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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti



अमराई का घुग्घु , उल्लू - Brown Fish Owl (Ketupa zeylonensis)

गढ़वाल की चिड़ियायें - भाग -35

( Birds of  Garhwal; Birding and Birds of Garhwal, Uttarakhand, Himalaya ----- 35)
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आलेख : भीष्म कुकरेती , M.Sc.; D.M.S.M; D.E.I.M.
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56  सेंटीमीटर लम्बा , निशाचर उल्लू जंगलों पानी के पास भाभर से 1500  मीटर की ऊंचाई तक पाया जाता है।  बादामी भूरे रंग का उल्लू के पंख गहरे भूरे चक्क्ते ( बार )होते हैं।

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सर्वाधिकार @सुरक्षित , लेखक व भौगोलिक अन्वेषक 



Birds of Pauri Garhwal, Birds of  block, Pauri Garhwal , Uttarakhand Himalaya; Birds of  Kot block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of  Kaljikhal block, Pauri Garhwal ; Birds of Dhangu (Dwarikhal)  block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of  Jahrikhal block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya  ;Birds of  Ekeshwar block, Pauri Garhwal ;  Birds of  Pauri block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of Pabau , Pabo  block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of Rikhanikhal  block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of  Bironkhal block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya  ; Birds of Yamkeshwar  block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of Naninidanda  block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of  Dugadda block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of  Pokhara block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Birds of Khirsu  block, Pauri Garhwal Uttarakhand Himalaya; Bird watchers Guide Uttarakhand , Himalaya; Bird watchers Guide Garhwal, Uttarakhand , Himalaya ; Bird watching Places in Pauri Garhwal, Himalaya, Uttarakhand  , Birding  Garhwal, Uttarakhand Himalaya , Birding  Garhwal, Uttarakhand Himalaya ,Birding Dehradun garhwal, Birding Dehradun Shivalik, Himaalya
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Bhishma Kukreti


Anoop Rawat: A promising Garhwali Poet and a Blogger
(गढ़वाल, उत्तराखंड,हिमालय से गढ़वाली कविता  क्रमगत इतिहास  भाग -236 )
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(Critical and Chronological History of Garhwali Poetry, part -)
  By: Bhishma Kukreti   (Literature Historian)
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     Anoop Rawat is one of the promising young Garhwali poets interested in taking Garhwali poetry on its zenith.
   Anoop knows that in modern time, internet is one the most promising medium for promoting small population spoken language as Garhwali. That is the reason he started his own blog (Meru Mulk Meru Pran iamrawatji.blogspot.in).
   Anoop Rawat was born in Gween Malla, Khatli, Beeronkhal of Pauri Garhwal in 1989.  Anoop Rawat is post graduate and interested in digital media.
   
Humanity , Social reforms  and Garhwal are major concerns for young Garhwali poet Anoop. He discusses Chakbandi , foeticide,  development and many more subjects as love, philosophy, spirituality, patriotism.
हे गितांग दिदा जरा चकबंदी कु गीत लगे दे poem shows his concern for social and agriculture reforms in Garhwal hills.
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His one of the best social concern poems is bout foeticide -
कन्या भ्रूण हत्या पर कुछ पंक्तियाँ (गढ़वाली कविता भाग )





आणि दे वीं ईं दुनिया मा, जीणी दे वीं ईं दुनिया मा..
क्या चा वींकु दोष ज्वा ह्व़े व बेटी जात.
कुछ त डेर वे बिधाता से राखी ले मनख्यात..

आज की दुनिया मा बेटी बेटा बराबर चा
ध्यान से देख फर्क नीचा कुछ भी द्वियु मा
टक्क लगे सुणी ले अनूप रावत कि या बात.
क्या चा वींकु दोष ज्वा ह्व़े व बेटी जात.
कुछ त डेर वे बिधाता से राखी ले मनख्यात..

तीलू, रामी, गौरा ह्वेनी बड़ी-२ नारी.
जौन करी काम यनु दुनिया दे तारी..
छाया सभ्या यु भी रे मनखी नारी जात...
क्या चा वींकु दोष ज्वा ह्व़े व बेटी जात.
कुछ त डेर वे बिधाता से राखी ले मनख्यात..


