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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

सफेद छाती वाली किलकिल   White Throat Kingfisher (Halcyon Smyrnensis)

गढ़वाल की चिड़ियायें - भाग -38

( Birds of  Garhwal; Birding and Birds of Garhwal, Uttarakhand, Himalaya ----- 38)
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आलेख : भीष्म कुकरेती , M.Sc.; D.M.S.M; D.E.I.M.
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28 सेंटीमीटर  की सफेद छाती वाली किलकिल बड़े पैमाने पर पाया जाने वाला पक्षी है जिसका गला व मध्य छाती सफेद रंग का होता है।   सिर व ऊपरी शरीरांग  भरे रंग का होता है व निचला भाग फिरोजी रंग का होता है।  लाल ताकतवर, लम्बी  चोंच वाली सफेद छाती किलकिल जंगलों के किनारे , खेतों ,शहरों व गाँवों में पानी के आस पास मिलती हैं व जल जंतु व उभयचरों का भोजन करती हैं।  इनकी आवाज बड़ी तेज होती है

Bhishma Kukreti


Preparation for IAS Exam, UPSC exams
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समाचार पत्रों की संख्या

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( गढवाल भ्रातृ मंडल (स्थापना -1928 ) , मुंबई  की मुहिम  –हर उत्तराखंडी  IAS बन सकता है )

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IAS/IRS/IFS/IPS  कैसे बन सकते हैं श्रृंखला 50-

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गढ़वाल भ्रातृ मण्डल हेतु प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

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  समाचार पत्रों के सम्पादकीय व अन्य आवश्यक घटनाओं हेतु समाचार पत्र पढ़े जाते हैं।  किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के परीक्षार्थी किन किन और कितने समाचार पत्र पढ़े जायं पर कनफ्यूज रहते हैं।  समाचार पत्र परीक्षार्थी को आज के ज्ञान व अन्य ज्ञान हेतु वश्य्क है किन्तु परीक्षार्थी को समझना चाहिए कि समाचार पढ़ने में समय कम ही लगाना चहिये। 
   सभी विज्ञ सलाहकारों की रराय  है कि निम्न स्तरीय समाचार पत्र ही पढ़े जाने चाहिए और तीन से अधिक समाचार पत्र कतई नहीं पढ़ने चाहिए -
1 -राष्ट्रीय समाचार पत्र
2 - प्रादेशिक समाचार पत्र
3 - फिनेंसियल समाचार पत्र
समाचार पत्र वही पढ़ने चाहिए जिस भाषा  माध्यम में आप परीक्षा दे रहे हों।
अंग्रेजी समाचार पत्र तभी पढ़ना चाहिए कि जब आपको अंग्रेजी समझ में आती हो। 


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शेष IAS/IPS/IFS/IRS कैसे बन सकते हैं श्रृंखला -  में.....
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कृपया इस लेख व "

हर उत्तराखंडी IAS बन सकता है"
आशय को  7  लोगों तक पँहुचाइये प्लीज !
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IAS Exams, IAS Exam preparation, UPSC exams, How I can be IAS , Rules of IAS exams, Characteristics of IAS exam, How will I success IAS exam, S UPSC Exam Hard ?Family background and IAS/UPSC Exams, Planning IAS Exams, Long term Planning, Starting Age for IAS/UPSC exam preparation, 
Sitting on other exams ,
Should IAS Aspirant take other employment while preparing for exams?, Balancing with College  Study ,
Taking benefits from sitting on UPSC exams, Self Coaching IAS/UPSC Exams,  Syllabus  IAS/  UPSC Exams ,

Bhishma Kukreti


Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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देवस्थल तो रचनाधर्मिता रोकने के 'खबेश' हैं 
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चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती   

