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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

     Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind  context History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur


                           हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर   इतिहास संदर्भ में महाभारतीय कुलिंद में पशुपालन व शिल्प

                            History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  Part  -- 83

                                 
                     हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -  83                                     


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती


                           पशुपालन
    महाभारत  जब कुलिंद जनपद के बारे में पशुपालन के बारे में उल्लेख है तो उसी दृष्टि से उसी तरह हरिद्वार , बिजनौर व सहारनपुर में था।
कुलिंद जनपद के निम्न पालतू पशुओ का उल्लेख है -
गाय
चंवर गाय
भेड़
बकरी
अश्व
गधे
हाथी
कई स्थान बैलों के लिए प्रसिद्ध थे जैसे आज  का उत्तरी चमोली गढ़वाल में रांकवयण बैल प्रसिद्ध थे।
आश्रमों में गाय पाली जातीं थीं।
कुलिंद राज्य प्रवेश याने भाभर में हाथी व अश्व प्रचुर मात्रा में पाले जाते थे। 
                      शिल्प

    पहाड़ी कुलिंद,  घाटियों व भाभर में जहां भेड़े पाली जाती थीं वहां अति उत्तम ऊनी  वस्त्र बनाये जाते थे।
मधु निर्माण सभी जगह होता था। कुलिंद जनपद का शहद तो सम्राट अशोक के समय में भी कुलिंद क्षेत्र से (हरिद्वार , सहारनपुर व बिजनौर सहित ) निर्यात होता था
धातु विज्ञान व खनन विज्ञान विकसित था  व यह क्षेत्र प्रसिद्ध था व नदी किनारे सुवर्ण चूर्ण के लिए भी प्रसिद्ध था।  धातु वर्तन बनाये जाते थे।
अर्जुन ने यदि यहां अस्त्र शस्त्र प्राप्त किये थे तो सिद्ध होता है कि बिजनौर , हरिद्वार व सहारनपुर में भी  आदि अस्त्र शस्त्र बनाये जाते थे।
जड़ी बूटियां भी प्रसिद्ध थीं अतः आयुर्वेदिक दवाइयो का निर्यात किया जाता रहा होगा।
घर मिटटी पत्थर , राल , लकड़ी से बनाये जाते थी।
पहाड़ों के शिल्प उत्पाद संभवतया मैदानी मंडियों से निर्यात किया जाता था।

** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन

Copyright@ Bhishma Kukreti  Mumbai, India  21/3/2015

   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --

हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -
   
Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ;Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind &  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ;Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind &  History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ;  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ;Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind &  History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ; History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ;Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind &  History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind &  History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;  History of Bijnor; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind &  History of Nazibabad Bijnor ; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind &History of Saharanpur; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind &History of Nakur , Saharanpur; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Deoband, Saharanpur; Pasturing and Crafts in Mahabharata Kulind & History of Badhsharbaugh , Saharanpur;
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                     :=============  स्वच्छ भारत !  स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत =============:


Bhishma Kukreti

                                 बंद कमरा
                            (उन्ना देसी भाषाक नाटक )
                         