Anoop also creates humor and satire in his Garhwali poetry as under –
उन त मि
नौन्युं देखि
भारी सरमांदू  छौं
पर कबि फेसबुक मा
जरा सि चैट कै देंदु
  Anoop Rawat uses lyrics, poems and Ghzals for his illustration.
  It is clearly visible effects of Salani Garhwali dialects in poems by Anoop Rawat.
    Anoop uses old Garhwali phrases (खैरी खांदा खांदा ) and new phrases (फूल माला रिबन कटे उद्घाटन ह्वे गे)  too for illustrating his poems .
  There are mostly all types of images in the poems by Anoop. His uses of symbols make perfect images.
   Poetry critic Dr. Manjula Dhoundiyal claims that Anoop has tremendous potentiality for Garhwali poetry world. 


Copyright@ Bhishma Kukreti, 2017
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चमोली गढ़वाल , उत्तराखंड , उत्तरी भारत कविता , लोकगीत  इतिहास ; रुद्रप्रयाग गढ़वाल , उत्तराखंड , उत्तरी भारत कविता , लोकगीत  इतिहास ; टिहरी गढ़वाल , उत्तराखंड , उत्तरी भारत कविता , लोकगीत  इतिहास ; उत्तरकाशी गढ़वाल , उत्तराखंड , उत्तरी भारत कविता , लोकगीत  इतिहास ; देहरादून गढ़वाल , उत्तराखंड , उत्तरी भारत कविता , लोकगीत  इतिहास ; हरिद्वार गढ़वाल , उत्तराखंड , उत्तरी भारत कविता , लोकगीत  इतिहास ;
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History and review of Garhwali Poems, Folk Song from Uttarkashi Garhwal, Uttarakhand, South Asia; History and review of Garhwali Poems, Folk Song from Tehri Garhwal, Uttarakhand, South Asia; History and review of Garhwali Poems, Folk Song from Dehradun Garhwal, Uttarakhand, South Asia; History and review of Garhwali Poems, Folk Song from Rudraprayag Garhwal, Uttarakhand, South Asia; History and review of Garhwali Poems, Folk Song from Chamoli Garhwal, Uttarakhand, South Asia; History and review of Garhwali Poems, Folk Song from Pauri Garhwal, Uttarakhand, South Asia; History  Garhwali poems from Haridwar ;


Bhishma Kukreti

Preparation for IAS Exam, UPSC exams
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सहायक पुस्तकों का अपना महत्व है

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( गढवाल भ्रातृ मंडल (स्थापना -1928 ) , मुंबई  की मुहिम  –हर उत्तराखंडी  IAS बन सकता है )

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IAS/IRS/IFS/IPS  कैसे बन सकते हैं श्रृंखला  -47

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गढ़वाल भ्रातृ मण्डल हेतु प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती
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   यद्यपि UPSC परीक्षा में सफल होने के लिए सैलेबस के हिसाब से अध्ययन आवश्यक है जिसके लिए बजार में हर विषय के लिए विशेषज्ञ लिखित पुस्तक उपलब्ध हैं।  किन्तु परीक्षार्थी को अपनी विश्लेष्णात्मक व संस्लेषणात्मक  शक्ति वर्धन हेतु कुछ सहायक पुस्तकों का अध्ययन भी आवश्यक है। 
    विशेष विषयी पुस्तकें परीक्षा हेतु लिखी पुस्तकों से अलग होती हैं किन्तु आपको विशेषता प्रदान करने में सहायक होती हैं।  जैसे इतिहास हेतु UPSC सेलेब्स की पुस्तक तो आवश्यक है ही किन्तु नेहरू जी लिखित पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया आपको नई सोच दे देगा और आ अपनी परीक्षा में कुछ विशेष दे पाएंगे और आप परीक्षा निरीक्षक के हिसाब से विशेष माने जायेंगे। 
  विशेष पुस्तक आपको उत्तर लिखने में सरसटा  / जीवंतता प्रदान करने में सहायक होती हैं। 


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शेष IAS/IPS/IFS/IRS कैसे बन सकते हैं श्रृंखला -  48में.....
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कृपया इस लेख व " हर उत्तराखंडी IAS बन सकता है" आशय को  7  लोगों तक पँहुचाइये प्लीज !
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Bhishma Kukreti



Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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चुल्लक  गैस स्टोव से चिरड्याण
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चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती   
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माटौ चुल्ल - औ ये ब्वे ! नि सयेंद , नि रयेंद , नि खयेंद
गैस स्टोव (अपणी मनम ) -अब ये तैं  मृत्यु डौर लगण लग गे , एन सब्युं निसिणि करण।
चुल्ल - ये ब्वे ! ये ब्वे ! क्या ह्वाल भोळ , भोळ क्या ह्वाल ..  . भोळ क्या ह्वाल।  निजड़ू  शत्रु गैस स्टोव आण से म्यरो वंश  समाप्ति अवश्यम्भावी च।
घण्यसौ बंठा - ये चुल्ल माराज सीण दि हम तै।
चुल्ल -चुप बै बंठा।  तेरी मृत्यु  आली ना नजीक तब पता चौलल।   त्वे पता बि  च कि निरबंशी मोरणो दुःख क्या हूंद।
गैस स्टोव (मन इ मन मा ) - अब यूं सब्युं बत्थों मा नि सियाण। आज संस्कृति नाश पर आज अवश्य ही भाषण भीषण होलु।
बंठा - ह्यां पर रोज रोज क्या रौंद तू रुणु कि अब तेरी मृत्यु ही ना त्यार बंश बि खतम ह्वे जाण
चुल्ल - अबै त्वे क्या पता बंश नास का क्या दुःख हूंद।
बंठा - पता च।  सि प्लास्टिकै बल्टी अर टब ऐ इ गेन ना ।  पर मीम धीरज च , धैर्य च , सहनशीलता च।
बौळी -हाहाहा
बंठा -क्या छे ये बौळी मै पर हंसणी ?
बौळी - मि त्वे पर नि हंसणु।
बंठा - त ! कै पर छे हंसणी ?
बौळी - मि त तै भुल्लकड़ चुल्लु पर छौं हंसणु।
चुल्लु - क्या च इखम हंसणै बात ? मेरी मृत्यु निश्चित च अर तू हंसणी छे हैं ?
बौळी - जरा वु दिन याद करदी जब ये घौरम तै बंठा की दीदी तमोळी ऐ छे।  तब सब माटौ घौड़ , घंटी , हिसर अपण अवश्यंभावी बंश नाश पर रुणा छा अर तू हंसणु छौ बल सब माटक भांड कूंड , पत्थरौ भांड कूंड अर लखड़ूं भांड कूंड खतम ह्वे जाल पर चुल्लु कबि नि मोर सकुद।  तीन तब अट्टाहास कौर छौ कि माटौ चुल्लाक मृत्यु कबि नि हूण।  माटौ चुल्ल अजर छन , अमर  छन।
कठब्वड़ पुटकाक बरोळी - हाँ हाँ , तब त ये चुल्लन घमंड मा संस्कृत श्लोकों मा बोलि छौ बल मृतिका भांडुं मृत्यु अवश्य आली , मृदिका  पात्रुं वंश नाश हूण च , काष्ठ पात्र समाप्त ह्वाला किन्तु मृतिका चुल्ली: तो मनुष्य वंश  का साथ ही समाप्त ह्वाल।
जंदरी - हां ! येन म्यार वंशौ नाश पर बि अट्टाहास कौर छौ बल पाषाण -भंडम बि मृत्यु लोक चल जाल किन्तु मृदिका चुल्लि: न समाप्त नि हूण।
गैस सिलिंडर - स्टॉप , स्टॉप।  कीप क्वाइट।  डोंट अटर ऐनी वर्डस।  लेट मि स्लीप पीसफ़ुली।
कूण्या - पता नी यु लाल गोळ उच्चु  भांड कैं बिजली मा रौंद गिटर पिटर करणु धौं। बिंगणम बि नि आंद एक बुल्युं।
चुलखंदौ लखड़ - अरे म्यार बारम बि त स्वाचो।  जब बिटेन स्यु शत्रु गैस स्टोव आयी मि चुलखंद म पड्युं पड्युं सौड़ ग्यों।
पटिला - अच्छु ह्वे तू नि जळदु।  अरे त्यार धुंवान हमारी क्या कुगति हूंद छै।
सब -हाँ अब ना धुंवां ना हमर अंसदारी।  धुवांहीन  वातावरण म मजा ही मजा.आनंदम !  आनंदम !
चुल्लु -सालो ! तुम सब म्यार बैरी ह्वे गेवां।  मेरो कुलनाश हूणू च अर तुम आनंदम आनंदम भजणा छवां।
पसूण - देख भाई चुल्लू ! ये ब्रम्हांड कु नियम नियति च बल जु जनम ल्यालो वैकि मृत्यु अवश्यम्भावी च।  इख तलक कि जु नया वंश, नया कुल याने जु नया उपकरण आंदो वैन पुरण हूण।  फिर वैक जगा नया उपकरण आंद अर पुरण उपकरण स्वतः ही अप्रासांगिक ह्वे जांद।  उपकरण याने संस्कृति अर संस्कृति ठहरदी नी अपितु समाप्त हूंद जांद।
चुल्ल - अरे त्वे पर बितदी ना तब बुल्दु मि।
पसूण - बितण क्या च।  परसि नि ऐ छा ये उबर नया किस्मौ ओड जु अब नयो कूड़ बणाणो बात करणु छौ।  बुलणु  छौ बल काष्ठ रहित बिल्डिंग बणौलु।
मोर, सिंगार, देळी (एक  दगड़ी ) - मतलब अब हमन बि बदल जाण ? हमर बि वंश नाश ?
पसूण (प्रसन्नचित ) - बिलकुल।  तुमर , हमर क्या तकरीबन हम सब्युंक वंश नाश हूण।
पर्या - मतलब हर अन्वेषण से पुरातन को नाश ?
पसूण - हाँ हर नयो  अन्वेषण पुरण उपकरण संस्कृति बिनास करदो।  अब हमर बारी च।
घण्यस - तो क्या करे जावो ?
पसूण - कुछ नहीं।  बस नई संस्कृति याने नया  उपकरणों स्वागत अर अपण वंश नाश पर प्रसन्नता।  प्रसन्नता ही जीवन च , प्रसन्नता ही हम उपकरणों नियति च।
सब -परिवर्तन की जय हो।  परिवर्तन की जय हो
सिलिंडर - लॉन्ग लिव चेंज !