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ब्याळि लोकसभा मा 'तीन तलाक ' बिल पास ह्वे गे।  बिलन पास नि हूण  छौ पर कॉंग्रेस अर यार पार्टी अचकाल हिंदुऊं तै बि सेकुलर समजण मिसे गे त कॉंग्रेस अर यींक यारी पार्ट्युं न मुसलमानुं तैं तिरैक बिल पास हूण दे।  पर ओवैसी साब कुछ बुलणा छा अर हरेक 'देशभक्त' नेता जनाब ओवैसी क स्टेटमेंट तैं बकबास बुलणु छौ।  जब कि ओवैसी की बातुं म स्वार्थ हो किन्तु तर्क बि छौ।  तीन तलाक बंद करण  त ठीक च पर तलाक लीणो तरीका अर तलाकौ ऐथर पैथर पर बि त क़ानून स्पष्ट हूण चयेंद निथर GST तरां रात मा बार बार घसीटा राम की दूकान खुलण पोड़ल 'देशभक्तों ' तैं।
बकबास , कुतर्क मा बि तर्क हूंद।
   हमर गाँव एक मूळी माई आंदि छै अर सुबेराक चाय पीणो हमर ड्यार आंदि छे।  चाय पेकि माई बुल्दी छे , "चा त झंग्वर जोग बणी च "
   उन त बात बेतुकी लगद  , तर्कहीन दिखेंद किन्तु यदि झंग्वर चाय मा खाये बि जावो त भंगुल त नि जाम जाल ? अरे प्रयोग करणम हमर क्या जाणु च भै।  ज्वा बात हमर संस्कृति या धारणा विरुद्ध हूंद हम वीं बात तैं बकबास , निरर्थक , उटपटांग नाम देकि रचनाधर्मिता तैं रुकणो पुठ्या जोर लगांदा।  बकबास पर ऐक्सिपरिमेंट की जगा हम क्रिएटिविटी का ही  कत्ल कर दींदा।  आम मनिख क्रिएटिविटी कु  कतल करण मा इ तर्क समजद।
  अब झंग्वर पर बात आयी त मुंबई की छ्वीं लगै दींदु।  मेरी मा सन 71   मा मुंबई ऐ गे छै।  अर मां क वजै से आज बि मेरी घरवळि , मेरी द्वी ब्वारी झंग्वर पकांदी छन।  मैना मा एक दिन त झंग्वर पकद इ च। अर मीन कत्ति दैं अपण घरवळी कुण ब्वाल (रिक्वेस्ट ) बल एक दिन झंग्वरै बिरयानी या पुलाव बणै दे, निथर खिचड़ी ही पकै दे ।  जब बि मि झंग्वरै पुलाव या बिरयानी पकाणो रिक्वेस्ट कौरु ना कि मेरी माँ , म्यार बच्चा इ ना आस पड़ोसी बि घरवळि तरफ ह्वे जांद छा अर मि तैं तून दींद छा बल अरे लाटो -कालों छ्वीं मुंबई मा बर्जित च।  दुसर ढंग से सुचण समाज मा अमूनन बुरु माने जांद।  जब ब्वारी ऐ गेन त झंग्वर पकण बंद त नि ह्वे किन्तु अब उथगा दैं नि पकद पर झंग्वर हमर डाइट का एक अंग छैं इ च।  जब मीन ब्वार्युं से झंग्वर बिरयानी या पुलाव पकाणौ  दरख्वास्त कार तो उंकी भाव भंगिमा से मि समज ग्यों बल उ मि तैं दुनिया का मूर्खों का सम्राट समजणा छन।  क्वी बि अपण धारणा नि तुड़ण चाँद अर जु ऊंकी धारणा तुड़ण चांद  वै तैं मूर्ख ,  पागल या बकबास करंदेर करार दिए जांद।
      मंदिर , मस्जिद , गिरिजाघर या गुरुद्वारा तो रचनाधर्मिता रुकणो सबसे बड़ा खबेश छन , रागस छन।  जी हाँ देवस्थल रचनाधर्मिता निजन्मणो बान ही बणाए जांदन।  देवस्थलों काम ही एक च कै बि तरां से रचनाधर्मिता यीं पृथ्वी मा नि जनम।  मनुष्य की रचनाधर्मिता तबि विकसित हूंद जब हम कै चीज तैं ऐथर इ ना पैथर बिटेन बि देखां। रचनाधर्मिता मा गलत दिशा से दुनिया दिखण आवश्यक हूंद।  किन्तु जरा देवस्थलों पर नजर तो मारो अधिसंख्य देवस्थल मा एकी दरवज हूंद जु समिण हूंद।  देवस्थलों मा तीन तरफ से द्वार /आवाजावी का रस्ता बंद रौंदन।  अर देवस्थलों मा तीन तरफ से रस्ता बंद करणो ख़ास कारण हूंद कि भक्तों या अवालंबियूं की सुचणा सकती खतम करे जावो।  धर्मावलम्बी चौतरफान दुनिया दिखणो नि स्वाच यो ही मकसद हूंद मंदिर , मस्जिदों , गिरिजाघरों या देवस्थलों का।  इख तलक कि निरंकार समर्थकों देवस्थल बि तीन तरफ से बंद हूंदन।  पैथर बिटेन दिखण मतलब दूरबीन से उल्टा तरफ से दुनिया दिखण किन्तु समाज , देवस्थल , अर अन्य इनि माध्यम नि चांदन कि मनुष्य अलग तरह से संसार द्याख तो मनुष्य की सोच शक्ति पर तरह तरह का पहरा लगाए जांदन।
      क्या आप बि अपण बच्चों की रचनाधर्मिता तैं उटपटांग , निरर्थक , बकबास नाम तो नि दीणा छा ? क्या आप बि झंग्वरौ बिरयानी पकाणम रोड़ा अटकाणा छंवां ? क्या आप बि रचनाधर्मिता रुकणो बान तीन तरफ से दीवाल धरणा  छा ?
 