                        अनुवाद - भीष्म कुकरेती
                       चरित्र
नौकर
गजेन्द्र उर्फ़ गज्जु
कामिनी
मेनका
(एक कमरा मा यु नाटक मंचित हूंद। कमरा की सजावट फ्रेंच सेकंड ऐम्पायर की च )
गज्जु  (नौकर  का साथ कमरा मा प्रवेश करद अर कमराक जायजा लींद। ) अच्छा तो हम इख छंवां हैं ?
नौकर  - जी मिस्टर गज्जू ।
गज्जु  -हाँ तो यु कमरा इन लगद हैं ?
नौकर - जी।
गज्जु  -सेकंड ऐम्पायर फर्नीचर ! भलो भलो , पर इन कमराक अभ्यस्त हूणम समय लगद ।
नौकर  -कुछ ह्वे जांदन , कुछ नि हूंदन। 
गज्जु  -सब कमरा ए कमरा जन इ छन ?
नौकर  - इन कन ह्वे सकद ? हम सब्युं  कुण इंतजाम करदां। चीनी क्या अर क्या भारतीय ! चीनी अर भारतीयों कुण सेकंड ऐम्पायर फर्निचरौ क्या काम ?
गज्जु  -अर मेकुण बि के कामक च ? पता च ना मि कु छौं ? ... ओह इथगा बड़ी बात नी च।  सच्च बतौं  त मि तैं ऊँ फर्निचरूँ बीच रौणै आदत पड़ गे जौं तैं मि पसंद नि करदु अर झूठी शान का बीच। अर धीरे पसंद बि ऐ गे छे। झूटी शान फिलिप्स लुइस कु डडाइनिंग रूम मा -पता च कैं शैलीक च ? हालांकि वै मा कुछ मतबल बि च। पर सही बोलूं तो बेकार मादे बेकार।
नौकर -अब तुम पैल्या कु तरां  सेकंड एम्पाइयर वळ कमरा मा रौणो बि मतलब च
गज्जु  -अच्छा ?  ... हाँ हाँ मि हिम्मत से बोल सकुद  ... मीन आसा नि कौर छौ   कि -यि !पता च ना कि पृथ्वी लोक मा क्या क्या बुले जांद।
नौकर - केक विषय मा ?
गज्जु  -ये घौ  ... घौरक विषय मा। 
नौकर -असल मा , आप ऊँ कपोल कल्पित कथाओं पर विश्वास इ कनकैक करदा ? अरे जौन  कबि इख खुट नि धार वु इखक बारा मा विश्वास से बतांदन।  हाँ यदि उ इख आंद , तो बात -
गज्जु  -हाँ ये बात च , अच्छा , मि पुछणु छौं कि त्रास दीण वळ हथियार कख छन ?
नौकर - क्या कख ? क्या ?
गज्जु  -अरे  लाल चचकार ,गर्म लोहा की सीक सरिया, आग मा चढ़ाईं तेलाकि  कढ़ाई, मतलब यंत्रणा दीणो साजो सामान ?
जरा वीं जगाक बार मा सोच जु तुमन नरक का वास्ता चुन। क्या या जगा साधारण अर रूढ़िवादी लगदि ? जन सार्त्रे कु ड्रवाइंग रूम , या यु दांतेक त्रासदारी साहित्यिक सामान  से सुसज्जित च ? क्या इथगा सुंदर कमरा मा मन मानल कि यु नरक च ? क्या नारकीय भौतिक वातावरण मा मन तैं शान्ति मिल सकिद ?
नौकर -हो हो , यु छुट मुट मजाक  इ  ह्वाल।
गज्जु  -छुट मुट मजाक ? नै नै मि मजाक मसखरी नि करणु छौ। मीन द्याख कि ईख क्वी शीशा नी च। खिड़की नदारद। आशा करे जै सक्यांद।  इक कुछ बि टुटण लैक नी च। भंगुल जाम जावो यूँ पर पर  या क्या बदतमीजी च कि म्यार दांतुन नी च !
नौकर - भला भला ! अबि तक आप अपण वै से भैर नि ऐंया - वु क्या बुल्दन वांकुण ? हाँ मानवीय अहम।  म्यार मुस्कराण तैं माफ़ कर्याँ।
गज्जु  -जरा नम्रता से व्यवहार कर। मीन अपण पद समझि याल , पर मि बर्दास्त नि -
नौकर -क्षमा जी ! म्यार अपमान करणो विचार नी च। पर हरेक मेहमान यु इ सवाल पुछुद। क्षमा कर्याँ बेवकूफी वल सवाल। हरेकाक सवाल हूंद कि त्रास भवन कख च ? सबसे पैल सबि ये  इ सवाल करदन। क्वी बि बाथरूम का बार मा चिंता नि दिखांद। अर जब ऊँ तैं होश आंद तब टूथपेस्ट यांद अर क्या क्या याद नि आंद धौं ! भगवानौ वास्ता ! मिस्टर गार्सिन ! अपण दिमाग त लगाओ त सै?  दांतु ब्रश कु क्वी महत्व च ?
गज्जु  -हां ! सही बुलणु छे। अर किलै हम आईना मा अपण मुखड़ा दिखदां ?पर चिमनी क मथि  पीतल का काम ! या दूसरी बात च। म्यार हिसाब से समय इन बि आल कि जब मि कुछ दिखुल। कुछ टक लगैक  दिखुल .... सूण म्यार मतबल क्या च ? ठीक च , अब बात तै समजण जरुरी च। मि विश्वास दिलांदु कि मि अपण पद या प्रतिष्ठा का बार मा सचेत छौं। बतौँ कि मि तैं क्या लगद ? एक डुबद आदिम तब तक भक्कु , डुबणो अनुभव तब तक इ अनुभव कर सकुद जब तलक वैक आँख पाणि से भैर ह्वावन। अर वु इख क्या द्याखल  ? एक हिंसक पीतल की कलाकृति   ... राक्षसी कृति , जंगली कृति क्या च कलाकार का नाम बारबेड़िनी।  दुःस्वप्न ! या च ऊंक सोच ! त्वे तैं मथि बटें आदेश होलु कि उत्तर नि दीण; अर जबाबौ बान दबाब बि नि डळुल।  पर इन नि भूल कि मी पर इथगा सुचणो -समजणो तागत छैं च कि म्यार दगड़ क्या वर्ताव ह्वाल  ... नरक मा । त इन घमंड मा नि रौ कि तीन मेरी दुखती रग पकड़ आलि। मि यथास्थिति समजणु छौं , ना टूथब्रश , ना पलंग।  यांक युइ  मतलब च कि क्वी से बि नि सकद ?
नौकर - जी यै बात च।
गज्जु  -जन कि आसा छै। आदिम तैं किलै सीण चयेंद हैं ? एक अळगस घर कर जांदि , कंदूडू पर कुतगळि हूंद , अर यी त अनुभव हूंद कि आँख बुज्याणा छन   - पर सीण किलै च ? आदिम सोफ़ा मा पड़द , - कुछि देर मा , नींद आदिम तैं दूर ली जांदी , भौत,  मीलों दूर।  फिर आँख मरोड़ो अर बिजि जावो , अर फिर वीं इकि बात दुहराओ। 
नौकर - आप रूमानी मनिख छंवां
गज्जु  - जरा चुप रौ ,  ... मीन पैलि बथै याल कि मि क्वी बखेड़ा नि करलु जांसे पछतावा हो , इन नि हो कि मेपर इल्जाम लग जावो। मीन त सै बात बोलि अर तू बुलणु छै बल मि रोमांटिक मनिख छौं। अब मि मुद्दा पर आंदु -यदि कै तैं निंद नी आणि त निंदक बान चिंता किलै ? यु विचारणीय च,  है न ? जरा एक मिनट हाँ , कुछ  अड़चन च ; अस्वीकार्य अड़चन। हाँ पर अब , क्यांक अस्वीकृति  ? .... औ , इख त बगैर आराम की जिंदगी होलि। क्या नरक की परिभाषा च - बगैर विराम या अवकास बगैर  अति की  बहुतायत ? हम विभिन्नता , अनुशासन , स्व अनुशासन , संतुलन , अवकास आदि बातों तैं  अति की गर्मी तैं दूर करणो साधन मणदां त क्या यी इख अति एक सभ्यता च ?
नौकर - तुम केक बारा मा बात करणा छंवां ?
गज्जु  -त्यार आंखुं चेप याने पलकुं बारा मा बुलणु छौं। हम अपर चेप उब -उंद करदां। जन कि काळो शटर जु तौळ आंद त एक अड़चन पैदा करद एक पर्दा करद।  चेप बंद हूण से सब काळु ह्वे जाँद ; अर आंखुं मा नमी ऐ जांदी। तू नि जाणि सकदि कि चेप झपकाण कथगा  आराम  अर तरोताजा लांद ।  एक घंटा मा चार हजार दैं छुटु सि आराम। एक घंटा मा चार हजार दैं छुटु सि आराम -- जरा सोच !  ...तो या च असली बात। अब मीन  आंखुं चेप बगैर रौण। लाटो जन स्वांग नि कौर , तेरी समज मा मेरि सब बात आणि च। पलक ना तो नींद बि ना; यै च यांक मतबल हैं ना ? अब मीन फिर से कबि नि सीण।  पर फिर - मि अपणु इ दगुड़ तैं  कनकै सहन करलु ? जरा समजणै कोशिस कौर। पता च , मि तै चिरड़ाणो आदत च, या मेरी दुसरि प्रवृति च -- अर मि अफु तैं बि चिरड़ाणो आदि छौं। तू बोलि सकिद कि अफु तै अफिक तंग करण; पर मि अच्छी  तरां से नि चिरडै सकुद।   पर मि  बगैर विराम कु हर समय वै काम थुका  कर सकुद।  तौळ रात हूंदी छे।  मि सींदु छौ। अच्छी रात हूंदी छे। मतबल म्यार खयाल से इनाम का रूप मा। अर खुसमिजाज सुपिन। उख हरियाली छे मतबल पुंगड़ । साधारण पुंगड़। मि उख घुमणो जांद छौ    ... क्या अबि दिन च ?
नौकर -दिख्याणु नी च ?  लाइट ऑन च।
गज्जु  -औ ! हाँ समझ मा ऐ ग्याइ। यु तुमर दिनौ बगत च। अर भैर ?
नौकर - भैर ?
गज्जु -तू समजणि त छे कि म्यार बुलणो मतबल क्या च।  चारदीवारी से भैर ?
नौकर -उख रस्ता च।
गज्जु  -अर रस्ता का अंत मा ?
नौकर - फिर कमरा छन , रस्ता छन अर सीढ़ी।
गज्जु  -अर वांसे भैर क्या च ?
नौकर -बस स्युइ च।
गज्जु  -हाँ पर हफ्ता मा तेरी छुटि त हूंदी इ ह्वेलि। छुटिक दिन तू कख जांदि ?
नौकर - अपर काकाक इख।  उ तिसर मंजिल मा रौंद।
गज्जु  -मि तैं अफिक सोची लीण चयेंद छौ।  अच्छा लाइट स्विच कख छन ?
नौकर -इन कुछ नी च।
गज्जु  -क्या ? तो लाइट कनकै बुजाण ?
नौकर - जरूरत पड़ण पर प्रबंधक इ करंट बंद कर सकदन।  पर मि तैं याद नी च कि ये कमराकी लाइट बुजि हो।  हमम बिजलिक कमी नी च।
गज्जु  -त मतबल इख हर समय आँख खोलिक इ जीण  पोड़ल ?
नौकर -तुमन ब्वाल जीण पोड़ल ? जीण ?
गज्जु  -शब्दुं जाळक पचड़ा मा नि पड़न चयेंद। हर समय आँख खोलिक।  हमेशा , हर समय। हर समय म्यार आँखूं मा उज्यळ- अर म्यार दिमाग मा बि। अच्छा यदि मि मेंटलपीसक पीतल उठैक लैम्प मा धोळि द्यूं तो  - लैम्प नि बुजल ?
नौकर - मेन्टलपीस नि उठै सकदा तुम।
गज्जु  -हाँ तू सही छे।  मेन्टलपीस भौत भारी च।
नौकर - ठीक च , अब आप तैं मेरी जरूरत नी च।  अब मि जांद छौ।
गज्जु  -क्या ? तू जाणु छे ? रुक ! क्या वा घंटी च ?मतलब मि जब घंटी बजौल तो तू अवश्य ऐली ?
नौकर - हाँ ! बुलणो त घंटी इ च। पर तारुं मा कुछ गड़बड़ी च।  त हमेशा घंटी बजद नी च।  कबि , कबि ना।
गज्जु  -नै या तो काम करणी च।
नौकर -हाँ पर यदि मि तुमर जगा होलु त घंटी पर भरवस नि करलु। अच्छा जी अब मि तैं जाणी पोड़ल।
गज्जु  -क्वी बात नी च।  अच्छा यी क्या च ?
नौकर - देख ल्यावो ? स्यु पेपरकटर च ।
गज्जु  -इक किताब बि छन ?
नौकर -ना।
गज्जु  -त फिर यांक क्या फायदा ? अच्छा ठीक च , तू जा।
( गज्जु  अकेला च वु पितळो सजौटी सामान का पास जांद।  वै पर जोर की थाप मारद।  उ बैठद च; फिर खड़ु हूंद ;घंटिक पास जांद बटन दबांद।  घंटी बटें आवाज नि आंदी।  द्वी तीन दफै पर्यटन करूद , कुछ नि हूंद। उ दरवाजा खुलणो कोशिस करद पर क्वी सफलता नि मिल्दि।  वु नौकर तैं भट्यान्दु कुछ फरक नि पड़द। वु दरवज खटखटांदु पर क्वी फरक नि पड़द।  आवाज दींदु , पैल झल्लैक फिर उ शांत ह्वेक  बैठ जांद। तबि द्र्वज खुल्द  अर इनेज कु प्रवेश हूंद अर वींक पैथर नौकर आंदु  ।
नौकर - जी आपन भट्याइ ?
गज्जु  (वु हाँ बुलण चाँद पर मेनका तैं देखिक )-ना ,
नौकर -मैडम ! यु तुमर कमरा च।  बकै सबि इकजनि प्रश्न पुछदन।  जन कि टूथब्रश , घंटी , लाइट, मेन्टलपीस  आदि तो श्रीमान जी आप तैं सब बतै द्याल । यांसे पैल हमर बात ह्वे गे छे।
(नौकर भैर जांद )
मेनका -फ्लोरेंस कख च ? सुणणु नि छे ? हाँ हाँ मि त्वे तैं पुछणु छौं। फ्लोरेंस कख च ?
गज्जु  -मि तैं नी पता।
मेनका -औ तो नरक ये प्रकार से काम करद हैं ? बिगलाण से , कै तै अलगाव  से त्रास दीण। म्यार तो क्या च में पर फरक नि पड़दो ,  कखि बि रौँ ।  फ्लोरेंस एक तंग करण वळि छे।  मि तै वींक कमि से फरक नि पड़न।
गज्जु  -हैं ! तू मि तैं समजणि क्या छे ?
मेनका -त्रास दीण वाळ जल्लाद और क्या !
गज्जु  -यु बढ़िया मजाक च! हैं ! मि अर त्रास दीणेर जल्लाद ! त तू भितर ऐ , तीन मी पर नजर मारि अर ------स्वाच कि मि तरास दीण वळ जल्लाद छौं या स्टाफ छौं -- या वैकि मूर्खता च।  वै तैं परिचय करण चयेंद छौ। वास्तव मा यु इ उत्पीड़न च।  मि जोसेफ गार्सिन छौं ! एक पत्रकार। अर हम एकि रस्ता का बटोही छंवां।  आप मिसेज   ...  ?
मेनका -मिसेज ना ! मि अणबिवा छौं अबि।
गज्जु  -चलो शुरुवात त ह्वे गे। क्या मि त्रास दीण वळु जल्लाद दिख्यांदु ? अर बतादि कि त्रास दीण वळौ  असली पछ्याणक क्या च ? साफ़ पता लगणु च त्रास दीन्देरो बारा मा त्वेम जानकारी च।
इनेज -उ  डर्याँ  हूंदन।
गज्जु  -डर्याँ  हूंदन ? बड़ो बेवकूफी वळ उत्तर ! त्रास दीण वळ बि कै से डर्याँ रौंदन ? शिकारी  अपर शिकार से डरदन ?
मेनका -छवाड़ो न हंसी बात ! मि जाणदु छौं कि मि क्या बुलणु छौं। मि रोज आईना मा अपण मुखड़ि दिखुद छौ।
गज्जु  -ऐना मा ? जानवर कहींके ! यून सब चीज हटै देन अर ऐना जन बि। मि विश्वास दिलांदु कि मि डर्युं नि छौं। इलै ना कि मि अपण पद तैं गंभीरता से नि लींदु ; मि बात की गंभीरता समजदु छौं। पर मि डर्युं नि  छौं।
मेनका -वु जाणि ! अच्छा इन बतादि हर समय इकि चिपक्युं रौंदी या कखि घुमण -उमणो बि जांदी ?
गज्जु  -द्वार बंद  छन।
मेनका -भौत बुरी बात।
गज्जु  -हाँ में तैं देखिक खीज या ऊब लगणी त ह्वेलि।  अर सै बोलुं त   ... मि तै अकेलापन  पसंद च।  मि अपण जिंदगी तैं ढर्रा पर लाणो बान सुचण चाणु छौ अर यु तबि ह्वे सकद जब आत्मविवेचना हो। पर ठीक च निभै ल्योला। मि ज्यादा बातूनी नि छौं अर ज्यादा रौंत्या -गौन्त्या याने घुम्मकड़ बि ना। मि एक तरां से शांतिप्रिय छौं। मेरी एक सलाह च बल हम तैं एक दुसर का प्रति नम्र रौण चयेंद। यांसे स्थिति ठीक ठाक रालि।
मेनका -पर मि विनम्र नि छौं।
गज्जु  -ओहो तो मि तैं दुयुंक तरफ़ से  विनम्र रौण पोड़ल।
मेनका -त्यार मुख !
गज्जु  -क्या ?
मेनका-तू अपण मुख तैं स्थिर नि रख सकदि ? हर समय हिलाणु  रौंद।  बड़ा भद्दु लगद।
गज्जु  -हैं ! मि तैं पता नि छौ।
मेनका -मीन यी अभियोग त लगै छौ। तू विनम्रता की बात करदि , अर अपर मुखुं भाव तैं संयत बि नि कर सकदि। याद रख तू अकेला नि छे। अपण डौर तैं में पर निरोपित करणो तीम क्वी अधिकार नी च।
गज्जु  -अपण हाल बोल ! क्या तू डरीं नि छे ?
मेनका -क्या फैदा ? डर त्रास से पैलि  ठीक लगद  याने जब आस हो। जब आस नि  ....
गज्जु  -हाँ ठीक च भौत आस नी च।  पर अबि निरासा से पैलाकि स्थिति च।  अबि त्रास शुरू नि ह्वे।
मेनका -हाँ या बात त छैं च। क्या हूण वाळ होलु ?
गज्जु  -मि तैं नी पता।  मि बि जग्वाळ मा छौं।  (इस्टेली कु नौकर का साथ प्रवेश। वा गार्सिन तैं दिखदि जैक हाथ से मुख छुप्युं  च। )
कामिनी- नहीं ! मथिन नि देख ! मि तैं पता च कि हतुं पैथर क्या लुकाणु छै।  मि तैं पता च त्यार मुक नी बच्युं च। क्या ! पर  मि त्वै तैं नि जाणदु  !
गज्जु  -मि जल्लाद नि छौं , मि पीड़ा दिंदेर नि छौं।
कामिनी  - ना ना मि त्वै तैं वु नि समजणु छौ - - मीन समज क्वी म्यार दगड़ भयंकर मजाक करणु च। (नौकर से ) क्वी हौर बि आणु च ?
नौकर - ना  मेम ! हौर क्वी नी आणु च।
कामिनी - (हँसिक ) औ तो हम तिनि छंवां इख, यी सज्जन या भद्र महिला अर मि (हंसदि )।
गज्जु  -इकम हंसण लैक बात कुछ नी च ?
कामिनी -अरे यी सोफ़ा नि छन।  बड़ा भद्दा छन। द्याखदि जरा कै हिसाब से धर्यां छन। बड़ा बोरिंग -उबाऊ। मि तैं नया साल की याद ऐ गे। जब मि अपण बोरिंग -उबाऊ बूढी फुफूक इक जांद छौ , फूफुक नाम मेरी छौ। वींक ड्यारम बि इनि भद्दा सोफ़ा छा।  म्यार हिसाब से हरेकाकुण इकै सोफ़ा च। वु म्यार च ? पर म से आसा नि कर्याँ कि मि उखमा बैठुल।   मि तैं धुंधलु नीलु रंग पसंद च अर यु त चमकीलो हौरु रंग क च।
मेनका - तो म्यार सोफाक बारा मा क्या ख़याल च ?
कामिनी -त्यार मतलब वै  गैरु लाल रंगक सोफ़ा से मतलब च ? भौत भौत धन्यवाद , पर मि तैं नि लगद क्वी फायदा होलु। जु मिलणु च वैपर इ खुस हूण मा इ फैदा च। मि होरु सोफ़ा ही लेलु। अर हाँ तै सज्जन पुरुषक जरा चुभाण वाळ च।
मेनका - मिस्टर गज्जू  ! सूणो !
गज्जु  -औ - सोफ़ा ? तो मैडम ! म्यार ले लो।
कामिनी - धन्यवाद , रण द्यावो।  अब हमन दगड़ी रौण।  तो परिचय ह्वे जावो। म्यार नाम चरिगौल्ट ,  इस्टेली रिगौल्ट।
मेनका - इनेज सिरेनो. मीलिक खुसी ह्वे।
गज्जु  - जोसेफ गार्सिन
नौकर - अब मेरी जरूरत च ?
कामिनी - ना ना तू जा।  जब जरूरत ह्वेलि  त मि घंटी बजै द्योलु।
मेनका - तू भौत सुंदर छे।  काश हम्म स्वागतौ बान फूल हुँदा।  मेहमान का स्वागत फूलों से !
कामिनी - फूल ? मि तैं फूल पसंद छन। बस यि इख जल्दी मुर्झै जांदन। है ना ? औ ! महत्वपूर्ण बात या च कि हम प्रसन्न रौंवाँ , ठीक बुलणु छौं ना मि ? अवश्य सहमत ह्वेलि ? हाँ  तू त खुस --
मेनका - हाँ पिछ्ला हफ्ता -
कामिनी - मि त अबि - नयो नयो। ब्याळि।  दिखे जावो तो अबि श्मशानौ कर्मकांड पूर बि नि ह्वेन। मेरि बैणि दुप्पट्टा हवा से उड़णु च। वा रुणै भौत कोशिस करणी च।  ह्यां !  जरा जोर लगा , और कोसिस कौर ! हाँ अब ठीक च। द्वी आंसू , द्वी हीरा जन आंसु काळ दुप्पटा पैथर बगणा छन। हाँ आज सुबेर ओल्गान मेरी बैणि तैं सम्बाल।  ओल्गा मेरी बैणि हथ पकड़िक संबाळणि च। वा नी रुणि च , दोष वींक नी च ,आँसु मुखक मेकप बिगाड़ दींदन।  है ना ? ओल्गा मेरी दंतकटी सहेली च।
मेनका - तीन भौत दुःख भ्वाग ?