26/12 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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    ----- आप  छन  सम्पन गढ़वाली ----
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Bhishma Kukreti

छुपका , Large Tiled Nightjar (Caprimulgus marcrurus)

गढ़वाल की चिड़ियायें - भाग -36

( Birds of  Garhwal; Birding and Birds of Garhwal, Uttarakhand, Himalaya ----- 36)
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आलेख : भीष्म कुकरेती , M.Sc.; D.M.S.M; D.E.I.M.
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जंगल वासी 28  सेंटीमीटर लम्बा छुपका एक रात्रिचर भूरे रंग का पक्षी है  जिसका शरीर चित्तीदार होता है। रात में छुपका जंगलों के सड़क में पड़ा रहता है और वाहनों के प्रकाश से जब कीड़े मकोड़े भ्रमित होते हैं तो उनका  तो शिकार करता है।  रात भर 'छौंक' ' छौंक' की आवाज करता है।

Bhishma Kukreti

Preparation for IAS Exam, UPSC exams
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आंकड़ों को कैसे याद करना चाहिए

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( गढवाल भ्रातृ मंडल (स्थापना -1928 ) , मुंबई  की मुहिम  –हर उत्तराखंडी  IAS बन सकता है )

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IAS/IRS/IFS/IPS  कैसे बन सकते हैं श्रृंखला  -48

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गढ़वाल भ्रातृ मण्डल हेतु प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

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  UPSC की परीक्षा में आंकड़े याद करना भी आवश्यक होते हैं।  किंतु यदि गलत आंकड़े /अंक /नंबर लिख दिया तो परीक्षा में लाभ के ेजगह हानि ही अधिक होती है।  अतः आंकड़े वही दो जो आपको बिलकुल सही तरह से याद हों या जिस आंकड़े पर सही होने का पूरा विश्वास  हो।
     आंकड़े अधितर एक दूसरे के साथ गडमड हो जाते हैं अतः आंकड़े याद करते वक्त व बाद में भी आंकड़ों के प्रति संवेदन होना आवश्यक है।
  आंकड़े याद करने के लिए सबसे पहला नियम है जिन आंकड़ों की आपको आवश्यकता ही नहीं या जो आंकड़े प्रासांगिक नहीं हैं उन्हें याद ही नहीं करो।  अप्रसांगिक आंकड़ों को न  याद करना ही लाभकारी है।
     आंकड़े  को  दूसरे आंकड़े से संबद्ध करने से आंकड़े याद करने में सहायक होते हैं जैसे उस क्षेत्र की लम्बाई 1974  किलोमीटर है और चौड़ाई 1458 किलोमीटर।  तो उत्तम है कि याद किया जाय कि क्षेत्र की लम्बाई लगभग 2 हजार किलोमीटर है और चौड़ाई लम्बाई से 5 सौ किलोमीटर कम है।
    एक आंकड़े को अंतरसंबद्ध करना ही हितकर है।
  फिर आंकड़े भी तभी याद रहते हैं जब उन्हें बार बार उपयोग किया जाय और लिखा जाय।  आंकड़ों को बार बार लिखा जाना भी श्रेयकर है। 