29/12 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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    ----- आप  छन  सम्पन गढ़वाली ----
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Bhishma Kukreti



ताजदार किलकिल , Crested Kingfisher (Megaceryle lugubris)

गढ़वाल की चिड़ियायें - भाग -39

( Birds of  Garhwal; Birding and Birds of Garhwal, Uttarakhand, Himalaya ----- 39 )
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आलेख : भीष्म कुकरेती , M.Sc.; D.M.S.M; D.E.I.M.
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   लगभग 41 सेंटीमीटर लम्बी ताजदार किलकिल एक हिमालयी पक्षी है जो पहाड़ तलहटी  (भाभर , तराई ) की नदियों व्  पहाड़ी नदियों , नालों के पास पायी जाती है।  इसकी झबरायुक्त कलंगी , पंखों व पूँछ पर काली सफेद पट्टी  होती हैं।

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सर्वाधिकार @सुरक्षित , लेखक व भौगोलिक अन्वेषक 



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Bhishma Kukreti



Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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कंडाळी ,सियूंण : आयुर्वैदिक पनिशमेंट कल्चर  वापस लाओ
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चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती   

कंडाळी ब्वालो , कनाली ब्वालो या ब्वालो सियूंण या पहाड़ी संस्कृति कु एक अभिन्न अंग थौ।  कंडाळी दंड संहिता त हिमालयी न्याय संस्कृति एक अंग छौ।
वै बगत हाउ टु करेक्ट युवर चिल्ड्रन किताब नि मिल्दी  छै , फंड फूको तब किताबि  नि मिल्दि  छै।  त पुस्तकबिहीन युग मा ब्वै बाबु कुण कंडाळी ही बच्चों तै अड़ाणो पुस्तक छे।  बच्चान उज्याड़ खलै  दे तो कंडाळी,  बच्चा स्कूल नि जाणो राड़ घाळो  तो कंडाळी की झपांग।  त कबि कबि कजे  अपण कज्याण बि झपोड़ दींद थौ बल कंडाळी मा हींग बिंडि किलै डाळ।  पहाड़ी लोक तब न्याय निसाब बि आयुर्वेदिक माने बाबा रामदेव  शैली मा हर्बल ढंग से करदा छा।  कंडाळीन झपोड़न वास्तव मा आयुर्वेदिक पनिशमेंट याने अहिसंक दंड थौ।
    जौं तैं हेमवती नंदन बहुगुणा अर चंद्रमोहन सिंह नेगी चुनाव याद ह्वावो त ऊं तैं पौखाळ (अजमेर पट्टी ) मा कंडाळी झपोड़ण घटना बि याद  होली ही। गढ़वाल का वास्ता यु चुनाव विश्व युद्ध से बि खतरनाक साबित ह्वे। द्वी पार्ट्युं तरफान उत्तर प्रदेश , चंबल से लुटेरा , डाकु , बलात्कारी बुलाये गे छा। मैदान से अयां कॉंग्रेसी कार्यकर्ताओंन पौखाळ नजिक कै छोरी छेड़ दे।  जनान्युंन कुछ नि कार , उखाड़िन कंडाळी बुट्या अर सब तै झपोड दे।  उ लड़की छिड़ण वाळुं तै बुबा नना याद ऐ गेन।  उ सब जीप से कोटद्वार दौड़िन अर पुलिस स्टेशन रपट लिखवाणो गेन त पुलिस वळुंन पूछ बल " जनान्युंन क्यां से  पीट ?" त लड़कीबाज कॉंग्रेसी कार्यकर्ताओं जबाब छौ ," घास से पीटा ". फिर पुलिसक प्रश्न छौ ,"घाव बताओं ". अब यी बदजात कॉंग्रेसी घाव कखन बतांद।  घाव हो तो बतांद।  सब  दुशासनों पर दर्द हूणु थौ पर डाउ -दर्द की निशानी नि दिखेणी छे। पुलिसन रिपोर्ट नि लेखी। हर्बल पनिशमेंट कु सबसे बढ़िया प्रयोग !  याने कंडाळीन झपोड़ो।
     अबि कुछ दिन पैल शराब विरोधी जनान्युंन शराब बिचण वळ अर शराब्यूं तैं कंडाळीन झपोड़ अर फिर बि पुलिस वळ FIR नि दर्ज कर सकिन।  आयुर्वैदिक दंड का विरुद्ध पुलिस बि कुछ नि कौर सकिद।
असल मा कंडाळी दंड संहिता सरा भारत म लागू करणै जरूरत च।
म्यार त बुलण च बल संसद मा पीठासीन अध्यक्ष तैं कंडाळी दिए जाण चयेंद अर जनि सांसद या विधायक संसद का कुंवा मा घ्याळ लगाणो आवो तनि मार्शल घ्याळ करदार सांसदों तैं कंडाळीन झपोड़ द्यावो।  तो मि शर्त रखदु  बल एक बि सांसद संसद ठप्प करणो सुपिन मा बि नि सोच सकल।  कंडाळी म्यार हिसाब से देव दत्त अहिंसक दंड हथियार च अर संसद या विधान सभा मा अवश्य प्रयोग हूण चयेंद।
  जु मंत्री पूरी तयारी कौरिक संसद मा नि आओ वै /वीं पर बि आयुर्वैदिक पनिशमेंट याने कंडाळी दंडिका  प्रयोग हूण चयेंद।
      कपिल सिब्बल सरीखा लोमड़ी से बि बड़ो चालाक वकील जु जज साहिबान से तारीख पर तारीख मंगणा रौंदन ऊं पर बि कंडाळी दंडिका प्रयोग हूण चयेंद कि ये लोक तो छ्वाड़ो हैंक लोक मा यी खुर्रांट वकील तारीख मंगण से घबरावन।
      जब जनता  सरकारी दफ्तर मा काम करवाणो जांदी त हरेक तै कंडाळी बुट्या मुफ्त मा दिए जाण चयेंद।  जनि क्वी सरकारी कारिंदा काम करणो बहाना बताओ या घूस मांगो वै तैं अभ्यार्थी कंडाळी  से झपोड द्यावो।
     मि त उत्तराखंड क्रान्ति दल वळुं  तै सलाह दीणु छौं बल उत्तराखंड मा एक आंदोलन चलाओ जु मास्टर रावो कोटद्वार मा हाजरी लगणी रुद्रप्रयाग मा इन मास्टरों तै कंडाळी से झपोड़े जावो।
      कंडाळीन  झपोड़णै संस्कृति कु वापस लाणौ समय ऐ गे।
    आपक राय क्या च ? क्या कंडाळी दंड संहिता सरा भारतम लागू नि हूण चयेंद ?



