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शेर दा अनपढ -उत्तराखंड के प्रसिद्ध कवि-SHER DA ANPAD-FAMOUS POET OF UTTARAKHAND

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 25, 2007, 01:55:05 PM

Risky Pathak

मी हेठी  कून भेटी ज्वें तुम कब आ छा
मील को एल्ले ऊनू
खैर फ़िर ज्यू जाग पैलाग भय  आशिर कुशव भय
सासुल  को ज्वे घरेक कुसोव बात सब भाल छू
मील को ९ मेहन बटी मैट चेल तमेर छू  कि कुसोव बात भेल छो

सासुल को जो हैगो हैगो, पल फूको
अब तीके पूजे दयूं
हाथ खुट ध्वे लिहो
रवात पक्नी रवात खे लिहो

Risky Pathak

उदू मी स्यें कून बेठी ते दगर मी ने जान
मील को तो फ़िर मी रवात न खान
अब कूछा महाराज तो फ़िर सासुल समझा
और सौरेल ले धमका
पे हो स्येन्न उन हो तैयार है गे
ओह बाज्यु म्येर ले भार है  गे

सासुल को अब तो खे लिहो रवात
मील को तो हितों झटपट
अब महारज तुम्हे साची कू ३ दिन बटी मील खाई ने भेई
भुखेल  म्येर बितोव है भेई
और उप्रेती जी माल ताल ले  सासुल गजब बडाई भेई

Risky Pathak

आल गड़ेरि को साग पकाय भोय खूब लटपट
मणि मणि मिठ है भोय मणि खट-पत
और बड़ाइ भोय खूब चटपट
आलु खापिर बनाय भाय इदु म्वाट
ओ इजा दगाड़ हालि भाय मासक बेड़ु रवाट
रवाटा जै कि भाय सुदे घाटाक पाट
अब महाराज म्यार भुकेल बिटोव है भे
मैंल रवाट निलि सटासट
अब सागकि भदाई कर गोइ चट
रवाटा छापरि करो गोइ पट
आब मेर पेट भरि ग्यो
आब एक अणकस्सि है गै
जाणि को छो कमरा में बदबु ठस्सि गै

Risky Pathak

अब महाराज म्योर सुरावक टूट गोय नाड
और अब कसिक उठु ठाद
अब मीके मणि हँसी ऊने
मणि मणि दाड
और मणि मणि गुस्स चदनो
और मणि मणि खार
सास कुने ज्वें किले जाना ने छा भेर

Risky Pathak

abh kasi uthu thaad
to mahaaraaj 1 taraf saasul thaamo
1 tarfe saurel
syenil suraav baadho भेसा ज्योडेल

Risky Pathak

अब सासुल को चेली अब लगा बिछून
और मील कि सुनो चेली लगा सिसून
२ खूत थामी म्येरा रघोद ल्हिगेयी
चाखन पड़े दे, कैक धकिन कैक गद
सुदे गद्दु जे घुरे दये

Risky Pathak

Thanks Mehta Jee for karma

ab aadu raat ke myer petan rigan bhego ghat
khul ber fer ha gyi fata fat
bhider pan bhata bhat

ab aadu raat ke uthyu thaad, kheri meel khataar
bhyer hu laagi baat, bher hai bhai anyaarpat
khoot dhanu kuno chhi sid me
Maharaaj khoot rad pado ho chhin me
yo khwad pado ho bhaisa kil me

kaik syen kaik sauraas
aapun je munh lhiber ghar waaw
syen je lhyoon go
yo bad dhaang rade laayo

पंकज सिंह महर

बहुत-बहुत धन्यवाद हिमांशु जी, शेर दा की अतुलित रचनाओं से हमें अवगत कराने के लिये। आशा है भविष्य में भी आप अपनी जोरदार उपस्थिति बनाये रखेंगे और जानदार जानकारियों से फोरम को अवगत कराते रहेंगे।

राजेश जोशी/rajesh.joshee

पंकज भाई
शेरदा का जिक्र आते ही मुझे अपना बचपन याद आता है जब में primary class में था और शेरदा हमारे विद्यालय Model School Bhimtal में आए थे तब मेरे अंदर इतनी समझ नही थी की इस महान कलाकार को जान पाता|  पर शेरदा द्वारा सुनाया गए गीत का मुखड़ा
"पार्वती को मैतुडा देश मेरो मुलुको कटुक प्यार"
आज भी याद है|  तब घर जाने पर मेरी माता जी ने मुझे बताया था की जब वह छोटी थी तो उस समय शेरदा रामलीला में अपनी कॉमेडी और गीत प्रस्तुत किया करते थे|
पर पिछले साल मैंने केबल टीवी पर होली समारोह में आज के शेर दा को देखा टू मैं सचमुच दंग रह गया और मुझे बिल्कुल विश्वास नही हुआ की समय के साथ आदमी कितना कमज़ोर और लाचार हो जाता है|  क्योंकि मेरे मष्तिष्क में तो वही आज से करीब ३० साल पुराने शेर दा की छवि अंकित थी|