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शेर दा अनपढ -उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि-SHER DA ANPAD-FAMOUS POET OF UTTARAKHAND

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 25, 2007, 01:55:05 PM

Risky Pathak

1 More From "Hasne Bhaar"
१ बार ३ औरते अपने अपने ससुराल से मायके जा रही थी| जब तीनो मिलते है तो तीनो निश्चय करते है कि समय काटने के लिए वो तीनो अपने ससुराल के बारे में बताएंगी|

तो पहली महिला अपनी सास के बारे में बताती है: 

दीदी कि सुनु सासू बार में
सास जय कि छू दुतुनी छू
और फ़िर मी थे ज्युने भुतुनी छू
दिन भर कचकचात करी, धानक चार अल्बलात करी
बिराऊ  चार किकात करी और मूसे चार तितात करी
नॉन च्येल हु भूति रई
और थूल च्योल कै बूकू हु जई
ज्याठ ज्यूँ ख्वारेन जान्थ तोड़ राखी
और सौर ज्यूक कूछा भांट तोड़ राखी
सास जै कि छू, १ पैग जनम रे
ढाई तस सास है बेर मी नि सासू भल

Risky Pathak

दूसरी महिला अपने ससुर के बारे बताती है

दीदी कि सुनु सौर बार में
सौर जै कि भे १ ज्युने खबीस भय
और पुर ४२० भय
जन्म बहर सांच कुने में रे गयी
और मीहे नथ बनुन में रे गयी
काना कनफूल ल्यूं कूना छि
ल्यूने में रे गयी
और जो म्येर मिटा डबल छी
ऊ चुल्पन बूर कूने में रै गयी
दीदी सौर ज्यूक दाढ़ई  फुल बेर गाव ऐ रे
औ बाज्यू जुंग फुल बेर घूगुतक माव ऐ रे
दांत सब कूकाव हे रई
परवे आय ले मारनी खूब ग्ह्वाज़
ओ बाज्यू मडुआ चेनि १० रवात
द्वि पटेली भात खे जानी
नानतिन चाइए रे जानी
पे दिन भर बागे चार दुदात करनी
ओ इजा भेन्से चार रात भर ओडात करनी
दीदी एस छान म्येर सौर
धै कबहु इनर ले होली खाली थोर

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Great Himanshu Bhai,

Aaj ki dekho, aab dekhla.. One of the pack words of Shreda Anpad. Mahraj..

Quote from: Himanshu Pathak on August 04, 2008, 04:06:53 PM
दूसरी महिला अपने ससुर के बारे बताती है

दीदी कि सुनु सौर बार में
सौर जै कि भे १ ज्युने खबीस भय
और पुर ४२० भय
जन्म बहर सांच कुने में रे गयी
और मीहे नथ बनुन में रे गयी
काना कनफूल ल्यूं कूना छि
ल्यूने में रे गयी
और जो म्येर मिटा डबल छी
ऊ चुल्पन बूर कूने में रै गयी
दीदी सौर ज्यूक दाढ़ई  फुल बेर गाव ऐ रे
औ बाज्यू जुंग फुल बेर घूगुतक माव ऐ रे
दांत सब कूकाव हे रई
परवे आय ले मारनी खूब ग्ह्वाज़
ओ बाज्यू मडुआ चेनि १० रवात
द्वि पटेली भात खे जानी
नानतिन चाइए रे जानी
पे दिन भर बागे चार दुदात करनी
ओ इजा भेन्से चार रात भर ओडात करनी
दीदी एस छान म्येर सौर
धै कबहु इनर ले होली खाली थोर


Risky Pathak

3ree महिला अपने पति के बारे में बताती ह


दीदी कि सुनु मैसे बार में
पैली मैसे कि निगुरी जात
अब कि सुनु रंकरे बात
आदतक छो निगुर जान
ओ इजा दिखिनक छू नानू नॉन
मणि मणि गौर छू, मणि मणि काव
धानक सूत खानक छाव
मीहे खुस्यानी जै झोव छू
और भेर वालेन थे बीनू बल्ड जै बोव छू
गददु जे गलार छान दीदी द्हरू जे आँख
आँख जे कि भय, सुदे छिलुकाक रान्ख
तुमोर जै मुखोद छू जानी को उशे रो
मीहू नि बुलानो रंकार पोरु आदु रात बे रीशे रो
दीदी येस छो म्येर मैन्स
मैन्स जे कि भय गोठ बाड्नी भैंस

हेम पन्त

वास्तव में यो त "हसने कि बहार" हैरे...

हिमांशु को धन्यवाद....
शेर दा की जै-जै कार..


