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Tough Life of Women In Uttarakhand - पहाड़ की नारी का कष्ट भरा जीवन

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 17, 2007, 11:42:20 AM

पहाड़ी महिलाओ के दयनीय जीवन के लिए कौन जिम्मेवार ?

Conservative Rules of Society
4 (57.1%)
Geographical Condition
3 (42.9%)
Education
3 (42.9%)
Can't say
1 (14.3%)

Total Members Voted: 7

Voting closed: January 15, 2008, 11:42:20 AM


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


During the rainy season, there are news of women falling from the hills in Uttarakhand and losing their lives.

Recently, a women in my village lost her life when he fell from the hill. She had gone there for grass cutting.

There is no denying the fact that the lives of women in pahad is very very tough compared to parts of the country.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Ye bojh kam kab hoga.. Ye kathin jeewan saral kab hoga.

Quote from: मोहन सिंह बिष्ट/THET PAHADI on February 20, 2008, 02:12:12 PM
ye dekho kaha kahenge aap ye dursasa nahi to kya hai.. matlab kitna mehnat logo ke pass padne likhane sochane ke liye time nahi hai....

पंकज सिंह महर

जागरण समाचार Aug 14, 10:15 pm

अस्कोट (पिथौरागढ़)। सीमांत जिले पिथौरागढ़ का एक सुदूरवर्ती दुर्गम इलाका ऐसा है जहां की महिलाओं का रोज मौत के साथ साक्षात्कार होता है। संसाधन नहीं होने से रोज मौत के दरवाजे तक होकर आना यहां की महिलाओं की दिनचर्या बन गई है। हालत यह है कि यहां सुबह घर से निकली महिलाएं शाम को सही सलामत लौटेगी यह विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता है। विकट भौगोलिक परिस्थितियों में बसे इस दुर्गम इलाके की महिलाओं का जीवन एक ऐसी खतरनाक चट्टान व उसके बीच बनी पानी की गूल के हवाले है जो अब तक कई जिंदगियों को लील चुकी है। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 52 किमी की दूरी पर अस्कोट कस्बा है। इस कस्बे से लगभग दस किमी की दूरी पर एक ऐसा इलाका है जहां के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इसके अ‌र्न्तगत आने वाले सिरतोली, कूटा और बसौरा राजस्व गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल और यातायात जैसी सुविधायें आज तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। हांलाकि सुविधाओं के अभाव में अब तक अधिकांश परिवार यहां से बाहर पलायन कर चुके है। परंतु आर्थिक रूप से कमजोर परिवार आज भी इन्हीं असुविधाओं से जीवन यापन करने को मजबूर है। आज भी लगभग दो हजार की आबादी खेतीबाड़ी व पशुपालन से गुजर बसर करते है। अपने मवेशियों के लिये लिये घास चारा व जलौनी लकड़ी आदि के लिये यह लोग एक ऐसी बेहद खतरनाक चट्टान से आवाजाही करने को मजबूर हैं जो अब तक कई लोगों की मौत का सबब बन चुकी है। इन गांवों की महिलाएं घास, चारा और लकड़ी के लिये हर रोज इस चट्टानी क्षेत्र में जाती है। सैकड़ों मी.ऊंचे व लगभग एकदम खड़े कालभेल नामक इस चट्टानी क्षेत्र के बीचो बीच संकरा रास्ता बनाया गया है। इस स्थान पर महिलाओं को घास को पकड़कर आवाजाही करनी पड़ती है। थोड़ी सी लापरवाही होने पर सैकड़ों फीट गहरी खाई में गिरने का खतरा बना रहता है। अब तक इस स्थान पर कई महिलाएं गिरकर मौत के मुंह में जा चुकी है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


The rainy season is specially very tough for women. I assume every almost 30 women might be losing their life in pahad.

Due to tough working, they have to visit hill area for grass cutting etc and due to slippery way, they fall from the hills.