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शेष IAS/IPS/IFS/IRS कैसे बन सकते हैं श्रृंखला -  49में.....
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हर उत्तराखंडी IAS बन सकता है"
आशय को  7  लोगों तक पँहुचाइये प्लीज !
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Sitting on other exams ,
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Bhishma Kukreti



Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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जब ब्यौ मा  अंगेठी चलदी छै  (संस्कृति समळौण )
(यह प्रकरण श्री सोहन लाल जखमोला ने सुनाया था )
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नाट्य रूपांतर   :::   भीष्म कुकरेती 
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काल -सन  1904
स्थान - बड़ेथ  (मल्ला ढांगू )   ( किमसार, उदयपुर , यमकेश्वर ब्लॉक से 25 -30  मील दूर  ))
स्थान - बड़ेथ का ब्रिटिश काल का चौक
कुमना नंद बड़थ्वाल  (बड़ेथक  ) - हे चंदनु ! चल तू भी ऐ  गे  बखारी  बिटेन।  ले सि जसपुर बिटेन जोगी  भैजि , डाबर बिटेन  सदा भैजि  बि  ऐ गेन।  अब चिंता नी
(रामा रूमी हूंद )
कुमना नंद - सदा भैजि ! अच्छु  ह्वे जु  तुम डाबर बिटें  ऐ गेवां  . मेरी त  निंद इ हर्चि गे।  इथगा दूर सुदनु बरात किमसार लिजाण।
सदा नंद डबराल (डाबर , डबराल स्यूं वासी )-  ब्वे कथगा दिनुं बिटेन घचकाणि छे बल मौसेर  भाइक नौनु सुदनु क ब्यौ च अर मि अबि तक नि बड़ेथ नि ग्यों।
कुमना नंद बड़थ्वाल - ज्यठि  ब्वेक हम सब पर बड़ो प्रेम च।
सदा नंद - अच्छा भैजि क्या क्या इंतजाम ह्वे गे।  25 -30  मील दूर बरात जाणो बात च त  ...
कुमना नंद - हूं  हां।  कख बड़ेथ अर  कख किमसार।  हिंवल पार , लंका दूर।  पर ढुंगा क भुप्पी बडोला ममा जीन उख रिस्ता की बात कार।  त्याईस गुण मिलणा छन। खानदान देखिक ना नि  बुले गे।
जोगी  कुकरेती (जसपुर ) -  भैजि ! और क्या चयेंद ? जातिक कंडवाल ,मोतीराम जीक त छै भैंसी लैंदी , तीन जोड़िक  बल्द , आठ तंदला बखरों अर  एक तंदला ढिबरों क च।
चंदन सिंह -हाँ बड़ जिमदारु , बड़ु  कामकाज।  अर  मीन सूण बल मोतीराम जीक चार त म्वार जळट छन बल।  हर मैना  दु दु परोठी शहद हरिद्वार भेषक बाबा जीक इख जांद बल।
सदा नंद - हाँ भेषक बाबाक इख आयुर्वेदिक दवा जि बणदन।  मोतीराम कंडवाल जीक  भैजिन उखी त बैदकी सीख।
कुमना नंद - हाँ पर सि सात आठ दिन पैली मोतीराम जीक रैबार बि त आयी।
जोगी - क्या भुला ?
सदा नंद - कुछ इन तन ?
कुमना नंद - बल द्वार बाट  हूण से पैल बल ऊँन हमर कै बराती तैं  हुक्का नि दीण अर ना आग।
जोगी -  हाँ त रिवाजौ बात च।  इखमा क्या ? हम बि त भातौ पिठै लगाणो बाद ही अपण समदयूं तैं हुक्का पिलांदा।
कुमना नंद - भैजि ! रैबार पूर  त सूणो।
जोगी - बोल , बोल
कुमना नंद - बल मोतीराम जीक बड़ो नाम च उदेपुर मा  त पचास बरात , कम से कम चार घ्वाड़ा , चार हुक्का, एक बैठक हुक्का अर कम से कम चार अंगेठी त आण इ चयेंदन  ।