कामिनी  - न भै ! मि त तकरीबन अर्धचेतन अवस्था मा इ रौं।
मेनका - क्या ह्वे छौ ?
कामिनी -न्यूमोनिया ! अब त सब खतम।  सि देखि लेदि , सब श्मशान गृह से भैर आणा छन। भीड़ छै च हाँ ! म्यार पति त दुखक मारो घौर पर इ राइ।  बिचारो ! त्वे क्या ह्वे छौ ?
मेनका - गैस स्टोव से। जळिक।   
कामिनी - अर मिस्टर गज्जु  ?
गज्जु  -बारा गोळी सीधा छाती पर। मि तैं लगद मि मर्यां लोगुं बीच मा ठीक नी लगुद।
कामिनी - नै नै तन नि बोल।  जपाट भाषा ठीक नी च। जिकुड़ी जळाण वाळ शब्द। खैर यांन  कुछ फरक बि पड़न वाळ नी च।  मि तैं लगद कि हम अब ज्यादा इ जीवंत छंवां।   मेरि समज मा हम तै अफु तैं मर्युं नि बुलं चयेंद अपितु -------'अनुपस्थित 'बुलण चयेंद। तू  --- कथगा समय बटें  अनुपस्थित छे ?
गज्जु  - एक मैना बिटेन।
कामिनी - कखक छे ?
गज्जु  -रियो कु।
कामिनी - मि पेरिस की छौं।  उख क्वी च बि कि ना  ?
गज्जु  - हाँ , मेरी पत्नी च। वा बिचारी बैरेकक द्वार पर प्रतीक्षा करणी च। वा उख रोज आदि। पर वु वीं तैं भितर नि आण दींदन। अब वा छड़ों बीच बिटेन भितर दिखणै कोसिस करदि।  वीं तैं पता नी च कि मि 'अनुपस्थित ' छौं।  पर  वीं तैं शक तो छैं च कि .... अब वा वापस जाणि च।  वींक काळु ड्रेस पैर्युं च।  ठीक च कपड़ा बदलणै जरूरत बि नि पोड़लि।. वा रुणि नी च।  उनि बि वा कबि नि रवै। यु एक घाम वळ दिन च।   इन लगणु च जन काळी छाया खाली गळी मा  घसीटेकी सरकणि हो धौं। शहीदी मुख पर -वींक बड़ी बड़ी करुणामयी आँखि। वींन म्यार नाक मा दम कर्यूं च।
मेनका - कामिनी  !
कामिनी -मिस्टर गार्सिन ! कृपया !
गज्जु  - क्या ह्वै ?
कामिनी  - तू म्यार सोफ़ा मा बैठ्युं छे ?
गज्जु  -क्या ?
कामिनी - तू सुदूर दिखणु छौ ---- सॉरी मीन डिस्टर्ब कार।
गज्जु  - मि अपण जिंदगी  सेट करणो कोशिस मा लग्युं छौ। तुमन हंसण  च पर तुम बि जिंदगी नियमित कर ल्यावो।
मेनका  - जरूरत नी च। मेरि जिंदगी बिलकुल नियमित च। मीन ठीक से दुरस्त करी च। तो मि तैं चिंता करणै आवश्यकता नी च।
गज्जु  - अच्छा ? मतबल तू इथगा सरल समजणी छे हैं। ओहो भौत गरम च इख।  आप बुरु त नि मानिल्या यदि मि अपण -
कामिनी - हैं ? तेरी इथगा हिम्मत कनकै ह्वे ? ना ना प्लीज ! मि तैं बगैर सुलारौ  मरद पसंद नि छन। घृणा हूंद।
गज्जु  - क्या कौरु ! मि जब अखबारौ दफ्तरम रात काम करदु छौ , दफ्तर क्या एक बड़ो अन्ध्यरु काळो दुंळ छौ त कोट -पैंट टांगिक या पैट अळकरिक   काम करदा छ। भट्टी जन गरम।  अबि त रात ह्वेलि।
कामिनी -हाँ।  ओल्गा नंगी हूणि च त मतबल अधा रात ह्वेइ गे ह्वेलि। पृथ्वी मा समय कन जल्दी जल्दी कटद हैं !
मेनका - हाँ अधा रातम तौन म्यार कमरा सील कर याल। चुकापट अंध्यरु अर खाली।
गज्जु  - उख न्यूजपेपर औफिस मा मर्दुन अपण कोट टाँगी यालिन , कीमजक बौंळ बिटै यालीन।  भौत गर्म हूंद। उख सिगरेटों धुंवा अर उफ़।
कामिनी - ये मामला मा मेरि रूचि अलग च। यु प्रमाणित ह्वे गे।  त्वे तैं बौंळ बिटयाँ मरद पसंद छन ?
मेनका - मि मरदुं बारा मा जादा सुचद बि नि छौं।
कामिनी - मेरी समज मा नि आई कि यूंन हम तिन्युं तैं एक जगा किलै रख। क्वी तुक   नि बैठद।
मेनका - क्या ब्वाल ?
कामिनी - हाँ हम तीन अर इख ! मि त अपण यार दोस्त अर सगा संबंदियुं आस मा छौ।
मेनका - त्यार सुंदर दोस्त , जैक मुख पर छेड़ च।
इस्टेली - हाँ वी बि।  माउथऑर्गन बढ़िया बजांद छौ  ... पर यूंन किलै हम तिन्युं तैं दगड़ि राख?
गज्जु  - बस बाई चांस और कुछ ना। बस पहले आवो वल आधार पर। तू किलै हंसणी छे ?
मेनका - त्यार बाइ चांस वळ सोच पर।  बगैर बजह का नि होलु।
कामिनी - आश्चर्य हूणु च।  यांसे बढ़िया हम तौळ पािल ज़िंदा मा मिल जांद तो। 
मेनका - हाँ मीन त त्वै तेँ नि भुलण छौ।
कामिनी - ह्वै सकद च हमर क्वी समान दोस्त बि ह्वाल ? डुबिअस सेमोर्स तैं क्वी जाणद च ?
मेनका - ना
कामिनी - पर बड़ आदिम छ पार्टी करद।  लोग उंक घर जांदन।
मेनका - मि त नि जाणदु। मि त पोस्ट ऑफिस मा कलर्क छौ।
कामिनी - औ , हाँ    ... मिस्टर गार्सिन ?
गज्जु  - न  ना  .... मि त रिओ मा रौंद छौ।
कामिनी -हाँ हमर पछ्याणक वाल सामूहिक दोस्त बि नि छौ। त यांक मतबल च कि हम संयोग से ही इक कट्ठा हुवाँ।
मेनका - संयोग से ? त जन कमराकी सजौट हुईं च वु  बि संयोग से हुयुं च ? क्या या दुर्घटना बस ह्वे कि दैण हथक सोफ़ा चकाचक नील च , अर बैं वळ लाल च ? अकस्मात ? जरा सोफ़ा हटावो ना कि अंतर पता चल जाल।  अर मेन्टलपीस मा व मूर्ति , क्या इन बि अकस्मात इ च ? अर ये कमराकि गर्मी बि संयोग च क्या ?  ये विषय मा हम तैं लाण से पैल खूब विचार ह्वे होलु। हरेक बारीकी पर सुनियोजित विचार करे गए। कुछ बि अकस्मात नि ह्वे।
कामिनी - हाँ , हरेक चीज भद्दी छन।  कोणाकार वस्तु असुविधाजनक छन। मि हमेशा से कोणीय या तीखा किनारा वल चीजुं तैं नापसंद करदु।
मेनका - तो त्यार बुलण च कि मि सेकंड ऐम्पायर वळ कमरौं मा रौंद ?
कामिनी - मतलब हम तैं सोचि समजिक इक लये गे?
मेनका - बिलकुल हाँ ! तिन्युं तैं जाणि बुजिक इक रखे गे।
कामिनी - तो त्यार म्यार समिण विरोधी दिशा मा बैठण बि अकस्मात नी च? पर यांक पैथर क्या विचार ह्वाल ?
मेनका -मि तैं हैंक सवाल पूछ। मि तैं लगणु च वू कुछ हूणै आसा मा छन ?
कामिनी- मि कबि बि कैक आसा अनुसार काम नि करद।  हमेशा उल्टां इ मि करूद।
मेनका - त कौर।  बस जरा उंक आसा क उल्टां करिक दिखादि।  अर त्वै तैं पता बि नि वू क्या आसा करणा छन।
कामिनी - यु अत्यधिक अन्यायपूर्ण च। मतबल तुमन म्यार दगड़ कुछ बिघन करण। कुछ निरपट लगण वाळ च। मि मुख देखिक बोलि सकुद कि कु क्या करण वाळ च। त्यार विश्वसनीय चेहरा नि च।
गार्सिन -सूणो।  हम इख एकदगड़ी किलै छंवां ? तीन इथगा  अंदाज त दियाल , अब जरा तू लगादि अंदाज।
मेनका -मि कुछ नि जणदु।  जन तुम अनभिज्ञ छंवां तन मी बि अनभिज्ञ। छौं
गार्सिन - हम तैं लगाण चयेंद।
मेनका -यदि हमम,  हरेकम सत्य बुलणौ  साहस हो तो -
गज्जु  - क्या बुलणो ?
मेनका - इस्टेली ?
कामिनी -हाँ ?
मेनका - तीन क्या कार ? ति तैं इख किलै भ्याज ?
कामिनी - बस इनि।  मि तैं कुछ बि नी पता, जरा बि अंदाज नी च । मि तैं लगणु  च कि कुछ गलती ह्वे गे।  रोज उख बिटेन हजारों की संख्या मा लोग अनुपस्थित हून्दन। फिर इखक नौकर लोग छंटनी करदा ह्वाला।  कथगा इ मूर्ख  नौकर हूंदन जौं तैं पता इ नी च कौंतैं छंट्यांण।   यूंसे भयंकर गल्ति हूण लाजमी च।  म्यार मतलब समजी गेवां ना ? मुस्कराण कौर।   ... तू किलै नि बुलणि छे ? तू बि बोल कि जन म्यार मामला मा गलती ह्वे उनि त्यार मामला मा कुछ गलती ह्वे गे। अर त्वी बि।  हम इन किलै नि सुचदां कि इख गलती से लाये गेवां ? हैं ?
मेनका-बस यी बुलणाइ ?
इस्टेली - अब क्या बथौं ? मीम लुकाणो कुण कुछ नी च। म्यार ब्वे -बाब बचपन मा इ मोर गे छा।   अर मीम म्यार भुलाक जुमेवारी बि छे। हमर हालत कंगाल छे।  फिर कैन एक बुड्या दगड़ शादी करणो राय दे। बुड्या म्यार बुबाकि उम्र से बि बडु छौ।  पर म्यार भाई बड़ो कोमल सुभौ  कु छौ अर बुड्या करोड़पति त छौइ। पर छै साल तक हमन सुखी वैवाहिक जीवन बताऐ।  फिर द्वी साल पैल एक युवा से मुलाक़ात ह्वे।  आँख मिल्दा इ हम तैं लग कि हमर जोड़ी मथि बटे बणी च।  वैन भागणो ब्वाल पर मीन ना बोलि दे। फिर न्यूमोनिया ह्वे अर मि इख छौं। ठीक च मीन  अफुसे तिगुण  उमरक बुड्या दगड़ शादी कार , मीन अपण जवानी स्वहा कार।  पर मैं नि लगद कै बि हिसाबन यु क्वी पाप च। क्या यु पाप च ?
गज्जु  - बिलकुल नही।  अच्छा एक बात बतावो क्या अपण सिद्धांत का साथ खड़ रौण क्वी गुनाह च ?
कामिनी - कदापि नही।  क्वी बि इन आदिम पर अभियोग नि लगे सकुद।
गज्जु  - अच्छा सूण ! मि एक युद्धविरोधी समाचार पत्र निकाळदु छौ। फिर युद्ध छिड़ गे।  मि क्या करदु।  लोग दिखण चाणा छा कि 'अब स्यु क्या कारल ? क्या हिम्मत दिखालु ?' ।मीन हिम्मत दिखाइ।  म्यार हथ बंधे गेन अर मी पर गोळी मारे गे।  मीन क्या क्वी गलत  कार ? मतलब इखम पाप कख च ?
कामिनी - गलत ? नही उल्टां।  तुम तो -
मेनका - एक हीरो ! अर मिस्टर गार्सिन ! तेरी घरवळि क बारा मा ?
गज्जु - भौत सरल।  मीन वीं तैं   ... मीन वीं तैं गटर से निकाळ।
कामिनी -देख ! देख ! सूण याल !
मेनका -हाँ देख याल ! सूणो ! अब नाटक करणो क्या मतबल ? किलै एक दूसरौ आंख्युं मा धूळ छुड़ना छंवां हम ? हम सब्युंक मुख काळु। च
कामिनी -तेरी या हिम्मत !
मेनका - हम सब अपराधी छंवां- हत्यारा - तिन्याक तिनि। प्यारो ! हम नरक मा छंवां। ऊ लोक गलती नि करदन अर मनुष्य  बेकार मा दुर्भाग्यशाली नि हूंद।
कामिनी -भगवान का वास्ता बकबास बंद कौर
मेनका - नरक माँ ! अभागी आत्माएं -उ हम छंवां , हम तिनि !
कामिनी -मुख बंद कर ! बंद कर !
मेनका -अच्छा , अच्छा ! अब मेरि समज मा ऐ गे कि ऊंन हम तैं दगड़ी किलै राख।
गज्जु  - देख हाँ ! बुलण से पैल द्वी दैं सोच समज ले हाँ कि तू क्या बुलणि छे।
मेनका - रुको ! अब चितैल्या बल यु बड़ो सरल च समजण।  बच्चा बि समाज जालु। हाँ इख भौतिक रूप से क्वी त्रास दायक चीज वस्तु नि छन -मि सै बुलणु छौं  ना ? है ना ? फिर बि हम सब नरक मा छंवां। अर अब क्वी हौर आण वळ बि नी च। हमन येइ कमरा मा रौण , हम तिन्युंन दगड़ि रौण अर सद्यनि कुण   ... मतलब इख , एक औपचारिक त्रासदायक चीज अनुपस्थित च।
गज्जु  - हूँ मि तैं अंदाज च।
इनेज  -म्यार दिखण से इख कर्मियों याने कामगतियूँ कमी च -यातना दायी जल्लादी  कर्मियों की कमी - आर्थिक डावांडोल - कुछ बि कारण ह्वे सकदन जन अचकाल होटलुं मा या ब्यौ काजुं मा  स्वयं सेवा -
कामिनी -क्या मतबल ?
मेनका-मतलब या च कि हम मादे एक तैं हौर दुयुंकुंण  यातनादायी बणन।
गज्जु - , नहीं।  मीन त्वे तैं यातना नि दीण।  ना है तुम दुयुं मादे कै कुण बि यातना दिंदेर बणन। म्यार तुम से क्वी लीण दीण नी च त मीन तुमतैं क्वी नुक्सान नि पौंछाण । तो समस्या समाधान या च कि हम अपण अपण जगा मा बैठ जाँदां अर कै हैक से क्वी मतलब नि रखवां। तू तख , वा वख अर मि इख बस। जन सिपाइ अपण अपण चौकी मा। अर हम तैं आपस मा बात बि नि करण चयेंद।  सब चुपचाप। हमम अपणी दगड बात करणो भौत च।  मि दस हजार साल तक अफु मा लीन रै सकुद।
कामिनी -मि तैं बि चुप रौण पोड़ल ?
गज्जु  - हाँ। ये तरह से हम सद्गति पै सकदां। अपण अंदर दिखण बस अर मुंड नि उठाण कि कु क्या करणु च।  ठीक च ना ? स्वीकार ?
मेनका -स्वीकार।
कामिनी -स्वीकार।
गज्जु  - नमस्ते !
(इनेज गाणा गान्दि , इस्टेली अपण मुख  पाउडर लगान्दि , लिपस्टिक लगान्दि , अर अपण बैग से कुछ खुज्यान्दि , फिर गार्सिन से )
कामिनी -एक्सक्यूज मी।  तीम ऐना होलु , छुटु सि हि सैइ।   (गार्सिन चुप रौंद ) अबचळयौ रौ पर आईना दे दे।
मेनका -चिंता नि कौर।  मीम छैं च।  (बैग टटोळदि ) ओहो नी च।  गेट पर यूंन निकाळ दे होलु।   
कामिनी -कथगा तकलीफदेय च  !   ( इस्टेली आँख बंद करदि , वीं तैं रिंग लगदि  बुल्यां वा भीम पड़ण वाळी हो। इनेज दौड़िक जान्दि अर वीं तैं थमदि )
मेनका -क्या बात च ?
कामिनी -बड़ो अजीब लगणु च। त्यार दगड़ कबि इन ह्वे च ? मि अफ तै नि देखु त मैं लगद मि छैं इ नि छौं। अफु तै भरवस दीणो तरीका च अपर सूरत दिखण। पर -
मेनका - तू भाग्यशाली छे।  मि त अपण मन मा अपण प्रति - सचेत हूंद। दुखदायी चेतना !
कामिनी-औ तू अपण इ मन मा।  पर जू बि मा आंद वु सब धुंधलो धुँधलो हि हूंद।  मि तैं त निंद ऐ जान्दि।  मीन त अपण बैडरूम मा छै आइना लगायाँ छन। वु उखि छन। मि तौं तैं देख सकुद।  पर सि मि तैं नि देख सकदन। ऐना मा कार्पेट , टेबल , ड्रेसिंगौ सामान सब दिखे जांद- पर अब सब बेकार अब आईना मा मेरी छवि नी च। जब मि कैक दगड बात करदु छौ तो मि इन जगा मा बैठुद छौ कि मि अफु तैं देख सकुं। मि अफु तैं बचळयांद दिखुद छौ। ऐना मा देखिक मि अफु तैं खुद चेतावनी दीणु   रौंद छौ कि म्यार लिपस्टिक कन च , बाळ कना फैल्यां छन , क्वा लट कन लटकणि च।  ये ब्वे मेरी लिपस्टिक ! मि बगैर लिपिस्टक  नि रै सकुद ,  घड़ी भर  बि ना।
मेनका - जु मि त्यार ऐना बण जौं त ? आ म्यार पास ऐजा।  इखम बैठ , सोफ़ा मा जगा च।
कामिनी -पर (गार्सिन की तरफ इशारा ) -
मेनका - वै तैं नि गौण।
कामिनी -पर  दुसर तै पीड़ा द्योल्या तो --- तीन इ बोल छौ कि -
मेनका -  त्वै तैं मि कष्ट दिंदेर लगद ?
कामिनी -कुछ नि बुले सक्यांद।
मेनका -ज्यादा याइ उम्मीद च कि तू मि तै कष्ट द्येली।  पर क्या फरक पड़दु? यदि मै तैं  चोट बि पौंछल तो त्यार कुंगुळ , बिगरैल्या हतुं से चोट पौंचल। जरा नजिक आ।  नजिक।  अब म्यार आँख्यु मा देख।  कुछ दिखेणु च ?
कामिनी -हाँ मि तक छौं ! पर मि इथगा छुटि छौं कि  ठीक से दिखणम नी आणु च।
मेनका -पर मि देख सकुद।  इकै इंच दिख्याणु च। अब  कर।  मि स्पष्ट जबाब द्योलु, जन आईना दींद ।
कामिनी -मिस्टर गार्सिन ! हमर बात सूणिक  बोर त नि हूणि छे ना ?
मेनका -वैक बारा मा चिंता नी कौर।  हमकुण वु गणत मा छैं इ नी च।   ... सवाल कौर।
कामिनी -म्यार ऊँठ ठीक छन ?
मेनका -कुछ धब्बा -धब्बा अर दागदार सि छन।
कामिनी - जन मि चिताणु छौ। अच्चु ह्वे कैन नि द्याख। मि  फिर से करदु।
मेनका -हाँ अब पैल से ठीक छन। अब जरा ऊंठुं लाइन पर ध्यान दे।  रुक मि तेरि अंगुळि  त्यार ऊंठुं पर फिरांदु। हाँ इकम ,  ठीक।  बिलकुल ठीक ठाक।
कामिनी -ऊनि ना जन मि इक ऐ छौ।
मेनका - भौत बढ़िया।  भोंडा।  इन मा त त्यार मुख कुछ क्रूर लगणु च।
कामिनी -तू शालीन छे ! अर तू बुलणि छे कि त्वै तैं पसंद च! यु पागल बणणो बात च।  मि अफु तैं नि देख सकुद। मिस सेरानो ! त्वै तैं विश्वास च ना कि अब ठीक च ?
मेनका - इनेज नि बोलि सकदि ?
कामिनी -पक्को ना कि ठीक छन ?
मेनका - इस्टेली ! तू प्यारी छे।
कामिनी -पर मि तेरी रूचि पर कनै विश्वास कर ल्यूं ? क्या तेरी अर मेरि रूचि इकजनि च ? भौत बुरु हाल छन मीन त पागल ह्वे जाण।
मेनका -हाँ मेरी रूचि तेरी जन च , किलैकि मि तीतै पसंद करदु। म्यार तरफ देख।  सीधा।  अब मुस्करा।  मी बि क्वी बदशक्ल नि छौं। क्या मि त्यार ऐना से बढ़िया नि छौं ?
कामिनी -पता नी। आईना बणिक तू  डरांदि छे। मेरी छायान  मि तैं कबि नि डराइ।  इन लगद जन मीन आईना तैं अपण बश मा कर याल छौ  ... मि मुस्कराण वळ छौं अर या मुस्करात तेरी आंख्युं मा धंस जाली , अर पता नी फिर क्या होलु धौं।
मेनका -मि तैं बि बश मा कर ले। सूण मि तैं इनेज नाम से भट्या। हम तैं गहरा दोस्त बणन चयेंद।
कामिनी -मि सरलता से लड़क्यूं दग्द दोस्ती नि कर सकुद। इस्टेली -
मेनका -मतबल पोस्टल कलर्को दगड दोस्ती नि करण ? अरे इ क्या ? अरे ! त्यार गल्वड़ पर लाल ---हाँ लाल फुंसी?  मुहाँसा ?
कामिनी -मुंहांसा ? छिः ! कखम ?
मेनका -तख। तू कबि आईना दगड खेल बि त खिल्दी होली ना ? मि त्यार खेल आइना बि छौं। ना तक क्वी मुँहासा नी च। त यांक क्या अर्थ च ? माना कि ऐना झूट बुलण मिसे जाव तो ? या माना कि मि अपण आँख बंद कर द्यूं जन तैक कर्याँ छन   -- अर त्वै तैं देखवां इ ना त तेरी सुंदरता तो सुखो कुंवां मा डूबि जालि। ना डर ना। मि त्यार मुख से अपण आँख नि घुमौलु। मि तयार दगड़ ठीक रौलू , हमेशा।   हाँ त्वै तैं बि म्यार दगड़ ठीक रौण पोड़ल।
कामिनी -अच्छा तू म्यार तरफ आकर्षित छे ?
मेनका - हाँ बिलकुल।
कामिनी -कास ! स्यु आकर्षित हूंद।
मेनका - आकर्षित च किलैकि वु मरद च।  ये वींक तरफ देख।  इन नि बोल हाँ कि तीन हमर बात नि सूण ह्वेलि।
गज्जु  - बिलकुल ! एक बि शब्द ना।  मीन अपण कंदू डू मा अंगुळि  जि कुचिं च, पर तुमरि आवाज म्यार बर्मंड फुंडणि छे। बेकारका छुंयाळ !  मि तैं शान्ति से रौण द्या , तुम द<

