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शेर दा अनपढ -उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि-SHER DA ANPAD-FAMOUS POET OF UTTARAKHAND

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 25, 2007, 01:55:05 PM

पंकज सिंह महर

Quote from: Himanshu Pathak on February 29, 2008, 04:14:38 PM
Mere Pass To Bus Hasne bhaar padi Hai.

Jiska 1 Or

च्योल  कुणा मी बाब कै  चूटूल
ब्वारि कुणे मी सास को कुटूल
भाई कूणी मी भाई कै लूटूल
और दुनि कुणे मी ठूल रे मी ठूल 



Quote from: M S Mehta on February 29, 2008, 04:00:56 PM

शेर दा अनपड़ की दो ऑडियो कैसेट उनकी कविताओं पर बाज़ार मे बहुत पहले ही आ चुकी है..

   -     पंच मियाव
  -     हसन बाहर

maja aa gaya himansu jee, samajik vyawastha par kya prahar kiya hai SHER DA ne

Risky Pathak

घर मे न्हेति म्येर छबेली
मे कै  दगेड खेलु होलि
होई घमिक रे चैत मे
ओ इजा सैन लतिक रे मैत मे

कैक करू मुख लाल
कै कै लगु रंग गुलाल
कैक लूसू फूल धमेली
मी कै दगेड खेलु होलि

Risky Pathak

होलि जो यो तयार भय
सैन बैग न्यार भय
मैस रनकर भिदेर बे   
स्यें रंकर भैर बे

लोग मारने बोली टोली
मे कै  दगेड खेलु होलि
घर मे न्हेति म्येर छबेली
मे कै  दगेड खेलु होलि



पंकज सिंह महर

Quote from: Himanshu Pathak on March 08, 2008, 11:18:34 PM
घर मे न्हेति म्येर छबेली
मे कै  दगेड खेलु होलि
होई घमिक रे चैत मे
ओ इजा सैन लतिक रे मैत मे

कैक करू मुख लाल
कै कै लगु रंग गुलाल
कैक लूसू फूल धमेली
मी कै दगेड खेलु होलि


होली फटिक रै चैत में, सैंणी लटिक रै मैत में,
कैकी करुं मुखड़ी लाल, कै के लगुं रंग गुलाल।

हिमांशु भाई शेर दा की वह कविता भी सुनाओ, जिसमें वह ससुराल जाते हैं और वहां उनको द्स्त लग जाते हैं.....।

Risky Pathak

Lo Jee pankaj Jee, Aapki farmaish puri karte hai... Kavita ko me   Mukhdo me sunaunga

Sherdaa ki Jabaani me, 1 baar jab wo apne sasuraal pahunche
ह्युनक छी कूसा रात
और सौरासक छी बात
अन्यारपट कै  मुख ले  परन  पड़ने पुजू सौरास
जाले कूसा स्येन्न  हाल ने भैस कै घास
Quote from: पंकज सिंह महर/P. S. MAHAR on March 10, 2008, 09:25:17 AM
Quote from: Himanshu Pathak on March 08, 2008, 11:18:34 PM
घर मे न्हेति म्येर छबेली
मे कै  दगेड खेलु होलि
होई घमिक रे चैत मे
ओ इजा सैन लतिक रे मैत मे

कैक करू मुख लाल
कै कै लगु रंग गुलाल
कैक लूसू फूल धमेली
मी कै दगेड खेलु होलि


होली फटिक रै चैत में, सैंणी लटिक रै मैत में,
कैकी करुं मुखड़ी लाल, कै के लगुं रंग गुलाल।

हिमांशु भाई शेर दा की वह कविता भी सुनाओ, जिसमें वह ससुराल जाते हैं और वहां उनको द्स्त लग जाते हैं.....।


Risky Pathak

अब हो कूसा उसू केबेर मील ने जानि
और मी छु केबेर उवील ने पछ्यानी
उवील सोचो हे भगवान् यो अन्यारपट मे को हेरो ठाद
और मीके ले हो महाराज उके देख्बेर लागन भेगो मणि मणि जाड

Risky Pathak

उवील को तू को छे
मील को तू को छे
उवील को मी सैण छू
मील को मी मैन्स छू ..

अब महारज इदु मे मील  उके जान्यी ल्हें
और उवील ले मीकू पंछ्यान  ल्हें
अब ऊ जरा शर्मान फेटी
और मी जरा रिशान फेटी 

Risky Pathak

ऊ भाज्बेर चुल्यान बेठी
और मी रंकर भिदेर  बेथ्यु
महाराज भिदेर चाछी कूछा सास पकुने चहा
और सौर को पड़ी रो दहा