30/12 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,
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    ----- आप  छन  सम्पन गढ़वाली ----
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Bhishma Kukreti

      Sting Nettle in Uttarakhand Mythology
(Herbs and Animals in Uttarakhand Mythology -1)
(Herbs in Uttarakhand Mythology part-1)
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Bhishma Kukreti (Mythology Research Scholar)
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Mythology means study of old beliefs. Those beliefs might be scientifically correct, incorrect  or might be today, proved harmful.
  Garhwal has old history and the people have been using herbs and animals as myths (stories, remedies, rituals, proverbs, daily practices etc.).
In Mahabharata, Kalidas literature, there are description of various plants and animals of Uttarakhand those were used as local ritual practices.
     Apart from food, medicines, and packing material uses, Uttarakhand have been using sting nettle or Kandali or Siyunn for various rituals too.
        Sting Nettle uses in avoiding epidemics
     Uttarakhand people believed that sting nettle is anti-cholera, anti-pox and anti-malignant influences and troubles. In nearest past and still today, people used to hang the sting nettle stem on door wall top plate (Singar ) for stopping entry of cholera, pox, malignant influences.
   It is believed that sting nettle drives away the bad spirits. In epidemics, people used to keep sting nettle plants outside of rooms too.
  People also use Kandali in chicken pox (dadru) diseases. People kept sting nettle leaves besides the patient.
        Sting Nettle in Marriage Party
   When a marriage party takes gift items, people used to keep sting nettle plants on top of gift items as a protecting deity representative.
          Sting Nettle while Bruising
     When thee is rice bruising in mortar for cooking 'arsa' sweet, people keep sting nettle plant  around mortar for protecting bad evils that spoils 'arsa' cooking. 
     
               Sting Nettle for getting rid of Evil Soul, Ghost (Bhut)
   When a person is affected by evil soul (Bhut/Bhoot) the tantric uses sting nettle plants for beating the affected person.
                 The people also use sting nettle leaves for improving the numb body parts.
            Sting Nettle in inaugurating Clay Stove
      When there is first wood burning in newly built clay oven, people burn sting nettle leaves with wood as auspicious norms.
               There are various folk sayings, adjectives, metaphors related to sting nettle in Uttarakhand.
Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai 2017
     
   

Bhishma Kukreti


बड़ा बसंता  Brown-headed Barbet (  Megalanima zeylanica)

गढ़वाल की चिड़ियायें - भाग -40

( Birds of  Garhwal; Birding and Birds of Garhwal, Uttarakhand, Himalaya ----- 40)
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आलेख : भीष्म कुकरेती , M.Sc.; D.M.S.M; D.E.I.M.
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स्नजय सोंधी अनुसार 27 सेंटीमीटर लम्बा बसंता तकरीबन  उत्तराखंड में सब जगह मिलता है।  इसकी विशष पहचान इसका भूरा सिर , भूरी छाती व भूरा गला है। इसके पेट व अगल बगल में धारियां नहीं होती हैं। बड़ा बसंता जंगलों व बस्तियों के पास के पेड़ों में वास करता है और कुत्रु , कुत्रु की आवाज करता रहता है।  वैसे फल ही  खाता है किन्तु कीड़ों से परहेज नहीं है।  इसी से मिलता जुलता काला नीला सिर वाला बसंता भी होता है


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सर्वाधिकार @सुरक्षित , लेखक व भौगोलिक अन्वेषक 



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Bhishma Kukreti

Preparation for IAS Exam, UPSC exams
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समाचार पत्रों में क्या क्या पढ़ना चाहिए

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( गढवाल भ्रातृ मंडल (स्थापना -1928 ) , मुंबई  की मुहिम  –हर उत्तराखंडी  IAS बन सकता है-51 )

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IAS/IRS/IFS/IPS  कैसे बन सकते हैं श्रृंखला  -51

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गढ़वाल भ्रातृ मण्डल हेतु प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