Bhishma Kukreti

  बंद कमरा part -2




मेनका -मिमा  ना सै - पर इं बच्ची का बारा मा क्या ख़याल च ? क्या तेरी दिलचस्पी यीं मा नी च ? मीन त्यार खेल देख आल , समजी आल। वीं पर प्रभाव डाळणो बाण तू मर्दाना रूप से ठसठस लगणु छे।
गज्जु  - मि तैं शान्ति मा रण द्याओ।  उख ऑफिसम म्यार बाराम कुछ लोग छ्वीं लगाणा छन। मि तैं सुणन द्याओ कि वु क्या बुलणा छन। अर तेरी खुसी का वास्ता मि बोलि द्यूं कि  मैकुण  तैं बच्चीक  क्वी उपयोग नी च। 
कामिनी -धन्यवाद।
गज्जु  - मीन कठोरता पूर्वक नि ब्वाल हाँ !
कामिनी -नीच !
गज्जु  - अब देख ले।  मीन पैलि बोल छौ कि बात नि कारो।
कामिनी -वींक गलती च; वींन इ शुरू कार । मीन त कुछ बि नि मांग छौ , स्याइ आइ म्यार ऐना बणनो।
इनेज - हूँ त तू इन बुलणि छे। पर हर बकत तू इन हरकत करणी छै कि वु आकर्षित ह्वे जाव।
कामिनी -ठीक ! पर मी तैं किलै नि करण चयेंद ?
गज्जु  - तुम पागल छंवां ! दुयाक द्वी।  दिखणा नि छंवां बल हम इन मा कख जाणा छंवां ? खुदा ! हाँ दया का वास्ता ! बैठ जावो , अब चुप राओ , फर्स की तरफ द्याखो अर हरेक भूल जावो कि क्वी हैंक बि इख च।
इनेज -दुसर तैं भूल जौंवाँ ? क्या बेवकूफी च ! मि त्वै तैं अपण हरेक छिद्र मा अनुभव करणु छौं। तेरी हरेक चुप्पी म्यार कंदुड़ुम  भारी आवाज करदि।   तू अपण मुख सील सकदी , जीब काटि सकदि .... पर तू अपण अस्तित्व नि मिटै सकुद । क्या तू अपण विचार बंद कर सकदि ? मि त्यार विचारुं तैं इनि सुणद जन बुल्यां घड़ी की सुई टक टक करणी हो। मि तैं विश्वास च कि तू म्यार विचार बि चिताणी रौंदि। हाँ ठीक च कि तू अपण सोफ़ा मा धँस्युं छे पर वास्तव मा तू हर जगा छे। हरेक ध्वनि मीमा मटमैली  ह्वेक आंद, किलैकि तीन ध्वनि रोक जि च।
किलै , इख तलक कि तीन मेरि  मुखड़ि बि चुरै आल; तू जाण दु छे पर मि नि जाणदु। अर इस्टेली का बारा मा क्या च ? तीन वींतैं मीमांगन चुरै आल।. यदि मि अर इस्टेली ही इख हूंदा तो क्या इस्टेली म्यार दगड़ इन ब्यौवार करदि ? न, मुख से अपण हाथ हठा , मीन त्वै तैं शांति से नि रण दीण - अर यु त्वै तैं भलु बि लगल। तू बैठिक योगी का रूप मा ध्यानमग्न ह्वे जैली तो फिर बि यदि वा मि तैं नी बि दिख्यालि तो बि मेरि  हड्डी वीं तैं अनुभव करणा छया    ---वींक फिराकक सरसर मि अनुभव कर सकुद ,अर हाँ त्यार लाभ का वास्ता मि बोलि दयूँकि वा त्वे पर मुस्कराट फेंकणी छे  , तीन नि द्याख  ...खैर वै मामला मा  म्यार क्वी मतलब नी च, पर मि अपर नरक कु चुनाव करण  चांदु , मीन त्यार आँखूं से  आँख मिलाण अर हिसाब किताब करण।
गज्जु  - जन करणयाइ स्यु कौर। मै लगद इन हूण इ छौ; वु जणदा छा कि वु क्या करणा छन , अर हम सरल प्यादा छंवां। यदि मि तैं मरदों बीच रखदा तो मरद चुप रै स्कदं।  पर असंभव की चाहत ही ठीक नी च। तो ठीक च. मि अब त्वे पर फ़िदा ह्वे ग्यों (वु इस्टेली तैं छेड़दु )।  इन लगद तू मि तैं दिखणि छे ? 
कामिनी -मि तैं टच नि कर  हाँ।
गज्जु  - किलै ना ? हमर व्यवहार प्राकृतिक हूण चयेंद  ....  पता च औरतुं मामला मा पागल छौ ? अर कुछ तो म्यार पैथर बि पागल छया। तो नाटक बंद कारो।  क्वी नुक्सान नि हूण। नम्रता , शालीनता मा समय बरबाद किलै करे जावु ? हमर अलावा इक क्वी नी च।  तो चलो नंग धड़ंग ह्वे जाँदां  --जन्मजाति बच्चा की गाणी मा। 
कामिनी -मि तै छोड़।
गज्जु  - नंग धड़ंग ! मीन पैलि बोलि याल छौ। मीन थोड़ा सा इ मांग छौ बस - शान्ति अर शांति।  मीन  कानुं पुटक अंगुळि  डाळी आल छौ।  गोमेज कमरा  का  बीच फवारा जन फुटणु छौ ,  प्रेसमैन सुणना छया अर सब्युंक  बौंळ  बिटयां छया।  मीन सुणनो  कोशिस कार पर तुमर चकच्याट मा  नि सुण्या। पृथ्वी मा समय जल्दी बदल्द।  तुम अपण जीबुं पर ताळु नि  लगै   सकद छा क्या ? अब सब बंद ह्वे गे।  वैन बुलण बंद कर याल। अर जु वैन म्यार बाराम सुचद वु  वैकि  दिमाग मा च। खैर अब त हम सब  ... नंग धड़ंग जन जनम जात  बच्चा। जथगा जल्दी तथ्गा भलु।  अच्छा बताओ म्यार जोड़ीदार को च।
मेनका - तू जाणदि इ छे।  इखमा पुछणै बात नी च।
गज्जु  - गलत।  अबि हमन अपण पत्ता नि खोलिन कि कैन क्या कार कि इख आण पोड़। चल यंग लेडी तू इ शुरू कौर। किलै ? बोल कि यी तीतै किलै लैन ? यदि तू सच बुलली हम तैं आपदा से बचै देलि।  चल शुरू कौर। किलै ?
कामिनी -बुलण क्या च।  मि तैं क्वी विचार इ नी सुजणु  च।  तौन बताण नी च।
गज्जु  - त बात या च। ऊंन मि तै बि नि बताण।  पर म्यार समज मा एक विचार आणु च। तू बुलण मा शर्माणि छे ना ? त मि शुरू करदु  -मि सम्मानीय पुरुष नि छौं।
मेनका -बताणै जरूरत बि नी च। हम तै पता च च धोखेबाज छे।
गज्जु  -हूण दे।  यू बस थोड़ा सि  बस। मि इक इलै छौ कि मीन अपण घरवळि तै पीड़ा दे , उत्पीड़न। बस।  पांच साल तक। हाँ व अबि तक दुःख सहणि च। अरे स्या च वा : जनि मीन वींक बारा मा ब्वाल वा दिखेण मिसे  गे। गोमेज का बारा मा सुचणु छौं , ले स्याच वा। गोमेज पांच साल तक कख छौ ? वुख। ऊंन वीं तैं म्यार चीज बस्तर दे आलिन; वा सब चीज लेकि खिड़की पास बैठीं च।  वींक घुण्डुं मा म्यार चौदा छेड़ वळ कोट पड्यूं च। खून बैंगनी जंक , हरेक छेद पर खून की एक पपड़ी। यु कोट इतिहास का म्यूजियम लैक च जु इतिहासकारुं तै डराल। अर मि ये तैं पैरदु छौ -मजे से। स्या एक आँसु बि नि बगै सकदि ! शायद अन्तमा ,  एक आंसू त टपकैलि तू ? ना ? त्वे से नि ह्वे सकण ?  ... देर रात मि नशा मा धुत्त , शराब की बदबू अर  जनानी लेक आंद छौ। वा म्यार बान खड़ी रौंदि छे। पर वा कबि ना त रोइ च अर ना इ वींन विरोध मा क्वी शब्द ब्वाल। खाली वींक आँख बुल्दा छा। बड़ी दुखी आँखि ! मि तैं क्वी पश्चाताप नी च। मि तैं कीमत चुकाण पोड़ल , पर मि तै शिकायत नी   ... बर्फ पड़नि च। मेरी प्यारी घरवाली !क्या तू रोली ना ? अजीब व्यक्तित्व ! वा औरत जनजात इ शहीद पैदा ह्वे छे , पता च , कर्म से बि वा पीड़ित  छे।
मेनका -तीन वीं तैं इन त्रास किलै दे  ?
गज्जु  -भौत सरल छौ।  एक शब्द इ से वा घबरै  जांदि  छे। बड़ी कोमल छे वा छुईमुई जन। पर कबि कुजबाब ना।  मि तैं तडफाण -तंग करणम मजा आंद। मीन द्याख अर प्रतीक्षा कार।  पर क्वी आंसू ना, क्वी विरोध ना । अब वा कोट झाड़नी च। वींक आँख बंद छन अर वींक अंगुळि  गोळी का दुंळ अनुभव करणा छन। तू क्या आशा करदि ? क्वी अफ़सोस ? ना। सच्चाई या च कि वा म्यार सम्मान करदि छे, अधिक ही प्यार करदि छे । क्वी मतलब ?
मेनका -ना।  में से क्वी प्यार नि करदु छौ , क्वी आदर नि दींदु छौ।
गज्जु  - त्यार दगड़ इनि हूण छौ।  अब जरा रामकथा अगनै सूण।  मि एक छुटि जातिक लड़की तैं रौणै अपड दगड़ लौं।  मेरी घरवळि मथिन रौंदि छे अर हम द्वी मुड़िन।  मेरि घरवळि तै  सुबेर जल्दी उठणै आदत छे अर हम द्वी देर तक सियां रौंद छा ।  मेरि घरवळि हम दुयुं तैं रोज सुबेरक काफी पिलांदि छे।
मेनका -पशु कहींका ! क्रूर !
गज्जु   - हाँ हाँ क्रूर ही सै पर शालीन क्रूर।  (वैक नजर दूर दिखदन ) हैं ! स्यु गोमेज ! ना म्यार बाराम कुछ नी बुलणु च। हाँ    ... तू क्या बुलणि छैइ    ... क्रूर पशु ! अवश्य।  निथर मीन इख किलै आण छौ ? अब तेरी बारी।
मेनका - मी पर लानत फिंकदा छ लोग अर कुत्ती बुल्दा छ।  खैर लानत तो अबि बि। त म्यार इक हूण मा खौंळेणे बात नी च।
गज्जु  - यी बुलणै ?
मेनका - ना।  फ्लोरेंस का साथ संबंध छौ। एक मुर्दा आदिमैक कथा। तीन मुर्दों की,  वास्तव मा। वु म्यार कजिन छौ।  वैकी  से शुरुवात तो ह्वे गए। वा अर मि , तीन। सब ऐ गेन हैं। मि तै चिंता नी च।  बस ऊ रूम।  ल्या अब मि देख सक्णु छौं। अब खाली अर ताळ लगि गए  ... ना ना ताळ खोली याल।  अब ' किराए के लिए उपलब्ध है ' कु साइन पट्टी  लग गे।  बडु अजीब बेकार   ।
गज्जु न - तीन बोल बल तीन मृत्युएँ ?
मेनका - तीन।
गज्जु  - एक मरद अर द्वी औरत ?
मेनका - हाँ।
गज्जु  - अच्छा , अच्छा। क्या वैन आत्महत्त्या कार ?
मेनका - ना , ना वैमा इथगा हिम्मत इ नि छै। फिर बि यांकुण कारण तो छैं इ छौ। हमर कारण उ कुत्ता की जिंदगी जीणु छौ। असल मा वु ट्राम का तौळ ऐका   मोर। एक सुदी सूद्यक  अंत। मि उंक दगड़ रौंद छौ।  वु म्यार  कजिन छौ।
गज्जु  - क्या फ्लोरेंस साफ़ आदिम छौ ?
मेनका - साफ़ ? तू जाणदि छे,  मि तैं क्वी अफ़सोस नी च। फिर बि मि तैं तीमा कथा लगाणै रूचि नी च।
गज्जु  - ठीक च।  मतलब , तू वै से अति परेशान ह्वे गे छे ?
मेनका - हाँ धीरे धीरे। छुटि छुटि बातुं से मि बितके या  उछिंडे   गे छौ। उदाहरण ले लेदि , पींद दैं बड़ी आवाज गांडदु छौ - एक तरां से गड़गड़।  बर्दास्त से भैर। इनि छुटि छुटि बात।  असल माबड़ी शोचनीय दशा छे वैक। भौत इ कमजोर, मार्मिक । तू हंसणि किलै छे ?
गज्जु  -खैर , किलैकि मि कमजोर नि छौं।
मेनका -इथगा विश्वास ठीक नी च  ... मि वींक भितर बैठ गए छौ।  वा दुनिया म्यार आंखुं से दिख्दि  छे। वीन जब वै तैं छवाड़ त मीन वीं तैं सहारा दे। शहर का दुसर किनारा पर हम द्वी छुट सि कमरामा एकि बिस्तर मा सींद छा ।
गज्जु  - फिर ?
मेनका - फिर वु ट्राम तौळ ऐ गे। मि रोज वींतैं याद दिलांदु छौ :" हम दुयुंन वै तैं पिचकैक मार। ".। असलम मि जरा क्रूर छौं।
गज्जु  - मी बि त क्रूर छौं।
मेनका - न तू क्रूर न कुछ हौरि छे।
गज्जु  -क्या ? क्या ?
मेनका - बाद मा बतौल।  मि जब बुल्दु कि मि क्रूर छौं तो मतलब च कि मि तैं तब  तक चैन नि पड़द जब तक मि कै तैं दुःख नि द्यों। एक जळदु क्वीला। कैक दिल पुटुक एक जळदु  क्वीला। जब मि अकेला हूंद तो मि जळणु रौंद। छै मैना तक मि वींक जिकुड़ी तैं लगातार फुकणु रौं   तब तब तक वींक पास रंगुड़ छोड़िक कुछ नि रै।  तो एक  रात वींन अफु पर आग लगै दे अर मि सियुं छौ। अर वा बेड पुटुक घुस गे।  तो अब जाणि गे।
गज्जु - अच्छा , अच्छा।
मेनका - हूँ।  त्यार  मन मा क्या च ?
गज्जु  -कुछ ना।  पर या भली कथा नी च ।
मेनका -अवश्य। पर क्या फरक पड़द ?
गज्जु  - हाँ जन तीन ब्वाल -क्या फरक पड़द। अब तेरी बारि  च।  बोल तीन क्या कार ?
कामिनी -मीन ब्वाल नी च कि मि तैं खयाल इ नि आणु कि मीन क्या कार कि मि  तैं इ इख लैन।  मीन दिमाग पर भौत जोर दे पर कुछ फायदा नि हूणु।
गज्जु  - ठीक।  हम तेरी सहायता करला।  उ घायल मुखक , कु छौ वु ?   
कामिनी - कु ? - कैक बारा मा ?
मेनका - और कु ! तू जाणदि त छे।  वी, इख आण पर  जै से तू डरीं छे।
कामिनी -ओ ऊ।   वु म्यार ब्यॉय फ्रेंड ।
गज्जु  -तू वै से किलै डरीं छे ?
कामिनी -मिस्टर गार्सिन ! वु म्यार व्यक्तिगत मामला च।
मेनका - क्या वैन त्यार तरफ से इ  अफु पर गोळि मार ?
कामिनी -नै नै।  क्या बेवकूफी वळि बात करणि छे ।
गज्जु  - तू फिर किलै भयभीत छे ? वैन अपण मुंड पर गोळि चलाई , है ना ? यांसे वैक मुंड फटी गे।
कामिनी -नहीं।  कृपया अब नि सुणाओ।
गज्जु  - त्यार वजै से।  त्यार इ कारण।
मेनका -वैन अफु पर त्यार कारण से गोळी मार।
इस्टेली -मि तैं इखुलि रण द्यावो ! या बि क्वी बात ह्वे  ... मि  तैं तंग कारणा छंवां।  मि जाण चाणु छौं , मीन जाणै।
गज्जु  - जै स्कद त जा। मीन क्वी इन बात बि नि पूछ कि। दुर्भाग्यवश द्वार बंद छन।
कामिनी -तुम धुर्या छंवां  दुयाक द्वी।
मेनका -धुरया वा घृणा लायक ? हाँ सही शब्द। अब मुद्दा पर आ।  जैन अफु तै गोळी  मार , तू वैकि रखैल छे ?
गज्जु  - हाँ भै हाँ ! स्या वैक रखैल छे। अर वु चाँद छौ स्या वै तैं अकेला छोड़ द्या। है ना ? याइ बात च ना ?
इनेज -वु जाज डांसर छौ जन प्रोफेसनल हुँदन। पर वु गरीब छौ जन भिकंगाक ड्यारौ मूस , है ना ?
गज्जु  - क्या वु गरीब छौ ? सीधा जबाब दे।
कामिनी -हाँ वु गरीब छौ।
गज्जु  - अर तू गरीबी से घृणा करदि छे। एक दिन वु आई अर त्वे से भागणो प्रार्थना करण मिसे गे। अर तू वैक प्रार्थना पर हंसण बिसे गे।
मेनका - हाँ तू वैक मुख पर इ  हंसण लग गे।
कामिनी -क्या तू फ्लोरेंस का समिण इनि मुक मड़कांदी छे ?
मेनका -हाँ।
कामिनी - इन नि ह्वे।  तुम दुयुंक अनुमान गलत च। वु चाँद छौ कि हमर बच्चा हो। या च बात !
गज्जु  - अर त्वे तैं बच्चा नि चयाणु छौ ?
कामिनी -बिलकुल नही। दुर्भाग्यवश , बच्चा ह्वे। मि पांच मैना कुण स्विट्जरलैंड ग्यों। कै तैं कुछ पता नि चौल।  नौनि पैदा ह्वे । जब बच्ची पैदा ह्वे त रोजर  बि दगड़ मा छौ। वै तैं भोत बड़ी खुसी ह्वे।  मि तै कतै  नि ह्वे!
गागज्जु  - फिर ?
कामिनी -उख बालकोनी बिटेन बिलकुल समिण एक झील दिख्यांदि छे। मि एक बडु पत्थर लौं। बेटी बाँध  ... उ बालकोनी से दिखणु छौ। वैक समज मा ऐ गे कि मि क्या करणु छौं।  वु बालकोनी से लॉंफ्याणु छौ अर चिल्लाणु राइ , "इस्टेली ! नहीं , नहीं।  कर " ।   मी    घृणा से ही ना  अधिक गुस्सा मा छौ। वैन सब द्याख।  वैन बि द्याख कि पाणि मा कन गड्ढा ह्वे, भौंर पैदा ह्वे अर कन लहर बणिन -
गज्जु  -हूँ।  फिर ?
कामिनी -बस ! मि स्विट्जरलैंड बिटेन वापस औं - अर वैन वी कार ज्वा वैक इच्छा छे।
गज्जु  - मतलब वैन तब अपण मुंड पर गोळी मारि ?
कामिनी -बेवकूफ छौ वु।  म्यार पति तै कुछ पता नि चौल। तुम लोग गंदा छंवां।
गज्जु  - कुछ बि कौर।  इख आँसु नि आंदन।
कामिनी -मि कायर छौं।  अर तुमसे घृणा करद।
मेनका - बेचारी बच्ची ! तो सुणवाइ खतम।  पर इख लटक्युं जज बणनै जरूरत नी च।
गज्जु  - लटक्युं जज ? लटका हुआ न्याय ? मि अफु तैं आइना मा दिखण चांदु। ओहो ! कथगा गरम च (कोट उतारदु )। सौरी (फिर से कोट पैरदु )
कामिनी -फिकर नि कौर। तू कमीज मा ऐ सकदि अर बौंळ  बिटै सकद छे।
गज्जु  - ओके।  त्वै तैं मै पर गुस्सा नि हूण चयेंद।
कामिनी -मि त्वै पर नराज नि छौं।
मेनका - अर मि ? क्या तू मे पर बि गुस्सा छे ?
कामिनी -हाँ।
मेनका - अच्छा, मिस्टर गज्जू , चलो अब हम  हम नंग धड़ंग हुयां छंवां । क्या तू यांसे अधिक कुछ हौर बि समज सकदी ?
गज्जु  -हाँ ! शायद छेड़खानी बढ़िया होलु। मेरी समज से हम तैं एक दुसरैक मदद शुरू करण चयेंद।
मेनका -मि तैं सहायता की जरूरत नी च।
गज्जु  - इनेजा ! ऊंन बड़ी हुस्यारी से हम तैं फँसायुं च -मकड़जाळ जन। यदि तू कुछ बि हरकत कौर , थ्वड़ा सि हथ बि उठैलि त इस्टेली अर मि द्वी  खिंचे जांदा। अकेला क्वी बि  अफु तैं नि बचै सकुद ; हम एक दूसर से जटिलतापूर्वक जुड़्यां छंवां। अब तुमारी अपण इच्छा च।  हे ! त्वे क्या ह्वाइ ?
मेनका - उख। ऊंन कमरा किराया पर उठै याल।  खिड़की पूरी खुलीं, एक आदिम म्यार पलंग मा बैठ्युं च ।  म्यार पलंग , म्यार कमरा मतलब बुलणो कुण म्यार। साला वै कमरा तैं धीरे धीरे अपण बणाणु च। अरे ! अरे ! उख एक स्त्री बि च। वा वैक पास जाणि च  , वीन वैक कंधा मा हाथ धौर आल। उश , अरे सि  ट्यूब लाइट किलै नि जळाणा छन   ? अंध्यर हूणु च। अब  वु भुकि पीण वाळ च , शायद चखुलुं तरां एक हैंकाक दाँत बुकाणा  होला ! पर उ म्यार कमरा च , म्यार पलंग। धुप्प अन्धेरा।  मि तै कुछ नि दिख्याणु च , पर पर हाँ दुयुंक सुस्कारि सुण्याणु च। क्या वु द्वी म्यार पलंग मा ? अहो ! वु क्या बुलणु च - दुफरा च , चिट्टु घाम च ? अरे अरे , मि अंधा हूणु छौं।  पूरा काळ अँध्यारु।  ना मि देख स्कणु छौं , ना हि सुणणु छौं। मै लगद यु पृथ्वी दगड म्यार आखरी सम्पर्क छौ। अब ऊख से क्वी संबंध अर कारण नि रै गे। सब खलास ! मि तैं सब खाली खाली लगणु च, अब अछेकि मेरि  मृत्यु ह्वे गे ।  बस मी अर मी बस अकेली।  गार्सिन ! तू क्या बुलणु छौ - कुछ मदद -सुदद , है ना ?
गज्जु  - हाँ।
मेनका - तू मेरी मदद किलै करण चाणि छे ?
गज्जु  - ऊंक खतरनाक  होसियारी खतम करणो वास्ता।
मेनका - अर बदला मा क्या चांदि , में से ?
गज्जु  - मि तैं मदद कर। मेरी  मदद कर। मि तैं बिंडी ना थ्वड़ा सि मदद चयेंद , कोशिस , इनेजा ! मि तैं मानवीय भावना याने तेरी भावनाओं कु प्रवाह, बहाव  !
मेनका -मानवीय भावना।  यी मेरी तागत से भैराक बात च। मि भावनाओं मामला मा सडिं -गळी चीज छौं।