Devbhoomi,Uttarakhand

महिलाओं की प्रगति में बाधक है निरक्षरता


जन शिक्षण संस्थान बागेश्वर ने प्रौढ़ शिक्षा सप्ताह के तहत गरुड़ में साक्षरता रैली निकाली। विकास खंड सभागार में आयोजित रैली में वक्ताओं ने महिलाओं से अपील की कि वह साक्षर बनकर सामाजिक गतिविधियों में भागीदार बनें।

सभा में मुख्य अतिथि क्षेत्र प्रमुख शोभा आर्या ने कहा कि निरक्षरता अभिशाप है तथा इससे विकास बाधक होता है। निरक्षरता दूर करने के लिए शासन द्वारा कई योजनाएं चलायी जा रही है।
विशिष्ट अतिथि बीडीओ गोविंद सिंह गढि़या ने कहा कि पढ़ी लिखी व साक्षर महिलाओं का परिवार भी शिक्षित, संगठित व सभ्य होता है। प्रधान निर्मला बोरा व व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष नवीन ममगई ने कहा कि कई कार्यक्रम चलाने के बाद भी महिलाओं में साक्षरता का प्रतिशत नहीं बढ़ रहा है। जिस कारण बाजार में खरीददारी करते वक्त महिलाएं ही अक्सर ठगी का शिकार होती है।
कार्यक्रम अधिकारी राकेश कुमार ने कहा कि निरक्षरता व्यक्तित्व विकास में बाधक है। निरक्षर समाज कभी भी प्रगति नहीं कर सकता है। सभा को प्रधान हंसा कांडपाल आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर जूनियर हाईस्कूल माल्दे की छात्र छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बाद में विकास खंड सभागार से लेकर टीट बाजार तक रैली निकाली।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Devbhoomi,Uttarakhand

मीडिया में प्रमुखता से उठें महिलाओं से जुड़े मुद्दे



पिथौरागढ़। महिलाओं से जुडे़ मुद्दों को मीडिया में प्रमुखता से उठाये जाने की जरुरत हैं। महिला संघर्ष के ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिससे अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिल सके।

यह बात मंगलवार को अर्पण संस्था द्वारा आयोजित महिलाओं के मुद्दे और मीडिया के सहयोग विषय पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कही। गोष्ठी में उत्पीड़न की शिकार महिलाओं ने अपने मामले उठाये और कहा कि उत्पीड़न से उबरने के बाद जो जद्दोजहद वह कर रही हैं उसे भी मीडिया में कवरेज मिलनी चाहिए।

गोष्ठी में उपस्थित मीडिया कर्मियों ने कहा मीडिया महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहा है। जिले में उत्पीड़न से जुड़े कई मसलों पर मीडिया की पहल से ही कार्रवाई संभव हो पायी।

मीडिया की पहल से ही आज उत्पीड़न के मामले सामने आ पा रहे हैं और महिलायें उत्पीड़न के मामलों की शिकायत दर्ज करवा रही हैं। वक्ताओं ने कहा महिला मुद्दों पर महिला संगठनों को भी आगे आने की जरुरत है। पीडि़त महिलायें मीडिया तक पहुंच सके इसके लिए महिला संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

गोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि उत्पीड़न के साथ ही महिला पंचायत प्रतिनिधियों की सफलतायें, महिला काश्तकारों की सफलतायें, महिला समूहों की सफलतायें भी प्रमुखता से मीडिया में आयें ताकि महिलाओं को प्रेरणा मिल सकें।

हेम पन्त

देखिये यह महिला किस तरह घास के बोझ के साथ स्वेटर भी बुन रही है. कष्ट भरे जीवन को हंसी के साथ गुजारना उत्तराखण्ड की महिलाएं भली-भांति जानती हैं.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


The life standard of people have changed in pahad. There is mobile facility for communication, in some place road connectivity is there, cookig gas has come but.. there is no technology in working field (khet).

Same old method of doing agriculture.. If some small size of trackers are introduced which are in portable in nature, this will help the workload in field for women.