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   बहुत से या कहें अधिसंख्य   UPSC परीक्षार्थी समाचार पत्रों को परीक्षाओं की दृष्टि  से पूरा पढ़ते हैं कि पता नहीं परीक्षा में क्या प्रश्न आ जा।  किन्तु भूल जाते हैं कि प्रत्येक समाचार पत्र अपने आप में महासागर है और महासागर को पीने की चेष्टा करना याने कुछ भी याद न रखना है। 
  UPSC परीक्षा में महत्वपूर्ण जनरल नॉलेज के प्रश्न पूछे जाते हैं जिनका रोजमर्रा जिंदगी या प्रशासन में महत्व होता है।  अत : परीक्षार्थी को UPSC परीक्षा की दृष्टि से निम्न पृष्ठों को ही ध्यानपूर्वक ,स्मरणार्थ पढ़ना चाहिए -
मुखपृष्ठ - मुखपृष्ठ में मुख्य सूचना/समाचार /न्यूज होते हैं अत: इन समाचारों को स्मरणार्थ पढ़ना आवश्यक है
सम्पादकीय - सम्पादकीय पृष्ठ में संपादक मंडल के अतिरिक्त कई ज्ञानियों, विशेषज्ञों  के विभिन्न विषयों पर प्रादेशिक से लेकर अंतर्राष्ट्रीय ज्ञानवर्धक लेख होते हैं जो कई विषयों को संबद्ध  करने में सक्षम होते हैं।  सम्पादकीय लेख ज्ञान वर्धन हेतु ही नहीं विश्लेषण शक्ति वर्धन हेतु भी महत्वपूर्ण होते हैं। एक लेख में कई अन्य संबन्धीय विषयों का तर्कसंगत मिश्रण होता है।
खेल समाचार -खेल समाचार भी जनरल नॉलेज ज्ञान हेतु आवश्यक है
अन्य समाचार - जैसे पुरुष्कार , नई खोज , विज्ञानं पर्यावरण संबधी , नए करतबों के बारे में समाचार पत्र में पढ़ने तर्कसंगत हैं। 



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शेष IAS/IPS/IFS/IRS कैसे बन सकते हैं श्रृंखला -  में.....
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कृपया इस लेख व "

हर उत्तराखंडी IAS बन सकता है"
आशय को  7  लोगों तक पँहुचाइये प्लीज !
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IAS Exams, IAS Exam preparation, UPSC exams, How I can be IAS , Rules of IAS exams, Characteristics of IAS exam, How will I success IAS exam, S UPSC Exam Hard ?Family background and IAS/UPSC Exams, Planning IAS Exams, Long term Planning, Starting Age for IAS/UPSC exam preparation, 
Sitting on other exams ,
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Bhishma Kukreti

Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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टिमुर, तूंग  अर झोलगेट टूथपेस्ट मा तनातनी
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चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती   