गज्जु  -अर मी ? मि त निरा पत्थर छौं।
मेनका - कुछ फैदा नी च।  मि खाली छौं। मि ना  दे सकुद ना ले सकुद। मि मदद करुल ? मि त सुक्युं सुरै (कैक्टस पेड़ ) छौं जु जळणो तयार च। फ्लोरेंस सुंदर छौ , प्रकृति अर प्राकृतिक रूप से।
गज्जु  - पता च त्वै कि यीं नौनिक भाग्य मा त्यार पीड़ादाता बणन लिख्युं च ?
मेनका - सैत , मीन कुछ कुछ अंदाज लगै त आल छौ।
गज्जु  - ऊंन ईंक द्वारा त्वै तैं पीड़ा या उत्पीड़ा दीण। मि , हाँ , मि कुछ अलग छौं -अकेला।  मीन वीं पर ध्यान नि दे - यदि तू कोशिस कर सकदी तो -
मेनका-हाँ ?
गज्जु  - यु एक फसाणो फंदा च। ऊ त्वै तैं दिखणा छन कि कं तू जाळ मा फंसदि।
मेनका - जाणदु छौं। तू बि त दुसर फंदा छे। क्या तू समजदि कि ऊँ तैं पूर्वज्ञान नि हो कि तीन क्या क्या बुलण ? अर अवश्य ही भोत सी गुप्त चाल ह्वाल जौं तै हम नि भांपी सकदां। इख हरेक चीज फंदा च , जाळ च। पर मि तैं क्यांक फिकर ? मि बि स्वयं एक फंदा छौं।  अवश्य ही वींकुण। शायद मि वीं तै पकड़लु।
गज्जु  - तीन कुछ नि पकड़न। हम एक दुसरक पैथर दौड़ना छंवां गोल गोल घ्यारा मा अर जन कोल्हू का बैल रिटद। या यूंक योजना कु भाग च, हाँ  अवश्य  ...इनेज ! छोड़ ये तैं। अपर हथ खोल अर सब चीज करे जावो।  अर नथर तीन हम तिन्युं कुण  आपदा लाण।
मेनका - क्या मि इन स्त्री लगद कि जु कुछ बि हूण दे ? मि जणदु छौं म्यार दगड़ क्या हूण वाळ च। मि जळण वाळ छौं, अर यु सदा का वास्ता। हाँ , मि सब कुछ जाणदु। पर तू समजदि कि मि हूण द्योलु? मि वीं तैं फँसौलु , अर वा त्वे तैं मेरी आँख्यूंन द्याखलि जन फ्लोरेंसन वै आदिम तैं मेरि आंखिन द्याख।  मेरी हमदर्दी जोड़नै कोशिस किलै ? मि विश्वास दिलांदु कि मि सब जाणदु , अर मि अपर बान बि दुःख अनुभव नि कर सकुद। एक फंदा ! क्या मि नि जाणदु  कि  मि गौळ तक जाळ मा फँस्युं छौं अर यांपर कुछ नि करे सक्यांद ? ठीक च यदि  तौंकि नियमावली से मेल खांदी तो ठीक च।
गज्जु  - हूँ ! अच्छा , मि तैं ते से हमदर्दी च। म्यार तरफ देख ! हम द्वी नंगी छंवां , हर तरह से नंगी कि मि त्यार हृदय देख सकुद छौं ।  यु त्यार अर म्यार मध्य एक जोड़  च। क्या त्वे तैं लगद च कि मि त्वे तैं चोट , ठेस, पीड़ा  पौंचाण चांदु ? मि तैं क्वी अफ़सोस नी च। मि सुखा ही छौं।  पर त्यार बान मि दया अनुभव कर सकुद।
मेनका -नहीं ! मि दया से चिड़दु छौं। अपर दया , करुणा अफुम ही रख। गार्सिन !  याद रख , त्यार बान बि ये कमरा मा जाळ बिछयां छन। मि त्वे कुण फंदा छौं। तू अपण विषय मा सोच।  यदि तू हम दुयुं तैं मि अर तैं बच्ची तैं शान्ति मा रण देलि त मि त्यार क्वी नुकसान नि करुल।
गज्जु  -ठीक च।
कामिनी -गार्सिन ! प्लीज !
गज्जु  -क्या चयेणु च ?
कामिनी -खैर , तू मेरी सहायता कर सकदी।
गज्जु  -यदि मदद चयाणी च त वींसे प्रार्थना कौर।
कामिनी -मी त्वे से प्रार्थना करणु छौ। गार्सिन - तीन वादा कौर  छौ, वादा दे छौ कि ना ? मेरी सहायता कौर , जल्दी। मि अकेला नि रौण चाँद। ओल्गा वै तैं कैबरे करणो ली गे।
मेनका -कै तैं ?
कामिनी -पीटर  ... ले , सि द्वी दगड़ी डांस बि करणा छन।
मेनका -पीटर क्वा च ?
कामिनी -इतना मूर्ख  लड़का। वु मेकुण अपण ग्लान्सिंग स्ट्रीम, छलछलाती नदी  बुल्दु छौ। वु भयानक तौर से में से प्यार करदु छौ। वींन वै तैं डांस करणो मनै आल।
मेनका -क्या तू वै से प्यार करदी छे ?
कामिनी -अब वु बैठणा छन। वा व्हेल्क तरां सांस लीणी च। बेवकूफ लड़की ! फिर बि डांस करणो जोर दींदी। मि विश्वास से बोल सकुद कि वा डांस अपण   ... कम करणो बान  ... ना ना,  मि वै से प्यार नि करदु। वु अबि अठारा कु च, अर मि बच्चा चोर नि छौं।
मेनका - तो ऊंपर इथगा चिरड़ेणै या जळणै  जरूरत क्या च ? क्या फरक पड़द ?
कामिनी -वु म्यार छौ ।
मेनका -अब पृथ्वी मा त्यार क्वी नी च।
कामिनी -मीन ब्वाल कि वु म्यार छौ । पूरी तरह से म्यार।
मेनका -हाँ वु त्यार छौ - कबि । पर अब - जरा वै तैं छूणै कोशिस करदी , जरा वै तै कुछ सुणादि। ओल्गा वै तैं छू सकदी , जब चा व वैक दगड़ बात कर सकदी। सचाई या च ना ? ओल्गा वै पर चिपक सकदी -
कामिनी -देख ! वा अपण बकळि  मोटि छाती वैक छाती पर कन चिपकाणि च, जोर जोर कैक साँस लीणी च अर अपण सांस वैक मुक पर फेंकणी च ।  पर म्यार  बिचारु चिनखु , क्या तू नि दिखणु छै कि स्या कन बेढंगी च ? तू तैं पर किलै नि हंसणी छे ? यदि मि तैं तौंक समिण जाणो मौक़ा मिल्द त वीन भीम पोड़ जाण छौ। क्या अब म्यार उक कुछ नी बच्युं च ?
मेनका -कुछ बि ना।  त्यार उख अंश मात्र बि नि बच्युं च - छैलु बि ना।  क्या तू तै किताब काटणो चक्कु पसंद करली ? या मेन्टलपीस का जर जवाहारात ? उ नीलु सोफ़ा त्यार च। अर प्यारी ! डार्लिंग ! मै तेरी हूँ सदा के लिए।
इस्टेली -तू मेरी ! ठीक च ! ठीक ! तुम मादे कु मेकुण छलछलाती नदी , झिलमिलाती नदी , पवित्र लड़की बोल सकुद ? तू म्यार बारा मा अधिक इ जाणदि , तू जाणदि छे कि मि सरासर सडीं छौं , सड़ी -गळी - पीटर प्यारा ! जरा म्यार बारा मा सोच , अपण ध्यान म्यार तरफ त घुमा , अर मि तैं बचा। हर समय तू सोचदी छौ ," छलछलाती नदी , झिलमिलाती नदी " , मि इख अधा इ छौं। मि इख केवल अधा बदमाश , बुरी छौं बकै अधा  साफ़ , पवित्र त तौळ त्यार दगड़ च साफ़ जल   ...  अहो , जरा वींक मुकौ तरफ त देख , लाल चचकार टमाटर। यु सरासर हास्यास्पद च , तू अर मि वीं पर कथगा दै हौंस होला धौं ! भौत दैं   ... अच्छा वु गीत क्या छौ ? हाँ , मेरि बौ सुरीला ! सतपुळि नि जाणा , मेरी बौ सुरीला " ... ठीक च नाच ले , नाच ले।  ग्रासिन ! काश ! तू वीं तैं दिखदि त तीन बि हौंसन मर जाण छौ। केवल - वींन कबि नि जणन कि मि वीं तैं दिखणु छौं। हाँ ओल्गा ! मि त्वै तैं दिखणु छौं, अपण बाळुं कारण तु मूर्ख लगणी छे ।  ये ये ! अब तू वैक खुट दबाणी छे अपण खुटन। या चिल्लाहट च। जल्दी  , जल्दी , अरे उ वीं तैं रिंगाणु च , भद्दो लगणु च। पर तीन त बोल छौ बल दुनिया मा मि इ सबसे हळकि छौं , वु म्यार दगड डांस करण पसंद करदु छौ।  वु क्या च ? क्या च ? अच्छा तीन ब्वाल ," बिचारी ओल्गा !" ? इथगा बड़ो धोखेबाज नि बण। तीन एक आँसु बि नि बगाई    ... अर वेंक हिम्मत त द्याखो वा वैक दगड़ छ्वीं लगाणी च। वींक हिम्मत तो द्याखो ! व पीटरक  दगड़ म्यार विषय मा बात करणी च? ना , ना , वैमा नि बोल , वैमा नि बोल - सब बात नि बथा - ये मेरी ब्वे तैन सब बथै आल - रॉजर , स्विट्जरलैंड , बच्ची सब्युंक बारा मा। वैन क्या ब्वाल ," इस्टेली इन इथगा त नि छे --". हाँ मि इथगा इन नि छौ।  पर हैं ? वु दुखी त ह्वे च , वैन मुंड त हिलै च , पर वै तै क्वी आश्चर्य कतै नि ह्वे, कै  से क्या आसा करे सक्यांद। ठीक च रख वै तैं -  मि त्यार दगड़ वैक नौनी जन प्यारि सुंदर ,  मुखड़ी, सुंदर आंख्युं का भौंउंक   सौदा बि नि कर सकुद। अब वु सब त्यार छन। 'छलछलाती नदी , झिलमिलाती नदी " सब बौगी गे , सब सुखी गेन।  सब चकनाचूर ! नाच , नाच , नाच।  पर स्टेप उठाणों समय कु ख़याल अवश्य रख , एक द्वी , तीन  ...। मेरी इच्छा इख बिटेन उख वैक दगड़ नाचणै हूणि च।  संगीत की आवाज मंद हूणी च , लाइट मंद हूणी च    ... प्लीज आवाज बढ़ाओ , लाइट कारो   ... हैं ! मि दूर हूणु छौं और दूर , हौर दूर  ... मि कुछ बि नि सुणणु छौं।  सब ख़तम , सदा का वास्ता ख़तम। पृथ्वीन मि तैं छोड़ि आल।  मे से दूर नि हो --प्लीज। मि तैं अपर हातुं मा ले।
मेनका -  गज्जू  , उठा।
गज्जु  -इनेज , वा तेरी च।
कामिनी - मुख नि मोड़। तू मरद छे , छे ना , अर अवश्य ही मि डरौंण्या नि छौं!  सब बुल्दा छ कि म्यार बाळ प्यारा छन , आखिर एकान म्यार बान अफु पर गोळी मार। त्वे तैं कुछ ना कुछ दिखण इ च अर इख सोफ़ा, मेन्टलपीस , मेन्टलपीस का उप्र जवाहरात अर मेज का अलावा कुछ नी च। मि यूँ भद्दा फर्निचरूँ से त सुंदर छौं इ।  सूण ! मि ऊंक दिल से इन भैर हों जन एक चखुलि बच्ची घोल से तौळ पड़ जांदी। तो मि तैं पकड़ , अपण दिल मा धौर - अर त्वे तैं लग जाल कि मि कथगा मयळि  छौं।
गज्जु  - सूण ! त्वै तैं वीं स्त्री से बात करण चयेंद।
कामिनी -वीं मा ? पर वा  त गणत मा इ नी च, वा स्त्री च ।
मेनका -हूँ ! मि गणत मा नि छौं ? तो तू या सुचदि ? पर मेरी नन्ही मुन्नी  मुनिया ! तू त युगों से म्यार  दिल मा रौंदि , हाँ यू तू नि जाणदि। डौर ना , मि सदा आँख खोलिक तेरी रक्षा करलु , हमेशा। अर तू हमेशा मेरी नजरूं समिण रैलि जन सूरज का समिण सूर्यकिरण।
कामिनी -सूर्यकिरण ! बकबास नि कौर। तीन पैलि हुस्यारि दिखै आल, अर पता हूण चयेंद कि तेरी ट्रिक नि चौल ।
मेनका - मेरी लहराती नदी , मेरी झिलमिलाती नदी इस्टेली !
कामिनी -तेरी झिलमिलाती नदी ? नखरी चाल। तू क्या समजणि छे कि तू चिकनी -चुपड़ी बथुं से मूर्ख बणै देलि ? मि भितर से पूरो खाली छौं , जू बि च स्यु म्यार भैर च पर यु त्वैकुण नी च।
मेनका -सूण !  कामिनी । तू जु चाणि सि रौ - छलछलाती नदी , झिलमिलाती नदी , कीच वळि नदी या कुछ बि। मेरी आंख्युं मा देख तू अर जु तू चाणि छे सि देख।
कामिनी -ह्यां मि तैं चैन से रण दे। तीम आँखि इ नी छन। मि ते से दूर रै सकुद छौं ? मीम एक विचार च (वा गारसिंक मुख पर थूकदि ) ले।
मेनका  -त्वे तैं कीमत चुकाण पोड़ल।
गज्जु  -त असल मा तीतै आदिम चयांद ?
कामिनी -क्वी बि आदिम ना , तू।
गज्जु  - अब चकड़ैति ना।  त्वै तैं आदिम  खुश कर सकुद। चूँकि मि इख छौं तो।  है ना ? पर इन तरां कु आदिम नि छौं। मि जवान मूर्ख युवा नि छौं अर झमेला नाच बि नि नाच सकुद ।
कामिनी -तू जन छे तन इ ठीक च।  सैत च , मि त्वै तैं बदल बि द्यूं।
गज्जु  - मि तैं विश्वास नी च। मीन ध्यान नि दीण।  मीन कुछ चीजुं  बारा मा सुचण।
कामिनी -क्या चीज ?
गज्जु  - त्यार कामक चीज नि छन।
कामिनी -मि त्यार सोफ़ा मा बैठलु अर प्रतीक्षा करुल। मि विश्वास दिलांद कि मि त्वे तै दिक नि करुल।
मेनका - हाँ ठीक च। मूरख जन लगा मक्खन।  भीख अर शरम ! अर वैकि नजर मा  प्रशंसा बि नी  च ।
कामिनी -वींक नि सूण।  ना वीं आँख छन ना इ कान।  कुछ बि नी च --वा।
गज्जु  -जु चयेणु च मि दींदु। ज्यादा कुछ ना। मि ते से प्यार नि करुल। मि त्वै तैं बि खूब से जाणदु।
कामिनी -खैर ! तू मि तैं चांदि छे कि ना ?
गज्जु  -हाँ।
कामिनी -बस और कुछ नि पुंछण --
गज्जु -ये मामला मा -
मेनका -गार्सिन , इस्टेली ! तुम पागल ह्वे गेवां।  तुम द्वीइ नि छंवां।  मी बि छौं इख।
गज्जु  - हाँ - पर क्या फरक पड़द ?
मेनका  - मेरि आंख्युं समिण ? तुम इन नि कर सकदां।
कामिनी -किलै ना ? मि त अपण नौकरानी क समिण नंगी हूंद छौ अर वींक आँख -
मेनका - वीं तैं अकेला रौण दे।  अपण गंदा हाथ वींक पीठ पर नि फेरी हाँ।
गज्जु  - सावधान हाँ ! मि जंगली किस्मौ मनिख छौं। मि औरतुं पर कताई दया नी दिखांदु।
मेनका -पर तीन मै से वादा कौर छौ, वादा कौर छौ । मि खाली वादा निभाणो बुलणु छौं।
गज्जु  -किलै , पैल तीनि वादा त्वाड़? अफु तो तू ?
इनेज - ठीक च ,  जु करणाइ सि कारो।  मि दुयुंक बीच मा अकेला पड़ ग्यों तो मि कमजोर। पर मत भूलो कि मि बि इख छौं अर मि देख सकुद। गार्सिन मीन आँख नि हटाण। गार्सिन जब तू वींक भुकि पेलि त  पता चलल   कि वींक ऊँठ फीका छन। ठीक च जु करणाइ स्यु कारो। हम नरक मा छंवां तो मेरी बि चलल तो फिर तुमर सकिण -पकिण दिखुल।
गज्जु  - अब। जरा अपण ऊँठ त नजीक लादि। त्यार ऊँठ, हौर नजदीक !
कामिनी -हैं ? मीन बोलि  नि छौ  कि वींक नि सूण ?
गज्जु  -तीन गलत समज।  उख गोमेज च। गोमेज प्रेस रूम मा फिर ऐ गे। वूंन खिड़की बंद करीं च। मतलब जड्डू मौसम ऐ  गे। उख छै मैना बीत गेन।  मीन चेतावनी दे  छौ ना कि मि भुल्ल्कड़ छौं।  है ना ? वु कमणा छन -कोट पैर्युं च अर मि ईख गरमाक मारा भरच्याणु छौं। वाह , वु म्यार बारा मा बात करणु च। 
कामिनी -येन देर तक चलण।  तू बता कि उख क्या हूणु च।
गज्जु  - कुछ ना।  उ कुत्ता च साला।  खदुळ कुत्ता।  कुत्ता का बच्चा। चलो अब वापस - यख ऐ जाँदां। क्या तू प्यार का वास्ता तयार छे?
कामिनी -अब ?
गज्जु  - विश्वास करलि कि ना ?
कामिनी -क्या बुड्यों जान बात करणु छे। तू हमेशा मेरी नजरूं समिण रैलि।  अर मि तैं इनेज से किलै डरण , जब तू म्यार दगड़ छे ?
गज्जु  - ओहो , मि कै हैंक विश्वास की बात करणु छौ। बोल , बोल। मि अपण बात नि करणु छौ। त्वे तैं विश्वास दीण पोड़ल।
इस्टेली -ओ ! क्या बकबास करणु छे तू ! मि अपण मुख , ऊँठ , हाथ पूरा शरीर सब कुछ त्वै तैं सौंपणु छौं अर  तू म्यार विश्वास मांगणु छे ! मीन कै तैं कुछ नि दीण , तू मि तैं शर्मिंदा करणी छे। अवश्य ही तेरी चेंतना मा म्यार विश्वास पर अविश्वास बैठ गे।
गज्जु  - ऊंन मै पर गोळी मार।
कामिनी -मि तै पता च।  किलैकि तीन प्रतिरोध  मा लड़ै नि लड़। तीन लड़ै किलै नि लौड़ ?
गज्जु  -मीन - मीन असल मा मना बि नि कौर। मि बोल सकुद बल उ अच्छी तरह से बात करदु छौ, वैन म्यार विरुद्ध काबिल केस बणै पर वैन कबि नि ब्वाल कि मि तैं क्या करण चयेंद छौ। क्या ? मि तैं सेनाध्यक्षक का पास जाण चयेणु छौ अर बुलण चयेंद छौ कि " जनरल , मीन नि लड़न। " ? उ वैबरी मि तैं जेल भेजी दींदा।  पर मि अपण रंग दिखाण चाणु छौ, मि अपण असलियत दिखाण चाणु छौ, मतलब समजी गे ना ? मि नि चांदु छौ कि वु म्यार मुख बंद कारन। इलै मीन -ट्रेन पकड़  ... अर ऊंन रस्ता मा टबॉर्डर पर ट्रेन  मा पकड़।
कामिनी -तू कख जाणौ कोशिस करणु छौ ?
गज्जु  -मि मैक्सिको  जाण चाणु छौ।  उख  एक विश्व 'शांति' समर्थन मा एक अखबार निकाळणो विचार छौ। अच्छा तू कुछ ख़ास किलै नि बुलणि छे ?
कामिनी -क्या बुलण ? जब तू लड़न इ नि चाणु छौ त तीन ठीकि कार। परर तू क्या जबाब चांदी में से ?
इनेज -अंदाज नि लगै सकदी ? वू चांदु कि तू वैकुण शेर क्या बब्बर शेर बोल ! वैन शेर बणणो बाण लड़ै नि लड़।
गज्जु  -शेर बणणो बाण लड़ै नि लड़ ! हम तैं शब्दुं  बान लड़ै नी लड़न चयेंद।
इस्टेली -हाँ पर त्वे तैं भागण चयेंद छौ।  उख रैक तो ऊंन जेल इ डाळन छौ,  है ना ?
गज्जु  - हाँ , क्या मि कायर छौं ?
इस्टेली -मि क्या बोल सकुद ? में से इतना आस ? मि तेरी जगा मा हूंद तो मि क्या करदु ? इथगा कल्पना मि नि कर सकुद। तू अपर बारा मा अफिक निर्णय ले।
गज्जु  -मेरी समजम कुछ नि आणु च।
कामिनी -हाँ पर त्वे तैं कारण पता हूण चयेंद कि तू किलै अर क्या करणु छे।
मेनका - मि तैं पता च।
कामिनी -अच्छा ?
गज्जु  - पर क्या वु कारण सही होला क्या ?
कामिनी-त्यार दिमाग एक जगा मि नि छौ। या च असली परेशानी। इन छुटि छुटि बातों से तू असल मुद्दा  से भटक गे।
गज्जु  - हाँ पर मि अपण सिद्धान्तु तै अग्वाड़ी लाण चाणु छौ अर वूं पर दृढ बि रौण चाणु छौ।
मेनका - हाँ याइ त बात च। यू इ त सवाल च।  कि त्यार क्या उदेश्य च ? तीन अवश्य ही खूब स्वाच विचार कौर होलु , तीन सबि बथुं पर विचार कर ह्वै होलु।  पर डौर  , घृणा गंदी प्रकृति बणान्दि अर असली सूच यूँ गंदा बथुं तौळ दब जांदन। घृणा अर डौर सही आत्मविश्लेषण नि करण दींदन। तो मिस्टर गार्सिन लगे रहो , बोलते रहो ।  पर हमर दगड़ ना सै अपण दगड़ तो ईमानदारी बरतो , चाहे एकाद बार इ सै -
गज्जु  - क्या यु बताण जरूरी च ? दिन अर रात मि कुठड़ि मा हिटणु राउंड छौ , कख से कख तक ? एक दीवाल बिटेन खिड़की तक अर खिड़की से दीवाल तक। मीन अपण दिल तैं खंगाळ, मीन अपण खोज इनि कार जन एक जासूस करद। अंत मा मीन अनुभव कार कि मीन अपण सरा जिंदगी आत्मविश्लेषण मा वितै दे। पर अंत मा आवाज आदि छे कि मीन वी कार जु करण चयेंद छौ, मीन वीं फ्रन्टियरौ वास्ता ट्रेन  पकड़ । पर किलै ? किलै ? आखिरमा मीन स्वाच : मृत्यु ही हिसाब किताब पूर कर सकद। यदि मि मृत्यु का सामना साहस , बीरता अर हिम्मत से करुल तो मि साबित कर देलु कि मि कायर नि छ