सदा नंद - ये मेरी ब्वे बड़ खानदानौ दगड़ रिस्ता जवाड़ो त  ताम झाम बि बड़ ही करण पड़द।
जोगी - हूँ।  घ्वाड़ा , हुक्का बि  लिजै ल्योला।  हूँ पर  चार अंगेठी ?
चंदन  सिंह  - ह्यां यांकि बान त भाना डुलेर बुलै छौ।  अबि तक नि आयी।  यूंक बि अब भाव बढ़ गेन।
जोगी - ले सि  ऐ गे भाना  डुलेर।
(रामा रूमी हूंद )
चंदन - क्या रै भाना  देर लगै द्याई ?
भाना - हाँ ग्वीलम  अम्बा दत्त ठाकुर जीक इख देर ह्वे गे।  ऊंक नौन बाला दत्त जीक क बरात जाण मन्यार स्यूं नैथाणा।  त ब्योलीक ड्वाला  लाणौ डुलेर चयेणा छन।
जोगी - ये हां बाला कु ब्यौ बि  त सुदनु ब्यौ से छै  दिन बाद च।
भाना - हां।  बरात मा आठ डुलेर अर आठ अंगेठी लिजाण वळ अर एक बांजक लखड़ लिजाण वळ चयेणा छन। ये ठाकुर लोगो अंगेठी जगा गुपळ जळैक किलै नि लिजान्द होला।
सदा नंद - ये क्या बुलणु छे ? गुस्स -गुपळ मुर्दा लिजान्द दैं लिजांदन।  ब्यौ मा अपशकुन्या चीज लिजांदन क्या ?
भाना - हम तैं क्या पता।  हम त टकौं ब्यौ करदा त  हमर ले क्या।
जोगी - ये भाना ! सुदनु बरातौ कुण बि चारेक डुलेर अर अंगेठी लिजाण वळ चयेणा छन।
भाना - कथगा अंगेठी जाणा छन बरातम ?
चंदन - कम से कम चार अंगेठी।
भाना - बरतीन जाण किमसार।  मतलब डेड़  दिन जाण अर डेड़ दिन आण।  ऊं त इख बि आठ अंगेठी लिजाण वळ अर एक लखड़ लिजाण वळ चयाल।
कुमना नंद - हां इथगा त चयला ही।  दूरक बात च।
भाना - इन च काका ! डुलेर त मि पांच बीसी लयों पर जळदि अंगेठी लिजाणो क्वी डुलेर तयार नी होणु।
जोगी - अरे भाना ! इन कनै बात बल अंगेठी लिजाणो क्वी डुलेर तयार नी ?
भाना - इन च जळदि अंगेठी लिजाण  क्वी खाणो काम नी च।
चंदन - अरे पर अंगार त रंगुड़ो तौळ रंदन फिर ड्यूल बि खूब डमडमु रौंद
भाना -कबि लिजा धौं जळदि अंगेठी।
चंदन - पर आमदनी बि त खूब हूंदी कि ना ?
भाना - अरे क्वा च आमदनी पैंथर पड़्यु ? सब बुल्दन बल बच्यां रौला त तमाखू मांगि देखि खै ल्योला।
सदा नंद - हाँ पर अंगेठी वळुं तै मजूरी अलावा दु दु गिंदोड़ा बि मिल्दन।
भाना - डबराल ठाकुर ! हमर लोग बुल्दन बल इथ्गा कट्ठण अर खतरा वळ काम इ जि करण हूंद त मथि मुलक पेंशनर काम मतबल चाय बगानों मा काम नि करदा हम।
कुमना नंद - ह्यां पण।  हमकुण अंगेठी लिजाण जरूरी च।  समदी जीक मान सम्मान कु  सवाल च।  बेटी ब्यौ मा जथगा ज्यादा अंगठी तथगा बड़ो नाम हूंद।
भाना - मुश्किल च
जोगी - अरे त इकै गिंदौड़ा हौर ले ले
भाना - गिंदोड़ा सवाल नी च।  क्वी बि इथगा कट्ठण अर खतरा वळ काम करणो तयार नी च।
सदा नंद - अच्छा त अम्बा दत्त जी अंगेठी लिजाण वळुं क्या इंतजाम करणा छन ?
भाना - क्या करण जन लाट साब सरकार सड़क बणानो करदी।  अर क्या।
चंदन - क्या ?
भाना - दुगड्ड -भाभर बिटेन डुट्याळ मंगाणा छन।
सदा नंद - डुट्याळ ? दुगड्ड भाभर बिटेन ?
भाना - हाँ ठाकुर।
कुमना नंद - ठीक च।  अब जब मान सम्मान कु सवाल हि ह्वे गे त हम बि डुट्याळ इ मंगोला।
सदा नंद - हाँ यी ठीक रालो
जोगी - बिलकुल जी।  अंगेठी उठाणो बान डुट्याळ इ ठीक राल। कै तै दुगड्ड भाभर भिजण पोड़ल।
कुमना नंद - हाँ