टिमुर - साला एक त हम पॉलीथिन से उनि तंग छां अर स्यु उन्नादेसी झोलगेट बि ऐ गे।  मारो साला तै हरामी , हराम की औलाद पाजी तै।  मारो , भगाओ
तूंग -हां हां तै बदजात , बदनीयत, एकाधिकारवादी कु कतल कारो।  करमजला साला हरामी।
झोलगेट हर्बल टूथपेस्ट की खाली ट्यूब - माइंड योर लैंग्वेज।  सांप,  संपेरों और तांत्रिकों के देस के ! असभ्य जंगली , सड़ी गली कौम।  ब्लडी पीछे देख के कार  चलाने वाले !
तूंग - यै हम तै हमर इ देस मा गाळी दीणि छै ?
टिमुर - हां हरामी ! हमर देस से नफा कमांद अर हमी कुण 'नीच ' बुलणु च।  नफ़ाख़ोर हरामखोर  बहुदेसी कम्पनी। झोलझाल गेट !
तिमल - हां हां  मी बि तुमर दगड़ छौं।  कतल कारो तौं बहुदेसी ब्रैंडों कु , बिणास कारो सालों का , जड़नास कारो यूं विदेशी मल्टीनेशनल कंपन्यूँ का। पैल लोग मि तैं खांद छा अब विदेशी फल सेव , अनन्नास , पपीता , कीवी पर ढबि  गेन।
झोलगेट - कमअक्ली कहींके , आलसी कहीं के , घर बैठे बिन  घुंड हिलाये नफा की सोच वाले कहीं के! अफु कुछ नि करण अर दोष हैंक पर दीण। अफु सिंयूं रौण अर कूर बूर करण  वळ , कार बार  करण वळुं पर भगार लांछन लगाण कि येन मुनाफा किलै कमाई ।
तूंग - मारो साले को। मारो बहुदेशीय कम्पनी को , दूर भगावा यूं धुर्या विदेस्यूं  तैं। 
झोलगेट - बट व्हाइ आर यू अगेंस्ट मी ?
टिमुर - त्यार आण से म्यार कथगा अणभरवस ह्वै।  जणदि बि छे ?
तूंग - पता च झोलगेट टूथ पॉउडर आण से पैल मेरी क्या पूछ छै ? बड़ो आयी पुछण वळ कि हम विदेशी चीजुं विरुद्ध किलै छां ?
दूर बिटेन ओगळ - हां हां विदेशी मुंगरी आण से लोकुन मि तैं बूण बंद कौर दे।
जळयूं गिंडा का क्वीला - कमीने साले पुछणु छे बल हम त्यार विरोध किलै छंवां ? अरे पैल लोग म्वास अर लूण मिलैक दांत साफ करदा छा अर कथगा इ दांत सफाई भारतीय ब्रैंड छा।
तूंग - पर त्यार मालिकोंन म्वास , लूण , दांतुन तै नुक्सान बताणो इथगा घ्याळ , इथगा जादा हल्ला कार बल इख गढ़वाळम बि गरीब लोग म्यार दांतुन करणम शरमाण बीसे गेन।
टिमुर - अर मे सरीखा लाभदायी दंतरक्षक , पेटरक्षक , जुकाम अवरोधक , बुख़ार अवरोधक कु छत्यानास ह्वे गे।  उ त भलु ह्वेन भोटिया जातिका जौन मि तै बचैक राख।
तूंग - वोइ उन्नादेसी टूथपेस्ट ! ती तैं पता च ? सम्राट अशोक का समय पर टिमुर अर म्यार निर्यात पाटलिपुत्र तक हूंद छौ।
झोलगेट - हाहाहा ! हाहाहा ! भूतकाल की आनंद भोगी ! इतिहास में रमने वालो ! भविष्य के निर्मुखियो ! तुमर मौत झोलगेट सरीखा कंपनियोंन नि कार।  तुमर मौत त अशोक काल मा इ ह्वे गे छै।
टिमुर- नहीं हमर मौत अशोक काल मा ना अपितु झोलगेट सरीखी प्रवृति से ह्वे।  हमर स्वर्णिम इतिहास तुम विदेशी कंपन्युन नास कार।
