाड़ की नारी रूप मैं जन्म लेना चाहेगी... पहाड़ी नारी की पहाड़ जैसी जिंदगी ये हकीकत मैं सच भी हैं हमने बहुत करीब से देखा हैं इस जिंदगी को पहाड़ से बहार की नारियों की जिंदगी भी दोनों की दिनचरिया मैं कितना अंतर हैं कभी कभी तो हमको भी लगता हैं हम भी भगवन से प्रार्थना करते है की हे भगवन किसी को भी पहाड़ की नारी का जीवन न देना आज भी किसी घर मैं लड़के का जन्म होता हैं तो कितना जश्न मनाया जाता हैं जन्म से नामकरण तक बच्चे को देखने वालों की भीड़ लगी रहती हैं सब लोग कितने खुश नजर आते हैं चरों तरफ चर्चाएँ होती हैं की "अम्कने मक्या भो है रो" अगर कही गलती से लड़की हो गई तो समझो एक बहुत बड़ा बोझ या दुःख घर मै आ गई हो घर वाले तो घर वाले बहार वाले भी लड़की को देखने नहीं आते कोई खसम खास आ भी गया तो वो भी यही बोलता हैं कोई बात नहीं लक्ष्मी का रूप हैं अगली बार जरूर लड़का होगा हर कोई बातें भी करता हैं तो "अरे उनोक घर मैं तो चेली है रै बलि की जाना देखनहन"लड़की का बचपन जब ओ चलने फिरने लगती है तो तब से ही उसके शिर पर जिम्मेदारियों का बोझ आना सुरु हो जाता है सबसे पहले ओ खुद तो होश संभाली नहीं होती हैं उससे छोटे बाई या बहिन जो भी हो उसकी देखभाल की जिमेदारी उसके शिर पर आजाती हैं थोड़ी बड़ी होती है तो आधे घर का काम का बोझ उसी के शिर पर आजाती हैं पहले तो स्कूल भी नहीं भेजते थे अब थोडा बहुत परिवर्तन आ गया हैं अब लडकियों को स्कूल तो भेजने लगे हैं परन्तु थोडा बहुत घर मैं काम हो या खेती का काम हो तो लड़की को बोला जाता हैं आज स्कूल मत जाना क्या करेगी स्कूल जा के करना तो घास पात और घर का ही कम हैं गाँव की लड़कियां को तो यह भी पाता नहीं चलता की कब ओ शादी योग्य हो गई हैं ओ क्या चाहती हैं किस लड़के से शादी करनी हैं लड़का कौन हैं कैसा हैं बिना जाने ही घर वालों की मर्जी से ही उसे ससुराल मै जाना पड़ता हैं ये अछि बात है की घर वाले कभी भी अपनी लड़की का भला ही सोचंगे परन्तु घर वाले लड़की को ये तक पूछना मुनासिब नहीं समझते की एक बार लड़की को भी बता दै की उसकी शादी वहां कर रहे हैं उसकी मर्जी जानना तो दूर की बात हैं. जब लड़की ससुराल जाती हैं वहां होती है असली परीक्षा जिसको पहाड़ की नारी का जीवन कहते हैं पहाड़ की नारी को काम का बोझ कोई भी पहाड़ की नारी हो सुबह ४ बजे जाग जाती हैं शुभे उठाके जानवरों को चारा डालना पानी भरना  घर का झाड़ू पोछा सुबह का खान पकान बाच्चों को स्कूल को तयार करना कपडे दोना जानवरों को खोलना चरने के लिए जंगल तक हांकना उसके बाद घास काटने जाना घास कटके आएगी तो फिर दिन का खाना पकाना पति देव जी ठीक समय पर खाने भी नहीं आ जाते क्यों की या तो कही तास खेल रहे होंगे नहीं तो कही गपसप चल रही होंगी उनका आने का इंतजार करो उसके बाद फिर घास काटने या लकड़ी लाने शाम को फिर पानी भरना जानवरों को बधना घर मैं दिया बाती करना खाना पकाना चुला चौका करना बच्चों को सुलाना यहाँ तक की शुबह के ४ बजे से रत के १० बजे तक एक मिनट की फुरसत नहीं जिसमें अगर खेती का काम हो तो फिर पूछो ही मत पहाड़ की खेती का सारा काम नारी के ही सर पर होता हैं केवल हल जोतने के अलावा उस विचारी के पास खुद के लिए तो समय ही नहीं रहता हैं नहाने धोने तक का समय बहुत मुस्किल से निकलती है पति जी घर मैं हैं तो भी परेशानी पति देव शाम को दारू पि के आ रहे हैं घर मैं आते ही उनके हिंदी मैं भाषण चालू अरे ये नहीं किया ओ नहीं किया ये क्या खाना हैं सब्जी बना राखी हैं की एसी होती है सब्जी गाली गलोज चालू कही पत्नी बिचारी ने कुछ बोल दिया तो समझो दो चार झापड़ भी पड़ जायंगे अगर पति जी कही बहार हैं तो ये सब तो नहीं देखना पड़ता है परन्तु पति के बिरह मै कैसे जीवन कटती है ये हम महसूस नहीं कर सकते ये तो वो ही नारी जानती हैं जो ये जीवन बिताती हैं हमारे पहाड़ मैं अधिकता बदनसीब महिलाओं के ये ही हल हैं हमने भारत के कई प्रान्त  घूमे है कई राज्यों मै सालों सालों तक रहे है बहार के देशों की तो बात ही छोड़  दो हमने तो कही भी पहाड़ के महिलाओं जैसा कठोर जीवन कही और नहीं देखा फिर भी जी लेती हैं अपनी जिंदगी मजबूरी मनो या जरुरत "जीवन मैं आये हैं तो जीना ही पड़ेगा जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा" 


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'Prakriti  [Nature ]April 20 Like ·  · Unfollow Post




एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Go through this sad news. Generally such cases happens in hills as the women has to go hills to bring grass for cattle.
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पहाड़ी से गिरकर महिला की मौत
Updated on: Thu, 06 Dec 2012 04:35 PM (IST)
 

जोशीमठ : जंगल में घास काटने गई महिला की पहाड़ी से गिरकर मौत हो गई। महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय लाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को प्रात: 10 बजे यह हादसा हुआ। उर्गम भर्की गांव की विजया देवी (43 वर्ष) पत्‍‌नी आनंद सिंह गांव के निकट ही जंगल में घास काटने गयी थी। पहाड़ी से पैर फिसलने के कारण वह चट्टान से गहरी खाई में जा गिरी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

(source dainik jagran)