27/12 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल विषय विशेषता दर्शन   हेतु उपयोग किये गए हैं।
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    ----- आप  छन  सम्पन गढ़वाली ----
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Bhishma Kukreti


छोटा किलकिल -Common Kingfisher ((Alcedo atthis)

गढ़वाल की चिड़ियायें - भाग -37

( Birds of  Garhwal; Birding and Birds of Garhwal, Uttarakhand, Himalaya -----37 )
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आलेख : भीष्म कुकरेती , M.Sc.; D.M.S.M; D.E.I.M.
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16 सेंटीमीटर लम्बा छोटा किलकिल साफ़ पानी का द्योतक है।  जहां छोटा किलकिल है का अर्थ है पानी साफ़ है। नदियों , नालों के किनारे रहने वाला  प्रवासी पक्षी बड़ी तेज से उड़ता है जिसकी चोंच लाल काली होती है। नारंगी रंग का  कान प्रछन होता है और सिर व् पंख नीले रंग के होते हैं।
  नदी किनारे पखेड़ों में रहना वाला किलकिल पानी की मछलियां व जल जीव खाते हैं। 



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Bhishma Kukreti


Preparation for IAS Exam, UPSC exams
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परीक्षाओं में समाचार पत्रों का महत्व

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( गढवाल भ्रातृ मंडल (स्थापना -1928 ) , मुंबई  की मुहिम  –हर उत्तराखंडी  IAS बन सकता है )

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IAS/IRS/IFS/IPS  कैसे बन सकते हैं श्रृंखला  - 49

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गढ़वाल भ्रातृ मण्डल हेतु प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

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UPSC की परीक्षाओं में सामन्य ज्ञान व इंटरव्यू के 25  क्या 50 प्रतिशत से ऊपर प्रश्न उत्तर वास्तव  में समाचार पत्रों से मिल जाते हैं।
समाचार पत्र आपको पर्टियोगीगामी बनाता है।
समाचार पत्रों से आपको ददुनिया में सामाजिक , राजनैतिक, आर्थिक, कृषि , खेल , तकनीकी परिवर्तन व तकनीक प्रबंधन जैसे कई विषयों पर ताजा  ज्ञान मिलता रहता है और जो परीक्षाओं व इंटरव्यू में भी पूछे जाते हैं।
सामन्य ज्ञान व विशिष्ठ ज्ञान के कई उत्तर जो खिन नहीं मिल पते वे समाचार पत्रों में मिल जाते हैं
जहां जनरल नॉलेज की पुस्तकें नीरस होती हैं वहीं समाचार पत्रों में सरसता होती है।

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शेष IAS/IPS/IFS/IRS कैसे बन सकते हैं श्रृंखला -  में.....
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कृपया इस लेख व "

हर उत्तराखंडी IAS बन सकता है"
आशय को  7  लोगों तक पँहुचाइये प्लीज !
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Bhishma Kukreti




Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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यदि मि कवि हूंद त मीन मुर्गौं  अयेड़ी (हंटिंग ) अर मुर्गा शिकार पर कविता लिखण छौ
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चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती   