झोलगेट -तुमर सरा हिन्दुस्तान इ गलतफहमी मा  च।  तुमर आयुर्विज्ञान , तुमर धातु  विज्ञान , तुमर सब विज्ञान त अशोक काल मा इ भष्माभूत ह्वे गे छा।  भारत कु विज्ञान मा अन्वेषण ही बंद ह्वे गेन तब बिटेन।  अर अभियोग हम पर लगद।
तिमल - इन कन ? इन कन ? इन कनै बुलणु छै ?
झोलगेट - द्याखौ मूर्खों का च्यालो ! अशोक काल आयी तो सब संस्कृत विद्वान् याने आयुर्वेदाचार्य जन वैज्ञानिकों काम बंद ह्वे गे।  यूं  संस्कृत विद्वानूं तै इनि तिराये गे जन कॉंग्रेस शासन मा  दक्षिण पंथी विद्वानों तौहीन ह्वे या अब भाजपा शासन  मा वामपंथी विद्वानों तौहीन की कोशिस हूणी च।
तूंग - तो ?
झोलगेट - तो क्या सनातनी या श्रुति बल पर चलण वळ सब वैज्ञानिक अन्वेषण बंद हूण से सब कुछ थम गे।  आज बि टिमुर का लाभ या टिमुर की औषधि निर्माण पद्धति जु आयुर्वेद मा छौ वी बताये जांद।  द्वी ढाई हजार साल हूणो उपरान्त बि कुछ नया नि बताये गे मतलब तब बिटेन टिमुर अर टिमुर औषधि पर अन्वेषण ह्वाइ इ नी अर लांछन यूरोप या अमेरिकी कंपन्यूँ पर लगणु च।  अरे अन्वेषण बंद कार तुमर आका भारतीयोंन अर अभियोग बहुदेशीय कंपन्यूँ पर ?
तिमल - हूं ! कुछ कुछ बात तो समाज मा आणि च आज बि म्यार बारा मा , म्यार मान तै लाभ साहित्य ज्वी बि साहित्य उपलब्ध च उ द्वी -ढाई हजार साल पैलाक साहित्य ही च।  कुछ भी नया नि जुड़े गे।
झोलगेट - अर इखमा कुछ देर गुप्त काल मा  कुछ ह्वे च।  किन्तु अन्वेषण नि हूणो पैथर सरा दोष संस्कृत मानसिकता कु च ?
जळयूं गिंडा - संस्कृत मानसिकता ?
झोलगेट -हां ! संस्कृत मानसिकता।  श्रुति विद्वानोंन संस्कृत तै विज्ञानं का माध्यम से भैर स्थानीय भाषा तै महत्व नि दे , विज्ञान ज्ञान संस्कृत तक ही सेमित  रखे गे त विज्ञान ज्ञान कुछ परिवारों तक सीमित ह्वे गे।  यदि आयुर्वेद या अन्य विज्ञान स्थानीय भाषा म उपलब्ध हूंद त राजनैतिक अस्थिरता , उथल पुथल का बाद भी विज्ञान व् तकनीक मा रोज अन्वेषण हूंदा अर आज भारत पता नी क्या से क्या हूंद।
जळयूं गिंडा - हां भै या बात तो बिलकुल सै च यदि विज्ञान स्थानीय भाषाओं मा उपलब्ध हूंद तो भारत मा विज्ञान , टेक्नोलॉजी अग्वाड़ी बढ़नि रैंदी।  संस्कृत भाषा तै महत्व दिए गए विज्ञान प्रसारण तै ना ।
टिमुर - पर तुम विदेशी कम्पनी बि त अंग्रेजी ?
झोलगेट - बिलकुल नहीं।  हमर मालिकों असली सोच  च थिंक ग्लोबल ऐंड  गो  लोकल।  याने स्थानीयता तै पूरो महत्व द्यावो।
तूंग - औ तबि अब झोलगेट नमक के साथ , आयुर्वेदिक झोलगेट जन टूथपेस्ट बि ऐ गेन ?
झोलगेट - हाँ अर भोळ नया प्रोडक्ट आलू - झोलगेट विद टिमुर एक्स्ट्रैक्ट , झोलगेट विद तूंग लीव्ज पेस्ट , झोलगेट विद फिग रेजिन आदि आदि।
गेरू - बाबा रामदेव के जय ! बाबा रामदेव की जय ! बाबा रामदेवन यूं बहुराष्ट्रीय कंपन्यूँ तै विवश कौर दे कि अब विदेसी कंपन्यूँ तैं आयुर्वेद पर अन्वेषण करण इ पोड़ल।
सब -जै स्वदेसीकरण ! जै स्वदेसीकरण ! जै नव जागृति !