Quote from: Himanshu Pathak on August 04, 2008, 04:19:03 PM
3ree महिला अपने पति के बारे में बताती ह


दीदी कि सुनु मैसे बार में
पैली मैसे कि निगुरी जात
अब कि सुनु रंकरे बात
आदतक छो निगुर जान
ओ इजा दिखिनक छू नानू नॉन
मणि मणि गौर छू, मणि मणि काव
---------
तुमोर जै मुखोद छू जानी को उशे रो
मीहू नि बुलानो रंकार पोरु आदु रात बे रीशे रो
दीदी येस छो म्येर मैन्स
मैन्स जे कि भय गोठ बाड्नी भैंस


Girdhar Joshi

Quote from: Himanshu Pathak on August 04, 2008, 04:19:03 PM
3ree महिला अपने पति के बारे में बताती ह


दीदी कि सुनु मैसे बार में
पैली मैसे कि निगुरी जात
अब कि सुनु रंकरे बात
आदतक छो निगुर जान
ओ इजा दिखिनक छू नानू नॉन
मणि मणि गौर छू, मणि मणि काव
धानक सूत खानक छाव
मीहे खुस्यानी जै झोव छू
और भेर वालेन थे बीनू बल्ड जै बोव छू
गददु जे गलार छान दीदी द्हरू जे आँख
आँख जे कि भय, सुदे छिलुकाक रान्ख
तुमोर जै मुखोद छू जानी को उशे रो
मीहू नि बुलानो रंकार पोरु आदु रात बे रीशे रो
दीदी येस छो म्येर मैन्स
मैन्स जे कि भय गोठ बाड्नी भैंस


ji raya pathak ji jo tumul yo post karo
ji ro hamar sher da jo etuk bhalo bhalo lekhni

prakashalmora88

SHE DA NE KAHA HAI- MAI BHAI KASI PITOW PHARU TUM SUNU BYAL BHAYA HUM ANPAR ANPAR BHAI TUM PARI LIKHI GURI CHYAL BHAYA

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



दीदी कि सुनु मैसे बार में
पैली मैसे कि निगुरी जात
अब कि सुनु रंकरे बात
आदतक छो निगुर जान
ओ इजा दिखिनक छू नानू नॉन
मणि मणि गौर छू, मणि मणि काव
धानक सूत खानक छाव
मीहे खुस्यानी जै झोव छू
और भेर वालेन थे बीनू बल्ड जै बोव छू
गददु जे गलार छान दीदी द्हरू जे आँख
आँख जे कि भय, सुदे छिलुकाक रान्ख
तुमोर जै मुखोद छू जानी को उशे रो
मीहू नि बुलानो रंकार पोरु आदु रात बे रीशे रो
दीदी येस छो म्येर मैन्स
मैन्स जे कि भय गोठ बाड्नी भैंस

The above is in fact a great composition of Sher Da...


पंकज सिंह महर


गणेश जोशी, हल्द्वानी गुच्ची खेले बचपन बितै अल्माड़ गौं माल में, बुढ़ापा हल्द्वानी में कटौ जवानी नैनीताल में.. इसी कविता में आगे जब पकडूं हाथ ऊ जब थमूं कमर, आखिर पड़ाव में न्हैगे ओ बटावा, तेरि उमर.. कविता के जरिये कवि अपनी जिन्दगी की पूरी गाथा सुना डालते हैं। संस्कृति विभाग के सहयोग से अंकित प्रकाशन द्वारा प्रकाशित शेरदा समग्र में शेर सिंह बिष्ट अनपढ़ की समस्त कवितायें समाहित हैं। इस संग्रह को वह जिन्दगी की सबसे बड़ी कमाई मानते हैं। पिचके गाल, पके बाल, लड़खड़ता बदन, मुंह में दांत नहीं फिर भी पूरे जोश के साथ काव्य पाठ करते हैं शेरदा। पहाड़ के दर्द से लेकर गरीबी, बिछोह आदि व्यथा को अपनी कविता में दर्शाने का पूरा माद्दा रखते हैं। अल्मोड़ा के ग्राम माल में जन्मे शेरदा का बचपन बड़े अभावों में गुजरा। पिता का साया बचपन से उठ गया। पढ़ने-लिखने का कोई मौका नहीं मिला। जीवन के कठिन संघर्षो के साथ कई घरों में नौकरी की। इसी दौरान एक शिक्षिका के घर पर नौकरी की और उसी ने शेरदा को पढ़ना-लिखना सिखाया। इसके बाद सेना में कार्यरत रहे। 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान घायल जवान पूना अस्पताल में भर्ती थे। साथ ही शेरदा भी इसी अस्पताल में भर्ती थे। घायल जवानों की व्यथा सुनते-सुनते शेरदा का कवि हृदय जाग उठा और कवितायें लिखनी शुरू हो गयीं। पहली पुस्तक नेफा-लद्दाख प्रकाशित हुयी। इसके बाद पूना की कोठियों में पहाड़ की नारियों का दर्द समेटता दीदी बैणी कविता संग्रह प्रकाशित हुआ। इसके अलावा गीत नाटक प्रभाग में कार्यरत होने के साथ ही उनकी मेरि लटि पटि, जॉठिक घुडु़र, गीत लगूनी गाड़-गध्यारा, हास्य व्यंग, फचैक आदि कविता संग्रह प्रकाशित हुए। शेरदा ने अपने प्रसिद्ध गीत ओ परुवा बौज्यू चप्पल क्ये लाछा एस को मस्त अंदाज में प्रस्तुत करते हुए जागरण को बताया कि कुमाऊंनी संस्कृति को आगे ले जाने के लिये गुमानी पंत व गौर्दा ने जो दीप जलाया, उसे और आगे ले जाने की आवश्यकता है। इसके लिये मेहनत, सोच व समझ के साथ आगे कदम उठाना है। अंकित प्रकाशन की निदेशक भावना पंत का कहना है कि कुमाऊं की परंपरा को सहेजना ही उनके प्रकाशन का मुख्य लक्ष्य है। इसी क्रम में उन्होंने शेरदा समग्र का प्रकाशन किया है।