Bhishma Kukreti

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                                            यूँ पुण्यात्माओं तैं नरक किलै मील ?

                                   बाल  प्रहसन नाटिका संकलन ::: भीष्म कुकरेती


चरित्र -

तीन मरद , एक जनानी

(द्वी   मरद अर एक जनानी एक कमरा मा बैठ्याँ छन )

मरद १- यु अन्याय च , न्याय नी च , सरासर अन्याय च। 

मरद  २ -तू इन किलै बुलणु छे ?

मरद १ -अरे मि इथगा दान करदु छौ अर फिर बि मि यख छौं ? उ दिखदि - जौं भिखारियों तैं मि दान दींद छौ सि उख मजे से छन।

मरद २  - अन्याय तो म्यार दगड़ बि ह्वे।  मि एक ईमानदार नगरपालिका कर्मिक छौ।  मि त इख छौं अर जौंन उथगा भ्रस्टाचार से कोठी बणैन सि उख आनंदावस्था मा छन।

जनानी - मीन सती सावत्री जन जीवन बताइ , कैक नुक्सान नि कार।  मि त इख छौं अर वीं पातर तैं द्याखदि !  जैंक खसम ह्वेक बि ज्वा यार दगड्यों दगड़ घुमदी छे स्या स्वर्गं प्रसन्नावस्था मा च ?

मरद १ -यु अन्याय च।

मरद २ -यु न्याय नी च।

जनानी - सरासर नाइनसाफी च।

मरद १  -मि पुण्यात्मा छौं अर मि नरकम ?

जनानी - मि पुण्यात्मा छौं अर नरक भोगी ह्वे ग्यों ?

मरद २ - पाक साफ़ रूह वळ ह्वेक बि मीन  दोजख की आग मा भरचेण ?

सब - ये उपरवाले ! ऐसा बेइनसाफ़ी क्यों ?

मरद २ (अपण आत्मा का अंदर दिखुद ) - ए मेरि ब्वे यि क्या ? मेरी आत्मा में से कुछ बुलणि च।  जरा सुणदु कि मेरी आत्मा क्या बुलणी च।

मरद २ की आत्मा -ठीक च तू ईमानदार नगरपालिका कर्मिक छौ अर तेरी ड्यूटी वाटर पाइप पर छे।  पर तीन कबि ध्यान दे च कि वाटर पाइपुं से रोज कथगा पाणि बेकार खत्याँद छौ ? जब पाइप फट जांद छौ तो मैनो तक त्वै तैं क्वी फिकर नि हूंदी छे अर तेरी असावधानी , बेफिक्री से लाखों करोड़ों लीटर पाणि बरबाद ह्वे अर लाखों लोगुं तैं तेरि कारगुजारी से पाणि नि मील।

जनानी - ये मेरी आत्मा बि मे से बात करणी च।

जनानिक आत्मा - हाँ ! तू सती सावित्री अवश्य छै।  पर तीन कबि द्याख बि च कि जै क्षेत्र मा पाणि की इथगा कमी छै उख तू कपड़ा धूणम , भांड धूणम सरा गाँसे अधिक पाणि खरच करदि छे कि तीम पाणी छौ।

मरद १ -  मेरी आत्मा बि धै लगैक बुलणि च कि मीन दान दे पर रोज बेकार पाणी मा पाणीक बरबादी कार।  दुनिया मा चोरी हो तो कुछ नि हूंद।  एक कीसा से पैसा दुसर कीसाउंद जांद।   पैसा केवल जगा बदलदु बस।  पर पाणी बर्बाद हो तो समझो मानव बर्बाद !

सबि - ओ तो हम तै पाणि बरबाद करण पर नरक मील। अरे अरे यु डिटरजेंट  बणाण वाळ कम्पनी कु मालिक बि इख आणु च।  एन त भारत मा सफाई आंदोलन चलै छौ फिर यु हम पाणी खतण वाळ पाप्युं दगड़ किलै ?

डिटरजेंट कम्पनी मालिक- हाँ ! मीम तागत छे कि मि इन डिटर्जेंट बणौ कि जै डिटरजेंट प्रयोग मा पाणी कम खर्च हो। पर मीन ध्यान नि दे कि म्यार कर्तव्य च कि इन डिटरजेंट बणौ जामा कम से कम पाणी खर्च हो । 

सबि - मनण पोड़ल भगवान सब कुछ दिखणु रौंद हां अर बारीकी से !

22 /3/15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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Bhishma Kukreti

  History: Army Administration of Gurkha/Gorkha Commander Amar Singh Thapa 

History Discussion on Gurkha/Gorkha Administration in Garhwal - 5
History of Gorkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) -70
   
   History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -589
 
                        By: Bhishma Kukreti (A History Research Student)
 
     After returning from Banaras, Regent or King Ran Bahadur appointed Amar Singh Thapa the commander for capturing west of hills Garhwal, Himachal. Amar Singh Thapa was brave, courageous and used to believe on working by planning and strategies. Amar Singh Thapa had a special place in Nepal History.
From 1804 to 1815, Gurkha/Gorkha commander Amar Singh Thapa was Commander for Nepal from West of Kali River-Kumaon, Garhwal and Himachal (east of Sutlej). The Provincial Governor or Subba used to report him for major decision.  Nepal court used to offer Jagir to administrators of Kumaon, Garhwal and Himachal as per advices of Amar Singh Thapa.
                       Nayab, Senapati or Army Chief
   When in 1804, Gurkha/Gorkha Army was busty to capture Garhwal, Dehradun and demolishing King Pradyuman Shah, Amar Singh Thapa was Chief of Army staff of Kumaon and Garhwal.
   Under Amar Singh Thapa, Hastidal Chautariya was Nayab Subba (Governor) and Kaji Randhir Singh Basnyat as Senapati Army Commander.
  Dr Dabral got two letters each from Hastidal Chautariya and Kaji Ran Dhir Singh Basnyat sent to Jamindars of Sanglakoti.
There were major reasons for deputing Hastidal Chautariya and other Chautariyas or relatives to Garhwal and Himachal. There was fierce revelry between Thapa and Chautariya groups for Nepal Court Administration as Kings became weak. Sherbahadur killed Ranbahadur. Bhimsen Thapa got opportunity to destroy Chautariya group. Bhimsen Thapa killed few Chautariyas. However, it was not possible to kill all Chautariyas.  Bhimsen Thapa took Jagirs (Land ) from Chautariyas and disestablished them from various posts. However, Chautariyas were also strong and they had strong says in the country.
There was chance of revolt by killing Bamshah (brother of Ranbahadur) and his brothers Hastidal Chautariya and Rudravir. Therefore, Prime Minister Bhimsen Thapa sent Hastidal Chautariya and Rudravir for Garhwal and Himachal Campaigns. Since, Amar Singh Thapa was there to look after , there was no chance of Chautariyas and other to revolt against Bhimsen Thapa.
   Due to constant attacks by Gorkha, the subjects of Salan (South Garhwal) were afraid of Gurkha/Gorkha and even after capturing Garhwal; Gurkha/Gorkha did not stop their suppressing and cruel methods of administration. The same was case in Dehradun after Gurkha rule started. People ran away towards plains and the land became barren as no people were ready for farming. Amar Singh Thapa took initiatives for improving the worsening situation.