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31/12 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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    ----- आप  छन  सम्पन गढ़वाली ----
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Bhishma Kukreti

Timur Plant Myths and Traditions in Uttarakhand (Himalaya)
Plant Myths and Traditions in Uttarakhand (Himalaya) -2
By: Bhishma Kukreti (Mythology Research Scholar)
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English name – Prickly Ash, Sichuan pepper or Toothache Tree
Botanical name –Xanthoxylum armatum
                        Traditional Medical Uses
   Timur or toothache tree is a shrub and found from 1000 meter to 2000 meter height in Uttarakhand hills, Himalaya.
   People use the plant parts as toothbrush, medicines for toothache, fever, cough remedies and stomach ache. Bhotiya community had been using 'Timur' as , business barter medium and using for food (spices, soup) too. Bhotiya community is main community for saving the heritage of Timur for centuries.
In old age and still today in small quantity, people used to sell the Timur stick to pilgrims as toothbrush.
              Mythological Uses in Narsing Rituals

     Timur is an auspicious plant and they use Timur stick for various religious rituals.
      In jagar, Timur stick is supposed to be beloved for deity Narsing (Narsing ki lath). People keep a Timur Stick in Narsing Thau  where nursing idols are kept in house).
        Sanyasi or sadhu also keeps Timur stick.
              Use of Timur Stick in Yagyopavit Rituals
                   The person that goes for taking Janeu (scarred thread) first time has to go for begging nearby houses and he has to take Timur stick with him for begging.
Copyright@ Bhishma Kukreti, Mumbai 2017
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