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     कबि कबि म्यार दिलम ख़याल आंदो बल मी बि मुर्गों  शिकार याने फाउल हंटिंग अर  चिकन पर कुछ लिखूं।  चूँकि मि कवि नि छौं तो मटन -चिकन पर कविता नि लेख सकुद।  ब्याळि मि सुचणु छौ यदि मि कवि हूंद तो चिकन पर क्या क्या कर कैं तरां से लिखुद।
    हे मुर्गा त्यार स्वागत च।  हमर जिना त्यार नाम कुखुड़ च।  हम बड़ा दयावान छां इलै हम स्त्री जाती पर अत्त्याचार नि करदां, हम जनान्युं इज्जत करदार छंवां अर योइ  कारण च हम मुर्गी खाणो बाद बि हमेशा बुल्दां कि हमन मुर्गा खायी।
 
    तू जू बि छे मुर्गी या मुर्गा, त्वे पर अति आकर्षित छौं।  उनी आकर्षित छौं जन ऑफिस की जनान्युं पर आकर्षित रौंद।  जन लाळसा पर-स्त्री की हूंदी उनि लाळसा त्वे देखिक मेरो अंतड्यूं मा हूण मिसे जांद।
   अहा ! जब मि दिखद कि तू बरखा मा भिगणो बाद छरबराट कौरिक पंख उड़ांदु  त पता नी मि तै भिज्यां बाळ सुखांदी वा स्त्री याद ऐ जांदी ज्वा बाळ सुखाणो बान अपण मुंड अर बदन झटकाँद।  त्यार झटका अर बाळ सुखांदि जनानी क झटका से पता नि मै किलै झटका लग जांदन धौं।
    हे कळंगी दार व पंखदार मुर्गा ! मुर्गी बजार म त्यार चमकदार लाल काळो पंख देखिक म्यार मन माँ श्रृंगार रस पैदा हूण मिसे जांद तो जीव मा थूक पैदा हूण लग जांद अर अंदड्यूं मा मरोड़ उठण मिसे जांदन।  जीब अर अंदड्यूं जोर ज्यादा हूंद त श्रृंगार रस हिंसक रस मा तब्दील ह्वे जांद। म्यार मन आईएसआई कु आतंकवादी बण जांद अर 'लव जिहाद' 'जायका  जिहाद ' मा बदल जांद।
किंतु 'जायका जिहाद ' जादा  देर तक नि चलदो।  'न खाऊंगा न खाने दूंगा ' जुग मा  म्यार 'जायका जिहाद ' मुर्गों की कीमत सूणी उनि  गायब ह्वे जांद जन उत्तर प्रदेश चुनावौ  बाद 'लव जिहाद ' हर्चि जांद।
    त्यार पर्शुका याने पस्सली तैं  त  क्या बोलुं ! सोळा साल की छोरी सलमान खानक सिक्स पैक्स से उथगा क्या आकर्षित होला जथगा मि त्यार रिब्स, पस्सली , पर्शुका देखिक आकर्षित हूंद।  अर अजकाल मल्टीप्लेक्स का रेट्स व मुर्गी बजार म मुर्गों रेट्स इथगा ज्यादा ह्वे गेन कि मि सलमान खान का सिक्स पैक्स व मुर्गौं  रिब्स दुयुं से महरूफ छौं अर दुयुंक वियोग मा विप्रलम्भ रसयुक्त हास्य लेख लिखण  मिसे जांद।
     
हे मुर्गी या मुर्गा ! तेरी रान ? वह क्या रान  छन ! चिपळी , सळ सळी , आकर्षक  ! मि त तेरी रान देखि दिलफेंक मजनू ह्वे ग्यों।  बस तेरी टंगड़ी प्रेम मा  मि टंगड़ी खव्वा  हूण चांदो।  तेरी रान की चाहत मा मि रानखव्वा हूण चाणु छौं। किंतु मंहगाई की  मार से ग्रसित मि तेरी रानों तै सुपिनों मा इ दिखणु रौंद , सुपिनों मा तेरी रानों तैं घुरणु रौंद अर सुपिनों मा ही तेरी टंगड़ी व रानों तैं प्रेम से मलासणु रौंद।  लैला मजनू तैं जालिम दुनियान नि मिलण दे। जालिम दुनियान तीलू तड़ियाल तै सजवाण से नि मिलण दे अर तेरी मंहगी कीमत मेरी अंतड़ी अर तेरो मिलन नि हूण दींदन।
 
  चूँकि मि मुर्गा कु मामला मा अतृप्त आत्मा छौं तो लेख अगनै बि आंदा राला तैबर तक आप प्याज से काम चलाओ। 

28/12 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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