** History, Gurkha/Gorkha Administration in Garhwal...Remaining part, read in next chapter
*** History of Gorkha/Gurkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) to be continued -71

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com 22/3//2015
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued... Part -590
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
XX
                    Reference

Atkinson E.T., 1884, 1886 , Gazetteer of  Himalayan Districts ...
Hamilton F.B. 1819, An Account of Kingdom of Nepal and the territories
Colnol Kirkpatrik 1811, An Account of Kingdom of Nepal
Dr S.P Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 5, Veer Gatha Press, Dogadda
Bandana Rai, 2009 Gorkhas,: The Warrior Race
Krishna Rai Aryal, 1975, Monarchy in Making Nepal, Shanti Sadan, Giridhara, Nepal
I.R.Aryan and T.P. Dhungyal, 1975, A New History of Nepal , Voice of Nepal
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Gorkhavansavali, Kashi, Bikram Samvat 2021 
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B D pande, Kumaon ka Itihas
Sharma , Nepal ko Aitihasik Rup Rekha
Chaudhari , Anglo  –Nepalese Relations
Pande, Vasudha , Compares Histriographical Traditions of Gorkha Rule in Nepal and Kumaon
Pradhan , Kumar, 1991, The Gorkha Conquests , Oxford University  Press
Minyan Govrdhan Singh , History of Himachal Pradesh
A.P Coleman, 1999, A Special Corps
Captain Thomas Smith, 1852,Narrative of aFive Years Residence at Nepaul Vol.1
Maula Ram/Mola Ram  , Ranbahadurchandrika and Garhrajvanshkavya

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Nepal Itihas, Garhwal Itihas, Kumaon Itihas, Himachal Itihas;  Gurkha/Gorkha ks kumson psr Adhikar Itihas , Gurkha/Gorkha Garhwal par Shasan Itihas;  Gurkha/Gorkha Rule in Kumaon, Garhwal Uttarakhand; History Gurkha/Gorkha  Rule in Himachal, Uttarakhand;कुमाऊं , उत्तराखंड का इतिहास ; गढ़वाल , उत्तराखंड का इतिहास ; डोटी , पूर्व उत्तराखंड का इतिहास ;गोरखाओं /गुर्खाओं का कुमाऊं पर अधिकार इतिहास ; गोरखाओं /गुर्खाओं का गढ़वाल पर अधिकार इतिहास ; गोरखाओं /गुर्खाओं का हिमाचल पर अधिकार इतिहास ; गोरखाओं /गुर्खाओं का  इतिहास ; नेपाल इतिहास
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History:  Gurkha/Gorkha Army Administration in Old Pauri Garhwal , History:  Gurkha/Gorkha Army Administration in Old Tehri Garhwal,      History:  Gurkha/Gorkha Army Administration in Dehradun, Garhwal; History: Judiciary and Executive Gurkha/ Gorkha Administrative Officers in Garhwal; History: Judiciary and Executive Gurkha/ Gorkha Administrative Officers in Old Pauri Garhwal; History: Judiciary and Executive Gurkha/ Gorkha Administrative Officers in Tehri Garhwal; History: Judiciary and Executive Gurkha/ Gorkha Administrative Officers in Dehradun Garhwal; History: Judiciary and Executive Gurkha/ Gorkha Administrative Officers in Kumaon 
                          ::: ====स्वच्छ भारत!  स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत====:::



Bhishma Kukreti

 Transportation System and Measurement System in Mahabharata Kulind context History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur


              हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर   इतिहास संदर्भ में महाभारतीय कुलिंद राज्य में नाप तौल व परिहवन तंत्र

                   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  Part  -- 84

                                 
                     हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -   84                 


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती


                     नाप तौल
महाभारत में नापतौल के विषय में एक ही संदर्भ मिलता है
            जातरूपं द्रोणमेहार्षु : पुनज्शो नृपा: (सभापर्व ५२/४ )
द्रोण याने दूण (३२ सेर ). यह प्रथा आज भी इक्सवीं सदी में पहाड़ी इलाकों में चल रही है।
शालिवाह के माप को बीस द्रोण का कहा गया है  (आदिपर्व १५९ /६ ) . आज भी बीस दूण की एक खारी मानी जाती है।
              परिहवन
महाभारित्य कुलिंद राज्य में परिहवन कठिन था। हरिद्वार, भाभर , बिजनौर में रथ हांके जाते थे। साधारण व्यक्ति पैदल ही चलते थे।  भीम ने अपने बांधवों को या घटोतकच्छ ने पांडवों को कंधे पर उठाने का अर्थ है कि पीड़ितों , असक्षम , धनी लोगों को पपीठ या कंधे पर बिठाकर भी यात्रा की जाती थी।
नदी पर रस्सियों के पल प्रयोग होते थे।  घोड़े , भैंस आदि पर चढ़कर भी परिहवन किया जाता था।
यात्रा में सत्तू मुख्य भोजन था व जंगल आदि से कंद मूल फल प्राप्त कर यात्री क्षुधा शान्ति करते थे।
पथिक चटाईयां , खेल व कंबल भी लेकर चलते  थे।
यात्रा से पहले गुरु , बड़ो का आशीर्वाद लिया जाता था।

** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन

Copyright@ Bhishma Kukreti  Mumbai, India 22 /3/2015

   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --85

हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -
       Transportation System and Measurement System in context History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in context  History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in context History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in context  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in context History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in context  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in context History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in context  History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in context History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ; Transportation System and Measurement System in contextMahabharata Kulind &  History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ;  Transportation System and Measurement System in context History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ; History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ; History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ;  Transportation System and Measurement System in context Mahabharata Kulind &  History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar;   Transportation System and Measurement System in context Kulin , Mahabharata History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ;  Transportation System and Measurement System in context History of Bijnor;  History of Nazibabad Bijnor ;  Transportation System and Measurement System in contextHistory of Saharanpur;  Transportation System and Measurement System in contextHistory of Nakur , Saharanpur;  Transportation System and Measurement System in context in Mahabharata Kulind & History of Deoband, Saharanpur;   Transportation System and Measurement System in contextHistory of Badhsharbaugh , Saharanpur;
कनखल , हरिद्वार का इतिहास ; तेलपुरा , हरिद्वार का इतिहास ; सकरौदा ,  हरिद्वार का इतिहास ; भगवानपुर , हरिद्वार का इतिहास ;रुड़की ,हरिद्वार का इतिहास ; झाब्रेरा हरिद्वार का इतिहास ; मंगलौर हरिद्वार का इतिहास ;लक्सर हरिद्वार का इतिहास ;सुल्तानपुर ,हरिद्वार का इतिहास ;पाथरी , हरिद्वार का इतिहास ; बहदराबाद , हरिद्वार का इतिहास ; लंढौर , हरिद्वार का इतिहास ;बिजनौर इतिहास; नगीना ,  बिजनौर इतिहास; नजीबाबाद , नूरपुर , बिजनौर इतिहास;सहारनपुर इतिहास
                     :=============  स्वच्छ भारत !  स्वच्छ भारत ! बुद्धिमान भारत =============:

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Bhishma Kukreti

        रक्तरंजित  रंजीता
           (एक उन्नादेसी  नाटक )
             अनुवाद - भीष्म कुकरेती

         -----चरित्र -
रंजीता - एक जवान स्त्री , जैंक शरीर खून से लत पत च।
युवराज  - युवा जैक एक हथ अर एक टांग नी च
बुडड़ि -करीब अस्सी सालक बुडड़ि जैंक हथ पर लाठी च
धुरंदर - बढ़िया सूट मा , दरोड्या
पुलिस अधिकारी - मूंगफली खांद , हतुं पर डंडा
(गली , गलीक आवाज - हॉर्न , गियर बदलणो आवाज , पैथर करेला ले लो , अच्छे दिन करेला सस्ता  .... लाइट ऑन हूंद।  अपण पुटुक पकड़िक एक स्त्री , धीरे धीरे वींक अग्नैक भाग दिखेंद अर पुटुक बिटेन खून बगणु च। वा सहायता का वास्ता दिखिद )
रंजीता -ये नौनु ! ये नौनु ! जरा मदद कर दे प्लीज ! जरा कै तैं भेज दे   ... मी पर गोळि  लगीं च!!!
(रंजीता की उम्मीद खतम हूंद लगद।  वा खून रुकणो कोशिस करदी।  पर वींक समज मा नि आंद। वा अपण बिलोज निकळदि पर समज मा नि आंड कि बिलोज तैं कनै घुसाये जाव। वा आसा छोड़दि कि एक बुडड़ि आदि )
बुडड़ि (जोर से )- क्या बुलणि छे ? सुण्याणु नी च। 
रंजीता -म्यार खून बगणु च।  प्लीज मदद कर दे प्लीज
बुडड़ि-मि कनकै खून बंद कौरुं जब मि तैं कुछ सुण्यान्दु इ नी च.
(जल्दी जल्दी माँ सूट मा एक आदिम प्रवेश करद )
धुरंदर सूट वळ आदिम - क्या मदद चयेणी च ?
रंजीता -जुगराज रयाँ। देखो म्यार खून बगणु च --
धुरंदर - कुछ नि कर सकुद।  मि तैं दादी जी तैं हमेशा रस्ता पार करवांदु।  मि अपण नियम नि तोड़ सकुद।
रंजीता -पर म्यार खून बगणु च
धुरंदर - ये दादी चल मि तीतैं रस्ता पार करांद।
(बुडड़ि लाठी से धुरंदर तैं खुजदि अर धुरंदर वींक हथ पकड़िक ली जांद। रंजीता तैं इन लगद कि वा वेहोश हूण वळ च कि एक पुलिस वळ उना आंद।  वींपर जान आंद )
रंजीता -हे भगवान तीन भेज दे।  हवलदार जी , हवलदार जी भलु व्हे तुम ऐ गेवां।
पुलिस वळ - हूँ ! गुनाहगार अपण निसान छोड़ि जांद।  त्यार हाल चाल बताणा छन कि तू रस्ता मा टट्टी करणी छे।  यद्यपि  मि ड्यूटी पर नि छौं पर एक अनुशाशन प्रिय राष्ट्रभक्त सिपाई ह्वेक मि तैं तीतै अरेस्ट कर सकद ।
रंजीता - पर मि टट्टी नि करणु छौ अपितु मि घैल छौं। रक्तश्राव हूणु च
पुलिस वळ - नंगी हूणो बान बहानेबाजी ? त्वे तै शरम आण चयेंद। मि ड्यूटी पर नि छौं इलै बची गे।
रंजीता -पर मि तैं मदद की जरूरत च।  म्यार टैक्स से तुम तैं तनखा मिलदी।
पिलिस वळ  - अवश्य।  अर त्यार टैक्स से एम्बुलेंस ड्राईवरूं तैं बि तनखा मिल्दी। इलै तेरी सहायता करणो पैलो अधिकार ऊंक च।  अरे हरामियो ! जरा एम्बुलेंस तैं बुलावो रै !
रंजीता -पर , मि   ...
(पिलिस वळ मंच से भैर जांद।  रंजीता अपण आस छुड़ण इ वाळ छे।  एक चुप्पी।  ---- कि उना बिटेन एकहथ अर एकि खुट वळ युवराज धम्म से रंजीता का समिण भीम पड़द )
युवराज - औ , क्षमा हाँ !
(युवराज उठद अर एक टंगड़ से उछलणो  कोशिस करद )
रंजीता -प्लीज ! मेरी मदद कर दियां जरा ! ये मेरि ब्वे ! तुम तै क्य ह्वे ?
युवराज -नै न ! कुछ नि ह्वे ।  मि ठीक छौं।  उ त मि ठीकि चलणु छौ    .... कैं बुडड़िन मेरि लाठि लूठि द्याई त पर मि ठीक छौं , ह्वे जौल। मि  पचास   गज दूर एक रेडी  मेड कपड़ों फैक्ट्री मा काम करूद।  म्यार गण्यूँ  च , ईख बिटेन एक सौ द्वी फाळ मा मि उख पौंछि जौल। (चुप्पी ) हे मेरी माँ ! क्या ह्वाइ  ?
रंजीता -सच्ची तीन देख आल ?
युवराज -मिस !  मि लूलो अर लंगड़ो छौं , काणु नि छौ। मि तैं कनि दिख्याणु च कि त्यार शरीर बिटेन खून बगणु च। तू त बिलकुल आखरी--
रंजीता -हाँ इनि लगणु च।
युवराज -मीम एक आडिया च।
रंजीता -क्या च ?
युवराज -हाँ ह्वे सकद च। मि सैत मदद कर सकुं। हालंकि यु अजकाल नि हूंद कि एक अनजान लड़का कै अनजान लड़की की सहायता कारो   ...  पर तब बि    ...। सुबेर जब मि बिजुं त मीन अपण हरा जुराब पैर जैपर तीन छेड़ छ्या।  किलैकि मि तै लग कि आज कुछ विशेस हूण वळ च। अर फिर जब पड़ोसीक कुत्तान म्यार खुट चाट तो म्यार विश्वास और बि बढ़ गे कि आज कुछ विशेस हूण।  मि तेरी मदद अवश्य करुल।  अच्छा कुछ खाणो दीण ?
रंजीता -ना ना , धन्यवाद।  अबि ना। पता च खून बंद कन करे जांद ?
युवराज -हाँ , मि पड्यूँ लिख्युं आदिम छौं।
रंजीता -क्या तू म्यार बिलोज गाडि सकद ?
युवराज -म्यार नाम युवराज च।  त्यार नाम ?
रंजीता -रंजीता , युवराज
युवराज -अरे ! हमर भाग्य बंध्युं च। दुयुंक सर नेम युवराज च।
रंजीता -ना ना मि रंजीता छौं अर त्यार नाम पुकारणु छौ।
युवराज -अरे हाँ ! मि बि ना लाटु ! मि तै पता इ नी कि मेरी समस्या क्या च। बस मि अजनब्यूं दगड  ! मतलब समजी गए ह्वेल्या।  मि तुमर प्रेम मा पड़ी ग्यों।  जब बी क्वी लड़की मिलदी तो  म्यार भितर बिटेन आवाज आदि स्या मेकुण बणी च।
रंजीता -युवराज ! प्रेम की बात फिर।  अबि मि तैं मदद की जरूरत च।
युवराज -म्यार रूप रंग से परेशानी ?
रंजीता -ना , ना।  म्यार खून बगणु च।  मि तै मदद की जरूरत च।
युवराज -द ले तू पैल मदद चांदी अर हबाब बाद माँ।  तू मि तै अच्चु इलै नि मनणि छे कि म्यार एक खुट नी च अर एक हथ नी च। अर तू मेरी मदद मंगणी छे। बिलकुल जनान्युं तरां।
रंजीता -क्या ?
युवराज -मी त्वे से प्यार करदु अर चांदु कि तू बि में से प्यार कर। पर -
रंजीता -देख ! या तो मदद कर या  ... मेरी समज मा नि आणु कि तू - पर मदद तो नि करणु छे।
युवराज -मि रक्तबन्ध बांधिक रक्त बंद कर सकुद।
रंजीता -हाँ यु ही जरूरत च।  तू बड़ो प्यारो छे।
युवराज -हाँ चल रक्तबंद करे जाव।  कोशिस करे जाव।
( रंजीता अपण हथ बढ़ांद अर वु   बिलोज पकड़द। वु ध्यान दीणु कि वीं पर नि लगो। )
युवराज -तू दूसर हिस्सा पकड़ हाँ अर मि इख बटें  ... मुड़दु छौं।
रंजीता -हाँ हाँ।
(युवराज रक्तबन्ध बंधणो संघर्षरत रौंद ) -
रंजीता -युवराज ?
युवराज -हाँ ?
रंजीता -अच्छा रण दे।
युवराज -ठीक च।
रंजीता -युवराज ?
युवराज -हाँ ?
रंजीता -त्यार   --- कनकैक सि ...
युवराज -सि क्या ?
रंजीता -कनकैक खुट अर हथ ?
युवराज - बिलोजक किनारा टाइट करिक नि पकड़याणु च ?
रंजीता -ठीक।  अच्छा नि बताणै त रण दे।
युवराज -भलु।
रंजीता -तू बड़ो सुंदर रै ह्वेल जब -
(रंजीता वैक कपाळ छूण चाणि छे कि युवराज उछळदु )
युवराज -ना ना !
रंजीता -मि केवल हथ लगाणु छौ बस  ---क्या म्यार छूण पसंद नी च ?
युवराज -ना ना , पर एबकत त्वे तै इन नि करण चयेंद।
रंजीता -किले ना ?
युवराज -अच्छा रक्तबन्ध ठीक च अब ?
रंजीता -हाँ हाँ अब ठीक ह्वे गे।  धन्यवाद।
युवराज -मि तै चलण चयेंद।
रंजीता -कुछ परेशानी च ?
युवराज -कुछ ना।  काम पर बि त जाण। मीन अबि तक कुछ नि खाइ।  जब तक पुटकुंद कुछ नि जालु मे से काम नि हूंद।
रंजीता -एक मिनट पैल तू प्यार स्यार की बात करणु छौ अर अब तू चलणो बात करणु छे।
युवराज -हाँ कबि कबि मि भौत उटपटांग बात करदु।  मेर समज मा इ नि आंद क्खम क्वा बात। मि तैं जाण चयेंद , मि उटपटांग बात -
रंजीता -मि तै लगणु च म्यार टच करण से इन ह्वे।
युवराज -ना ना।
रंजीता -क्या कबि कैन टच नि कार ? हैं ?
युवराज -कनि कार।
रंजीता -नै , मि पैलि नौनी छौं जैन त्वे तैं टच करण चाहि ?
युवराज -या तीन बड़ी तुच्छ बात बोलि दे ।
रंजीता -हाँ तू सही छे।  सॉरी हाँ !
युवराज -या बात बि सै नी च। मि तैं कैन टच कार च।
रंजीता -हाँ अवश्य , अवश्य।
युवराज -द्वी दैं टच हूँ मि।
(युवराज अपण भंग खुट दिखान्द। )
रंजीता - वो त हर समय तू टच  ह्वे ?
युवराज -हाँ।
रंजीता -अर त्यार द्वी अंग नि छन?
युवराज -रंजीता ?!?!
रंजीता -औ , म्यार मतलब यु नी च। जिज्ञासा बस।
युवराज -जिज्ञासा नि करण चयेंद।
रंजीता -तो यदि तू कैतै टच करिल तो क्या व्हाल , तू क्या ख्वैली ?
युवराज -पता नी।  मीन कै तैं टच नि कार।
रंजीता -म्यार रक्तबंधक ढीलु पड़णु च।  जरा टाइट कर दे।
युवराज -मि तै लगणु च यु ठीक नी च।
रंजीता -त तू चांदी कि मि रक्तभाव से मोर जौं।
युवराज -नहीं , कभी नही। पर मि खतरा मोल नि लीण चांदु।
रंजीता -खतरा ? क्यांक।  इकै  खुट हथ त चली गेन।  अब बस द्वीइ त छन।
युवराज -मि तै लगद हम तै कै हैकक मदद लीण चयेंद।  हवलदार जी , हवलदार जी !
रंजीता -मीन कोशिस कौर छे पर कुछ फायदा नि ह्वे। अब बस तू ही सहारा छे।
युवराज -मि क्वी चांस नि लीण चांदु। मि त्वै तै टच करुल अर तेरी टांग चल जाली।  फिर हम क्या करला ?
रंजीता -मेकुण टांग महवतपूर्ण नी च बल्कण मा जिंदगी।
युवराज -हाँ।  सइ  ब्वाल ।
(युवराज कोशिस करद , एक हाथ अर एक पैर कु कारण बड़ी तकलीफ हूंद।  लग्युं रौंद, वु निराश हूंद जांद )
युवराज -मीन ब्वाल नी कि कठिन च।  अब रक्तस्राव से पता नी तू कखि -
रंजीता -हे भगवान !
युवराज -अब म्यार दगड़ इनि हूंद।
रंजीता -डर कोशिस कौर अर टच करण से  नि डौर। मि नि छौं घबराणु।
( युवराज दुबर कोशिस करद।  ये समय जरा सरल हूंद। अर ये टाइम वु वींक हाथ टच करद।  वु रक्तबन्ध तैं बंधणम सफल ह्वे जांद। वु हैंक दै वींक हथ टच करद अर वींक हाथ गिर जांद। )
युवराज - ये मेरी ब्वे अब मि क्या कौरुं ? क्या कर दे ?
रंजीता -म्यार हथ ! म्यार हथ भ्यूं गिर गे !
युवराज -सॉरी ! मीन -
रंजीता -जल्दी कौर , म्यार सब खून बगण वाळ च।
युवराज -त्यार हथ ?
रंजीता -भूल जा म्यार  हथ !
युवराज -भूल जा म्यार  हथ ! ?
रंजीता -रक्तबन्ध टाइट बाँध ।
(युवराज वींक हथ वींक कंधा पर लगाणो कोशिस करद )
युवराज -मि तै लगद कि मि त्यार हथ लगै सकुद। म्यार दादा जी सेना मा छया अर मेडिकल कोर मा , लड़ै मा -)
(रंजीता वैक हाथ से अपण हाथ लुठदि )
रंजीता -युवराज ! रक्तबन्ध बाँध !
युवराज -मीन भौत कोशिस कर याल।  मि अब नि कर सकद।
(युवराज जाणै तयारी करद )
रंजीता -मि तै छोड़ि ना जा।  क्या तू सचेकि जाणि छे ?
युवराज -हाँ।  मि तेरी मदद का वास्ता कै तैं खुजुल ।
रंजीता -इना आ।
युवराज -क्या च ?
रंजीता -इना आ।
युवराज -ह्यां पर क्या च ?
रंजीता -इना आ त सै।  त्यार मी पर उधार बकै च (उ आंद ) अब खड़ रौ , सीधा (व खड़ रौणै कोशिस करद , डगमगांद , बेचैनी अनुभव करद ) . सीध ! (वु खड़ रौंद ) अब आँख बंद कर
युवराज -आँख बंद ?
रंजीता - मी पर विश्वास नी च ? जाण दे।  मीन अपण हाथ खोये अर तू मे पर विश्वास बि नि कर सकिद हैं ?
युवराज -अच्छा , अच्छा !
रंजीता -सुंदर बच्चा !
(रंजीता अपर हाथ पकड़दी अर वै हाथ तै युवराजक कंधा पर लगै दींदी जै कंधा मा हाथ नि छौ। हाथ बरोबर लग जांद )
युवराज -रंजीता तू क्या करणी छे ? यु कुछ अनुभव -
रंजीता -बढ़िया !
युवराज -हाँ , बढ़िया !
रंजीता -आँख खोल !
(युवराज आँख खुलद अर नै हथ दिखुद )
युवराज -यी क्या कार तीन ?
रंजीता -अब रक्तबन्ध बाँध अर बचा मेरी जिंदगी।
युवराज -पर अब मेफर त्यार हाथ लग्युं च।
रंजीता -हाँ।
युवराज -मि त्यार हाथ नि ले सकुद। यु बड़ो दान च अर मि वु बि नि छौं।
रंजीता -मि तै एकी जरूरत नी च।
युवराज -मेरी जिंदगी मा कैन मेकुण इथगा नि कार।
रंजीता -जल्दी कौर।
(रंजीता बेहोश हूंदी पर युवराजन नि द्याख )
युवराज -अरे वाह ! मि इन समजणु छौं जन म्यार इ हिस्सा हो।  बढ़िया अनुभव। हैं तेरो शरीर अर म्यार शरीर एकी छन जन। रंजीता ! रंजीता !
(वु वीं तै होश मा लाणो कोशिस करदु पर होशम  नि आई . वु रक्तबन्ध टाइट बंधध।  पर कुछ फरक नि पड़द )

युवराज - अब इंक मुख पर अपर मुखान सास डाळदु
(वी हवलदार कु प्रवेश, )
हवलदार - बच्चे ! पता च तू क्या करणु छे ?
युवराज -हाँ , मी ईंक जान बचाणो कोशिस करणु छौं --
हवलदार -अब वींक जान कोर्टकुण रण दे। त्वे लगद कि मि त्वै नि जाणदु।  अब यूं आर अंडर अरेस्ट। 
युवराज -अरेस्ट ? क्यांक अपराध ?
हवलदार -तैं स्त्रीक हाथ चुर्याणो अपराध मा।
युवराज -यी , वीं मितै अफिक दे।
हवलदार -कथा जयकादार च। चल म्यार दगड़।
युवराज -वीं तैं मदद की आवश्यकता च।
हवलदार -वो मीन दुबर नि बुलण हाँ
(हवलदार युवराज आंद  अर युवराज हवलदार पर मुक्का मारद। हवलदार गिर जांद। युवराज अपण नै हथ दिखुद )
युवराज -सय्या एक ताकतवर स्त्री च।
(युवराज अब निडर ह्वेक वींक मुख पर अपर मुख लगान्दु अर वीं तैं सांस दींद , रंजीता होश मा आंद )
रंजीता -यु सब समय की बात च।  तै तैं क्या ह्वे ?
युवराज -कुछ ना वै तैं मददकारी हाथ चयेणा छ तो मीन सहृदय ह्वेक दे देन।
रंजीता -म्यार हाथ त्वे पर सजणु च , बिराजणु च।
युवराज -धन्यवाद।  वापस चयेंद ?
रंजीता -ना
युवराज -सच्ची ?
रंजीता -यदि मि तै आवश्यकता होली तो तू खड़ो मीलली , है ना ?
युवराज -हाँ।
रंजीता -  अवश्य ही ...
युवराज -तो   ...
रंजीता -तो    ...
युवराज - कुछ खाए जाए। हैं ?
रंजीता - बिलकुल सही।

     ==========पर्दा ==============
सर्वाधिकार - मूललेखक
यु केवल नाटक प्रशिक्षण का वास्ता च।
२१//३/१५
नव शक संबतसर ,

Bhishma Kukreti

Best  Harmless Garhwali Humor   , Garhwali Comedy Skits  , Satire, Wit , Sarcasm  , Garhwali Skits  , Garhwali Vyangya  , Garhwali Hasya

                             हाँ वु त्वै तैं अच्छी तरां से जाणद

                          चबोड़्या स्किट संकलन :::   भीष्म कुकरेती


(द्वी बुड्या -बुडड़ि कार मा बैठ्याँ छन , बोर्ड पर लिख्युं च -हाइवे पेट्रोल पम्प, पेट्रोल भरण वाळ ऊंक दगड़ हर समय बात करद )

पेट्रोल भरण वाळ - सर ! क्या चयाणु च ?

बुड्या - पांच सौक पेट्रोल भर दे।

बुडड़ि  -क्या पूछ  वैन ?

बुड्या -बल क्या चयाणु च ?
बुडड़ि  -बोल दया बल पांच सौक पेट्रोल भर दे।

बुड्या -हाँ मीन बोली याल बल पांच सौक पेट्रोल भर दे।

पेट्रोल भरण वाळ - कख जाणा छंवां ?

बुड्या - कोल्हापुर जाणा छंवां ।
बुडड़ि  -क्या पूछ  वैन ?

बुड्या -कख जाणा छंवां ?
बुडड़ि  -वैकुण बोल दया बल कोल्हापुर जाणा छंवां ।
बुड्या (चिरड़ेक )   - हाँ मीन बोल याल बल कोल्हापुर जाणा छंवां ।।
पेट्रोल भरण वाळ - कख रौंदां ?

बुड्या - हम भोलेभाले नगर रौंदां।
बुडड़ि  -क्या पूछ  वैन ?

बुड्या -कख रौंदां ?
बुडड़ि  -बोल द्या  बल हम भोलेभाले नगर रौंदां।

बुड्या ( गुस्सा मा ) -हाँ मीन बोल याल बल हम भोलेभाले नगर रौंदां।

पेट्रोल भरण वाळ -मि पैल भोलेभाले नगर इ रौंद छौ।  उख जनानी अपण कजेयुंक  जान खै जांदन , खदुळि  कुत्ती जन ।
बुडड़ि  -क्या पूछ वैन ?

बुड्या -पूछ नी च बताणु छौ बल उ तीतैं पैल बि मिल्युं च अर अच्छी तरां से जाणदु बि च। 



23/3/15 , Bhishma Kukreti , Mumbai India
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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                    स्वच्छ भारत  , स्वच्छ भारत , बुद्धिमान भारत! 

Bhishma Kukreti

 History:  Initial Administration Structure by Amar Singh Thapa in Garhwal

History Discussion on Gurkha/Gorkha Administration in Garhwal - 6
History of Gorkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) -71
   
   History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -589
 
                        By: Bhishma Kukreti (A History Research Student)

                      Initial Administration by Amar Singh Thapa

            After capturing Shrinagar Garhwal, Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa retained the administrative officers of Garhwal Kingdom as Daftari, Bhalmanush, Chakdait etc. Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa started initial administration in Dehradun through Saknyanis. Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa tried to get sympathy and cooperation from elites of Garhwal Kingdom as Mola Ram/Maula Ram etc.  Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa retained the old system of land administration of Garhwal after taking the control of Garhwal and Dehradun. Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa retained the tax collection power on Kamins. Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa did not change the system of collecting toll tax, bridge or river crossing tax etc. Garhwal Kings or Kamins donated land to various Temples and priests. Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa did not change land ownership of temples and priests.  Those administrators supported Gurkha/Gorkha they were retained the Jagir or salaries as was in past. By those acts, Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa did not get any unusual resistance from Garhwal Administrators. Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa handed over the administration of three Tehsil – Shrinagar , Kainyur (Chandpur) and Langur to Nayab (Governors)  Ranjit Kunwar, Sradar Angar and Sradar Parshuram Thapa.

           Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa Ignoring King Family Members
       Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa captured Pritamshah and sent him to Nepal. Parakram Shah fled to Nalagarh (Hindur). Sudarshan Shah took shelter in house of Kriparam Purohit in Kankhal Haridwar. Kankhal was under East India Company; therefore, there was fear for Sudarshan Shah from Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa and his aides.  Chobdar Kishan Singh was given the charge of protecting Prince Sudarshan Shah in Kankhal. Kishan Singh was wounded from left ear to right ear in Khurbura Battle, Dehradun. Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa did not arrange any penson or allaonces for Kingdom families anywhere in Garhwal or in Haridwar. Elites were unhappy but they did not have courage to speak before Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa.
         As soon he captured Garhwal he was sent to Himachal. Therefore from 1805to 1801, Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa did not have any direct say in Garhwal administration.  From 18011-1815, Gurkha /Gorkha Commander Amar Singh Thapa and his son Ranjor Singh Thapa took interest in Garhwal administration.
                        Harshdev Joshi in Kankhal
    Gorkha administration captured Jainarayan Joshi the son of Harshdev Joshi. After demise of Pradyuman Shah, Harshdev Joshi did not have any hope in Kumaon. Frustrated Harshdev Joshi came to Kankhal. He was unable to go directly against to Gurkha/Gorkha as his son was in prison in Nepal.
Harshdev Joshi saw that Gorkha/Gorkha were selling Garhwalis as slaves in Kankhal. The trouble for Kumaon and Garhwal came due to selfish interest of Harshadev Joshi and he saw the Garhwali people being sold as goats and sheep in Haridwar.
  Harsh Dev Joshi made contacts with British India Civil Servant or Resident William Fraser and sent him many letters about Gorkha/Gurkha suppression Uttarakhand.   He used to send letters to Ranbahadur too. He was again frustrated by killing of Ranbahadur in Nepal as he was hopeful getting honor from Ranbahadur.
  Harshdev Joshi had regular contacts too with Prince Sudarshan Shah in Kankhal.

** History, Gurkha/Gorkha Administration in Garhwal...Remaining part, read in next chapter
*** History of Gorkha/Gurkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) to be continued -72

Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com 23/3//2015
History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued... Part -591
(The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)
XX
                    Reference

Atkinson E.T., 1884, 1886 , Gazetteer of  Himalayan Districts ...
Hamilton F.B. 1819, An Account of Kingdom of Nepal and the territories
Colnol Kirkpatrik 1811, An Account of Kingdom of Nepal
Dr S.P Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 5, Veer Gatha Press, Dogadda
Bandana Rai, 2009 Gorkhas,: The Warrior Race
Krishna Rai Aryal, 1975, Monarchy in Making Nepal, Shanti Sadan, Giridhara, Nepal
I.R.Aryan and T.P. Dhungyal, 1975, A New History of Nepal , Voice of Nepal
L.K Pradhan, Thapa Politics:
Gorkhavansavali, Kashi, Bikram Samvat 2021 
Derek J. Waller, The Pundits: British Exploration of Tibet and Central Asia page 172-173
B D pande, Kumaon ka Itihas
Sharma , Nepal ko Aitihasik Rup Rekha
Chaudhari , Anglo  –Nepalese Relations
Pande, Vasudha , Compares Histriographical Traditions of Gorkha Rule in Nepal and Kumaon
Pradhan , Kumar, 1991, The Gorkha Conquests , Oxford University  Press
Minyan Govrdhan Singh , History of Himachal Pradesh
A.P Coleman, 1999, A Special Corps
Captain Thomas Smith, 1852,Narrative of aFive Years Residence at Nepaul Vol.1
Maula Ram/Mola Ram  , Ranbahadurchandrika and Garhrajvanshkavya

XXX
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Bhishma Kukreti

          Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur

                     हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर   इतिहास संदर्भ में कुलिंद राज्य में विवाह प्रथाएं

                 History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  Part  -- 85

                                 
                     हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -    85                 


                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती


                          ऋणों की कल्पनायें
महाभारत में निम्न ऋणों की कल्पना की गयी है -
१-  पितृ ऋण
२ - देव ऋण
३ -ऋषि ऋण
४   -मनुष्य ऋण
                         विवाह
पुत्र प्राप्ति स्वर्ग जाने के लिए आवश्यक माना गया था अतः विवाह एक आवश्यक कृत माना गया है।  ऋषि भी विवाह करते थे।  फिर भी अविवाहित जीवन वितया जाता था।

                            विवाह के विभिन्न प्रकार
१-ब्राह्म  विवाह - अधिकतर ब्राह्मणो व विशिष्ठ जातियों द्वारा
२- गन्धर्व या प्रेम विवाह - आम बात थी
३- लूटकर विवाह करना - आम बात थी
४- बहुपत्नी संस्कृति - यह रिवाज अति सामन्य रिवाज था
५- बहुपति संस्कृति - द्रौपदी के पांच पति थे।  इससे साफ़ जाहिर है कि बहुपति संस्कृति सामन्य संस्कृति थी। देहरादून के चकरौता क्षेत्र में कुछ सालों पहले बहुपति संस्कृति थी।
६-दूसरों से पुत्र प्राप्ति -कर्ण सहित कुंती के चार पुत्र व माद्री के दो पुत्र थे।  पांडवों में से कोई भी पाण्डु के पुत्र नही था ।  धृतराष्ट्र , पाण्डु और विदुर वास्तव में कुरु वंश के थे ही नही।  वे सत्यवती के नाजायज (?) पुत्र व्यास के पुत्र थे।  उस समय जायज या नाजायज संतान के मध्य कोई अधिक अंतर नही माना जाता रहा होगा।
                 विधवा विवाह
विधवा विवाह मान्य था।  हरिद्वार  नागपुत्री पुत्री उलिपि विधवा थी।  अर्जुन के साथ गन्धर्व विवाह के बाद उसने आदर्श पत्नी रूप में वैवाहिक  जीवन विताया था।

** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर
आर के पुर्थि , द एपिक सिवलीजिसन

Copyright@ Bhishma Kukreti  Mumbai, India  /3/2015



   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --

हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -
     Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom & History of Kankhal, Haridwar, Uttarakhand ;  Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom & History of Har ki Paidi Haridwar, Uttarakhand ;Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom & History of Jwalapur Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Telpura Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Sakrauda Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Bhagwanpur Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Roorkee, Haridwar, Uttarakhand ;Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &   History of Jhabarera Haridwar, Uttarakhand ;Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &   History of Manglaur Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Laksar; Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom & History of Sultanpur,  Haridwar, Uttarakhand ;Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &   History of Pathri Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &   History of Landhaur Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Bahdarabad, Uttarakhand ; Haridwar; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &   History of Narsan Haridwar, Uttarakhand ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Bijnor;   Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom & History of Nazibabad Bijnor ; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &   History of Saharanpur;  Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom & History of Nakur , Saharanpur;  Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom &  History of Deoband, Saharanpur; Marriage System in Mahabharata Kulind Kingdom & History of Badhsharbaugh , Saharanpur;
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